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“कोई भी Judiciary को धमका नहीं सकता”: सुप्रीम कोर्ट मार्च पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

कोई भी Judiciary को धमका नहीं सकता”: सुप्रीम कोर्ट मार्च पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट तक विपक्ष के मार्च को लेकर मुख्य Judiciary सूर्यकांत ने गुरुवार को सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता।” यह टिप्पणी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुवाई में 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च के संदर्भ में आई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालतें “आइवरी टावर” में नहीं बैठी हैं और न्यायपालिका जमीनी हकीकत से अनजान नहीं है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि प्रदर्शन या राजनीतिक दबाव के जरिए Judiciary को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। क्या है पूरा मामला? 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था। विपक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने आरोप लगाया कि कोर्ट परिसर की ओर मार्च और प्रदर्शन का उद्देश्य न्यायपालिका पर दबाव बनाना था। इस पर CJI ने कहा कि ऐसे प्रयास “कमजोर” हैं और अदालत इनसे प्रभावित नहीं होती। ये भी पढ़ें:Ankita Bhandari के माता-पिता इंडिया गेट पर हिरासत में लिए गए; मां बोलीं- “भूख हड़ताल पर बैठेंगे” सुप्रीम कोर्ट का एक्शन सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से उनके आचरण और मार्च के इरादे पर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित अन्य नेताओं को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा, कोर्ट परिसर के आसपास प्रदर्शन और जुलूसों को नियंत्रित करने से जुड़ी याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया है। SIR याचिका पर निर्वाचन आयोग को नोटिस अलग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और अन्य INDIA गठबंधन नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं ने SIR से जुड़े फैसलों पर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती दी है।

CJP Protest: ममता बनर्जी समेत TMC नेता हिरासत में, जंतर-मंतर कूच से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा

CJP Protest: ममता बनर्जी समेत TMC नेता हिरासत में,

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन से पहले शनिवार को दिल्ली में कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें TMC प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के कुछ अन्य नेता भी शामिल हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था। ममता बनर्जी की हिरासत कैसे हुई रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू इलाके में उनके दिल्ली आवास के बाहर से हिरासत में लिया गया। TMC नेता साकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी और पांच अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस और CRPF ने एक कैदी वैन में हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स में डोला सेन और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य TMC नेताओं के भी हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। हिरासत के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि लड़ाई जारी रहेगी। CJP के शीर्ष नेताओं को भी हिरासत में लिया गया ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद CJP ने घोषणा की कि संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। बताया गया है कि दिपके ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते पहले से एक वीडियो रिकॉर्ड कर रखा था। द फेडरल की रिपोर्ट में ध्रुव राठी के भी हिरासत में लिए जाने का ज़िक्र है। धरने पर बैठीं और विरोध प्रदर्शन कर रहीं ममता बनर्जी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है ​#MamataBanerjee #DelhiPolice #JantarMantar #TMC #ElectionCommission #BreakingNews https://t.co/X2dpMMhEo6 — News26india (@news26indias) October 10, 2026 दिल्ली में भारी सुरक्षा द फेडरल के मुताबिक, प्रदर्शन के मद्देनज़र दिल्ली में करीब 25,000 पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए। आउटलुक की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था की “गंभीर” चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, और करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वकीलों की हिरासत पर विवाद रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे कुछ वकीलों को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इसकी निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। आउटलुक की लाइव अपडेट्स में बताया गया है कि वकीलों की रिहाई के लिए CJI ने दखल दिया। विपक्ष की प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर “ब्लैक इमरजेंसी” लगाने का आरोप लगाया। पार्टी विधायक गोपाल राय ने दावा किया कि मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और ट्रेनें रद्द की गईं। इन आरोपों पर सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से हमें कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। महत्वपूर्ण बातें CJP का “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आयोजित था ममता बनर्जी और TMC के कुछ नेता रिपोर्ट्स के मुताबिक हिरासत में लिए गए CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका भी हिरासत में लिए गए दिल्ली में करीब 25,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी SCBA ने वकीलों की हिरासत की निंदा की आगे क्या होगा हिरासत में लिए गए नेताओं पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर हमें दिल्ली पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं मिला है। CJP ने कहा है कि अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी रहेगा। स्थिति साफ होने पर खबर अपडेट की जाएगी।

