विराट कोहली ने रचा इतिहास, पूरे किए 15,000 ODI रन; सचिन तेंदुलकर के बाद ऐसा करने वाले बने दूसरे बल्लेबाज

तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में रविवार को India और West Indies के पहले ODI में विराट कोहली ने 15,000 ODI रन पूरे किए। सचिन तेंदुलकर के बाद वे पुरुष ODI क्रिकेट में इस आंकड़े तक पहुंचने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं। कोहली ने यह milestone सिर्फ 303 innings में हासिल किया और इस मामले में सबसे तेज बल्लेबाज बन गए। उसी मैच में उन्होंने 88 गेंदों पर नाबाद 139 रन बनाए। भारत ने West Indies के 295/7 के जवाब में 296 का लक्ष्य 41.4 overs में हासिल कर लिया। मैच 8 विकेट से जीतकर टीम ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली है। विराट कोहली ने कैसे पूरे किए 15,000 ODI रन? कोहली मैदान पर उतरे तब उनके नाम 14,941 ODI रन थे। 15,000 तक पहुंचने के लिए 59 रन चाहिए थे। West Indies के 295/7 के जवाब में भारत की शुरुआत अच्छी रही। रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए 74 रन जोड़े। रोहित के आउट होने के बाद कोहली क्रीज पर आए और पहली गेंद से आक्रामक रुख रखा। chase के 29वें ओवर में उन्होंने Alzarri Joseph की गेंद पर लगातार दो चौके लगाए। इसी के साथ उनके ODI रन 15,000 के पार पहुंच गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने दोनों हाथ उठाकर अपने आदर्श सचिन तेंदुलकर के प्रति सम्मान जताया और दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया। milestone के बाद भी उनकी पारी रुकी नहीं। कोहली अंत तक नाबाद रहे और मैच का समापन छक्के के साथ किया। 15,000 ODI रन तक पहुंचने वाले दूसरे बल्लेबाज बने कोहली पुरुष ODI क्रिकेट में अब तक सिर्फ दो बल्लेबाज 15,000 रन के पार पहुंचे हैं। पहले सचिन तेंदुलकर थे, जिन्होंने ODI करियर में कुल 18,426 रन बनाए। दूसरे अब कोहली हैं। कोहली ने यह आंकड़ा 303 innings में छुआ। तेंदुलकर को इसके लिए 377 innings लगी थीं। यानी कोहली 74 innings पहले इस मुकाम पर पहुंच गए। ESPNcricinfo के आंकड़ों के मुताबिक गेंदों के लिहाज से भी वे आगे हैं: कोहली ने 15,950 गेंदों में यह आंकड़ा पूरा किया, जबकि तेंदुलकर को 17,528 गेंदें लगी थीं। Player ODI Runs Milestone Innings Virat Kohli 15,000 303 Sachin Tendulkar 15,000 377 यह तुलना सिर्फ इस milestone तक पहुंचने के statistical आंकड़े की है। इसे दोनों खिलाड़ियों के पूरे करियर की तुलना या “कौन बेहतर है” के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों का दौर, खेलने की परिस्थितियां और नियम अलग रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ कोहली की तूफानी 139* रन की पारी कोहली ने 88 गेंदों पर नाबाद 139 रन बनाए। इस पारी में 10 चौके और 9 छक्के शामिल थे, यानी उनका strike rate करीब 158 रहा। उन्होंने शतक 74 गेंदों में पूरा किया। ESPNcricinfo के अनुसार ये 9 छक्के किसी ODI पारी में उनके सबसे ज्यादा हैं। इससे पहले उनका सर्वाधिक आंकड़ा 2023 में श्रीलंका के खिलाफ इसी मैदान पर 8 छक्कों का था। किसी भारतीय बल्लेबाज का West Indies के खिलाफ ODI में यह सबसे ज्यादा छक्कों का आंकड़ा भी है। गिल के आउट होने के बाद (स्कोर 225/2) भारत को जीत के लिए 71 रन चाहिए थे। कोहली ने रुतुराज गायकवाड़ (नाबाद 13) के साथ बिना किसी दबाव के लक्ष्य पूरा किया। वे 50 से 100 के बीच भी तेज खेले और गति कम नहीं होने दी। यह उनके ODI करियर का 55वां शतक था। West Indies के खिलाफ यह उनका 10वां ODI शतक है, जो किसी एक टीम के खिलाफ बल्लेबाज के संयुक्त सर्वाधिक शतकों के बराबर है। शुभमन गिल ने भी जड़ा शतक भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने 108 गेंदों पर 110 रन बनाए, जिसमें 13 चौके और एक छक्का था। यह उनका 10वां ODI शतक था। ESPNcricinfo के मुताबिक 10 ODI शतक तक पहुंचने के लिए उन्होंने 67 innings लीं, जो किसी भी भारतीय के लिए सबसे कम है। उन्होंने शिखर धवन (77 innings) को पीछे छोड़ा। रोहित शर्मा के आउट होने के बाद गिल और कोहली ने दूसरे विकेट के लिए 151 रन जोड़े। यह साझेदारी 132 गेंदों में आई। गिल को Roston Chase ने आउट किया, तब तक भारत मजबूत स्थिति में था। दोनों शतकों ने भारत के लिए 296 का लक्ष्य आसान बना दिया। भारत ने 8 विकेट से जीता पहला ODI West Indies ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 overs में 295/7 बनाए। Justin Greaves ने अपना पहला ODI शतक (101) लगाया और John Campbell ने 62 रन बनाए। दोनों ने पहले विकेट के लिए 135 रन जोड़े। इसके बाद कुलदीप यादव की अगुवाई में भारतीय गेंदबाजों ने वापसी की और मेहमान टीम 320 के पार नहीं जा सकी। कुलदीप ने 4 विकेट लिए और Player of the Match रहे। जवाब में भारत ने 41.4 overs में 300/2 बनाकर 8 विकेट से जीत दर्ज की। टीम के पास 50 गेंदें बाकी थीं। तीन मैचों की सीरीज में भारत 1-0 से आगे है। विराट कोहली के 15,000 ODI रन का रिकॉर्ड क्यों खास है? ODI क्रिकेट में 15,000 रन का आंकड़ा बेहद कम खिलाड़ियों की पहुंच में रहा है। पुरुष क्रिकेट में अब तक सिर्फ दो बल्लेबाज यहां पहुंचे हैं। यह आंकड़ा उनके ODI करियर की लंबी अवधि और लगातार रन बनाने की क्षमता को दिखाता है। कोहली ने 2008 में श्रीलंका के खिलाफ ODI डेब्यू किया था। 315 मैचों में उनका औसत 59.13 है। ICC के अनुसार वे 8,000 से 14,000 रन तक हर पड़ाव पर सबसे तेज पहुंचे थे। 37 साल की उम्र में, जब वे सिर्फ ODI खेल रहे हैं (T20I से 2024 में और Tests से 2025 में संन्यास ले चुके हैं), यह रिकॉर्ड इस निरंतरता का ठोस सबूत है। विराट कोहली के बड़े ODI रिकॉर्ड 15,000 ODI रन: तेंदुलकर (18,426) के बाद दूसरे बल्लेबाज। इस पारी के बाद उनके 15,080 रन हैं। 15,000 रन तक सबसे तेज: 303 innings, जबकि तेंदुलकर ने 377 innings ली थीं। ODI में सर्वाधिक शतक: 55 शतक। तेंदुलकर के 49 शतकों का रिकॉर्ड वे पहले ही पार कर चुके हैं। 50वां ODI शतक: 2023 विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ। सबसे तेज पड़ाव: 8,000 से 14,000 रन तक हर पड़ाव पर सबसे तेज (ICC)। 13,000 रन उन्होंने 267 innings में
Voter List विवाद के बीच ECI का बड़ा कदम, ECINet Software की होगी Review

ECI Voter Roll Software Review: Voter List विवाद के बीच बड़ा कदम 26 सितंबर 2026 को हुई Election Commission of India (ECI) की पूर्ण बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें सबसे चर्चित रहा ECINet सॉफ्टवेयर की समीक्षा का आदेश। यह फैसला ऐसे समय आया है जब वोटर लिस्ट में हो रहे बदलावों और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच को लेकर पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक बहस चल रही है। नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आयोग ने घोषणा की कि एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति, जिसमें किसी IIT/IIIT से एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा, ECINet सिस्टम की समीक्षा करेगी और यह जांचेगी कि सिस्टम संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप है या नहीं। यह घोषणा Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के बाद आयोग के तीन सदस्यों में से दो सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा उठाई गई कथित आपत्तियों की चर्चा सामने आई थी। वोटर लिस्ट की सटीकता का सीधा संबंध लोगों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है, इसलिए यह मुद्दा आम नागरिकों के लिए भी अहम है। ECI ने ECINet Software की Review का आदेश क्यों दिया? ECINet चुनाव आयोग का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो वोटर लिस्ट प्रबंधन, फॉर्म प्रोसेसिंग और फील्ड अधिकारियों के कामकाज से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से संचालित करता है। आयोग ने अपने आधिकारिक प्रेस नोट में कहा है कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार ECINet तक role-based access प्राप्त है। हालांकि, हाल की रिपोर्टिंग में सिस्टम की पहुंच, अधिकारों और कुछ प्रक्रियागत बदलावों को लेकर सवाल उठे थे। इसी के मद्देनज़र आयोग ने तय किया कि एक स्वतंत्र, तकनीकी रूप से सक्षम समिति सिस्टम की compliance जांचेगी। यह जरूरी है कि इस कदम को सॉफ्टवेयर में किसी गड़बड़ी की स्वीकारोक्ति के तौर पर न देखा जाए आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह एक “double-check” प्रक्रिया है। ECINet क्या है? ECINet चुनाव आयोग का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे जनवरी 2026 में लॉन्च किया गया था। यह 40 से ज्यादा ऐप्स और वेब सेवाओं को एक साथ जोड़ता है और नागरिकों, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों को एक ही मंच पर लाता है। यह प्लेटफॉर्म पुराने ERONet सिस्टम का उत्तराधिकारी है और वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं जैसे नाम जोड़ना, हटाना, फॉर्म