UP Election 2027 : गाजियाबाद विधानसभा सीट: तीन चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं? जानिए पिछले चुनावों का हिसाब

New Delhi: उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर लगातार बढ़ा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2024 के बीच पार्टी की पकड़ और मजबूत हुई है। उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, इसलिए इन नतीजों पर नजर बनी हुई है। 2024 By Election: बीजेपी की बड़ी जीत अतुल गर्ग के लोकसभा सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। 20 नवंबर 2024 को वोटिंग हुई और 23 नवंबर को नतीजे आए। बीजेपी के संजीव शर्मा को 96,946 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 62.99 प्रतिशत। समाजवादी पार्टी के सिंह राज जाटव 27,595 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। बसपा के परमानंद गर्ग को 10,736 वोट मिले। संजीव शर्मा 69,351 वोटों के अंतर से जीते। 2022 और 2017: अतुल गर्ग की जीत 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अतुल गर्ग को 1,50,205 वोट मिले। यह कुल वोटों का 61.37 प्रतिशत था। 2017 में उन्हें 1,24,201 वोट मिले थे, यानी 54.99 प्रतिशत। वोट शेयर का ट्रेंड 2017: 54.99% 2022: 61.37% 2024 उपचुनाव: 62.99% कम वोटिंग: एक अहम पहलू उपचुनाव में कुल 1,53,904 वोट पड़े। 2024 में इस सीट पर करीब 4.61 लाख वोटर दर्ज थे। इस हिसाब से वोटिंग लगभग 33 प्रतिशत रही (यह आंकड़ा हमारी गणना है)। 2022 में अकेले बीजेपी उम्मीदवार को ही 1.5 लाख वोट मिले थे। यानी उपचुनाव में कुल वोटिंग काफी कम रही। छोटी पार्टियों का प्रदर्शन उपचुनाव में AIMIM के रवि कुमार को 6,536 वोट (4.25%) और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सत्यपाल चौधरी को 6,304 वोट (4.10%) मिले। नोटा पर 792 वोट पड़े। 2027 में क्या देखना होगा उपचुनाव आम तौर पर आम चुनाव से अलग माहौल में होते हैं। इसलिए 2027 में टर्नआउट कितना रहता है, विपक्ष कितना एकजुट होता है और उम्मीदवार कौन बनता है, ये बातें नतीजे तय करेंगी।
Up Election 2027: वोटर लिस्ट का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2 नवंबर से, 4 जनवरी को आएगी फाइनल सूची

New Delhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया का कार्यक्रम तय हो गया है। चुनाव आयोग (ECI) ने 15 अक्टूबर को विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का शेड्यूल जारी किया, जिसमें 1 जनवरी 2027 को योग्यता तिथि माना गया है और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी। आयोग ने क्या घोषणा की द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पुनरीक्षण यूपी समेत 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा, जिनमें पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और गुजरात जैसे चुनावी राज्य भी शामिल हैं। यह प्रक्रिया 2 नवंबर से शुरू होगी और 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची के प्रकाशन के साथ पूरी होगी। यूपी में कब क्या होगा यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने गुरुवार को बताया, यूएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, कि मतदान केंद्रों के आवंटन और पुनर्गठन का काम 2 नवंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुनरीक्षण की प्रमुख तारीखें इस तरह हैं: 2 नवंबर: पुनरीक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 12 नवंबर: मतदाता सूची का मसौदा (ड्राफ्ट) प्रकाशित होगा 11 दिसंबर तक: दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन भारत समाचार टीवी की रिपोर्ट में दावे-आपत्ति की अंतिम तारीख 11 दिसंबर बताई गई है। इस दौरान मतदाता नाम, पते और अन्य विवरण में सुधार भी करा सकेंगे। नए मतदाता कैसे जुड़ सकते हैं ट्रिब्यून के अनुसार, यह पुनरीक्षण 1 जनवरी 2027 की योग्यता तिथि के आधार पर पात्र मतदाताओं के नामांकन के