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Festive Season से पहले Myntra ने बनाई 26,000 से ज्यादा Temporary Jobs

Myntra Jobs 2026: Festive Season में 26,000+ Jobs

फैशन और लाइफस्टाइल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Myntra ने festive season और अपने Big Fashion Festival से पहले 26,000 से ज्यादा seasonal employment opportunities तैयार करने की घोषणा की है। कंपनी ने गुरुवार को बताया कि यह seasonal hiring पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। यह Myntra Jobs 2026 announcement इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत में festive shopping season के दौरान e-commerce कंपनियां कितनी तेजी से अस्थायी रोजगार के मौके पैदा करती हैं। शुरुआत में ही यह साफ कर देना जरूरी है कि ये सभी 26,000 positions फिलहाल public applications के लिए एक साथ खुली हुई vacancies नहीं हैं — यह कंपनी द्वारा तैयार की गई कुल seasonal employment opportunities की संख्या है। Myntra ने कितनी नौकरियां तैयार की हैं? कंपनी के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस साल seasonal workforce की संख्या 26,000 से ज्यादा है, जो पिछले साल के seasonal workforce के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। पिछले साल का exact आंकड़ा officially detail में साझा नहीं किया गया है, इसलिए इस लेख में सिर्फ verified तुलनात्मक जानकारी दी जा रही है, अनुमानित संख्या नहीं। किन-किन पदों पर होगी भर्ती? Myntra के seasonal roles में supply chain operations शामिल हैं, जैसे sorting, grading और packing, इसके अलावा delivery और customer service से जुड़े काम भी इसमें आते हैं। Fulfilment centre operations (sorting, grading, packing) Last-mile delivery से जुड़े roles Customer service roles Warehouse और logistics सहायता से जुड़े काम 8,000 Delivery Partners और 2,700 Customer Service Roles इस कुल seasonal team में 8,000 delivery partners और 2,700 customer service roles शामिल हैं। ये सभी roles seasonal या temporary nature की opportunities हैं, जो festive demand से जुड़ी हैं — इन्हें permanent jobs के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। किन शहरों और राज्यों में होंगे ये रोजगार? यह seasonal workforce पांच fulfilment hubs में तैनात होगा — Bengaluru, Mumbai, Kolkata, Bilaspur और Binola। वर्कफोर्स की भर्ती कई राज्यों से की गई है, जिनमें Odisha, Karnataka, Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Jharkhand शामिल हैं। यह जरूरी नहीं कि हर role हर शहर में उपलब्ध हो — अलग-अलग fulfilment centres में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग roles की संख्या तय की गई है। महिलाओं और Persons with Disabilities के लिए क्या है? कुल seasonal positions में से 350 से ज्यादा roles persons with disabilities के लिए रखे गए हैं, जबकि fulfilment centre workforce में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने seasonal hiring में diversity को शामिल करने की कोशिश कर रही है। Myntra को Festive Season में ज्यादा Workforce की जरूरत क्यों है? Festive season के दौरान online shopping में भारी बढ़ोतरी होती है, जिससे order volumes काफी ज्यादा हो जाते हैं। इसका सीधा असर पड़ता है sorting-packing की जरूरत, fulfilment centres पर operational load, delivery network और customer service demand पर। इसी वजह से Myntra जैसी कंपनियां festive season से पहले ही अपना seasonal workforce तैयार कर लेती हैं। Big Fashion Festival क्या है? Big Fashion Festival, Myntra का एक प्रमुख annual sales event है जो festive season के दौरान आयोजित होता है और Myntra के सबसे बड़े shopping events में से एक माना जाता है। ऐसे बड़े sales events की वजह से कंपनी को सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा operational capacity की जरूरत पड़ती है — इसी वजह से seasonal hiring जैसे कदम उठाए जाते हैं। पिछले साल की तुलना में कितना बड़ा Hiring Plan? साल Seasonal Workforce/Opportunities पिछला साल Exact आंकड़ा officially साझा नहीं, इस साल के मुकाबले आधे से भी कम 2026 26,000 से ज्यादा कंपनी के बयान के मुताबिक, यह बढ़ोतरी पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। क्या ये Permanent Jobs हैं? यह समझना बहुत जरूरी है — ये सभी 26,000+ positions seasonal या temporary employment opportunities हैं, जो सीधे तौर पर festive demand से जुड़ी हैं। इन्हें automatically permanent employment नहीं माना जाना चाहिए। अभी तक Myntra ने यह नहीं बताया है कि festive season के बाद कितने workers को permanent roles में absorb किया जाएगा। Myntra Jobs 2026 के लिए आवेदन कैसे करें? कंपनी की ओर से उपलब्ध जानकारी में इन सभी seasonal positions के लिए कोई एक common public application process या deadline स्पष्ट नहीं की गई है। Salary कितनी मिलेगी? उपलब्ध announcement में इन seasonal roles के लिए salary, stipend या payment से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। E-commerce Sector में Festive Hiring का Trend Myntra अकेली कंपनी नहीं है जो festive season से पहले बड़े पैमाने पर temporary workforce तैयार करती है। एक industry रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जुलाई-दिसंबर 2026 की अवधि के दौरान करीब 200,000 से 250,000 seasonal और gig jobs बनने की संभावना है, और festive hiring में 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि festive season के दौरान logistics, fulfilment और delivery networks कितने अहम हो जाते हैं। रोजगार के लिहाज से इस Hiring का क्या मतलब है? Festive season के दौरान seasonal income के मौके तैयार होते हैं Logistics और delivery workers की मांग बढ़ती है Customer service roles में भी अस्थायी रोजगार बढ़ता है Women और persons with disabilities की भागीदारी को शामिल करने की कोशिश हो रही है सिर्फ इस एक announcement के आधार पर भारत के overall employment market को लेकर कोई बड़ा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा — यह एक कंपनी-विशेष seasonal hiring plan है। Key Highlights Myntra ने 26,000 से ज्यादा seasonal employment opportunities तैयार की हैं यह पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है 8,000 delivery partners और 2,700 customer service roles शामिल हैं 350 से ज्यादा roles persons with disabilities के लिए रखे गए हैं Fulfilment centre workforce में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रहने की उम्मीद है Hiring पांच fulfilment centres — Bengaluru, Mumbai, Kolkata, Bilaspur और Binola में हो रही है वर्कफोर्स की भर्ती Odisha, Karnataka, Bihar, UP, MP और Jharkhand जैसे राज्यों से हो रही है यह hiring Big Fashion Festival और festive season की बढ़ी हुई demand से जुड़ी है FAQs Q1. Myntra ने 2026 में कितनी seasonal jobs

IND vs JPN T20 Match Report: बारिश से प्रभावित 5-5 ओवर के ऐतिहासिक मुकाबले में भारत ने जापान को 2 रन से हराया, अंतिम गेंद तक चला रोमांच

IND vs JPN T20: बारिश के बीच भारत ने जापान को 2 रन से हराया, जाने विवाद और रिपोर्ट