भरना को डिजिटल तरीके से संभालता है। आयोग के मुताबिक, अलग-अलग स्तर के फील्ड अधिकारियों — जैसे BLO, ERO, AERO — को उनके पद और वैधानिक अधिकार के अनुसार ही सिस्टम में एक्सेस मिलता है। Review Committee में कौन-कौन शामिल होंगे? आयोग के आधिकारिक फैसले के मुताबिक: समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (Senior Deputy Election Commissioner) करेंगे समिति में किसी IIT या IIIT से एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे समिति का उद्देश्य यह जांचना है कि ECINet संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप है समिति अपनी रिपोर्ट पूर्ण आयोग को सौंपेगी फील्ड अधिकारियों को जो भी अतिरिक्त flexibility चाहिए होगी, उसे रिपोर्ट के आधार पर operational बनाया जाएगा आयोग ने यह भी कहा है कि आगे से कोई भी नया IT मॉड्यूल या पोर्टल पहल पहले अधिकारियों की एक समिति (Committee of Officers) से गुजरेगी, उसके बाद ही आयोग की अंतिम मंजूरी के लिए रखी जाएगी समिति के व्यक्तिगत सदस्यों के नाम फिलहाल आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं। Voter List में Changes को लेकर विवाद क्या है? यह विवाद मुख्य रूप से The Indian Express में प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि आयोग के तीन सदस्यों में से दो संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें Form 6 में बदलाव, वोटर डेटाबेस तक केंद्रीकृत पहुंच, और नाम हटाने-जोड़ने से जुड़े कुछ फैसले शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को भी पत्र लिखा था, जिसमें ECINet और इलेक्टोरल रोल डेटाबेस के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंताएं जताई गई थीं। दो Election Commissioners की आपत्तियों की रिपोर्ट में क्या कहा गया? Indian Express की रिपोर्ट (प्रकाशित 23 सितंबर) के मुताबिक, संधू और जोशी ने ECINet पर ऑनलाइन Form 6 प्रक्रिया में हुए बदलावों पर सवाल उठाए थे। जुलाई 2026 में इस फॉर्म में एक नया घोषणा-खंड (Part J और Part K के बीच) जोड़ा गया, जिसमें आवेदकों को यह बताना था कि उनका, उनके माता-पिता का या दादा-दादी का नाम पिछले SIR के इलेक्टोरल रोल में शामिल था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक संधू ने इस बदलाव को “अनधिकृत और अवैध” बताया था, जबकि जोशी ने मई 2026 में ही यह चेतावनी दी थी कि केंद्र सरकार द्वारा Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन किए बिना Form 6 में बदलाव नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में गोवा का एक उदाहरण भी दिया गया, जहां 97 वोटरों ने ड्राफ्ट रोल से अपना नाम हटाए जाने को सफलतापूर्वक चुनौती दी थी, लेकिन कथित तौर पर सॉफ्टवेयर सिस्टम की वजह से उनके नाम अंतिम इलेक्टोरल रोल में शामिल नहीं हो पाए। यह जरूरी है कि इसे एक रिपोर्ट किए गए मामले के तौर पर देखा जाए, न कि किसी अदालत या आयोग द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में। ECI ने इन रिपोर्ट्स पर क्या कहा? अपने 26 सितंबर के आधिकारिक प्रेस नोट (ECI/PN/120/2026) में आयोग ने कहा कि: SIR से जुड़े सभी बड़े फैसले जिसमें 24 जून 2025 का SIR आदेश भी शामिल है पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किया गया SIR शेड्यूल भी सर्वसम्मति से मंजूर हुआ था कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीतिगत विषय से जुड़ा नहीं था, बल्कि ECI में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के काम से जुड़ा था फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार role-based access मिलता है आयोग ने अब ECINet की स्वतंत्र समीक्षा का आदेश दिया है आयोग
Delhi Weather Today: मानसून विदाई के बाद फिर बारिश, 26-27 सितंबर को Thunderstorm और तेज हवाओं का अलर्ट

आज 26 सितंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में मौसम एक बार फिर बदल गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून राजधानी से विदा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद आसमान में बादल छाए हुए हैं और हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज और कल दोनों दिनों के लिए thunderstorm, बिजली कड़कने और तेज हवाओं की संभावना जताई है। IMD के अनुसार दिल्ली में आज आमतौर पर आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम विभाग ने हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में कुछ स्थानों पर 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गस्ट 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की चेतावनी दी है। आमतौर पर मानसून की विदाई के बाद मौसम शुष्क और साफ होने लगता है, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी में सक्रिय एक मौसमी सिस्टम के असर से उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में नमी पहुंच रही है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। Delhi में आज कैसा रहेगा मौसम? जानकारी विवरण तारीख 26 सितंबर 2026 अधिकतम तापमान (अनुमानित) करीब 28°C (25 सितंबर के 32°C से कम) आसमान आमतौर पर बादल छाए रहेंगे बारिश का अनुमान हल्की से मध्यम बारिश Thunderstorm कुछ स्थानों पर गरज-चमक की संभावना हवा कुछ इलाकों में 40-50 किमी/घंटा, गस्ट 60 किमी/घंटा तक IMD चेतावनी कोई विशेष रेड/ऑरेंज अलर्ट सामने नहीं आया, सामान्य पूर्वानुमान 26 सितंबर को बारिश का क्या अनुमान है? IMD के मुताबिक आज दिल्ली में आसमान आमतौर पर बादलों से घिरा रहेगा और शहर के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर thunderstorm और बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे तक और गस्ट 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। यह बारिश पूरे शहर में एक जैसी नहीं होगी — मौसम विभाग ने इसे “isolated places” यानी कुछ चुनिंदा इलाकों तक सीमित बताया है, इसलिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की तीव्रता में अंतर देखने को मिल सकता है। 27 सितंबर को कैसा रहेगा मौसम? रविवार, 27 सितंबर को भी दिल्ली में मौसम एक जैसा ही बना रहने की उम्मीद है। IMD ने इस दिन के लिए मध्यम बारिश का अनुमान जताया है, साथ ही thunderstorm और तेज हवाओं की आशंका भी बनी रहेगी। मौसम विभाग के मुताबिक 27 सितंबर को बारिश की गतिविधि 26 सितंबर के मुकाबले थोड़ी ज्यादा स्पष्ट रूप से महसूस हो सकती है। Monsoon Withdrawal के बाद भी Delhi में बारिश क्यों? दक्षिण-पश्चिम मानसून हाल ही में दिल्ली से विदा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद बारिश की यह वजह मानसून नहीं, बल्कि एक अलग मौसमी सिस्टम है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक विकसित हो रहा मौसमी सिस्टम सक्रिय है, जिसका असर देश के कई हिस्सों के साथ-साथ उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम पर भी पड़ रहा है। यही सिस्टम दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और मध्य भारत के कई राज्यों में नमी और बारिश की गतिविधि ला रहा है। Delhi-NCR में किन इलाकों पर असर पड़ सकता है? IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में कुछ स्थानों पर thunderstorm, बिजली कड़कने और तेज हवाओं की संभावना है। इसका मतलब है कि दिल्ली से सटे गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे हरियाणा के हिस्सों में भी समान मौसमी गतिविधि देखने को मिल सकती है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे उत्तर प्रदेश से सटे इलाकों के लिए फिलहाल कोई अलग, विस्तृत पूर्वानुमान उपलब्ध नहीं है, लेकिन एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना सामान्य तौर पर बनी हुई है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि पूरे एनसीआर में बारिश एक जैसी नहीं होगी — तीव्रता इलाके के हिसाब से अलग-अलग रह सकती है। Temperature में कितना बदलाव आएगा? बारिश और बादलों के असर से दिल्ली के तापमान में गिरावट देखी जा रही है। 25 सितंबर को अधिकतम तापमान करीब 32°C दर्ज हुआ था, जबकि 26 सितंबर के लिए IMD का पूर्वानुमान इसे घटाकर करीब 28°C के आसपास बता रहा है। 