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग, CM योगी को लिखा गया पत्र

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग, CM योगी को लिखा गया पत्र

मथुरा/वृंदावन: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज सुरक्षा को लेकर एक बड़ी मांग सामने आई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ श्रेणी की सुरक्षा देने की मांग की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में इस संबंध में मुख्यमंत्री को दो पत्र भेजे जा चुके हैं।  प्रेमानंद महाराज सुरक्षा मांग की वजह क्या बताई गई पत्र में दावा किया गया है कि केलिकुंज आश्रम के भीतर दो गुटों के बीच विवाद है, और इस गुटबाजी से महाराज जी को खतरा हो सकता है। फलाहारी ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, आश्रम के सेवादारों के पुलिस वेरिफिकेशन और लगाए गए आरोपों की जांच की भी मांग की है। शिष्य की मौत का मामला यह मांग आश्रम से जुड़ी एक दुखद घटना के बाद सामने आई है। 25 सितंबर 2026 को महाराज जी के शिष्य दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण), उम्र 25 वर्ष, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार वे गुरु कृपा कुंज (वराह घाट के पास स्थित भवन, जहां प्रेमानंद के शिष्य रहते हैं) की चौथी मंजिल से गिर गए थे। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अब तक तीन दर्जन से ज़्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है, हालांकि किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। मृतक के परिवार ने आश्रम प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के भाई और जीजा का आरोप है कि आश्रम ने उन्हें घटना की सही जानकारी नहीं दी और CCTV फुटेज भी उपलब्ध नहीं कराई। आश्रम ट्रस्ट की ओर से जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही गई है। लापता शिष्यों का मामला एक रिपोर्ट के अनुसार आश्रम से जुड़े कुछ और साधकों के लापता होने के भी आरोप लगे हैं। हालांकि इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जुलाई से लापता बताया जा रहा एक 17 वर्षीय शिष्य हाल ही में बरसाना के एक अन्य आश्रम में मिल गया है। बाकी लापता बताए गए लोगों को लेकर अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन दावों को सावधानी से लिया जाना चाहिए। प्रशासन का रुख सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और आश्रम से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से Z+ सुरक्षा देने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर आप या आपके किसी परिचित को मानसिक तनाव या निराशा महसूस हो रही है, तो Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है। ये भी पढ़ें:OpenAI के सेफ्टी कर्मचारी का इस्तीफा, कहा- ‘ट्रायल एंड एरर का समय अब खत्म हो चुका है’ FAQs Q1. प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग किसने की? श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने यह मांग CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर की है। Q2. यह मांग क्यों उठी? पत्र में आश्रम के भीतर दो गुटों के विवाद और शिष्य की संदिग्ध मौत के बाद महाराज जी को खतरे की आशंका जताई गई है। Q3. दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण) की मौत कैसे हुई? एक रिपोर्ट के अनुसार 25 सितंबर को वे गुरु कृपा कुंज भवन की चौथी मंजिल से गिर गए थे। मामला संदिग्ध है और पुलिस जांच कर रही है। Q4. क्या आश्रम से कोई शिष्य लापता हुआ है? कुछ आरोप लगे हैं, लेकिन इनमें से एक मामले में जुलाई से लापता बताए गए शिष्य के बरसाना में मिलने की बात सामने आई है। बाकी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Q5. क्या प्रेमानंद महाराज को Z+ सुरक्षा मिल गई है? नहीं, अभी तक प्रशासन की ओर से इस पर कोई औपचारिक फैसला नहीं आया है।