New Delhi: पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार आमने-सामने उतरीं भारत और जापान की टीमों के बीच खेला गया टी20 मुकाबला उम्मीद से कहीं ज़्यादा रोमांचक साबित हुआ। सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड (जापान) में खेले गए इस ऐतिहासिक मैच में भारी बारिश के कारण मुकाबला घटाकर सिर्फ 5-5 ओवर का कर दिया गया। रोमांच से भरे इस मैच में जापान ने दुनिया की नंबर-1 टीमों में शामिल भारत को आखिरी गेंद तक कड़ी टक्कर दी। हालांकि, भारतीय टीम ने अंत में अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए महज 2 रन से जीत दर्ज की। यह मैच सिर्फ मैदान पर रन बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि एशियन गेम्स 2026 की तैयारियों और भारत-जापान के बीच 75 साल के राजनयिक संबंधों (Diplomatic Relations) के प्रतीक के रूप में भी बेहद अहम रहा। मैच का बैकग्राउंड: राजनयिक संबंध और एशियन गेम्स की तैयारियां यह मुकाबला दोनों देशों के बीच खेल और कूटनीतिक रिश्तों के लिहाज से एक नया मील का पत्थर साबित हुआ। पुरुषों के इंटरनेशनल क्रिकेट में यह पहला मौका था जब भारत और जापान का आमना-सामना हुआ। 75 Years of Diplomatic Relations: भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में इस स्पेशल फ्रेंडशिप सीरीज/मैच का आयोजन किया गया था। Asian Games 2026 Practice: जापान में ही आयोजित होने वाले Asian Games 2026 के पुरुष टी20 टूर्नामेंट से पहले दोनों टीमों के लिए यह मैच अपनी तैयारियों को परखने का एक बेहतरीन मौका था। बारिश का साया और टॉस का फैसला मैच शुरू होने से पहले ही सानो में लगातार बारिश होती रही, जिसके कारण आउटफील्ड गीला हो गया था। अंपायरों ने कई बार निरीक्षण (Inspection) करने के बाद ओवरों की संख्या घटाकर 5-5 ओवर करने का फैसला किया। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer) ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, इतने छोटे फॉर्मेट में भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं मिला और पावरप्ले का फायदा उठाने की कोशिश में टीम लगातार दबाव में आती गई। भारतीय बल्लेबाजी: 5 ओवर में बने सिर्फ 32 रन पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम 5 ओवर में 4 विकेट खोकर केवल 32 रन ही बना सकी। छोटे फॉर्मेट और गीली पिच का फायदा जापानी गेंदबाजों ने बखूबी उठाया। श्रेयस अय्यर का संघर्ष: कप्तान श्रेयस अय्यर ने एक छोर संभाले रखा और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा 16 रन की पारी खेली। जापानी गेंदबाजों का अनुशासन: जापान के तेज गेंदबाजों और स्पिनरों ने लाइन और लेंथ पर पूरा नियंत्रण रखा। उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों को बड़े शॉट्स खेलने की गेंदें ही नहीं दीं। 5 ओवर में भारत जैसी मजबूत बैटिंग लाइन-अप को 32 रन पर रोकना जापानी क्रिकेट के लिए किसी ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं था। जापान की जवाबी पारी: भारत को लगा हार का डर 33 रन के आसान दिख रहे लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापान की टीम ने बेहद सकारात्मक शुरुआत की। जापानी ओपनर्स ने बिना किसी डर के भारतीय पेस अटैक का सामना किया। जापान की आक्रामक बल्लेबाजी के चलते एक समय ऐसा लग रहा था कि यह उभरती हुई क्रिकेट टीम भारत को हराकर दुनिया का सबसे बड़ा उलटफेर (Upset) कर देगी। हालांकि, अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने अपनी लाइन-अप में सुधार किया और मैच को आखिरी ओवर तक खींच लाए। आखिरी ओवर का हाई-ड्रामा और वाइड बॉल विवाद जापान को जीत के लिए अंतिम ओवर (Last Over) में 8 रनों की जरूरत थी। दबाव के इस पल में कप्तान श्रेयस अय्यर ने अनुभवी ऑलराउंडर अक्षर पटेल (Axar Patel) के हाथ में गेंद सौंपी। मैदान पर हुआ विवाद: अंतिम ओवर की एक महत्वपूर्ण गेंद को मैदानी अंपायर ने पहले ‘वाइड’ करार दिया, जिससे जापानी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन भारतीय कप्तान और गेंदबाज की अपील के बाद अंपायरों ने आपस में सलाह-मशविरा किया और अपना फैसला बदलते हुए उसे ‘लीगल डिलीवरी’ करार दिया। इस फैसले पर जापानी ड्रेसिंग रूम और मैदान पर थोड़ी बहस देखने को मिली, जो इस मैच का सबसे चर्चित मोड़ बन गया। अक्षर पटेल की मैच विनिंग स्पेल: इस ड्रामा के बावजूद अक्षर पटेल ने अपना आपा नहीं खोया। उन्होंने सटीक यॉर्कर और लाइन-लेंथ का इस्तेमाल करते हुए जापानी बल्लेबाजों को बाउंड्री मारने से रोके रखा। अंतिम