27 सितंबर को अधिकतम तापमान फिर हल्का बढ़कर करीब 31°C रहने का अनुमान है। यानी बारिश से तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है, हालांकि इसे किसी बड़े “cold spell” के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए — यह मौसमी बदलाव सामान्य पोस्ट-मानसून पैटर्न का हिस्सा है। Traffic और Daily Life पर क्या असर पड़ सकता है? बारिश और तेज हवाओं की वजह से दिल्ली-एनसीआर में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं: निचले इलाकों में जलभराव की संभावना दृश्यता (visibility) में कमी, खासकर thunderstorm के दौरान ट्रैफिक की रफ्तार धीमी होने और जाम लगने की आशंका गीली सड़कों की वजह से फिसलन दोपहिया वाहन चालकों के लिए यात्रा में परेशानी फिलहाल किसी बड़े पैमाने पर जलभराव या यातायात बाधित होने की पुष्टि नहीं हुई है — ये सभी संभावनाएं हैं, जो मौसम की स्थिति पर निर्भर करेंगी। Delhi में बारिश के दौरान किन बातों का ध्यान रखें? गरज-चमक के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें बिजली कड़कने के समय पेड़ों और खुले मैदानों से दूर रहें बिजली के खंभों और तारों के पास खड़े होने से बचें गीली सड़कों पर वाहन सावधानी से चलाएं यात्रा से पहले ट्रैफिक की स्थिति जरूर देख लें मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखें अगले 3-5 दिनों में Delhi का मौसम कैसा रहेगा? IMD के मौजूदा पूर्वानुमान के मुताबिक 28 सितंबर को भी दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद के दिनों के लिए फिलहाल कोई विस्तृत, आधिकारिक पूर्वानुमान उपलब्ध नहीं है, इसलिए 29 सितंबर के बाद की स्थिति के बारे में अभी निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। मौसम अपडेट होने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। क्या Delhi में Monsoon पूरी तरह खत्म हो गया है? हां, दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली से आधिकारिक तौर पर विदा हो चुका है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अब बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। मानसून की विदाई के बाद भी पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance), बंगाल की खाड़ी के सिस्टम या अन्य मौसमी परिघटनाएं बारिश और thunderstorm
FY27 Market Borrowing घटा: ₹17.2 लाख करोड़ से करीब ₹16 लाख करोड़ हुआ अनुमान

भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने market borrowing plan को संशोधित किया है। केंद्रीय बजट में सरकार ने पूरे साल के लिए ₹17.2 लाख करोड़ के gross market borrowing का अनुमान रखा था। अब सरकार द्वारा जारी नए आंकड़ों के मुताबिक, पूरे साल का gross market borrowing घटकर करीब ₹16 लाख करोड़ रहने की उम्मीद है यानी बजट अनुमान से करीब ₹1.2 लाख करोड़ कम। यह बदलाव तब सामने आया है जब सरकार ने वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से (अक्टूबर 2026-मार्च 2027) के लिए अपना borrowing calendar जारी किया। सरकार ने बताया कि पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में करीब ₹8.14 लाख करोड़ का उधार पहले ही लिया जा चुका है, और दूसरी छमाही में ₹7.86 लाख करोड़ का gross borrowing dated securities के जरिए किया जाएगा। यह डेवलपमेंट इसलिए अहम है क्योंकि market borrowing सीधे तौर पर government bond supply, बॉन्ड मार्केट के सेंटिमेंट और ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों को प्रभावित करता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि net market borrowing जो fiscal deficit को फाइनेंस करने के लिए इस्तेमाल होता है बजट अनुमान ₹11.73 लाख करोड़ के आसपास ही बना हुआ है। FY27 में सरकार कितना उधार लेगी? Particular Amount Original Gross Market Borrowing (Budget Estimate) ₹17.2 लाख करोड़ Latest Gross Market Borrowing करीब ₹16 लाख करोड़ (सटीक आंकड़ा ₹15,99,506 करोड़) Reduction करीब ₹1.2 लाख करोड़ (₹1.21 लाख करोड़) Net Market Borrowing ₹11.73 लाख करोड़ (बजट अनुमान के बराबर) Fiscal Deficit (Budget Estimate) ₹16.96 लाख करोड़ Fiscal Deficit as % of GDP 4.3% इन आंकड़ों को समझें तो सरकार का gross borrowing लक्ष्य घटा है, लेकिन net borrowing जिससे असल में fiscal deficit फाइनेंस होता है लगभग वैसा ही बना हुआ है जैसा बजट में तय किया गया था। इसकी वजह है repayment/redemption requirement का घटना, जिसे आगे समझाया गया है। ₹17.2 लाख करोड़ से Borrowing क्यों घटी? सरकार के मुताबिक, इस कमी की मुख्य वजह repayment requirement का घटना है। बजट में FY27 के लिए repayment requirement ₹5.47 लाख करोड़ अनुमानित था, जो अब घटकर करीब ₹4.36 लाख करोड़ रह गया है। इसके पीछे मुख्य कारण debt switch और buyback ऑपरेशंस हैं। सरकार ने वित्त वर्ष के दौरान securities के switch auctions किए, जिनके जरिए पुरानी, जल्द मैच्योर होने वाली securities को नई, लंबी अवधि की securities से बदला गया। इससे आने वाले समय में एक साथ बड़ी रकम चुकाने का दबाव कम हुआ, और उसी वजह से कुल borrowing requirement भी घट गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूसरी छमाही के दौरान भी switch और buyback ऑपरेशंस जारी रहेंगे, ताकि redemption schedule को बेहतर तरीके से manage किया जा सके। Gross Market Borrowing और Net Market Borrowing में क्या अंतर है? आम पाठकों के लिए यह अंतर समझना जरूरी है: Gross Market Borrowing: यह वह कुल राशि है जो सरकार नई government securities जारी करके बाजार से जुटाती है। Net Market Borrowing: यह वह राशि है जो gross borrowing में से पुराने कर्ज की repayment/redemption घटाने के बाद बचती है। यही राशि वास्तव में fiscal deficit को फाइनेंस करने के काम आती है। सीधे शब्दों में — gross borrowing कम होने का मतलब यह नहीं कि सरकार की फाइनेंसिंग जरूरत कम हो गई है। इसका बड़ा हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि इस साल कितनी पुरानी securities मैच्योर हो रही हैं और उनका भुगतान कैसे मैनेज किया जा रहा है। FY27 के दूसरे छमाही में कितना Borrowing होगा? अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच सरकार ₹7.86 लाख करोड़ का gross borrowing dated securities के जरिए करेगी। इसमें ₹15,000 करोड़ Sovereign Green Bonds (SGrBs) के जरिए जुटाए जाएंगे। यह पूरा borrowing 23 weekly auctions के जरिए पूरा किया जाएगा, जो मार्च की शुरुआत तक चलेगा। हर हफ्ते के ऑक्शन का साइज करीब ₹33,000 करोड़ से ₹36,000 करोड़ के बीच रहेगा। इसके अलावा, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2026) में सरकार Treasury Bills के जरिए हर हफ्ते ₹23,000 करोड़ जुटाएगी, जो 13 auction weeks में बंटा होगा इसमें ₹8,000 करोड़ 91-दिन के बिल्स, ₹8,000 करोड़ 182 दिन के बिल्स और ₹7,000 करोड़ 364-दिन के बिल्स के जरिए आएंगे। सरकार किन Bonds के जरिए पैसा जुटाएगी? Dated Government Securities: ये लंबी अवधि की securities होती हैं, जिन पर तय ब्याज दर के साथ एक निश्चित मैच्योरिटी अवधि होती है। सरकार का ज्यादातर borrowing इसी माध्यम से होता है। Treasury Bills (T-Bills): ये कम अवधि (91, 182 और 364 दिन) की securities हैं, जो short-term फंडिंग जरूरतों को पूरा करने में मदद करती हैं। Sovereign Green Bonds (SGrBs): इनके जरिए जुटाई गई राशि पर्यावरण से जुड़ी परियोजनाओं में इस्तेमाल के लिए तय की जाती है। H2 FY27 में ₹15,000 करोड़ इसी माध्यम से जुटाए जाएंगे। Fiscal Deficit पर इसका क्या असर होगा? fiscal deficit वह अंतर है जो सरकार की कुल कमाई (राजस्व) और कुल खर्च के बीच होता है, जिसे उधार लेकर पूरा किया जाता है। FY27 के लिए बजट में fiscal deficit ₹16.96 लाख करोड़ यानी GDP का 4.3% तय किया गया था। यहां यह स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है gross market borrowing घटने का सीधा मतलब यह नहीं है कि fiscal deficit भी घट गया है। मौजूदा रिपोर्टिंग के मुताबिक net market borrowing लगभग बजट स्तर (₹11.73 लाख करोड़) पर ही बना हुआ है, जो दिखाता है कि fiscal deficit से जुड़ी फाइनेंसिंग जरूरत में कोई बड़ा बदलाव फिलहाल सामने नहीं आया है। gross borrowing में कमी मुख्य रूप से घटी हुई repayment जरूरत की वजह से है, न कि कम fiscal deficit की वजह से। Bond Market पर क्या असर पड़ सकता है? gross borrowing में कमी का मतलब है कि बाजार में सरकारी बॉन्ड्स की supply उतनी ज्यादा नहीं बढ़ेगी जितनी बजट अनुमान के हिसाब से हो सकती थी। इससे government securities की demand-supply स्थिति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्टिंग के मुताबिक, H2FY27 का यह borrowing plan बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही है, जिससे बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम होने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस बारे में कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती बॉन्ड यील्ड पर वैश्विक ब्याज दर के रुझान, महंगाई के आंकड़े और निवेशकों की मांग जैसे
Festive Season से पहले Myntra ने बनाई 26,000 से ज्यादा Temporary Jobs