Voter List विवाद के बीच ECI का बड़ा कदम, ECINet Software की होगी Review

ECI Voter Roll Software Review: Voter List विवाद के बीच बड़ा कदम

ECI Voter Roll Software Review: Voter List विवाद के बीच बड़ा कदम 26 सितंबर 2026 को हुई Election Commission of India (ECI) की पूर्ण बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें सबसे चर्चित रहा ECINet सॉफ्टवेयर की समीक्षा का आदेश। यह फैसला ऐसे समय आया है जब वोटर लिस्ट में हो रहे बदलावों और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच को लेकर पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक बहस चल रही है। नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में आयोग ने घोषणा की कि एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति, जिसमें किसी IIT/IIIT से एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा, ECINet सिस्टम की समीक्षा करेगी और यह जांचेगी कि सिस्टम संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप है या नहीं। यह घोषणा Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें The Indian Express की एक जांच रिपोर्ट के बाद आयोग के तीन सदस्यों में से दो सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा उठाई गई कथित आपत्तियों की चर्चा सामने आई थी। वोटर लिस्ट की सटीकता का सीधा संबंध लोगों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है, इसलिए यह मुद्दा आम नागरिकों के लिए भी अहम है। ECI ने ECINet Software की Review का आदेश क्यों दिया? ECINet चुनाव आयोग का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो वोटर लिस्ट प्रबंधन, फॉर्म प्रोसेसिंग और फील्ड अधिकारियों के कामकाज से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से संचालित करता है। आयोग ने अपने आधिकारिक प्रेस नोट में कहा है कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार ECINet तक role-based access प्राप्त है। हालांकि, हाल की रिपोर्टिंग में सिस्टम की पहुंच, अधिकारों और कुछ प्रक्रियागत बदलावों को लेकर सवाल उठे थे। इसी के मद्देनज़र आयोग ने तय किया कि एक स्वतंत्र, तकनीकी रूप से सक्षम समिति सिस्टम की compliance जांचेगी। यह जरूरी है कि इस कदम को सॉफ्टवेयर में किसी गड़बड़ी की स्वीकारोक्ति के तौर पर न देखा जाए आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह एक “double-check” प्रक्रिया है। ECINet क्या है? ECINet चुनाव आयोग का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे जनवरी 2026 में लॉन्च किया गया था। यह 40 से ज्यादा ऐप्स और वेब सेवाओं को एक साथ जोड़ता है और नागरिकों, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों को एक ही मंच पर लाता है। यह प्लेटफॉर्म पुराने ERONet सिस्टम का उत्तराधिकारी है और वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं  जैसे नाम जोड़ना, हटाना, फॉर्म भरना को डिजिटल तरीके से संभालता है। आयोग के मुताबिक, अलग-अलग स्तर के फील्ड अधिकारियों — जैसे BLO, ERO, AERO — को उनके पद और वैधानिक अधिकार के अनुसार ही सिस्टम में एक्सेस मिलता है। Review Committee में कौन-कौन शामिल होंगे? आयोग के आधिकारिक फैसले के मुताबिक: समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (Senior Deputy Election Commissioner) करेंगे समिति में किसी IIT या IIIT से एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे समिति का उद्देश्य यह जांचना है कि ECINet संबंधित अधिनियमों और नियमों के अनुरूप है समिति अपनी रिपोर्ट पूर्ण आयोग को सौंपेगी फील्ड अधिकारियों को जो भी अतिरिक्त flexibility चाहिए होगी, उसे रिपोर्ट के आधार पर operational बनाया जाएगा आयोग ने यह भी कहा है कि आगे से कोई भी नया IT मॉड्यूल या पोर्टल पहल पहले अधिकारियों की एक समिति (Committee of Officers) से गुजरेगी, उसके बाद ही आयोग की अंतिम मंजूरी के लिए रखी जाएगी समिति के व्यक्तिगत सदस्यों के नाम फिलहाल आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं। Voter List में Changes को लेकर विवाद क्या है? यह विवाद मुख्य रूप से The Indian Express में प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि आयोग के तीन सदस्यों में से दो संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें Form 6 में बदलाव, वोटर डेटाबेस तक केंद्रीकृत पहुंच, और नाम हटाने-जोड़ने से जुड़े कुछ फैसले शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को भी पत्र लिखा था, जिसमें ECINet और इलेक्टोरल रोल डेटाबेस के केंद्रीकरण से जुड़ी चिंताएं जताई गई थीं। दो Election Commissioners की आपत्तियों की रिपोर्ट में क्या कहा गया? Indian Express की रिपोर्ट (प्रकाशित 23 सितंबर) के मुताबिक, संधू और जोशी ने ECINet पर ऑनलाइन Form 6 प्रक्रिया में हुए बदलावों पर सवाल उठाए थे। जुलाई 2026 में इस फॉर्म में एक नया घोषणा-खंड (Part J और Part K के बीच) जोड़ा गया, जिसमें आवेदकों को यह बताना था कि उनका, उनके माता-पिता का या दादा-दादी का नाम पिछले SIR के इलेक्टोरल रोल में शामिल था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक संधू ने इस बदलाव को “अनधिकृत और अवैध” बताया था, जबकि जोशी ने मई 2026 में ही यह चेतावनी दी थी कि केंद्र सरकार द्वारा Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन किए बिना Form 6 में बदलाव नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में गोवा का एक उदाहरण भी दिया गया, जहां 97 वोटरों ने ड्राफ्ट रोल से अपना नाम हटाए जाने को सफलतापूर्वक चुनौती दी थी, लेकिन कथित तौर पर सॉफ्टवेयर सिस्टम की वजह से उनके नाम अंतिम इलेक्टोरल रोल में शामिल नहीं हो पाए। यह जरूरी है कि इसे एक रिपोर्ट किए गए मामले के तौर पर देखा जाए, न कि किसी अदालत या आयोग द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में। ECI ने इन रिपोर्ट्स पर क्या कहा? अपने 26 सितंबर के आधिकारिक प्रेस नोट (ECI/PN/120/2026) में आयोग ने कहा कि: SIR से जुड़े सभी बड़े फैसले जिसमें 24 जून 2025 का SIR आदेश भी शामिल है  पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किया गया SIR शेड्यूल भी सर्वसम्मति से मंजूर हुआ था कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीतिगत विषय से जुड़ा नहीं था, बल्कि ECI में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के काम से जुड़ा था फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुसार role-based access मिलता है आयोग ने अब ECINet की स्वतंत्र समीक्षा का आदेश दिया है आयोग

Election Commission Row LIVE: CEC को हटाने की मांग पर प्रदर्शन के दौरान गौरव गोगोई हिरासत में लिए गए

