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Mirabai Chanu एशियन गेम्स सिल्वर: 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में लौटी देश की गुड न्यूज़

Mirabai Chanu एशियन गेम्स सिल्वर: 28 साल बाद इतिहास

New Delhi: भारत की स्टार वेटलिफ्टर Mirabai Chanu ने बुधवार को एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। महिलाओं की 49 kg कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने न सिर्फ अपने करियर का सबसे बड़ा इंतजार खत्म किया, बल्कि भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में 28 साल का सूखा भी खत्म किया। Mirabai Chanu एशियन गेम्स सिल्वर: उन्होंने कैसे जीता मेडल टोक्यो ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट Mirabai Chanu ने कुल 198 kg वजन उठाकर यह कामयाबी हासिल की। ​​उन्होंने स्नैच में शानदार शुरुआत की और 83, 85 और 87 kg के तीनों अटेम्प्ट सफलतापूर्वक पूरे किए, जिससे वह पहले हाफ के बाद तीसरे स्थान पर रहीं। इसके बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 111 kg का शानदार लिफ्ट किया और कुल 198 kg (87 + 111) का स्कोर बनाया, जिससे वह नॉर्थ कोरिया की री सोंग-गम के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गईं। री सोंग-गम ने 215 kg के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंडोनेशिया की लुलुक डायना ट्राई विजयाना ने 191 kg के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। कर्णम मल्लेश्वरी की बराबरी, 28 साल का इंतज़ार खत्म इस मेडल के साथ, Mirabai Chanu ने भारतीय वेटलिफ्टिंग की दिग्गज कर्णम मल्लेश्वरी की भी बराबरी कर ली है, जिन्होंने 1998 में बैंकॉक एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था  तब से भारत इस खेल में एशियन गेम्स के पोडियम का इंतज़ार कर रहा था। चानू अब मल्लेश्वरी के बाद दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर बन गई हैं जिन्होंने ओलंपिक्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप्स, कॉमनवेल्थ गेम्स के साथ-साथ एशियन गेम्स में भी पोडियम फिनिश हासिल किया है  मतलब उनका मेडल कलेक्शन अब लगभग पूरा हो गया है।   View this post on Instagram   A post shared by @News26india (@news26india) 12 साल का इंतज़ार खत्म हुआ मैच के बाद, इमोशनल चानू ने कहा, “एशियन गेम्स में मेडल जीतना एक सपने के सच होने जैसा है। मैं 2014 एशियन गेम्स से, यानी पिछले 12 सालों से इस मेडल का पीछा कर रही थी। इस मेडल के साथ अब मेरी ज़िंदगी पूरी हो गई है, और मैं बहुत हल्का महसूस कर रही हूँ। यह मेरे लिए एशियन गेम्स जैसा सपना रहा है।” इससे पहले, चानू 2014 इंचियोन गेम्स में भी पोडियम से चूक गई थीं, नौवें स्थान पर रहीं और 2018 जकार्ता गेम्स में, जबकि वह 2023 हांग्जो गेम्स में चौथे स्थान पर रहीं। भारत की मेडल टैली में बढ़ोतरी चानू के सिल्वर के साथ, आइची-नागोया 2026 एशियन गेम्स के 5वें दिन भारत की मेडल टैली और मज़बूत हो गई। उसी दिन, भारत ने शूटिंग और सॉफ्ट टेनिस में तीन ब्रॉन्ज़ मेडल भी जीते, जिससे भारत का कुल मेडल स्कोर 10 (1 गोल्ड, 4 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज़) हो गया। टूर्नामेंट में अब तक एकमात्र गोल्ड महिला क्रिकेट टीम ने जीता है, जबकि शूटिंग भारत के लिए सबसे बड़ा मेडल सोर्स बनकर उभरी है, जिसमें अब तक 7 मेडल (4 सिल्वर, 3 ब्रॉन्ज़) शामिल हैं। यह भी पढ़ें: स्क्रीन टाइम और जंक फूड बढ़ा रहे PCOS का खतरा: AIMS का बड़ा अध्ययन एक शानदार सीज़न का हिस्सा यह सिल्वर चानू के लिए एक शानदार सीज़न का हिस्सा है। इस साल की शुरुआत में, उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना लगातार तीसरा गोल्ड मेडल जीता, जहाँ उन्होंने 85 kg स्नैच और 105 kg क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 190 kg वज़न उठाया। लेकिन एशियन गेम्स, एशिया के टॉप वेटलिफ्टर्स के खिलाफ, उनके लिए हमेशा एक अलग तरह की चुनौती रही हैं। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल FAQ Q1: Mirabai Chanu ने एशियन गेम्स में किस कैटेगरी में सिल्वर जीता? महिलाओं की 49 kg वेटलिफ्टिंग कैटेगरी में, कुल 198 kg वज़न उठाकर। Q2: गोल्ड मेडल किसने जीता? नॉर्थ कोरिया की री सोंग-गम ने कुल 215 किलोग्राम वज़न उठाकर। Q3: यह मेडल भारत के लिए खास क्यों है? कर्णम मल्लेश्वरी के 1998 के सिल्वर मेडल के बाद, यह 28 साल में भारत का पहला एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग मेडल है। Q4: Mirabai Chanu ने पहले कितनी बार एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था? यह उनका तीसरा एशियन गेम्स था 2014 में नौवां, चोट के कारण 2018 में नहीं खेल पाईं, और अब 2026 में सिल्वर मेडल। Q5: इस मेडल के साथ भारत की मेडल टैली कैसी दिखती है? भारत के पास कुल 10 मेडल हैं – 1 गोल्ड, 4 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज़।

IND vs JPN T20 Match Report: बारिश से प्रभावित 5-5 ओवर के ऐतिहासिक मुकाबले में भारत ने जापान को 2 रन से हराया, अंतिम गेंद तक चला रोमांच

IND vs JPN T20: बारिश के बीच भारत ने जापान को 2 रन से हराया, जाने विवाद और रिपोर्ट