फैशन और लाइफस्टाइल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Myntra ने festive season और अपने Big Fashion Festival से पहले 26,000 से ज्यादा seasonal employment opportunities तैयार करने की घोषणा की है। कंपनी ने गुरुवार को बताया कि यह seasonal hiring पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। यह Myntra Jobs 2026 announcement इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत में festive shopping season के दौरान e-commerce कंपनियां कितनी तेजी से अस्थायी रोजगार के मौके पैदा करती हैं। शुरुआत में ही यह साफ कर देना जरूरी है कि ये सभी 26,000 positions फिलहाल public applications के लिए एक साथ खुली हुई vacancies नहीं हैं — यह कंपनी द्वारा तैयार की गई कुल seasonal employment opportunities की संख्या है। Myntra ने कितनी नौकरियां तैयार की हैं? कंपनी के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस साल seasonal workforce की संख्या 26,000 से ज्यादा है, जो पिछले साल के seasonal workforce के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। पिछले साल का exact आंकड़ा officially detail में साझा नहीं किया गया है, इसलिए इस लेख में सिर्फ verified तुलनात्मक जानकारी दी जा रही है, अनुमानित संख्या नहीं। किन-किन पदों पर होगी भर्ती? Myntra के seasonal roles में supply chain operations शामिल हैं, जैसे sorting, grading और packing, इसके अलावा delivery और customer service से जुड़े काम भी इसमें आते हैं। Fulfilment centre operations (sorting, grading, packing) Last-mile delivery से जुड़े roles Customer service roles Warehouse और logistics सहायता से जुड़े काम 8,000 Delivery Partners और 2,700 Customer Service Roles इस कुल seasonal team में 8,000 delivery partners और 2,700 customer service roles शामिल हैं। ये सभी roles seasonal या temporary nature की opportunities हैं, जो festive demand से जुड़ी हैं — इन्हें permanent jobs के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। किन शहरों और राज्यों में होंगे ये रोजगार? यह seasonal workforce पांच fulfilment hubs में तैनात होगा — Bengaluru, Mumbai, Kolkata, Bilaspur और Binola। वर्कफोर्स की भर्ती कई राज्यों से की गई है, जिनमें Odisha, Karnataka, Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Jharkhand शामिल हैं। यह जरूरी नहीं कि हर role हर शहर में उपलब्ध हो — अलग-अलग fulfilment centres में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग roles की संख्या तय की गई है। महिलाओं और Persons with Disabilities के लिए क्या है? कुल seasonal positions में से 350 से ज्यादा roles persons with disabilities के लिए रखे गए हैं, जबकि fulfilment centre workforce में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने seasonal hiring में diversity को शामिल करने की कोशिश कर रही है। Myntra को Festive Season में ज्यादा Workforce की जरूरत क्यों है? Festive season के दौरान online shopping में भारी बढ़ोतरी होती है, जिससे order volumes काफी ज्यादा हो जाते हैं। इसका सीधा असर पड़ता है sorting-packing की जरूरत, fulfilment centres पर operational load, delivery network और customer service demand पर। इसी वजह से Myntra जैसी कंपनियां festive season से पहले ही अपना seasonal workforce तैयार कर लेती हैं। Big Fashion Festival क्या है? Big Fashion Festival, Myntra का एक प्रमुख annual sales event है जो festive season के दौरान आयोजित होता है और Myntra के सबसे बड़े shopping events में से एक माना जाता है। ऐसे बड़े sales events की वजह से कंपनी को सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा operational capacity की जरूरत पड़ती है — इसी वजह से seasonal hiring जैसे कदम उठाए जाते हैं। पिछले साल की तुलना में कितना बड़ा Hiring Plan? साल Seasonal Workforce/Opportunities पिछला साल Exact आंकड़ा officially साझा नहीं, इस साल के मुकाबले आधे से भी कम 2026 26,000 से ज्यादा कंपनी के बयान के मुताबिक, यह बढ़ोतरी पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। क्या ये Permanent Jobs हैं? यह समझना बहुत जरूरी है — ये सभी 26,000+ positions seasonal या temporary employment opportunities हैं, जो सीधे तौर पर festive demand से जुड़ी हैं। इन्हें automatically permanent employment नहीं माना जाना चाहिए। अभी तक Myntra ने यह नहीं बताया है कि festive season के बाद कितने workers को permanent roles में absorb किया जाएगा। Myntra Jobs 2026 के लिए आवेदन कैसे करें? कंपनी की ओर से उपलब्ध जानकारी में इन सभी seasonal positions के लिए कोई एक common public application process या deadline स्पष्ट नहीं की गई है। Salary कितनी मिलेगी? उपलब्ध announcement में इन seasonal roles के लिए salary, stipend या payment से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। E-commerce Sector में Festive Hiring का Trend Myntra अकेली कंपनी नहीं है जो festive season से पहले बड़े पैमाने पर temporary workforce तैयार करती है। एक industry रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जुलाई-दिसंबर 2026 की अवधि के दौरान करीब 200,000 से 250,000 seasonal और gig jobs बनने की संभावना है, और festive hiring में 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि festive season के दौरान logistics, fulfilment और delivery networks कितने अहम हो जाते हैं। रोजगार के लिहाज से इस Hiring का क्या मतलब है? Festive season के दौरान seasonal income के मौके तैयार होते हैं Logistics और delivery workers की मांग बढ़ती है Customer service roles में भी अस्थायी रोजगार बढ़ता है Women और persons with disabilities की भागीदारी को शामिल करने की कोशिश हो रही है सिर्फ इस एक announcement के आधार पर भारत के overall employment market को लेकर कोई बड़ा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा — यह एक कंपनी-विशेष seasonal hiring plan है। Key Highlights Myntra ने 26,000 से ज्यादा seasonal employment opportunities तैयार की हैं यह पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है 8,000 delivery partners और 2,700 customer service roles शामिल हैं 350 से ज्यादा roles persons with disabilities के लिए रखे गए हैं Fulfilment centre workforce में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है Hiring पांच fulfilment centres — Bengaluru, Mumbai, Kolkata, Bilaspur और Binola में हो रही है वर्कफोर्स की भर्ती Odisha, Karnataka, Bihar, UP, MP और Jharkhand जैसे राज्यों से हो रही है यह hiring Big Fashion Festival और festive season की बढ़ी हुई demand से जुड़ी है FAQs Q1. Myntra ने 2026 में कितनी seasonal jobs
Sensex 315 अंक चढ़ा, Nifty भी संभला; Realty-Auto शेयरों में तेजी, बैंकिंग शेयरों का भी सहारा

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को घरेलू शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 315.20 अंक या 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 77.40 अंक या 0.34 प्रतिशत मजबूत होकर 23,140.50 पर बंद हुआ। यह तेजी पिछले कारोबारी सत्र यानी गुरुवार की तीखी गिरावट के बाद आई है, जब बीमा क्षेत्र से जुड़ी नियामकीय खबरों के चलते बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बड़ी बिकवाली देखी गई थी। शुक्रवार को रियल्टी और ऑटो शेयरों में खासी खरीदारी रही, वहीं बैंकिंग शेयरों में भी चुनिंदा खरीदारी का सहारा मिला। हालांकि आईटी शेयरों में दबाव बना रहा, जिसने बाजार की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया। बता दें कि इस बढ़त के बावजूद निफ्टी लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ, जो 2020 के बाद सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट सिलसिला है। यानी शुक्रवार की तेजी को साप्ताहिक रुझान के उलट एक दिन की रिकवरी के तौर पर देखा जा रहा है। Sensex और Nifty का आज का हाल Sensex: क्लोजिंग लेवल: 73,895.74 बढ़त: 315.20 अंक प्रतिशत बढ़त: 0.43% दिन का उच्चतम स्तर: करीब 73,906.96 Nifty 50: क्लोजिंग लेवल: 23,140.50 बढ़त: 77.40 अंक प्रतिशत बढ़त: 0.34% कारोबार के दौरान सेंसेक्स दोपहर 3 बजे तक 73,839.15 पर था, फिर क्लोजिंग ऑक्शन सत्र (CAS) में मजबूत होकर 73,881.44 तक पहुंचा और अंतिम रूप से 73,895.74 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी भी अंतिम कारोबारी घंटों में मजबूती दिखाते हुए 23,140.50 पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में क्या हुआ था? गुरुवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखी गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीमा नियामक द्वारा बीमा कमीशन और वितरण लागत से जुड़े नियमों में संभावित बदलाव की खबरों ने वित्तीय और बीमा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव डाला, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ा। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने भी सेंटीमेंट को प्रभावित किया। इस गिरावट में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। गुरुवार की इसी बिकवाली के बाद निवेशकों ने शुक्रवार को मूल्यांकन के आधार पर खरीदारी (वैल्यू बाइंग) की, जिससे बाजार में आंशिक रिकवरी देखने को मिली। Banking और Auto Stocks में खरीदारी शुक्रवार को सेंसेक्स पैक में एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एशियन पेंट्स प्रमुख गेनर्स में शामिल रहे। एक्सिस बैंक की बढ़त से बैंकिंग शेयरों में खरीदारी का संकेत मिला, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा की तेजी ने ऑटो सेक्टर को सहारा दिया। रियल्टी और ऑटो शेयरों में सबसे मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। हालांकि यह खरीदारी पूरी तरह व्यापक (broad-based) नहीं, बल्कि चुनिंदा शेयरों तक सीमित रही, क्योंकि सेक्टोरल इंडेक्स पर मिला-जुला रुख देखने को मिला। एनएसई पर सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप गेनर रहा। Oil & Gas Stocks का प्रदर्शन शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) उन शेयरों में शामिल रहा जो 52-हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंचे। रिलायंस के साथ-साथ पीबी फिनटेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और मारुति सुजुकी इंडिया के शेयर भी 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए। यह दिखाता है कि तेल एवं गैस तथा कुछ अन्य हैवीवेट सेक्टरों में कमजोरी बनी रही, भले ही व्यापक सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। दूसरे सेक्टर्स का हाल शुक्रवार के कारोबार में सेक्टोरल इंडेक्स मिले-जुले रहे: आईटी: भारतीय स्टॉक मार्केट पर एक रिपोर्ट के अनुसार, मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला, जिसने बाजार की तेजी को सीमित किया कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: एनएसई पर टॉप सेक्टोरल गेनर रहा मिडकैप और स्मॉलकैप: निफ्टी मिडकैप 100, 0.14 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100, 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ अन्य क्षेत्रों (फार्मा, मेटल, मीडिया, एफएमसीजी) से जुड़े पुष्ट आंकड़े फिलहाल सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं, इसलिए उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना उचित नहीं होगा। बाजार में तेजी की प्रमुख वजहें शुक्रवार की रिकवरी के पीछे प्रमुख रूप से ये कारण सामने आए हैं: गुरुवार की तीखी गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग यानी मूल्यांकन के आधार पर खरीदारी रियल्टी और ऑटो शेयरों में खरीदारी का सहारा चुनिंदा बैंकिंग शेयरों (जैसे एक्सिस बैंक) में मजबूती निफ्टी इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) में 7.25 प्रतिशत की गिरावट, जो नियर-टर्म अस्थिरता की आशंका कम होने का संकेत है वहीं आईटी शेयरों में कमजोरी और वैश्विक बाजारों के मिश्रित रुझान ने तेजी को सीमित रखा। FII और DII Activity 25 सितंबर 2026 के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की अंतिम और पुष्ट खरीद-बिक्री का पूरा आंकड़ा फिलहाल स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। हालांकि हाल के सत्रों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की खबरें आई हैं, जो घरेलू बाजार के लिए एक प्रमुख दबाव कारक बनी हुई थीं। सटीक और अंतिम आंकड़े आने पर इसे अपडेट किया जाएगा। आज के बाजार में कौन से शेयर चर्चा में रहे? ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (TCI): शेयर बायबैक प्रस्ताव पर विचार की घोषणा के बाद करीब 15 प्रतिशत उछला एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एशियन पेंट्स: सेंसेक्स पैक में टॉप गेनर्स रहे रिलायंस इंडस्ट्रीज, पीबी फिनटेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, मारुति सुजुकी: 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचे IPCA लैबोरेटरीज, लॉरस लैब्स, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स: निफ्टी फार्मा इंडेक्स में टॉप लूजर रहे यह जानकारी केवल बाजार की गतिविधि की रिपोर्टिंग के लिए है, किसी भी शेयर में निवेश की सलाह के तौर पर नहीं ली जानी चाहिए। Global Market और Crude Oil का असर वैश्विक स्तर पर संकेत मिश्रित रहे। एशियाई बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला कारोबार देखा गया, क्योंकि अमेरिकी बाजार लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ था। अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 5.22 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जिसने वैश्विक निवेशक धारणा को प्रभावित किया। क्रूड ऑयल को लेकर अमेरिका-ईरान वार्ता की संभावनाओं पर बाजार की नजर बनी हुई है, जिसका असर आगामी सत्रों में तेल कीमतों और इससे जुड़े शेयरों पर पड़ सकता है। हालांकि भविष्य की कच्चे तेल की कीमतों को लेकर कोई निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। क्या यह सिर्फ एक दिन की रिकवरी है? गुरुवार की तीखी गिरावट के बाद शुक्रवार को बाजार में सीमित रिकवरी देखने को मिली, लेकिन यह किसी बड़े ट्रेंड-रिवर्सल का संकेत नहीं कहा जा
SIR विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ PIL, दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर उठे सवाल

देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) को लेकर पहले से चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान लिए गए कुछ फैसलों को चुनौती दी गई है। यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की है। याचिका का आधार द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को बताया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े कुछ निर्णयों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चुनाव आयोग के आंतरिक निर्णय-प्रक्रिया, मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्था के रूप में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं और इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। क्या है पूरा मामला? चुनाव आयोग ने देशभर के मतदाता रोल का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया था, जिसका मकसद मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध करना बताया गया। इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए और नए आवेदन जोड़े गए, जिसे लेकर विभिन्न राज्यों में विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लगभग 10 महीनों की अवधि में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां या असहमति दर्ज कराई, जिनमें एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज कराने का भी दावा शामिल है। इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई और कुछ ही दिनों में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दाखिल इस PIL में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। यह स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है कि याचिका दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने इसमें लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया है या किसी को दोषी ठहराया है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। याचिका पर सुनवाई की तारीख और अदालत का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इसके अलावा एक अन्य घटनाक्रम में, अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर CEC के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति मांगी है। यह अलग प्रक्रिया है और इसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL के समान नहीं समझा जाना चाहिए। याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं? याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ फैसले “चुनाव आयोग” के नाम पर लिए गए, लेकिन इनमें अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में निम्नलिखित प्रमुख आरोप शामिल हैं: याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में बदलाव, इलेक्टोरल-रोल डेटाबेस के केंद्रीकरण, ECINet प्रणाली के जरिए योग्य मतदाताओं को बहाल न किए जाने और पश्चिम बंगाल में लगभग 16.1 लाख अपीलें दाखिल किए जाने जैसे मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। याचिका में कहा गया है कि मई 2026 में Form 6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त जोशी ने आपत्ति जताई थी और तर्क दिया था कि सांविधिक फॉर्म में बदलाव बिना संबंधित नियमों में संशोधन के नहीं किया जा सकता, जिससे संधू ने भी सहमति जताई थी। याचिका का आरोप है कि इसके बावजूद ECINet पोर्टल पर फॉर्म में बदलाव कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि CEC द्वारा लिए गए कुछ निर्णय, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर में बदलाव बहुमत की राय के विपरीत लिए गए, जो चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का उल्लंघन बताया गया है, जिसमें असहमति की स्थिति में बहुमत की राय से निर्णय लेने का प्रावधान है। यह सभी बिंदु याचिकाकर्ता के दावे हैं, जिनकी जांच और सत्यापन