लिए है। इसके साथ आयोग 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 की तीन आगामी योग्यता तिथियों के लिए भी अग्रिम आवेदन लेगा। चुनाव आयोग की सामान्य प्रक्रिया के मुताबिक, नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना होता है और यह voters.eci.gov.in या वोटर हेल्पलाइन ऐप से किया जा सकता है। हेल्पलाइन नंबर 1950 है। SIR से यह कैसे अलग है आउटलुक ने हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि यह पुनरीक्षण यूपी में SIR के दौरान नाम हटाए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच हो रहा है। SIR एक गहन प्रक्रिया थी, जबकि SSR संक्षिप्त पुनरीक्षण है, जो आमतौर पर हर चुनाव से पहले की जाने वाली नियमित कवायद है। पिछली बार 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी SSR हुआ था और अंतिम सूची 5 जनवरी 2022 को छपी थी। आगे क्या ? विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स में विशेष अभियान की तारीखें या मतदाताओं के लिए अलग शिविरों का ब्योरा नहीं मिला है। जानकारी आने पर खबर अपडेट की जाएगी।
UP Election 2027: अखिलेश यादव की कार्यकर्ताओं को नसीहत, अनुशासन में रहें और बूथों पर ढिलाई न बरतें

New Delhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को एक खास संदेश दिया है। विस्तार न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पार्टी के सभी शुभचिंतकों से अनुशासन में रहने और संगठन को मजबूत करने में पूरी ताकत लगाने को कहा है। अखिलेश यादव ने क्या कहा रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश ने कहा कि चुनाव में अब काफी कम समय बचा है और सभी को गंभीरता से जुटना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे ऐसा कोई काम न करें जिससे पार्टी की छवि धूमिल हो या शिकायत का मौका मिले। उनका लक्ष्य 2027 में सरकार बनाना है और इसके लिए अभी से मेहनत करनी होगी। वोट के अधिकार की रक्षा पर ज़ोर रिपोर्ट के मुताबिक, अखिलेश ने कहा कि वोट के अधिकार की रक्षा के लिए 2027 में सपा की सरकार ज़रूरी है और अगला विधानसभा चुनाव इसी अधिकार को बचाने के लिए होगा। इससे पहले भी वे मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं और दावा कर चुके हैं कि सपा के वोटरों के नाम सूची से हटाए गए। इन आरोपों पर चुनाव आयोग के सूत्र पहले सफाई दे चुके हैं। जीत के लिए अखिलेश के संदेश के मुख्य बिंदु अनुशासन: सभी समर्थक पार्टी के अनुशासन में रहें छवि का ध्यान: ऐसा कोई व्यवहार न करें जिससे पार्टी को नुकसान हो बूथ पर सतर्कता: बूथ-बूथ तक सक्रिय रहें और ढिलाई न बरतें संगठन मजबूत करना: पूरी ताकत चुनावी तैयारी और संगठन पर लगाएं एकजुटता: पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाए, सब मिलकर उसकी जीत के लिए काम करें पहले भी दे चुके हैं ऐसी सलाह यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश ने कार्यकर्ताओं को ऐसी हिदायत दी हो। टीवी9 यूपी की पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बूथ से विधानसभा स्तर तक अभियान शुरू करने का ऐलान करते हुए कार्यकर्ताओं को सकारात्मकता के साथ जनता के बीच जाने की सलाह दी थी। इनसाइडर लाइव की एक अन्य रिपोर्ट में चुनाव से पहले सपा नेताओं को अपनी बयानबाज़ी में संयम बरतने की नसीहत का भी ज़िक्र है। पिछले चुनाव का आंकड़ा विकिपीडिया के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 255 सीटें और 41.29% वोट मिले थे, जबकि सपा को 111 सीटें और 32.06% वोट। यूपी में अगला विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की उम्मीद है, लेकिन चुनाव आयोग ने अभी तारीखों की घोषणा नहीं की है। आगे क्या चुनाव की तारीखें घोषित होने तक सभी दलों की संगठनात्मक तैयारी तेज़ रहने की उम्मीद है। सपा के अभियान और अन्य दलों की प्रतिक्रिया आने पर खबर अपडेट की जाएगी।
UP Election 2027: सपा का 55 सीटों का ऑफर, कांग्रेस की 200 की डिमांड, क्या बनेगी बात?