CEC गोपनीय हटाओ प्रदर्शन: Gaurav Gogoi गुवाहाटी में हिरासत में लिए गए

New Delhi: असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को शुक्रवार को पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान हिरासत में ले लिया गया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। क्या हुआ Gaurav Gogoi  के साथ असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी मुख्यालय राजीव भवन से एक मार्च निकाला था, जिसका मकसद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक पहुंचना और वहां CEC का पुतला फूंकना था। पुलिस ने राजीव भवन के पास बैरिकेड लगा रखे थे। जब गोगोई समेत प्रदर्शनकारी नेताओं ने इन बैरिकेड को पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह प्रदर्शन क्यों हो रहा है रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रदर्शन एक हालिया investigative मीडिया रिपोर्ट के बाद आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), वोटर डेटा और नए वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर आंतरिक कामकाज और असहमति की बात सामने आई थी। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती रही है और CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करती रही है। ये भी पढ़ें:SIR विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ PIL, दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर उठे सवाल महत्वपूर्ण बातें गुवाहाटी में शुक्रवार को CEC हटाओ मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन हुआ गौरव गोगोई के साथ AICC सचिव मनोज चौहान, सेवा दल अध्यक्ष दीप बायन और APCC महासचिव को भी हिरासत में लिया गया प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर CEC का पुतला फूंकने वाले थे बैरिकेड पार करने की कोशिश के बाद पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया यह असम में कांग्रेस के व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है आधिकारिक बयान कांग्रेस प्रवक्ता बेदब्रत बोरा ने आरोप लगाया कि नेताओं को “जबरन गिरफ्तार” किया गया और कहा, “यह लोकतंत्र के लिए एक और खतरा है।” चुनाव आयोग की ओर से प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए विशिष्ट आरोपों पर अभी तक कोई तत्काल आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि आयोग पहले यह स्पष्ट कर चुका है कि उसकी कार्यवाहियां स्थापित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत संचालित होती हैं। Background कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठाती रही है, खासकर SIR प्रक्रिया और वोटर लिस्ट संशोधन को लेकर। हाल ही में असम कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर गौरव गोगोई ने पार्टी को 2026 असम विधानसभा चुनाव में नेतृत्व दिया था, जिसमें कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही और सीटें गंवा बैठी। गोगोई खुद जोरहाट विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। आगे क्या होगा फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हिरासत में लिए गए नेताओं पर कोई औपचारिक कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी का चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

SIR विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ PIL, दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर उठे सवाल

SIR विवाद, CEC ज्ञानेश

देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision यानी SIR) को लेकर पहले से चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान लिए गए कुछ फैसलों को चुनौती दी गई है। यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की है। याचिका का आधार द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को बताया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े कुछ निर्णयों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें चुनाव आयोग के आंतरिक निर्णय-प्रक्रिया, मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्था के रूप में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं और इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। क्या है पूरा मामला? चुनाव आयोग ने देशभर के मतदाता रोल का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया था, जिसका मकसद मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध करना बताया गया। इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए और नए आवेदन जोड़े गए, जिसे लेकर विभिन्न राज्यों में विपक्षी दल पहले से सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दावा किया गया कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लगभग 10 महीनों की अवधि में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां या असहमति दर्ज कराई, जिनमें एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज कराने का भी दावा शामिल है। इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई और कुछ ही दिनों में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दाखिल इस PIL में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। यह स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है कि याचिका दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने इसमें लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया है या किसी को दोषी ठहराया है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। याचिका पर सुनवाई की तारीख और अदालत का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। इसके अलावा एक अन्य घटनाक्रम में, अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र लिखकर CEC के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति मांगी है। यह अलग प्रक्रिया है और इसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL के समान नहीं समझा जाना चाहिए। याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं? याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ फैसले “चुनाव आयोग” के नाम पर लिए गए, लेकिन इनमें अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में निम्नलिखित प्रमुख आरोप शामिल हैं: याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में बदलाव, इलेक्टोरल-रोल डेटाबेस के केंद्रीकरण, ECINet प्रणाली के जरिए योग्य मतदाताओं को बहाल न किए जाने और पश्चिम बंगाल में लगभग 16.1 लाख अपीलें दाखिल किए जाने जैसे मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। याचिका में कहा गया है कि मई 2026 में Form 6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त जोशी ने आपत्ति जताई थी और तर्क दिया था कि सांविधिक फॉर्म में बदलाव बिना संबंधित नियमों में संशोधन के नहीं किया जा सकता, जिससे संधू ने भी सहमति जताई थी। याचिका का आरोप है कि इसके बावजूद ECINet पोर्टल पर फॉर्म में बदलाव कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि CEC द्वारा लिए गए कुछ निर्णय, दिशानिर्देश और सॉफ्टवेयर में बदलाव बहुमत की राय के विपरीत लिए गए, जो चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का उल्लंघन बताया गया है, जिसमें असहमति की स्थिति में बहुमत की राय से निर्णय लेने का प्रावधान है। यह सभी बिंदु याचिकाकर्ता के दावे हैं, जिनकी जांच और सत्यापन अदालत में होना बाकी है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई? याचिका में निम्नलिखित प्रमुख राहतें मांगी गई हैं: CEC द्वारा बिना पूर्ण आयोग की सहमति के लिए गए फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और शून्य (void ab initio) घोषित करने की मांग SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नामों के कथित रूप से हटाए जाने की स्वतंत्र जांच के लिए रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग, जिसमें साइबर सुरक्षा और IT विशेषज्ञों को भी शामिल करने की बात कही गई है मूल सांविधिक Form 6 (रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत निर्धारित) को बहाल करने और पात्र वयस्कों को मौजूदा कानून के अनुसार मतदाता के रूप में पंजीकरण की अनुमति देने की मांग जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत CEC ज्ञानेश कुमार, उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, आयोग की IT प्रमुख सीमा खन्ना और अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने की मांग याचिका में यह भी कहा गया है कि CEC की कथित भूमिका उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दायरे से बाहर है, इसलिए उन्हें कानूनी संरक्षण (immunity) का लाभ नहीं मिलना चाहिए ये सभी मांगें याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई हैं और इन पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को लेना है। ECI का क्या कहना है? यह खंड समझना बेहद जरूरी है। चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लिखित नोट, अवलोकन, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-परख आयोग के भीतर सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग का कहना है कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून के अनुसार हुई हैं और निर्णय-प्रक्रिया के दौरान विचारों में भिन्नता होना सामान्य बात है। ETV Bharat रिपोर्ट्स के अनुसार, ECI अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े आदेश,