अदालत में होना बाकी है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई? याचिका में निम्नलिखित प्रमुख राहतें मांगी गई हैं: CEC द्वारा बिना पूर्ण आयोग की सहमति के लिए गए फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और शून्य (void ab initio) घोषित करने की मांग SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नामों के कथित रूप से हटाए जाने की स्वतंत्र जांच के लिए रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग, जिसमें साइबर सुरक्षा और IT विशेषज्ञों को भी शामिल करने की बात कही गई है मूल सांविधिक Form 6 (रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत निर्धारित) को बहाल करने और पात्र वयस्कों को मौजूदा कानून के अनुसार मतदाता के रूप में पंजीकरण की अनुमति देने की मांग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत CEC ज्ञानेश कुमार, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने की मांग याचिका में यह भी कहा गया है कि CEC की कथित भूमिका उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे से बाहर है, इसलिए उन्हें कानूनी संरक्षण (immunity) का लाभ नहीं मिलना चाहिए ये सभी मांगें याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई हैं और इन पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को लेना है। ECI का क्या कहना है? यह खंड समझना बेहद जरूरी है। चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लिखित नोट, अवलोकन, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-परख आयोग के भीतर सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग का कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून के अनुसार हुई हैं और निर्णय-प्रक्रिया के दौरान विचारों में भिन्नता होना सामान्य बात है। ETV Bharat रिपोर्ट्स के अनुसार, ECI अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े आदेश,
उत्तराखंड मौसम: आज भारी बारिश, कल 26 सितंबर को बढ़ेगा खतरा

New Delhi: पहाड़ी राज्य में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर सक्रियता बढ़ गई है। मौसम विभाग (IMD) ने आज, 25 सितंबर को राज्यभर में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। देहरादून, हरिद्वार सहित कई इलाकों में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं और बीच-बीच में बारिश हो रही है। असली चिंता कल यानी 26 सितंबर को लेकर है। IMD के ताज़ा बुलेटिन के मुताबिक, कल राज्य में अत्यंत भारी बारिश (एक्सट्रीमली हैवी रेनफॉल) की चेतावनी दी गई है, जबकि 27 सितंबर के लिए बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। यानी अगले तीन दिन उत्तराखंड के लिए मौसम के लिहाज़ से संवेदनशील बने रहेंगे। गौरतलब है कि इस बार बारिश की यह सक्रियता बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम के असर से जुड़ी बताई जा रही है, जिसका प्रभाव धीरे-धीरे उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच रहा है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि यह चेतावनी पूर्वानुमान पर आधारित है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और IMD के अपडेट पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी है। आज कैसा रहेगा उत्तराखंड का मौसम? मौसम विभाग के मुताबिक आज, 25 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। देहरादून में आसमान में बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। IMD ने आज के लिए राज्य में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति बनने की भी बात कही है। यह दौर कोई अचानक आई घटना नहीं है पिछले कुछ दिनों से मौसम विभाग लगातार यह संकेत दे रहा था कि 25 सितंबर के आसपास बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है, और अब यह अनुमान सही साबित होता दिख रहा है। एक दिलचस्प जानकारी यह भी है कि राज्य के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में बुधवार (23 सितंबर) शाम से इस सीज़न की पहली बर्फबारी शुरू हो चुकी है। इससे साफ है कि मौसम में बदलाव सिर्फ मैदानी और मध्य पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊंचे इलाकों में भी सर्दी का असर जल्दी दिखने लगा है। 26 सितंबर को क्यों बढ़ सकता है खतरा? IMD के अनुसार 26 सितंबर को उत्तराखंड में बारिश की तीव्रता आज की तुलना में काफी बढ़ जाएगी। मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान में राज्य के लिए अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जो सामान्य भारी बारिश की श्रेणी से कहीं अधिक गंभीर मानी जाती है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि मौसमी सिस्टम का असर 26 से 28 सितंबर के बीच राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश के तौर पर सामने आने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही इस दौरान कहीं-कहीं गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी है। सीधे शब्दों में कहें तो आज की बारिश अगर हल्की से मध्यम रहती है, तो कल यह सिलसिला और तेज़ हो सकता है इसीलिए मौसम विभाग ने पहले से आगाह करना ज़रूरी समझा है। इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना मौसम विभाग के ताज़ा राज्यस्तरीय बुलेटिन में फिलहाल जिलावार रंग-कोडेड (ऑरेंज/रेड) अलर्ट की विस्तृत सूची सार्वजनिक नहीं की गई है यह जानकारी IMD देहरादून केंद्र समय-समय पर अपडेट करता रहता है। हालांकि, ऐसी मौसमी गतिविधियों में आमतौर पर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के पहाड़ी जिले जैसे देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाते हैं। पाठकों को सलाह है कि वे अपने जिले के लिए जारी ताज़ा अलर्ट के लिए IMD की आधिकारिक वेबसाइट या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) की जानकारी ज़रूर देखें, क्योंकि जिलावार अलर्ट अगले 24 घंटों में अपडेट हो सकता है। बारिश से किन इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है? अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए पहाड़ी इलाकों में कुछ सामान्य जोखिम बढ़ सकते हैं: भूस्खलन का खतरा पहाड़ी ढलानों पर लगातार बारिश से मिट्टी ढीली होने पर भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। सड़क अवरोध गढ़वाल और कुमाऊं के संपर्क मार्गों पर मलबा आने से यातायात बाधित हो सकता है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ना लगातार बारिश से पहाड़ी नदियों और बरसाती नालों में उफान आने की संभावना रहती है। निचले इलाकों में जलभराव देहरादून, हरिद्वार जैसे शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश से जलभराव की स्थिति बन सकती है। यातायात में देरी पहाड़ी मार्गों पर दृश्यता कम होने और बारिश के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो सकती है। यह ज़रूर ध्यान रखें कि यह संभावित जोखिम हैं फिलहाल किसी बड़े नुकसान या घटना की पुष्टि नहीं हुई है। लोगों के लिए जरूरी सावधानियां मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए स्थानीय निवासियों और यात्रियों को कुछ सामान्य सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है: भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें, खासकर पहाड़ी और संवेदनशील मार्गों पर। नदी, नाले और भूस्खलन-प्रवण इलाकों के पास जाने से बचें। यात्रा से पहले सड़क की ताज़ा स्थिति ज़रूर जांच लें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की एडवाइजरी का पालन करें। IMD और USDMA के आधिकारिक अपडेट पर नियमित नज़र रखें, ताकि किसी भी बदलाव की जानकारी समय पर मिल सके। चारधाम यात्रा या अन्य पर्वतीय यात्रा पर निकलने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की ज़रूरत है, क्योंकि पहाड़ी मार्गों पर मौसम अचानक बदल सकता है। उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों का मौसम IMD के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार, 26 सितंबर को राज्य में अत्यंत भारी बारिश, जबकि 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश जारी रहने की आशंका है। मौसम विभाग के बुलेटिन में 26 से 28 सितंबर के बीच राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश की गतिविधि बताई गई है, साथ ही इस दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं की भी चेतावनी है। इसके बाद मौसम में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि आने वाले दिनों के ताज़ा IMD बुलेटिन से ही हो सकेगी। फिलहाल पाठकों को सलाह है कि वे अगले 3-4 दिन मौसम को लेकर सतर्क रहें। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) 1. आज उत्तराखंड में बारिश कहां होगी? आज राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। देहरादून सहित मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों में बादल छाए रहने
बर्थ कंट्रोल मेथड चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?