New Delhi: पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आमने-सामने उतरीं भारत और जापान की टीमों के बीच खेला गया टी20 मुकाबला उम्मीद से कहीं ज़्यादा रोमांचक साबित हुआ। सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड (जापान) में खेले गए इस ऐतिहासिक मैच में भारी बारिश के कारण मुकाबला घटाकर सिर्फ 5-5 ओवर का कर दिया गया। रोमांच से भरे इस मैच में जापान ने दुनिया की नंबर-1 टीमों में शामिल भारत को आखिरी गेंद तक कड़ी टक्कर दी। हालांकि, भारतीय टीम ने अंत में अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए महज 2 रन से जीत दर्ज की। यह मैच सिर्फ मैदान पर रन बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि एशियन गेम्स 2026 की तैयारियों और भारत-जापान के बीच 75 साल के राजनयिक संबंधों (Diplomatic Relations) के प्रतीक के रूप में भी बेहद अहम रहा। मैच का बैकग्राउंड: राजनयिक संबंध और एशियन गेम्स की तैयारियां यह मुकाबला दोनों देशों के बीच खेल और कूटनीतिक रिश्तों के लिहाज से एक नया मील का पत्थर साबित हुआ। पुरुषों के इंटरनेशनल क्रिकेट में यह पहला मौका था जब भारत और जापान का आमना-सामना हुआ। 75 Years of Diplomatic Relations: भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस स्पेशल फ्रेंडशिप सीरीज/मैच का आयोजन किया गया था। Asian Games 2026 Practice: जापान में ही आयोजित होने वाले Asian Games 2026 के पुरुष टी20 टूर्नामेंट से पहले दोनों टीमों के लिए यह मैच अपनी तैयारियों को परखने का एक बेहतरीन मौका था। बारिश का साया और टॉस का फैसला मैच शुरू होने से पहले ही सानो में लगातार बारिश होती रही, जिसके कारण आउटफील्ड गीला हो गया था। अंपायरों ने कई बार निरीक्षण (Inspection) करने के बाद ओवरों की संख्या घटाकर 5-5 ओवर करने का फैसला किया। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, इतने छोटे फॉर्मेट में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला और पावरप्ले का फायदा उठाने की कोशिश में टीम लगातार दबाव में आती गई। भारतीय बल्लेबाजी: 5 ओवर में बने सिर्फ 32 रन पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 5 ओवर में 4 विकेट खोकर केवल 32 रन ही बना सकी। छोटे फॉर्मेट और गीली पिच का फायदा जापानी गेंदबाजों ने बखूबी उठाया। श्रेयस अय्यर का संघर्ष: कप्तान श्रेयस अय्यर ने एक छोर संभाले रखा और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा 16 रन की पारी खेली। जापानी गेंदबाजों का अनुशासन: जापान के तेज गेंदबाजों और स्पिनरों ने लाइन और लेंथ पर पूरा नियंत्रण रखा। उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों को बड़े शॉट्स खेलने की गेंदें ही नहीं दीं। 5 ओवर में भारत जैसी मजबूत बैटिंग लाइन-अप को 32 रन पर रोकना जापानी क्रिकेट के लिए किसी ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं था। जापान की जवाबी पारी: भारत को लगा हार का डर 33 रन के आसान दिख रहे लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापान की टीम ने बेहद सकारात्मक शुरुआत की। जापानी ओपनर्स ने बिना किसी डर के भारतीय पेस अटैक का सामना किया। जापान की आक्रामक बल्लेबाजी के चलते एक समय ऐसा लग रहा था कि यह उभरती हुई क्रिकेट टीम भारत को हराकर दुनिया का सबसे बड़ा उलटफेर (Upset) कर देगी। हालांकि, अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने अपनी लाइन-अप में सुधार किया और मैच को आखिरी ओवर तक खींच लाए। आखिरी ओवर का हाई-ड्रामा और वाइड बॉल विवाद जापान को जीत के लिए अंतिम ओवर (Last Over) में 8 रनों की जरूरत थी। दबाव के इस पल में कप्तान श्रेयस अय्यर ने अनुभवी ऑलराउंडर अक्षर पटेल (Axar Patel) के हाथ में गेंद सौंपी। मैदान पर हुआ विवाद: अंतिम ओवर की एक महत्वपूर्ण गेंद को मैदानी अंपायर ने पहले ‘वाइड’ करार दिया, जिससे जापानी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन भारतीय कप्तान और गेंदबाज की अपील के बाद अंपायरों ने आपस में सलाह-मशविरा किया और अपना फैसला बदलते हुए उसे ‘लीगल डिलीवरी’ करार दिया। इस फैसले पर जापानी ड्रेसिंग रूम और मैदान पर थोड़ी बहस देखने को मिली, जो इस मैच का सबसे चर्चित मोड़ बन गया। अक्षर पटेल की मैच विनिंग स्पेल: इस ड्रामा के बावजूद अक्षर पटेल ने अपना आपा नहीं खोया। उन्होंने सटीक यॉर्कर और लाइन-लेंथ का इस्तेमाल करते हुए जापानी बल्लेबाजों को बाउंड्री मारने से रोके रखा। अंतिम स्कोर: जापान की टीम 5 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 30 रन ही बना सकी और भारत ने यह मुकाबला रोमांचक अंदाज में 2 रन से जीत लिया। दोनों टीमों के लिए इस मैच के मायने टीम मैच से मिली सीख / टेकअवे टीम इंडिया (India) इतने छोटे फॉर्मेट (5 overs) में दबाव को हैंडल करने और कम स्कोर वाले मैच को डिफेंड करने का अनुभव मिला। जापान (Japan) दुनिया की नंबर-1 टी20 टीम के खिलाफ आखिरी गेंद तक लड़ने से जापानी क्रिकेट टीम के आत्मविश्वास में भारी बढ़ोतरी होगी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: भारत और जापान के बीच खेले गए इस टी20 मैच का अंतिम स्कोर क्या रहा? उत्तर: भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 ओवर में 4/32 रन बनाए। जवाब में जापान की टीम 5 ओवर में 3/30 रन ही बना सकी और भारत ने 2 रन से जीत दर्ज की। Q2: यह मैच 20 ओवर की जगह 5-5 ओवर का क्यों हुआ? उत्तर: जापान के सानो क्रिकेट ग्राउंड पर हुई तेज बारिश और गीले आउटफील्ड के कारण मैच के ओवर घटाकर 5-5 कर दिए गए थे। Q3: इस मैच में भारतीय टीम के कप्तान कौन थे और उन्होंने कितना स्कोर किया? उत्तर: इस मैच में भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर ने की थी, जिन्होंने सबसे ज्यादा 16 रन बनाए। Q4: अंतिम ओवर में भारत की तरफ से किसने गेंदबाजी की और क्या विवाद हुआ? उत्तर: अंतिम ओवर में अक्षर पटेल ने गेंदबाजी की। विवाद एक गेंद को लेकर हुआ जिसे अंपायर ने पहले वाइड दिया था, लेकिन बाद में री-चेक करके उसे फेयर बॉल (Legal Delivery) करार दिया। Q5: यह मुकाबला भारत-जापान क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है? उत्तर: यह पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में भारत और जापान की पहली भिड़ंत थी। साथ ही यह मैच भारत-जापान के 75 साल के राजनयिक संबंधों