स्कोर: जापान की टीम 5 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 30 रन ही बना सकी और भारत ने यह मुकाबला रोमांचक अंदाज में 2 रन से जीत लिया। दोनों टीमों के लिए इस मैच के मायने टीम मैच से मिली सीख / टेकअवे टीम इंडिया (India) इतने छोटे फॉर्मेट (5 overs) में दबाव को हैंडल करने और कम स्कोर वाले मैच को डिफेंड करने का अनुभव मिला। जापान (Japan) दुनिया की नंबर-1 टी20 टीम के खिलाफ आखिरी गेंद तक लड़ने से जापानी क्रिकेट टीम के आत्मविश्वास में भारी बढ़ोतरी होगी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: भारत और जापान के बीच खेले गए इस टी20 मैच का अंतिम स्कोर क्या रहा? उत्तर: भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 ओवर में 4/32 रन बनाए। जवाब में जापान की टीम 5 ओवर में 3/30 रन ही बना सकी और भारत ने 2 रन से जीत दर्ज की। Q2: यह मैच 20 ओवर की जगह 5-5 ओवर का क्यों हुआ? उत्तर: जापान के सानो क्रिकेट ग्राउंड पर हुई तेज बारिश और गीले आउटफील्ड के कारण मैच के ओवर घटाकर 5-5 कर दिए गए थे। Q3: इस मैच में भारतीय टीम के कप्तान कौन थे और उन्होंने कितना स्कोर किया? उत्तर: इस मैच में भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर ने की थी, जिन्होंने सबसे ज्यादा 16 रन बनाए। Q4: अंतिम ओवर में भारत की तरफ से किसने गेंदबाजी की और क्या विवाद हुआ? उत्तर: अंतिम ओवर में अक्षर पटेल ने गेंदबाजी की। विवाद एक गेंद को लेकर हुआ जिसे अंपायर ने पहले वाइड दिया था, लेकिन बाद में री-चेक करके उसे फेयर बॉल (Legal Delivery) करार दिया। Q5: यह मुकाबला भारत-जापान क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है? उत्तर: यह पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में भारत और जापान की पहली भिड़ंत थी। साथ ही यह मैच भारत-जापान के 75 साल के राजनयिक संबंधों

West Bengal SIR क्या है? वोटर लिस्ट रिवीज़न का पूरा विवाद, आंकड़े और अब तक क्या हुआ – पूरी कहानी

West Bengal SIR क्या है? पूरा विवाद और सच्चाई

 New Delhi: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन समीक्षा (SIR) के बारे में बहस ने पिछले कुछ महीनों में राज्य की राजनीति में बहुत हलचल मचा दी। लगभग 90 लाख नामों की कटौती, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद, और चुनाव के नतीजों पर असर होना — सब कुछ इतना जटिल हो गया कि समझना आसान नहीं। तो चलिए, शुरुआत से समझते हैं कि असल में क्या हुआ। West Bengal SIR क्या है? SIR यानी विशेष गहन समीक्षा, एक प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूचियों की गहराई से जांच होती है। चुनाव आयोग इसे समय-समय पर चलाता है। इसका मकसद होता है नकली, डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम सूची से हटाना। बंगाल में यह पहली बार ऐसे बड़े पैमाने पर हुआ था, इसलिए इसका असर भी बड़ा रहा। कब शुरू हुई, कैसे चली बंगाल में SIR की शुरुआत बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के घर-घर जाकर सत्यापन से हुई, जो 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चला। इस दौरान चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस से BLOs की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा, क्योंकि जमीनी स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा था। दिसंबर 2025 तक आंकड़े सामने आने लगे — करीब 15.53 लाख मृत मतदाताओं के नाम चिन्हित किए गए। इसके अलावा 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां मिलीं — 85 लाख से ज्यादा मतदाताओं के पिता के नाम गलत या असंगत पाए गए, जबकि 24 लाख से ज्यादा मामलों में एक ही परिवार में छह से अधिक बच्चों की एंट्री दर्ज मिली — यानी डेटा में गंभीर विसंगतियां थीं। ये भी पढ़ें-“1.4 अरब लोगों की सुरक्षा सबसे पहले”: Russian oil पर 100% US tariff की धमकी पर India का कड़ा जवाब सबसे ज्यादा विवाद की बात कौन सी रही अंतिम आंकड़ा आते-आते बात करीब 90 लाख नामों की कटौती तक पहुंच गई — जो अब तक की सबसे बड़ी SIR कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। तुलना के लिए, 2024 में आंध्र प्रदेश में 18.6 लाख, महाराष्ट्र में 21.5 लाख, हरियाणा में 5.8 लाख और ओडिशा में 9.4 लाख नाम हटाए गए थे — यानी बंगाल का आंकड़ा इन सबसे कहीं ज्यादा बड़ा था। भाजपा और TMC आमने-सामने भाजपा ने इस पूरी कवायद को “पारदर्शिता की दिशा में जरूरी कदम” बताया और चुनाव आयोग के “सक्रिय रुख” की तारीफ की। भाजपा नेता अमित मालवीय ने तो यहां तक दावा किया कि SIR के लिए जमा किए गए कई दस्तावेज गैरकानूनी तरीके से हासिल किए गए और पूरी तरह अवैध हैं, और आयोग से इसकी जांच की मांग की। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC ने इसे “राजनीति से प्रेरित रिवीजन” कहा, आरोप लगाया कि यह अल्पसंख्यकों और हाशिए के समुदायों को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश है। ममता बनर्जी ने खुद कोलकाता में एक रैली की अगुवाई कर इसका विरोध जताया। “27 लाख लोगों के साथ अन्याय”  विश्लेषकों की चिंता राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने एक बड़ा आरोप लगाया — उनके मुताबिक करीब 27 लाख लोगों को गलत तरीके से वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया, और आखिरी समय में हुए ज्यादातर सुधार बेअसर साबित होंगे। यह टिप्पणी उस वक्त आई जब मतदान नजदीक आते-आते भी वोटर लिस्ट में बदलाव जारी थे, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला विवाद इतना बड़ा हो गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा किए गए SIR को कानूनी रूप से वैध ठहराया — यानी अदालत ने प्रक्रिया पर मुहर लगा दी, भले ही राजनीतिक विवाद खत्म नहीं हुआ। इससे पहले TMC समेत कई दलों ने आरोप लगाया था कि रिवीज़न के दौरान कई असली मतदाताओं के नाम अनुचित तरीके से हटाए गए। विवाद चुनाव के बाद भी नहीं थमा SIR का असर सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं रहा — 2026 विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में भी विवाद जारी रहे। फाल्टा सीट पर तो EVM से छेड़छाड़ की शिकायतों के बाद पूरी तरह दोबारा मतदान तक कराना पड़ा। कई भाजपा समर्थकों, खासकर गांवों की महिलाओं ने स्थानीय TMC कार्यकर्ताओं से धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया। विवाद सुलझाने के लिए क्या इंतजाम हुए शिकायतों से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने 23 जिलों में 19 ट्रिब्यूनल बनाए, जिनमें से हर एक की अध्यक्षता एक रिटायर्ड जज कर रहे थे। मार्च 2026 तक करीब 37 लाख नामों के मामलों का निपटारा हो चुका था, और मतदाताओं को अपने EPIC नंबर से लिस्ट में नाम चेक करने की सुविधा भी दी गई। आखिर में सीखने लायक बात क्या है पश्चिम बंगाल के SIR की कहानी बताती है कि “साफ-सुथरी वोटर लिस्ट” जैसा प्रशासनिक काम भी कैसे गहरे राजनीतिक टकराव में बदल सकता है — खासकर तब, जब चुनाव नजदीक हों और आंकड़े इतने बड़े हों। सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बावजूद, यह बहस अभी पूरी तरह थमी नहीं है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: SIR क्या है? मतदाता सूचियों की एक गहन समीक्षा प्रक्रिया, जिसमें डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। Q2: बंगाल में कितने नाम हटाए गए? करीब 90 लाख, जो अब तक के सबसे बड़े SIR ऑपरेशनों में से एक है। Q3: सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया? मई 2026 में कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा की गई SIR प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराया। Q4: TMC का मुख्य आरोप क्या है? कि यह प्रक्रिया राजनीति से प्रेरित है और अल्पसंख्यकों व हाशिए के समुदायों को निशाना बनाती है। Q5: विवाद सुलझाने के लिए क्या व्यवस्था की गई? 23 जिलों में 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए, जिनकी अध्यक्षता रिटायर्ड जज कर रहे थे, ताकि शिकायतों का निपटारा हो सके।