आज के समय में गर्भनिरोधक के कई विकल्प मौजूद हैं गोलियां, आईयूडी, इंजेक्शन, इम्प्लांट, कंडोम और भी बहुत कुछ। इतने सारे विकल्पों में से सही तरीका चुनना कई बार मुश्किल लग सकता है। असल में कोई एक तरीका सबके लिए सही नहीं होता, सही चुनाव व्यक्ति की सेहत, जीवनशैली और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। इस लेख में उन जरूरी बातों के बारे में बताया गया है जिन पर बर्थ कंट्रोल मेथड चुनने से पहले ध्यान देना चाहिए, ताकि डॉक्टर के साथ बातचीत करना आसान हो सके। मेथड चुनने से पहले किन बातों का ध्यान रखें असरदारी (Effectiveness) अलग-अलग तरीकों की गर्भधारण रोकने की क्षमता अलग होती है। आईयूडी और इम्प्लांट जैसे लंबे समय तक चलने वाले तरीके ज्यादा असरदार माने जाते हैं क्योंकि इनमें रोज या हर बार याद रखने की जरूरत नहीं होती। कंडोम या गोलियां भी असरदार होती हैं, लेकिन इनकी सफलता सही और नियमित इस्तेमाल पर निर्भर करती है। सेहत से जुड़ी हिस्ट्री कुछ मेडिकल स्थितियां यह तय करने में भूमिका निभाती हैं कि कौन सा तरीका सुरक्षित है: जिन महिलाओं को ब्लड क्लॉट, कुछ खास तरह के माइग्रेन या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रही हो, उन्हें एस्ट्रोजन वाली गोलियों से बचने की सलाह दी जा सकती है। फाइब्रॉइड्स या heavy periods जैसी स्थितियों में hormonal IUD फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह ब्लीडिंग को भी कम करने में मदद करता है। पेल्विक इन्फेक्शन की हिस्ट्री होने पर आईयूडी उपयुक्त है या नहीं, यह डॉक्टर तय करते हैं। डॉक्टर आमतौर पर मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा दवाओं की जांच करने के बाद ही सही तरीका सुझाते हैं। सुविधा और जीवनशैली यह सोचना भी जरूरी है कि कोई तरीका रोजमर्रा की दिनचर्या में कितना फिट बैठता है: रोज लेने वाले तरीके (जैसे गोली) में हर दिन लगभग एक ही समय पर याद रखना जरूरी होता है। लंबे समय तक चलने वाले तरीके (जैसे आईयूडी या इम्प्लांट) लगाने के बाद बार-बार ध्यान देने की जरूरत नहीं होती, ये प्रकार के हिसाब से 3 से 10 साल तक चल सकते हैं। बैरियर तरीके (जैसे कंडोम) सिर्फ संबंध बनाते समय इस्तेमाल होते हैं और इनमें किसी रोजाना रूटीन की जरूरत नहीं। अगर रोज कुछ याद रखना मुश्किल लगता है, तो लंबे समय तक चलने वाला तरीका बेहतर हो सकता है। भविष्य में गर्भधारण की योजना अगर नजदीक भविष्य में गर्भधारण की योजना है, तो ऐसा तरीका बेहतर हो सकता है जिसे बंद करने के बाद fertility जल्दी वापस आ जाए, जैसे कंडोम या गोली। अगर लंबे समय के लिए या permanent रोकथाम चाहिए, तो आईयूडी, इम्प्लांट या नसबंदी जैसे विकल्पों पर डॉक्टर से बात करना बेहतर है। ये भी पढ़ें:Menopause के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव, कब लें डॉक्टर की सलाह साइड इफेक्ट्स Hormonal तरीकों से कुछ महिलाओं को अनियमित ब्लीडिंग, मूड में बदलाव, सिरदर्द या वजन में उतार-चढ़ाव जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, हालांकि यह हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। Non-hormonal तरीके, जैसे कॉपर आईयूडी या बैरियर मेथड, हार्मोनल साइड इफेक्ट्स से बचाते हैं, लेकिन इनकी अपनी बातें भी ध्यान रखनी होती हैं, जैसे कॉपर आईयूडी से periods heavy हो सकते हैं। यौन संक्रमण (STI) से सुरक्षा यह जानना जरूरी है कि ज्यादातर बर्थ कंट्रोल तरीके, जिनमें गोलियां, आईयूडी और इम्प्लांट शामिल हैं, यौन संक्रमण (STI) से सुरक्षा नहीं देते। कंडोम फिलहाल इकलौता ऐसा तरीका है जो गर्भधारण के साथ-साथ STI से भी बचाता है, इसलिए कुछ महिलाएं इसे किसी और तरीके के साथ इस्तेमाल करना चुनती हैं। लागत और उपलब्धता कुछ तरीकों में शुरुआत में ज्यादा खर्च होता है (जैसे आईयूडी लगवाना), लेकिन ये सालों तक चलते हैं इसलिए long-term में सस्ते पड़ते हैं। कंडोम या महीने की गोलियों जैसे तरीकों में छोटा लेकिन बार-बार होने वाला खर्च होता है। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं, इंश्योरेंस या नजदीकी क्लिनिक की उपलब्धता भी यह तय करने में मदद कर सकती है कि कौन सा तरीका व्यावहारिक है। रिवर्सिबिलिटी ज्यादातर तरीके reversible होते हैं, यानी इस्तेमाल बंद करने के बाद fertility वापस आ जाती है। नसबंदी जैसे permanent तरीके उन लोगों के लिए होते हैं जो भविष्य में गर्भधारण न करने को लेकर पूरी तरह निश्चित हों, और यह फैसला लेने से पहले डॉक्टर से विस्तार से बात करना जरूरी है। कब लें डॉक्टर की सलाह किसी भी hormonal तरीके को शुरू करने से पहले, खासकर अगर ब्लड क्लॉट, माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर या लिवर की बीमारी की हिस्ट्री हो अगर कोई तरीका शुरू करने के बाद तेज सिरदर्द, असामान्य सूजन या heavy bleeding जैसे लक्षण दिखें अगर स्तनपान करा रही हैं और बर्थ कंट्रोल पर विचार कर रही हैं, क्योंकि इस समय कुछ तरीके ज्यादा उपयुक्त माने जाते हैं अगर periods अनियमित या heavy हैं और ऐसा तरीका चाहिए जो इन्हें मैनेज करने में भी मदद करे अगर यह तय नहीं कर पा रही हैं कि सेहत, जीवनशैली या भविष्य की योजनाओं के हिसाब से कौन सा तरीका सही रहेगा डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, उम्र और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सही तरीका सुझाने में मदद कर सकते हैं, न कि हर किसी के लिए एक जैसी सलाह देकर। फैसला लेने में मदद करने वाले Practical Tips अपनी प्राथमिकताओं की लिस्ट बनाएं — असरदारी, सुविधा, लागत या STI से सुरक्षा और तय करें कि आपके लिए क्या सबसे जरूरी है। कोई नया तरीका शुरू करने पर लक्षणों पर नजर रखें, ताकि अगली विजिट पर डॉक्टर से इस बारे में बात कर सकें। सिर्फ दोस्तों या सोशल मीडिया की सलाह पर भरोसा न करें, क्योंकि हर किसी की सेहत अलग होती है और जो एक व्यक्ति के लिए सही है, जरूरी नहीं दूसरे के लिए भी सही हो। ट्रायल पीरियड के बारे में पूछें। कुछ तरीके शुरुआत में सही न लगने पर बदले जा सकते हैं, इसलिए कुछ समय तक निगरानी रखना सामान्य है। भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखें, जैसे कितनी जल्दी गर्भधारण की सोच रही हैं, क्योंकि यह भी तय करता है कि फिलहाल कौन सा तरीका सही रहेगा। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. कौन सा बर्थ कंट्रोल तरीका सबसे असरदार है? आईयूडी और इम्प्लांट जैसे लंबे समय तक चलने वाले तरीके सबसे असरदार माने जाते हैं, क्योंकि इनकी सफलता दर
Anemia महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है? जानिए वजह और बचाव