Maulana Rashidi का बड़ा बयान: ‘मुस्लिम सीएम’ के ऐलान पर सपा को नहीं मिलेगा एक भी वोट

Maulana Rashidi का बड़ा बयान: 'मुस्लिम सीएम' के ऐलान पर सपा को नहीं मिलेगा एक भी वोट

New Delhi: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। Maulana Rashidi का मुख्य दावा Maulana Rashidiने कहा कि अगर राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करते हैं, तो समाजवादी पार्टी को एक भी वोट नहीं मिलेगा और मुस्लिम वोट कांग्रेस की ओर चले जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमानों को सिर्फ भाजपा को हराने के लिए वोट नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने मुद्दों और हितों को ध्यान में रखकर मतदान करना चाहिए। सपा और कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप रशीदी ने सपा और कांग्रेस, दोनों पर मुस्लिम वोट लेने के बावजूद समुदाय के लिए पर्याप्त काम न करने का आरोप लगाया। उन्होंने अखिलेश यादव पर भी सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मुसलमानों को भाजपा का एजेंट बताना गलत और अनुचित है। ओवैसी से भी की एक मांग Maulana Rashidi ने असदुद्दीन ओवैसी से भी मुस्लिम मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करने की मांग की। उनका कहना था कि 2027 के चुनाव में मुसलमानों को सोच-समझकर मतदान करना चाहिए और अपने अधिकारों की बात खुलकर उठानी चाहिए, न कि किसी एक पार्टी के प्रति अंधसमर्थन दिखाना चाहिए। यह भी पढ़ें:Doctor से Rockstar तक: ‘धूम पिचक धूम’ फेम Palash Sen की अनोखी कहानी धार्मिक कार्यक्रमों पर भी दी प्रतिक्रिया बयान के दौरान रशीदी ने धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर भी अपनी राय रखी, कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा वाले कार्यक्रमों में मुसलमानों के शामिल होने की मनाही है। उन्होंने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के एक कथित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, और भाजपा नेतृत्व से ऐसे बयानों पर कार्रवाई करने की मांग रखी। 2027 चुनाव से पहले बढ़ती सियासी सरगर्मी यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सभी प्रमुख दल मुस्लिम वोट बैंक को साधने की रणनीति बनाने में जुटे हैं। रशीदी का यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले महीनों में मुस्लिम नेतृत्व और प्रतिनिधित्व का मुद्दा चुनावी बहस के केंद्र में रह सकता है। राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया अभी बाकी फिलहाल रशीदी के इन बयानों पर कांग्रेस, सपा या AIMIM की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इन दलों की प्रतिक्रिया इस पूरे मुद्दे को और तूल दे सकती है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Maulana Rashidi ने मुख्य रूप से क्या दावा किया? कि अगर राहुल गांधी UP में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने का ऐलान करते हैं, तो सपा को एक भी मुस्लिम वोट नहीं मिलेगा। Q2: Maulana Rashidi कौन हैं? ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष। Q3: उन्होंने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाया? कि वे मुसलमानों को भाजपा का एजेंट बताते हैं, जो गलत है। Q4: उन्होंने ओवैसी से क्या मांग की? मुस्लिम मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करने की। Q5: क्या किसी राजनीतिक दल ने इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है? अभी तक कांग्रेस, सपा या AIMIM की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Doctor से Rockstar तक: ‘धूम पिचक धूम’ फेम Palash Sen की अनोखी कहानी