यूपी चुनाव से पहले ताजा सर्वे: अवध-बुंदेलखंड की 137 सीटों में BJP गठबंधन को बढ़त, जानें आंकड़े

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New Delhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अवध और बुंदेलखंड की 137 विधानसभा सीटों को लेकर एक नया सर्वे सामने आया है। News Leader और Matrize के सर्वे के मुताबिक, इन दोनों क्षेत्रों में BJP गठबंधन को कुल 94 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं सपा गठबंधन के खाते में 42 सीटें और बसपा के खाते में एक सीट जाने का अनुमान जताया गया है। यह सर्वे उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से फिलहाल अवध और बुंदेलखंड की 137 सीटों के अनुमान सामने रखता है। इन आंकड़ों को चुनाव परिणाम नहीं, बल्कि सर्वे का अनुमान माना जाना चाहिए। UP Election 2027 अवध की 118 सीटों का क्या अनुमान है? सर्वे के अनुसार, अवध क्षेत्र की 118 विधानसभा सीटों में BJP गठबंधन को 77 सीटें मिलने का अनुमान है। सपा गठबंधन को 40 सीटें, जबकि 1 सीट बसपा के खाते में जाने की संभावना जताई गई है। अवध के आंकड़ों में कुछ प्रमुख जिलों की सीटों को लेकर भी अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ की सभी 9 विधानसभा सीटों पर BJP गठबंधन को बढ़त का अनुमान है। वहीं रायबरेली की 6 सीटों में BJP गठबंधन को 1 और सपा गठबंधन को 5 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। लखीमपुर खीरी में 8 सीटों में से 6 पर BJP गठबंधन और 2 पर सपा गठबंधन का अनुमान है। सीतापुर की 9 सीटों में BJP गठबंधन को 6 और सपा गठबंधन को 3 सीटें मिलने की संभावना रिपोर्ट में बताई गई है। बुंदेलखंड की 19 सीटों पर क्या कहता है सर्वे? बुंदेलखंड की कुल 19 विधानसभा सीटों के लिए सर्वे में BJP गठबंधन को 17 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं सपा गठबंधन को 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चित्रकूट की दो विधानसभा सीटों में BJP गठबंधन और सपा गठबंधन को एक-एक सीट मिलने का अनुमान है। वहीं झांसी की चारों विधानसभा सीटों पर BJP गठबंधन को बढ़त का अनुमान लगाया गया है। 137 सीटों का पूरा गणित सर्वे में अब तक सामने आए अवध और बुंदेलखंड के आंकड़ों को जोड़ने पर तस्वीर इस तरह है: कुल सीटें: 137 BJP गठबंधन: 94 सपा गठबंधन: 42 बसपा: 1 ये आंकड़े News Leader-Matrize सर्वे के अनुमान हैं और वास्तविक चुनाव परिणाम नहीं हैं। ये भी पढ़ें:UP Election 2027: यूपी चुनाव में योगी का साथ देंगे नीतीश कुमार! बेटे निशांत के वाराणसी दौरे से JDU की 60 सीटों पर बड़ी तैयारी किन इलाकों में क्या अनुमान? रिपोर्ट में बहराइच, हरदोई, उन्नाव, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रायबरेली, चित्रकूट और झांसी समेत कई जिलों के सीटवार अनुमान भी दिए गए हैं। बहराइच की 7 सीटों में BJP को 5 और सपा गठबंधन को 2 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है। हरदोई की 8 और उन्नाव की 6 सीटों पर BJP गठबंधन को बढ़त का अनुमान लगाया गया है। सर्वे के आंकड़ों को कैसे समझें? यह ध्यान रखना जरूरी है कि विधानसभा चुनाव अभी हुए नहीं हैं और सर्वे के अनुमान समय के साथ बदल सकते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में News Leader-Matrize सर्वे के sample size, सर्वेक्षण की पूरी methodology और fieldwork period का विवरण स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आंकड़ों की व्याख्या करते समय इसे एक सर्वेक्षण अनुमान के तौर पर ही देखना उचित है। इसके अलावा, 137 सीटों के आंकड़े उत्तर प्रदेश की पूरी 403 सीटों की चुनावी तस्वीर नहीं हैं। बाकी सीटों को लेकर अलग अनुमान सामने आने पर राज्य की व्यापक तस्वीर अलग हो सकती है। आगे क्या? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में और सर्वे तथा क्षेत्रवार अनुमान सामने आ सकते हैं। अंतिम चुनावी नतीजे मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होंगे। फैक्ट-चेक नोट: उपलब्ध स्रोतों में अवध की 118 सीटों के लिए 77 BJP गठबंधन, 40 सपा गठबंधन और 1 बसपा का विवरण दिया गया है। बुंदेलखंड की 19 सीटों में 17 BJP गठबंधन और 2 सपा गठबंधन के अनुमान हैं। इस तरह कुल 137 सीटों का योग पूरा होता है।