Anemia यानी शरीर में red blood cells या hemoglobin की कमी, महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा देखने को मिलती है। भारत में यह समस्या खासतौर पर आम है, जहां WHO के अनुसार reproductive age की एक बड़ी संख्या में महिलाएं किसी न किसी स्तर की anemia से जूझती हैं। थकान, कमजोरी या चक्कर आने को अक्सर लोग normal समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह anemia का संकेत हो सकता है। इस आर्टिकल में यह बताया गया है कि महिलाओं में anemia ज्यादा क्यों होता है, इसके common causes क्या हैं, और इससे बचने के practical तरीके क्या हैं। महिलाओं में Anemia ज्यादा क्यों होता है महिलाओं का शरीर biologically कुछ ऐसी situations से गुजरता है जिनकी वजह से iron और blood की जरूरत बढ़ जाती है। यही वजह है कि anemia महिलाओं में ज्यादा common है। Menstruation हर महीने periods के दौरान blood loss होना anemia की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। जिन महिलाओं को heavy periods (जिसे medically menorrhagia कहा जाता है) होते हैं, उनमें iron की कमी होने का खतरा और भी ज्यादा रहता है। Pregnancy Pregnancy के दौरान शरीर को बच्चे की growth के लिए extra blood और iron की जरूरत होती है। अगर diet में यह demand पूरी न हो, तो iron-deficiency anemia होना आम बात है। यही वजह है कि डॉक्टर pregnancy के दौरान iron supplements recommend करते हैं। Poor Diet और Nutrition की कमी कई महिलाओं की diet में iron, folate और vitamin B12 की मात्रा कम होती है, खासकर उन महिलाओं में जो vegetarian हैं या जिनकी diet balanced नहीं है। भारत में सामाजिक कारणों से भी महिलाएं अक्सर अपनी nutrition needs को परिवार की तुलना में कम priority देती हैं। Reproductive Health Conditions Fibroids, endometriosis या PCOS जैसी conditions के कारण heavy या irregular bleeding हो सकती है, जो over time anemia का कारण बन सकती है। Multiple Pregnancies और कम Gap बार-बार pregnancies, खासकर कम gap के साथ, शरीर के iron stores को ठीक से recover होने का मौका नहीं देतीं, जिससे anemia का खतरा बढ़ जाता है। Chronic Conditions Thyroid problems, kidney disease, या कोई chronic inflammatory condition भी red blood cell production को प्रभावित कर सकती है और anemia की वजह बन सकती है। Anemia के Common Symptoms लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना चेहरे का पीलापन सांस फूलना, खासकर थोड़ी सी activity के बाद चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना दिल की धड़कन तेज या irregular महसूस होना बाल झड़ना या नाखून कमजोर होना Concentration में दिक्कत ये symptoms धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए कई बार महिलाएं इन्हें रोजमर्रा की थकान समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। कब लें डॉक्टर की सलाह अगर थकान या कमजोरी लंबे समय से बनी हुई है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रही अगर periods बहुत heavy हैं या 7 दिन से ज्यादा चल रहे हैं अगर सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना बार-बार महसूस हो रहा है Pregnancy के दौरान अगर कमजोरी या चक्कर आना ज्यादा महसूस हो अगर बाल झड़ना, नाखून टूटना या त्वचा का पीलापन लगातार बना रहे अगर घर में anemia या किसी blood disorder की family history है डॉक्टर एक simple blood test (CBC) के जरिए anemia की पुष्टि कर सकते हैं और उसकी severity के हिसाब से iron supplements, diet में बदलाव, या underlying cause की जांच जैसे कदम सुझा सकते हैं। हर महिला के लिए treatment अलग हो सकता है, इसलिए किसी भी supplement या दवा को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। बचाव और Practical Tips Iron-rich foods शामिल करें। पालक, चुकंदर, गुड़, दालें, अंडे और मीट जैसी चीजें iron का अच्छा source हैं। Vitamin C के साथ लें। Iron के absorption को बेहतर बनाने के लिए iron-rich food के साथ नींबू, संतरा या टमाटर जैसी चीजें लें। Tea-coffee का समय ध्यान रखें। खाने के तुरंत बाद chai या coffee पीने से iron absorption कम हो सकता है, इसलिए बीच में gap रखें। Regular health check-ups कराएं, खासकर अगर periods heavy हैं या pregnancy planning कर रही हैं। Pregnancy के दौरान डॉक्टर की सलाह से supplements लें, खुद से कोई dose शुरू न करें। Heavy bleeding को नजरअंदाज न करें यह सिर्फ anemia नहीं बल्कि किसी underlying condition का भी संकेत हो सकता है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. Anemia महिलाओं में पुरुषों से ज्यादा क्यों होता है? Menstruation, pregnancy और childbirth के कारण महिलाओं के शरीर से ज्यादा blood और iron loss होता है, जिससे उनमें anemia का खतरा पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रहता है। 2. Anemia की पुष्टि कैसे होती है? एक simple blood test, जिसे CBC (Complete Blood Count) कहते हैं, से hemoglobin level चेक करके anemia की पुष्टि की जाती है। 3. क्या anemia सिर्फ diet से ठीक हो सकता है? Mild anemia में diet में बदलाव मदद कर सकता है, लेकिन moderate या severe cases में डॉक्टर supplements या आगे की जांच recommend कर सकते हैं। 4. Heavy periods और anemia में क्या संबंध है? हर महीने ज्यादा blood loss होने से शरीर के iron stores कम होते जाते हैं, जिससे समय के साथ iron-deficiency anemia हो सकता है। 5. Pregnancy में anemia क्यों common है? Pregnancy के दौरान बच्चे की growth के लिए शरीर को ज्यादा blood और iron की जरूरत होती है, जिसे diet अकेले पूरा नहीं कर पाती, इसलिए supplements की सलाह दी जाती है। 6. Anemia के लक्षणों को कब तक नजर अंदाज नहीं करना चाहिए? अगर थकान, चक्कर आना या सांस फूलना 2 हफ्तों से ज्यादा बना हुआ है, तो इसे नजरअंदाज न करते हुए डॉक्टर से मिलना चाहिए। 7. क्या iron supplements बिना डॉक्टर की सलाह के लिए जा सकते हैं? नहीं, iron supplements की dose व्यक्ति की condition पर निर्भर करती है। ज्यादा iron लेना भी नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। निष्कर्ष महिलाओं में anemia होना काफी हद तक biological कारणों से जुड़ा है, जैसे menstruation और pregnancy, लेकिन diet और lifestyle में सही बदलाव करके इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। अगर थकान, कमजोरी या पीलापन जैसे symptoms लगातार