Palash Sen: डॉक्टर से 'यूफोरिया' रॉकस्टार बनने की कहानी

New Delhi: 90 के दशक में जब बॉलीवुड का दबदबा था, तब Palash Sen ने इंडियन पॉप-रॉक को एक बिल्कुल नई पहचान दी। दिन में मरीज़ों का इलाज करने वाले पलाश शाम को स्टेज पर रॉकस्टार बनकर हज़ारों लोगों का मनोरंजन करते थे। वह बैंड ‘यूफोरिया’ के फाउंडर और लीड सिंगर हैं, और उनकी कहानी असल में एक Doctor के रॉकस्टार बनने की मिसाल है। ‘धूम पिचक धूम’ ने बनाया घर-घर का नाम ‘धूम पिचक धूम’, ‘माई री’, ‘महफूज’ और ‘कभी आएगा तू’ जैसे गानों ने Palash Sen को युवाओं के बीच खास पहचान दिलाई। सिंगर और कंपोज़र के साथ-साथ वह Doctor, एक्टर और डायरेक्टर के तौर पर भी काम कर चुके हैं यानी उनकी पहचान सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं रही। Doctor परिवार से निकला रॉकस्टार 23 सितंबर 1965 को लखनऊ में जन्मे पलाश का परिवार मूल रूप से वाराणसी से जुड़ा है, और उनके परिवार में कई लोग Doctor रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की और ऑर्थोपेडिक्स में एमएस किया यानी संगीत से पहले चिकित्सा ही उनकी पहचान थी, और आज भी है। कॉलेज से शुरू हुआ संगीत का सफर कॉलेज के दिनों से ही पलाश को संगीत का शौक था। 1988 में उन्होंने दोस्तों के साथ मिलकर ‘यूफोरिया’ बैंड बनाया। करीब एक दशक तक छोटे-बड़े कार्यक्रमों में परफॉर्म करने के बाद 1998 में ‘धूम पिचक धूम’ ने उन्हें रातोंरात घर-घर पहुंचा दिया। इसी नाम से यूफोरिया का पहला एल्बम भी रिलीज़ हुआ, जो बेहद लोकप्रिय साबित हुआ और भारतीय पॉप-रॉक सीन में एक नई लहर लेकर आया। यह भी पढ़ें:Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन: पीठ की अकड़न से मिल सकती है राहत, जानिए पूरा तरीका करियर का सुनहरा दौर और आगे का सफर 1998 से 2005 के बीच यूफोरिया की लोकप्रियता अपने चरम पर रही। इसके बाद पलाश ने फिल्मों में भी अभिनय किया और कई प्रोजेक्ट्स में नज़र आए। 2017 में उन्होंने शॉर्ट फिल्म ‘जिया जले’ का निर्देशन भी किया जो दिखाता है कि रचनात्मकता के मामले में उन्होंने खुद को कभी एक ही दायरे में सीमित नहीं रखा। आज भी सक्रिय हैं दोनों भूमिकाओं में Palash Sen आज भी डॉक्टर के तौर पर काम करते हैं और समय-समय पर स्टेज पर परफॉर्म करते नज़र आते हैं। संगीत की दुनिया में उनकी पहचान आज भी उस कलाकार के रूप में कायम है, जिसने हिंदी रॉक म्यूज़िक को नई आवाज़ और अलग पहचान दी एक ऐसी विरासत, जो आज भी कई युवा संगीतकारों को प्रेरित करती है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Palash Sen कौन हैं? बैंड ‘यूफोरिया’ के फाउंडर, लीड सिंगर, एक ट्रेंड ऑर्थोपेडिक डॉक्टर, और अभिनेता-निर्देशक भी। Q2: Palash Sen का जन्म कब और कहां हुआ? 23 सितंबर 1965 को लखनऊ में, हालांकि उनका परिवार मूल रूप से वाराणसी से जुड़ा है। Q3: ‘यूफोरिया’ बैंड की शुरुआत कब हुई? 1988 में, जब पलाश ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इसे बनाया। Q4: Palash Sen के मशहूर गाने कौन से हैं? ‘धूम पिचक धूम’, ‘माई री’, ‘महफूज’ और ‘कभी आएगा तू’। Q5: क्या Palash Senआज भी डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करते हैं? हां, वह आज भी डॉक्टर के तौर पर काम करते हैं, साथ ही स्टेज पर परफॉर्म भी करते रहते हैं।

Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन: पीठ की अकड़न से मिल सकती है राहत, जानिए पूरा तरीका

Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन से पीठ दर्द में राहत

New Delhi: लंबे समय तक बैठकर काम करने से पीठ, कंधों और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों में अकड़न महसूस होना आज के दौर में बेहद आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने और मांसपेशियों में खिंचाव कम करने में मदद कर सकता है। Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन क्या है आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह एक बैठकर किया जाने वाला योगासन है, जिसे सामान्य पश्चिमोत्तानासन का एक उन्नत रूप माना जाता है। इसमें दोनों पैरों को फैलाकर आगे की ओर झुका जाता है। इस दौरान हैमस्ट्रिंग के साथ-साथ अंदरूनी जांघों, ग्रोइन और पीठ की मांसपेशियों पर भी खिंचाव पड़ता है यानी यह एक साथ शरीर के कई हिस्सों को टारगेट करता है। किन लोगों के लिए है खासतौर पर फायदेमंद लगातार बैठे रहने या गलत पोस्चर के कारण अंदरूनी जांघों की मांसपेशियां टाइट हो सकती हैं। Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से इन मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या नियमित रूप से रनिंग, साइकिलिंग और जिम जैसी गतिविधियां करते हैं  क्योंकि इन गतिविधियों में भी हैमस्ट्रिंग और जांघों पर काफी दबाव पड़ता है। यह भी पढ़ें:Mark Wood टरनेशनल क्रिकेट संन्यास: इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ ने चोटों से हारकर लिया बड़ा फैसला अभ्यास करते समय किन बातों का रखें ध्यान इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर को जबरदस्ती नीचे झुकाने से बचना चाहिए। शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार ही आगे झुकें और धीरे-धीरे लचीलापन बढ़ाएं। किसी तरह का तेज दर्द महसूस होने पर तुरंत अभ्यास रोक देना चाहिए  योग में धैर्य और नियमितता ही असली फायदा दिलाती है, जल्दबाज़ी नुकसान पहुंचा सकती है। किन्हें बरतनी चाहिए विशेष सावधानी जिन लोगों को स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द है, उन्हें यह आसन करने से पहले विशेषज्ञ या योग प्रशिक्षक की सलाह लेनी चाहिए। बिना सही मार्गदर्शन के इस तरह के खिंचाव वाले आसन करना कई बार समस्या को और बढ़ा सकता है, इसलिए सावधानी बरतना ज़रूरी है। रोज़मर्रा की दिनचर्या में कैसे शामिल करें विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह आसन सुबह या शाम के समय हल्के वार्मअप के बाद नियमित रूप से किया जाए, तो यह डेस्क जॉब करने वालों के लिए एक असरदार आदत बन सकती है। इसे हफ्ते में कम से कम 3-4 बार अभ्यास में लाने से समय के साथ पीठ और हैमस्ट्रिंग की अकड़न में ध्यान देने लायक फर्क महसूस हो सकता है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Pada Prasara पश्चिमोत्तानासन किन मांसपेशियों को फायदा पहुंचाता है? हैमस्ट्रिंग, अंदरूनी जांघों, ग्रोइन और पीठ की मांसपेशियों को। Q2: यह आसन किनके लिए सबसे ज़्यादा उपयोगी है? लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों और रनिंग, साइकिलिंग, जिम जैसी गतिविधियाँ करने वालों के लिए। Q3: इस आसन को करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? शरीर को जबरदस्ती न झुकाएं, धीरे-धीरे लचीलापन बढ़ाएं, और तेज दर्द होने पर तुरंत रुक जाएं। Q4: किन्हें यह आसन करने से पहले सलाह लेनी चाहिए? जिन्हें स्लिप डिस्क, साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द है। Q5: इसे कितनी बार अभ्यास में लाना चाहिए? विशेषज्ञों के मुताबिक हफ्ते में कम से कम 3-4 बार, नियमितता के साथ। नोट: यह सामान्य जानकारी है, चिकित्सीय सलाह नहीं। किसी भी नए योगासन को शुरू करने से पहले, खासकर अगर आपको पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो कृपया विशेषज्ञ या योग प्रशिक्षक से सलाह लें।