Akhilesh Yadav का BJP पर हमला: “अयोध्या के विकास के नाम पर गरीबों के घर तोड़े गए”

Akhilesh Yadav का BJP पर हमला: अयोध्या ध्वस्तीकरण विवाद

New Delhi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने अयोध्या में मकानों पर हुई कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर गरीब परिवारों के घर उजाड़े जा रहे हैं, और प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही। अयोध्या के 14-कोसी परिक्रमा मार्ग से जुड़े हालिया ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल उठाए हैं। अयोध्या में कार्रवाई पर क्या बोले Akhilesh Yadav Akhilesh Yadav ने कहा कि समाजवादी पार्टी अयोध्या के विकास के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक, राम और अयोध्या के विकास में पार्टी कभी बाधा नहीं बनेगी, और मौका मिलने पर अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने भाजपा नेताओं के उन पुराने दावों को भी याद दिलाया, जिनमें अयोध्या को वेटिकन सिटी जैसे अन्य धार्मिक स्थलों से भी बड़े पैमाने पर विकसित करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “लेकिन अब जो हम देख रहे हैं, वह यह है कि गरीब लोगों को बड़े पैमाने पर उजाड़ा जा रहा है। उनकी आजीविका छीनी जा रही है, और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार भले ही ध्वस्तीकरण को लेकर अपना पक्ष रख सकती है, लेकिन प्रशासन को प्रभावित परिवारों के प्रति ज़्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला: आरोप Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि कुछ परिवारों को अपने सामान को सुरक्षित निकालने तक का पर्याप्त मौका नहीं मिला, इससे पहले कि उनके घरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा, “उनकी पूंजी उनके घरों में लगी होती है। कम से कम उन्हें अपने घरों से सामान निकालने का मौका तो मिलना चाहिए था।” हालांकि, अयोध्या जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि 14-कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार से जुड़ी कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को नोटिस दिए गए थे। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने कार्रवाई और पुनर्वास को लेकर शिकायतें उठाई हैं। यह भी पढ़ें:Menopause के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव, कब लें डॉक्टर की सलाह “नुकसान की भरपाई की जाएगी”: Akhilesh Yadav का वादा सपा प्रमुख ने बुलडोज़र कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को लेकर कहा कि जिन लोगों के घर और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उन्हें उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अगर मौजूदा सरकार प्रभावित लोगों की मदद नहीं करती, तो समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ऐसे परिवारों के नुकसान की भरपाई की जाएगी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान एक्सप्रेस-वे निर्माण से जुड़े विस्थापन का उदाहरण भी दिया, कहा कि उस समय प्रभावित गांवों को दूसरी जगह बसाने और लोगों को मुआवज़ा देने पर विशेष ध्यान दिया गया था। चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना Akhilesh Yadav ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक हालिया इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट को कमतर आंकते हुए कहा कि आयोग के सभी फैसले, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। सपा वोटरों के “व्यवस्थित रूप से हटाए जाने” का आरोप Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि सपा के वोटरों को मतदाता सूची से “व्यवस्थित रूप से हटाया गया” है, और उत्तर प्रदेश भाजपा पर “बुलडोज़र राज” चलाने तथा संविधान को कमज़ोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सरकार मनमाने ढंग से काम कर रही है। यह हर व्यवस्था को तोड़ रही है। जो लोग विध्वंस और तबाही में विश्वास रखते हैं  चाहे वह कानून हो या संविधान उन्हें किसी की परवाह नहीं है। यह सरकार हर किसी की गरिमा और आत्म-सम्मान को रौंद रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी ने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया, लेकिन भाजपा पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने का आरोप लगाया। SIR और वोटर लिस्ट को लेकर गहरी चिंता Akhilesh Yadav ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, और उत्तर प्रदेश में फॉर्म-7 के इस्तेमाल तथा कुछ जगहों पर एक ही पते से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात कही। पश्चिम बंगाल में भी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है  चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 38.20 लाख अपीलों में से करीब 1.02 लाख का ही अब तक निपटारा किया गया है, और यह पूरी प्रक्रिया अभी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। बुलडोज़र कार्रवाई पर व्यापक चिंता Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि आम लोगों की बड़ी पूंजी उनके घर और ज़मीन में लगी होती है। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले नियम, नोटिस और प्रभावित परिवारों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, न कि सीधे विध्वंस की कार्रवाई कर दी जाए। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Akhilesh Yadav ने अयोध्या में किस कार्रवाई पर सवाल उठाए? 14-कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार से जुड़े ध्वस्तीकरण अभियान पर, जिसमें गरीब परिवारों के घर तोड़े गए। Q2: Akhilesh Yadav ने प्रभावित परिवारों के लिए क्या वादा किया? कि सपा सरकार बनने पर उचित मुआवज़े के साथ प्रभावित परिवारों के नुकसान की भरपाई की जाएगी। Q3: चुनाव आयोग को लेकर Akhilesh Yadav का मुख्य आरोप क्या है? कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की है। Q4: चुनाव आयोग ने इस आरोप पर क्या सफाई दी? कि सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। Q5: पश्चिम बंगाल SIR मामले की मौजूदा स्थिति क्या है? 38.20 लाख अपीलों में से करीब 1.02 लाख का निपटारा हुआ है, बाकी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