New Delhi: UP Election 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट-बंटवारे को लेकर खींचतान सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सपा की ओर से कांग्रेस को 55 सीटों का ऑफर दिया गया है, जबकि कांग्रेस 150 से 200 सीटों की मांग पर अड़ी हुई है। गौतम का बड़ा बयान कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने शनिवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा, “किसने मांगी 150 सीटें? हमने तो असल में 200 सीटों की बात की थी।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस कम से कम 200 सीटों की हकदार है। गौतम ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का ही गठबंधन है और दोनों दल एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अक्टूबर महीने के भीतर सीट शेयरिंग का यह मसला सुलझ जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सीटों की अंतिम संख्या पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के स्तर पर तय होगी। अखिलेश यादव का जवाब कांग्रेस की इस मांग पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संयत अंदाज़ में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मक़सद जब साफ़ हो तो हाथ में हाथ होता है, जय संविधान-जय हिंदुस्तान!” इससे पहले भी अखिलेश यादव कई बार कह चुके हैं कि चुनाव में बात सीटों की संख्या की नहीं, बल्कि जीत की होनी चाहिए। छोटे दलों की भी सीटों पर नज़र एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के अलावा गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर रहे कुछ छोटे दल भी अपने लिए सीटों की मांग कर रहे हैं, जिससे सीट-बंटवारे का समीकरण और जटिल हो गया है। अभी स्थिति क्या है अब तक समाजवादी पार्टी की ओर से सीट-बंटवारे को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। कांग्रेस की मांग (150-200 सीटें) और सपा की ओर से अनौपचारिक रूप से सामने आ रही संख्या (55 सीटें) के बीच अभी बड़ा अंतर बना हुआ है। ये भी पढ़ें: Gold Rate: सोना फिर महंगा, 24K ₹1.48 लाख के पार: आज का भाव FAQs Q1. सपा ने कांग्रेस को कितनी सीटों का ऑफर दिया है? रिपोर्ट्स के मुताबिक सपा की ओर से कांग्रेस को 55 सीटों का ऑफर सामने आया है, हालांकि पार्टी ने अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की है। Q2. कांग्रेस कितनी सीटें मांग रही है? कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार पार्टी कम से कम 200 सीटों की मांग कर रही है। Q3. अखिलेश यादव ने इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया दी? अखिलेश यादव ने सधे अंदाज़ में कहा कि बात सीटों की नहीं, जीत की होनी चाहिए, और सोशल मीडिया पर गठबंधन को लेकर सकारात्मक संदेश दिया। Q4. सीट शेयरिंग कब तक फाइनल होने की उम्मीद है? राजेंद्र पाल गौतम के मुताबिक अक्टूबर महीने के भीतर यह मसला सुलझने की उम्मीद है। Q5. क्या सीट शेयरिंग का फाइनल फैसला गौतम लेंगे? नहीं, उन्होंने खुद कहा है कि अंतिम संख्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व के स्तर पर तय होगी।
UP Rajya Sabha Elections 2027: धनराज नथवानी और राम गोपाल यादव ने सपा से भरा राज्यसभा के लिये नामांकन, उच्च सदन पहुंचना तय

New Delhi: उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं। पार्टी ने गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के चेयरमैन धनराज परिमल नथवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बुधवार सुबह पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी ने लखनऊ पहुंचकर अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव की मौजूदगी में विधिवत रूप से नामांकन प्रक्रिया पूरी की। कौन हैं धनराज परिमल नथवानी धनराज परिमल नथवानी का नाम देश के कॉर्पोरेट जगत और खेल प्रशासन में जाना-पहचाना है। वे वर्तमान में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में डायरेक्टर के पद पर भी कार्यरत हैं। इसके अलावा वे द्वारका देवस्थानम समिति और कई सामाजिक पहलों से भी जुड़े हुए हैं। मूल रूप से गुजरात से ताल्लुक रखने वाले नथवानी का उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस तरह उतरना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए धनराज परिमल नथवानी और राम गोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया#RajyaSabha #AkhileshYadav #RamGopalYadav #DhanrajParimalNathwani @yadavakhilesh@samajwadiparty@mediacellsp@proframgopalya1 pic.twitter.com/jZMWTXmi90 — News26india (@news26indias) September 30, 2026 राम गोपाल यादव: सपा के वरिष्ठ स्तंभ राम गोपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े रहे हैं। वे पहले भी कई बार राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। ये भी पढ़ें: UP Election 2027: ‘आपके बिना सब सूना’, यूपी चुनाव से पहले बृजभूषण सिंह के बयान से सियासी तूफान, सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर कह दी बड़ी बात चुनाव की पृष्ठभूमि भारत निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को