Mark Wood टरनेशनल क्रिकेट संन्यास: इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ ने चोटों से हारकर लिया बड़ा फैसला

Mark Wood इंटरनेशनल क्रिकेट संन्यास इंग्लैंड तेज़ गेंदबाज़

New Delhi: इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ Mark Wood ने आखिरकार इंटरनेशनल क्रिकेट संन्यास का ऐलान कर दिया है। 36 वर्षीय वुड इंग्लैंड की 2019 वनडे और 2022 टी20 विश्व कप विजेता टीमों का अहम हिस्सा रहे हैं, और लगातार चोटों तथा मेडिकल सलाह के बाद उन्होंने यह मुश्किल फैसला लिया। Mark Wood इंटरनेशनल क्रिकेट संन्यास: करियर के आंकड़े वुड ने साल 2015 में लॉर्ड्स के मैदान पर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था। अपने करियर में उन्होंने 38 टेस्ट मैचों में 119 विकेट, 70 वनडे में 80 विकेट, और 38 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 54 विकेट हासिल किए यानी हर फॉर्मेट में उनका योगदान इंग्लैंड की सफलता का अहम हिस्सा रहा। चोटों से जूझते हुए लिया संन्यास का फैसला वुड ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में साफ लिखा कि पिछले एक साल को देखते हुए उनका Mark Wood इंटरनेशनल क्रिकेट संन्यास लेना शायद किसी के लिए हैरानी की बात नहीं है। उन्होंने बताया कि वह हमेशा चोटों से वापसी कर खुद को साबित करने की कोशिश करते रहे, लेकिन मेडिकल सलाह के मुताबिक अब उनके लिए टेस्ट और 50 ओवर का क्रिकेट खेलना संभव नहीं है यानी यह फैसला जज़्बे की कमी से नहीं, बल्कि शरीर की सीमाओं को स्वीकार करते हुए लिया गया।   View this post on Instagram   A post shared by Mark Wood (@mawood33) इंग्लैंड के लिए खेलना बताया सबसे बड़ा सम्मान वुड ने कहा कि इंग्लैंड के लिए खेलना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और एक सपना सच होने जैसा रहा। दुनिया भर में घूमने, शानदार लोगों से मिलने और बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ तथा उनके खिलाफ खेलने को उन्होंने अपने लिए सौभाग्य बताया। 2019 वर्ल्ड कप में निभाई अहम भूमिका वुड इंग्लैंड की 2019 विश्व कप विजेता टीम का अहम हिस्सा थे और टूर्नामेंट में उन्होंने 18 विकेट लिए थे। फाइनल में मांसपेशियों में खिंचाव के बावजूद उन्होंने पूरी रफ्तार से गेंदबाज़ी जारी रखी यह जज़्बा ही उनकी पहचान बन गया। इसके अलावा 2022 में जोस बटलर की कप्तानी में टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम में भी वह शामिल रहे। यह भी पढ़ें:Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद: चंद्रशेखरन एक्सटेंशन पर बोले “संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हो” एशेज सीरीज़ में भी दिखाया दम वुड ने चार एशेज सीरीज़ में हिस्सा लिया। 2015 में ट्रेंट ब्रिज में निर्णायक विकेट लेकर उन्होंने इंग्लैंड को एशेज जीतने में मदद की थी, वहीं 2023 में हेडिंग्ले टेस्ट में उनके शानदार स्पेल ने इंग्लैंड को सीरीज़ में वापसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। टीम मैनेजमेंट की तरफ से मिली सराहना इंग्लैंड पुरुष क्रिकेट टीम के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने वुड के करियर की खुले दिल से सराहना करते हुए कहा कि एशेज और दो विश्व कप जीत में उनकी भूमिका बेहद खास रही है। Mark Wood इंटरनेशनल क्रिकेट संन्यास के इस फैसले के साथ इंग्लैंड क्रिकेट एक ऐसे गेंदबाज़ को अलविदा कह रहा है, जिसने हमेशा अपनी रफ्तार और जज़्बे से मैदान पर छाप छोड़ी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Mark Wood ने संन्यास क्यों लिया? लगातार चोटों और मेडिकल सलाह के बाद, क्योंकि अब उनके लिए टेस्ट व वनडे क्रिकेट खेलना संभव नहीं रहा। Q2: Mark Wood का इंटरनेशनल डेब्यू कब हुआ था? 2015 में, लॉर्ड्स के मैदान पर न्यूज़ीलैंड के खिलाफ। Q3: Mark Wood  के करियर के आंकड़े क्या हैं? 38 टेस्ट में 119 विकेट, 70 वनडे में 80 विकेट, और 38 टी20 इंटरनेशनल में 54 विकेट। Q4: Mark Wood किन बड़ी जीत का हिस्सा रहे हैं? 2019 वनडे वर्ल्ड कप और 2022 टी20 वर्ल्ड कप, दोनों इंग्लैंड की विजेता टीमों में। Q5: टीम मैनेजमेंट ने उनके संन्यास पर क्या कहा? मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने एशेज और दो विश्व कप जीत में उनके योगदान की खुले दिल से सराहना की।

Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद: चंद्रशेखरन एक्सटेंशन पर बोले “संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हो”

Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद Tata Sons बोर्ड मीटिंग

New Delhi: देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने Tata Group में चल रही अंदरूनी खींचतान अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुकी है। इस Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद में अब NCP-SP प्रमुख Sharad Pawar  की सीधी एंट्री हो गई है उन्होंने X पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए साफ कहा है कि टाटा समूह का परोपकारी ढांचा भारत की धरोहर है, और Tata Trusts के अधिकारों को कमज़ोर करना देश के हित में नहीं होगा। Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद: शुरू कैसे हुआ यह पूरा मामला 17 सितंबर 2026 को हुई Tata Sons बोर्ड बैठक के बाद गहराया। बोर्ड ने N Chandrasekaran को फरवरी 2027 से अगले 5 सालों के लिए फिर से Executive Chairman बनाने का प्रस्ताव 4-1 के बहुमत से पास किया। Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने इस फैसले के खिलाफ वोट दिया, जबकि ट्रस्ट के दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर Venu Srinivasan ने समर्थन में वोट किया। यही असहमति पूरे विवाद की जड़ बनी। इसी बैठक में Tata Sons की स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रस्ताव भी पास हुआ। जमशेदजी टाटा आणि टाटा कुटुंबाने उद्योगाला समाजसेवेची मूल्याधिष्ठित दिशा दिली. त्यामुळे टाटा ट्रस्टची सामाजिक बांधिलकी आणि संस्थात्मक भूमिका जपली गेली पाहिजे. टाटा समूहाच्या नेतृत्वाबाबत निर्णय होताना संस्थात्मक प्रक्रिया आणि ट्रस्टच्या भूमिकेचा आदर होणं आवश्यक आहे. कारण… pic.twitter.com/4dNklgm8tH — Sharad Pawar (@PawarSpeaks) September 22, 2026 Articles of Association और Veto Power की जंग Tata Trusts और Noel Tata का तर्क है कि कंपनी के Articles of Association के तहत चेयरमैन के चुनाव या एक्सटेंशन के लिए ट्रस्ट द्वारा नामांकित दोनों (बहुमत) डायरेक्टर्स की सहमति ज़रूरी है। चूंकि 2 नॉमिनी में से केवल 1 ने ही समर्थन किया, इसलिए Tata Trusts इस फैसले को कानूनी रूप से अमान्य मान रहा है। पवार ने भी इसी बिंदु पर ज़ोर देते हुए कहा कि 4-1 का प्रस्ताव कानूनी रूप से वैध नहीं ठहरता, और उन्होंने Supreme Court के उस पुराने फैसले का हवाला दिया जिसमें नॉमिनी डायरेक्टर्स के विशेष सहमति अधिकार को मान्यता दी गई थी। 66% हिस्सेदारी और Listing पर मतभेद टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में लगभग 66% हिस्सेदारी Sir Ratan Tata Trust और Sir Dorabji Tata Trust समेत अन्य एलाइड ट्रस्ट्स के पास है। RBI के नियमों के मुताबिक Upper Layer NBFC होने के कारण Tata Sons पर शेयर बाजार में लिस्ट होने का दबाव है, लेकिन Tata Trusts को डर है कि लिस्टिंग के बाद पब्लिक शेयरहोल्डर्स के आने से ग्रुप पर ट्रस्ट्स का कंट्रोल और चैरिटी के लिए मिलने वाला डिविडेंड प्रभावित हो सकता है। Sharad Pawar ने क्या कहा दिग्गज नेता और पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री Sharad Pawar ने अपने बयान में टाटा समूह को महाराष्ट्र से गहरे जुड़ाव वाली एक राष्ट्रीय संस्था बताया। उन्होंने कहा कि जमशेदजी टाटा, सर दोराबजी और सर रतन टाटा की सोच थी कि बिजनेस से बनी संपत्ति समाज सेवा में जानी चाहिए यही वजह है कि Tata Sons में 66% हिस्सेदारी जानबूझकर व्यक्तिगत हाथों के बजाय परोपकारी ट्रस्ट्स को दी गई थी, ताकि कोई एक व्यक्ति इसका मालिक न बन सके। पवार ने स्पष्ट किया कि यह डिज़ाइन जानबूझकर बनाया गया था, महज़ संयोग नहीं अच्छा बिजनेस चलता है तो उसी से मिलने वाला डिविडेंड स्वास्थ्य, शिक्षा, रिसर्च और ग्रामीण आजीविका जैसे सार्वजनिक हित के कामों को फंड करता है। यह भी पढ़ें:Russia Ukraine मिसाइल हमला: कीव में ताबड़तोड़ बमबारी से 19 लोग घायल, बच्चे भी शामिल संवैधानिक प्रक्रिया की अपील पवार ने Tata Sons और Tata Trusts, दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे इस मतभेद को संवाद, तय प्रक्रिया, और Tata Group के दशकों पुराने गवर्नेंस नियमों के दायरे में ही सुलझाएं। उन्होंने कहा कि यह विवाद सिर्फ एक सामान्य बोर्डरूम असहमति नहीं, बल्कि इससे कहीं बड़ा मसला है, और नेतृत्व से जुड़े विवादों को टकराव के बजाय रचनात्मक बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए ही सुलझाया जाना चाहिए। इस विवाद का Tata Group पर क्या असर पड़ेगा साइरस मिस्त्री विवाद के बाद यह टाटा ग्रुप में मैनेजमेंट बनाम ट्रस्ट्स की अब तक की सबसे बड़ी संवैधानिक लड़ाई मानी जा रही है। 17 सितंबर की वोटिंग के बाद Tata Sons Board और Tata Trusts के बीच कानूनी रास्ता अपनाने की आशंका भी बढ़ गई है। इस बीच, टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों जैसे TCS, Tata Motors, और Tata Steel के शेयरधारक इस विवाद के जल्द से जल्द बातचीत से सुलझने का इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद में क्यों कूदे? उन्होंने Tata Trusts के परोपकारी ढांचे और गवर्नेंस अधिकारों की रक्षा को ज़रूरी बताते हुए दोनों पक्षों से संवाद के ज़रिए मसला सुलझाने की अपील की। Q2: विवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई? 17 सितंबर 2026 को Tata Sons की बोर्ड बैठक में N Chandrasekaran के 5 साल के एक्सटेंशन को 4-1 वोट से पास किए जाने के बाद। Q3: Tata Trusts के पास Tata Sons में कितनी हिस्सेदारी है? लगभग 66%, विभिन्न एलाइड ट्रस्ट्स के ज़रिए। Q4: Noel Tata ने फैसले के खिलाफ वोट क्यों दिया? उनका तर्क है कि Articles of Association के तहत दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स की सहमति ज़रूरी है, जो इस मामले में नहीं मिली। Q5: इस विवाद का निवेशकों पर क्या असर हो सकता है? TCS, Tata Motors और Tata Steel जैसी लिस्टेड कंपनियों के शेयरधारक जल्द समाधान का इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि लंबा खिंचता विवाद निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

Russia Ukraine मिसाइल हमला: कीव में ताबड़तोड़ बमबारी से 19 लोग घायल, बच्चे भी शामिल