Maulana Rashidi का बड़ा बयान: ‘मुस्लिम सीएम’ के ऐलान पर सपा को नहीं मिलेगा एक भी वोट

Maulana Rashidi का बड़ा बयान: 'मुस्लिम सीएम' के ऐलान पर सपा को नहीं मिलेगा एक भी वोट

New Delhi: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। Maulana Rashidi का मुख्य दावा Maulana Rashidiने कहा कि अगर राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करते हैं, तो समाजवादी पार्टी को एक भी वोट नहीं मिलेगा और मुस्लिम वोट कांग्रेस की ओर चले जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमानों को सिर्फ भाजपा को हराने के लिए वोट नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने मुद्दों और हितों को ध्यान में रखकर मतदान करना चाहिए। सपा और कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप रशीदी ने सपा और कांग्रेस, दोनों पर मुस्लिम वोट लेने के बावजूद समुदाय के लिए पर्याप्त काम न करने का आरोप लगाया। उन्होंने अखिलेश यादव पर भी सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मुसलमानों को भाजपा का एजेंट बताना गलत और अनुचित है। ओवैसी से भी की एक मांग Maulana Rashidi ने असदुद्दीन ओवैसी से भी मुस्लिम मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करने की मांग की। उनका कहना था कि 2027 के चुनाव में मुसलमानों को सोच-समझकर मतदान करना चाहिए और अपने अधिकारों की बात खुलकर उठानी चाहिए, न कि किसी एक पार्टी के प्रति अंधसमर्थन दिखाना चाहिए। यह भी पढ़ें:Doctor से Rockstar तक: ‘धूम पिचक धूम’ फेम Palash Sen की अनोखी कहानी धार्मिक कार्यक्रमों पर भी दी प्रतिक्रिया बयान के दौरान रशीदी ने धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भी अपनी राय रखी, कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा वाले कार्यक्रमों में मुसलमानों के शामिल होने की मनाही है। उन्होंने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के एक कथित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, और भाजपा नेतृत्व से ऐसे बयानों पर कार्रवाई करने की मांग रखी। 2027 चुनाव से पहले बढ़ती सियासी सरगर्मी यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख दल मुस्लिम वोट बैंक को साधने की रणनीति बनाने में जुटे हैं। रशीदी का यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले महीनों में मुस्लिम नेतृत्व और प्रतिनिधित्व का मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में रह सकता है। राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया अभी बाकी फिलहाल रशीदी के इन बयानों पर कांग्रेस, सपा या AIMIM की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इन दलों की प्रतिक्रिया इस पूरे मुद्दे को और तूल दे सकती है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Maulana Rashidi ने मुख्य रूप से क्या दावा किया? कि अगर राहुल गांधी UP में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करते हैं, तो सपा को एक भी मुस्लिम वोट नहीं मिलेगा। Q2: Maulana Rashidi कौन हैं? ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष। Q3: उन्होंने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाया? कि वे मुसलमानों को भाजपा का एजेंट बताते हैं, जो गलत है। Q4: उन्होंने ओवैसी से क्या मांग की? मुस्लिम मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करने की। Q5: क्या किसी राजनीतिक दल ने इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है? अभी तक कांग्रेस, सपा या AIMIM की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Delhi Bus Strike: एयरपोर्ट पहुंचना हुआ मुश्किल, Metro ने बढ़ाई 20 अतिरिक्त ट्रिप्स

Delhi DTC Bus Strike: Airport Access प्रभावित, Metro Active

New Delhi: दिल्ली में DTC बस चालकों की हड़ताल शुक्रवार को अपने चौथे दिन में प्रवेश कर गई, जिससे शहर में सार्वजनिक परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है  खासकर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए अपने नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त ट्रिप्स जोड़ी हैं। हड़ताल की वजह क्या है यह हड़ताल मुख्य रूप से नई इलेक्ट्रिक बसों के चालकों द्वारा शुरू की गई है, जो दैनिक मज़दूरी में बढ़ोतरी, मेडिकल सुविधाएं और ओवरटाइम भुगतान की मांग कर रहे हैं। मौजूदा समय में इन चालकों और कंडक्टरों को दिल्ली सरकार द्वारा तय न्यूनतम मज़दूरी के तहत सिर्फ ₹862 प्रतिदिन दिया जा रहा है यह दर आमतौर पर दैनिक-वेतन मज़दूरों, फैक्ट्री कर्मचारियों और छोटी कंपनियों के कर्मचारियों पर लागू होती है, जिसे बस चालक अपने काम की प्रकृति और ज़िम्मेदारी के हिसाब से अपर्याप्त बता रहे हैं। यह भी पढ़ें:Daayra Release: Kareena Kapoor Khan और पृथ्वीराज सुकुमारन की “Daayra” थ्रिलर ने सिनेमाघरों में मचाई हलचल रोज़ाना 60 लाख यात्रियों पर असर DTC की बसें दिल्ली में रोज़ाना करीब 60 लाख यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती हैं  इसलिए जब बसें डिपो में ही खड़ी रह गईं, तो शहर का पूरा यातायात तंत्र हिल गया। सोशल मीडिया पर कई यात्रियों ने लंबी कतारों और सामान्य से कहीं ज़्यादा भीड़भाड़ की शिकायत की, कुछ ने तो हड़ताल के चलते बने ट्रैफिक जाम की तस्वीरें और वीडियो भी साझा कीं। एयरपोर्ट यात्रियों के लिए खास मुश्किल बस सेवाओं में आई इस भारी कमी का सबसे ज़्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ा है जिन्हें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचना है। बसों की कमी के चलते एयरपोर्ट रूट पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों — मेट्रो, कैब या निजी वाहनों  का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे इन विकल्पों पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। मेट्रो ने संभाला मोर्चा स्थिति को संभालने के लिए DMRC ने अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाया है। बुधवार, 16 सितंबर को आठ अतिरिक्त ट्रेनें चलाई गईं, और यही बढ़ी हुई व्यवस्था गुरुवार को भी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक जारी रही। कुल मिलाकर, नेटवर्क भर में 20 अतिरिक्त ट्रिप्स जोड़ी गई हैं ताकि पीक ऑवर्स के दौरान यात्रियों की बढ़ी हुई संख्या को संभाला जा सके। सबसे ज़्यादा भीड़ कहां रहेगी DMRC के मुताबिक, सबसे ज़्यादा दबाव राजीव चौक, कश्मीरी गेट, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और हौज़ खास जैसे इंटरचेंज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यही स्टेशन शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच यात्रियों को जोड़ने का काम करते हैं। हौज़ खास खासतौर पर येलो और मैजेंटा लाइन को जोड़ता है, जहां गुड़गांव से नोएडा जाने वाले यात्रियों का भारी दबाव रहता है। यात्रियों के लिए सलाह DMRC ने यात्रियों को दिल्ली मेट्रो सारथी ऐप के ज़रिए लाइव एडवाइज़री चेक करने, अपनी यात्रा 20-30 मिनट पहले शुरू करने, और जहां संभव हो वैकल्पिक इंटरचेंज रूट्स (जैसे राजौरी गार्डन, जनकपुरी वेस्ट, आज़ादपुर या मंडी हाउस) का इस्तेमाल करने की सलाह दी है, ताकि केंद्रीय स्टेशनों पर भीड़ का दबाव कुछ कम किया जा सके। प्लेटफॉर्म मार्शल भी बोर्डिंग को नियंत्रित करने के लिए तैनात किए गए हैं, और ज़रूरत पड़ने पर संक्षिप्त स्टेशन होल्ड भी लगाए जा सकते हैं। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: DTC बस चालक हड़ताल पर क्यों हैं? दैनिक मज़दूरी बढ़ाने, मेडिकल सुविधाओं और ओवरटाइम भुगतान की मांग को लेकर। Q2: हड़ताल से कितने यात्री प्रभावित हो रहे हैं? DTC बसें रोज़ाना करीब 60 लाख यात्रियों को सेवा देती हैं, जो अब बुरी तरह प्रभावित हैं। Q3: मेट्रो ने कितनी अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं? नेटवर्क भर में 20 अतिरिक्त ट्रिप्स, जो सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक चल रही हैं। Q4: सबसे ज़्यादा भीड़ किन स्टेशनों पर रहेगी? राजीव चौक, कश्मीरी गेट, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और हौज़ खास जैसे प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर। Q5: एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को क्या करना चाहिए? मेट्रो या कैब जैसे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करें, और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा की योजना बनाएं।