Russia Ukraine पर 131 मिसाइल-ड्रोन हमला, 19 घायल

New Delhi: Russia-Ukraine मिसाइल हमला एक बार फिर सुर्खियों में है Russia ने Ukraine की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों पर मिसाइलों और ड्रोनों की एक बड़ी बौछार की, जिसमें कम से कम 19 लोग घायल हो गए, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला रातोंरात कीव, ज़ापोरिज्जिया और ओडेसा क्षेत्रों में एक साथ किया गया। Russia Ukraine मिसाइल हमला: कितना बड़ा था यह हमला यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, इस ताज़ा रूस यूक्रेन मिसाइल हमले के दौरान कुल 131 रूसी हवाई लक्ष्यों जिनमें बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें, ड्रोन और डिकॉय (धोखा देने वाले उपकरण) शामिल थे को नष्ट या निष्क्रिय किया गया। इतने बड़े पैमाने पर एक साथ आए हमलों ने यूक्रेन की हवाई सुरक्षा प्रणाली को एक बड़ी परीक्षा से गुज़ारा। रूस का दावा: सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी सेना ने धातु और इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट्स, सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स की फैक्ट्रियों, और ऊर्जा व परिवहन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर यूक्रेनी सेना के लिए सामान ले जा रहे तीन बड़े मालवाहक जहाज़ और एक फेरी को भी इस हमले में निशाना बनाया गया। यह भी पढ़ें:Rajya Sabha की 11 सीटों पर चुनाव का ऐलान, UP-उत्तराखंड में बड़ा सियासी घमासान तय आम नागरिकों पर सीधा असर हालांकि रूस अक्सर अपने हमलों को सैन्य-केंद्रित बताता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इन हमलों में आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं जो दिखाता है कि आबादी वाले इलाकों में भी नुकसान पहुंचा है, भले ही असली लक्ष्य इंफ्रास्ट्रक्चर बताया जा रहा हो। रूस यूक्रेन युद्ध: जारी है दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला यह ताज़ा रूस यूक्रेन मिसाइल हमला उस लगातार बढ़ते पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे की ऊर्जा और सैन्य-औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहे हैं। हाल के हफ्तों में रूस ने मॉस्को पर भी यूक्रेनी ड्रोन हमलों का सामना किया है, जिसे मॉस्को के मेयर ने “अब तक का सबसे बड़ा” हमला बताया था, जिसमें एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा था। वहीं यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने भी रूस के कई इलाकों में तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और फैक्ट्रियों को निशाना बनाया है। युद्ध का पैमाना लगातार बढ़ रहा है पिछले कुछ महीनों के आंकड़े देखें तो हमलों की तीव्रता में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद कुल पैमाना बढ़ता ही जा रहा है कुछ हालिया रातों में तो रूस ने एक ही हमले में 800 से ज़्यादा ड्रोन और दर्जनों मिसाइलें भी दागी हैं, जो युद्ध के इस चरण में अब तक के सबसे बड़े एक-रात के हमलों में शुमार है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया यूक्रेनी अधिकारी लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने और आधुनिक एयर-डिफेंस सिस्टम मुहैया कराने की अपील करते रहे हैं, ताकि नागरिक आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक शांति वार्ता ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचती, तब तक इस तरह के रूस यूक्रेन मिसाइल हमले जारी रहने की आशंका है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Faqs) Q1: इस Russia-Ukraine मिसाइल हमले में कितने लोग घायल हुए? कम से कम 19 लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। Q2: हमला किन इलाकों में हुआ? कीव, ज़ापोरिज्जिया और ओडेसा क्षेत्रों में। Q3: कितने हवाई लक्ष्यों को नष्ट किया गया? यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, 131 रूसी मिसाइलों, ड्रोन और डिकॉय को नष्ट या निष्क्रिय किया गया। Q4: रूस ने अपने हमले का मकसद क्या बताया? सैन्य-औद्योगिक ठिकानों, ऊर्जा और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना। Q5: क्या चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर भी हमला हुआ? हां, रूस के मुताबिक वहां यूक्रेनी सेना के लिए सामान ले जा रहे जहाज़ों को निशाना बनाया गया।

Rajya Sabha की 11 सीटों पर चुनाव का ऐलान, UP-उत्तराखंड में बड़ा सियासी घमासान तय

Rajya Sabha चुनाव 2026: 11 सीटों पर मतदान 16 अक्टूबर को

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में Rajya Sabha की 11 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों का ऐलान कर दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 सीटें, उत्तराखंड की एक सीट, और पश्चिम बंगाल में एक सीट पर उपचुनाव शामिल है। इस ऐलान के साथ ही कई राज्यों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। कब जारी होगी Rajya Sabha की अधिसूचना चुनाव आयोग के मुताबिक, Rajya Sabha चुनावों की अधिसूचना 29 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे, जबकि मतदान और मतगणना दोनों 16 अक्टूबर को होंगे। तीन राज्यों में होंगे चुनाव यह चुनाव उन सीटों के लिए हो रहे हैं जहां सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। देश की सबसे बड़ी विधानसभा वाले राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा 10 Rajya Sabha सीटों पर चुनाव होंगे। उत्तराखंड में एक सीट के लिए मतदान होगा, जबकि पश्चिम बंगाल में एक खाली सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। राज्यसभा भारत की संसदीय व्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है और लोकसभा के साथ मिलकर विधायी प्रक्रिया में हिस्सा लेती है। यह भी पढ़ें:Haridwar में गले में 7 फीट का अजगर लटकाकर घूमता दिखा युवक, वन विभाग ने शुरू की जांच पूरा चुनावी कार्यक्रम क्या है चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया है। 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होते ही नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की समय-सीमा के बाद, योग्य उम्मीदवार 16 अक्टूबर को मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। उसी दिन मतगणना भी होगी, जिससे इन राज्यों से Rajya Sabha में नए निर्वाचित प्रतिनिधियों की तस्वीर साफ हो जाएगी। विधान परिषद चुनावों का भी ऐलान Rajya Sabha चुनावों के अलावा, चुनाव आयोग ने बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की विधान परिषदों के लिए भी चुनावों का ऐलान किया है। ये चुनाव स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों (Graduates’ and Teachers’ Constituencies) के लिए होंगे, जिनकी चुनावी व्यवस्था सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होती है। इन निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए सदस्य विधान परिषदों में पंजीकृत स्नातकों और शिक्षकों जैसे विशेष पेशेवर वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। UP की 10 सीटें, उत्तराखंड की 1 सीट, और पश्चिम बंगाल में 1 सीट पर उपचुनाव। पूरी खबर 👇 https://t.co/3a5IFG2Ehs#RajyaSabha #ElectionCommission #UttarPradesh #WestBengal pic.twitter.com/ud16qekYKI — News26india (@news26indias) September 22, 2026 इन चुनावों का राजनीतिक महत्व क्यों है राज्यसभा चुनाव इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि सभी प्रमुख राजनीतिक दल संसद के उच्च सदन में अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखने या उसे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। लोकसभा चुनावों के उलट, Rajya Sabha सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिए अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। इतने सारे राज्यों के एक साथ चुनाव में शामिल होने से, राजनीतिक दल जल्द ही उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं शुरू करेंगे। आगे क्या होगा कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही अब राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने और चुनावी औपचारिकताएं पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। चुनाव आयोग नामांकन से लेकर जांच, मतदान और मतगणना तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा, ताकि सब कुछ तय नियमों के अनुसार संपन्न हो सके। 16 अक्टूबर को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि इन राज्यों से राज्यसभा में अगली बार कौन-कौन प्रतिनिधि पहुंचेंगे। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: कुल कितनी राज्यसभा सीटों पर चुनाव होंगे? 11 सीटों पर  उत्तर प्रदेश की 10, उत्तराखंड की 1, और पश्चिम बंगाल में 1 सीट पर उपचुनाव। Q2: नामांकन प्रक्रिया कब शुरू होगी? 29 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी होने के साथ ही। Q3: मतदान और मतगणना कब होगी? दोनों 16 अक्टूबर 2026 को एक ही दिन होंगे। Q4: क्या सिर्फ राज्यसभा चुनाव ही घोषित हुए हैं? नहीं, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की विधान परिषदों के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी चुनाव घोषित किए गए हैं। Q5: राज्यसभा सदस्यों का चुनाव कैसे होता है? सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिए अप्रत्यक्ष रूप से।

Haridwar में गले में 7 फीट का अजगर लटकाकर घूमता दिखा युवक, वन विभाग ने शुरू की जांच

Haridwar में गले में 7 फीट का अजगर लटकाकर घूमता दिखा युवक, वन विभाग ने शुरू की जांच

New Delhi: उत्तराखंड के Haridwar स्थित खड़खड़ी इलाके में रविवार को एक अजीबोगरीब वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी|एक युवक अपने गले में करीब 7 फीट लंबा अजगर लटकाए सड़क पर घूमता नज़र आया। यह घटना राजाजी नेशनल पार्क के पास रेलवे क्रॉसिंग की बताई जा रही है। वीडियो में क्या दिखा वायरल वीडियो में युवक अजगर को गले में डाले हुए बेफिक्री से सड़क पर चलता दिख रहा है, मानो सांप को लेकर रौब गांठ रहा हो। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की हरकत सामने आई हो कुछ ही दिन पहले बिहार के सारन ज़िले में भी एक युवक अजगर को अपने शरीर पर लपेटकर करतब दिखाता वीडियो वायरल हुआ था। वन विभाग ने शुरू की जांच वीडियो सामने आने के बाद Haridwar के DFO स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि वन विभाग की टीम इसकी गंभीरता से जांच कर रही है। टीम वीडियो की सटीक लोकेशन और समय की पुष्टि करने के साथ-साथ वीडियो में दिख रहे युवक की पहचान करने में जुटी है। DFO के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह भी पढ़ें:US Tariff Impact on India: अमरीका के 100% टैरिफ बिल से भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट, जानिए पूरा सच एक ही दिन में दूसरी अजगर से जुड़ी घटना गौरतलब है कि इसी दौरान वन विभाग की एक और टीम को व्यस्त रहना पड़ा शहर के सरकारी अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में अचानक घुस आए 12 फीट लंबे अजगर को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया, जिससे वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। Haridwar में अजगर देखना क्यों आम होता जा रहा है? Haridwar, राजाजी नेशनल पार्क से सटा होने के कारण, अजगर जैसे वन्यजीवों के शहरी इलाकों में घुस आने की घटनाओं के लिए पहले से भी चर्चा में रहा है। पिछले कुछ महीनों में ही शहर में कई बार अजगर देखे जाने की खबरें आई हैं कभी किसी हॉस्टल परिसर में, कभी हाईवे किनारे, तो कभी किसी पेड़ पर चढ़ा हुआ। वन अधिकारियों के मुताबिक, ठंड से राहत पाने के लिए अक्सर अजगर अपने बिलों से बाहर निकलकर धूप सेंकने आते हैं, जिससे इस तरह के मामले आम हो जाते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा सांप को पकड़ लेना या उसे शरीर पर लपेट लेना, यह साबित नहीं करता कि वह उससे सुरक्षित है। सांप और अन्य वन्यजीव अप्रत्याशित व्यवहार कर सकते हैं, इसलिए उन्हें पकड़ना, उनके साथ प्रदर्शन करना या तस्वीरें-वीडियो बनाने के चक्कर में उन्हें छेड़ना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है दोनों, इंसान और वन्यजीव, दोनों के लिए। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: यह घटना कहां हुई? उत्तराखंड के Haridwar स्थित खड़खड़ी इलाके में, राजाजी नेशनल पार्क के पास रेलवे क्रॉसिंग के नज़दीक। Q2: वीडियो में क्या दिख रहा है? एक युवक अपने गले में करीब 7 फीट लंबा अजगर लटकाए सड़क पर घूम रहा है। Q3: वन विभाग ने क्या कदम उठाया है? वीडियो की लोकेशन और समय की पुष्टि करते हुए युवक की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Q4: क्या इस तरह की हरकत पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है? हां, DFO स्वप्निल अनिरुद्ध के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। Q5: क्या हरिद्वार में अजगर दिखना आम है? हां, राजाजी नेशनल पार्क से सटे होने के कारण Haridwar में समय-समय पर अजगर दिखने और रेस्क्यू किए जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।