राज्यसभा की 11 सीटों (10 उत्तर प्रदेश और 1 पश्चिम बंगाल उपचुनाव) के लिए द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा की थी। उत्तर प्रदेश से जिन 10 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें राम गोपाल यादव भी शामिल हैं। इन सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से होना है। यह राज्यसभा चुनाव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले हो रहा है। सपा का सियासी समीकरण उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर समाजवादी पार्टी के पास अपने कोटे से उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने की स्थिति मानी जा रही है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज़ हो गई है कि इस समीकरण का आने वाले दिनों में विपक्ष की रणनीति और गठबंधन की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा। FAQs Q1. समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा के लिए किसे उम्मीदवार बनाया है? सपा ने राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को अपने उम्मीदवार बनाए हैं। Q2. धनराज परिमल नथवानी कौन हैं? वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। Q3. नामांकन कब और कहां दाखिल हुआ? दोनों उम्मीदवारों ने बुधवार को लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। Q4. राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान कब होगा? मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से होगा। Q5. यह चुनाव कितनी सीटों के लिए है? भारत निर्वाचन आयोग ने कुल 11 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा की है, जिनमें उत्तर प्रदेश की 10 और पश्चिम बंगाल की 1 उपचुनाव सीट शामिल है। Q6. राम गोपाल यादव पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं? हां, वे सपा के वरिष्ठ नेता हैं और पहले भी कई बार पार्टी की ओर से राज्यसभा में रह चुके हैं।
UP Election 2027: ‘आपके बिना सब सूना’, यूपी चुनाव से पहले बृजभूषण सिंह के बयान से सियासी तूफान, सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर कह दी बड़ी बात

New Delhi: UP Election 2027 से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट-बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक बयान सामने आया है, जो तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। किस सवाल पर आया यह बयान दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पत्रकारों ने बृजभूषण शरण सिंह से पूछा कि कांग्रेस प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। इस सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने सीट-बंटवारे का कोई फॉर्मूला बताने के बजाय मुस्कुराते हुए कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है।” बयान का समय भी अहम यह बयान ऐसे समय आया है जब 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक हो रही थी और अखिलेश यादव इसमें शामिल नहीं हुए। कांग्रेस और सपा के बीच सीट-बंटवारे पर बातचीत जारी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सपा और कांग्रेस के बीच सीट-बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है। खबरों के अनुसार कांग्रेस ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है, वहीं अखिलेश यादव ने केवल सीटों की संख्या पर ध्यान देने के बजाय चुनाव जीतने में सक्षम उम्मीदवार उतारने के महत्व पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि गठबंधन को उन निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए जहां मजबूत उम्मीदवार जीत हासिल करने की अच्छी स्थिति में हैं। बृजभूषण और अखिलेश का रिश्ता गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं और गोंडा (कैसरगंज) से पूर्व सांसद हैं। बृजभूषण शरण सिंह और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक विरोध के बावजूद दोनों की ओर से एक-दूसरे पर सीधे तीखे हमले कम ही देखने को मिले हैं। बृजभूषण पहले भी कई मौकों पर अखिलेश यादव की तारीफ कर चुके हैं, वहीं अखिलेश भी उन्हें मुलायम सिंह यादव के करीबी के तौर पर संदर्भित करते रहे हैं। बयान के सियासी मायने बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे अखिलेश यादव की राजनीतिक अहमियत को स्वीकार करने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सपा-कांग्रेस के बीच चल रही सीट-बंटवारे की खींचतान पर भाजपा नेता का तंज मान रहे हैं। हालांकि, बृजभूषण सिंह ने किसी गठबंधन या चुनावी रणनीति को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1. बृजभूषण शरण सिंह ने अखिलेश यादव को लेकर क्या कहा? उन्होंने कहा, “अखिलेश के बिना सब सूना है।” Q2. यह बयान किस सवाल के जवाब में आया? कांग्रेस के 150 से कम सीटों पर न लड़ने के दावे को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में बृजभूषण ने यह बात कही। Q3. बृजभूषण शरण सिंह कौन हैं? वे गोंडा (कैसरगंज) से भाजपा के पूर्व सांसद हैं। Q4. यह बयान किस मौके पर दिया गया? यह बयान दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान आया, उसी दिन जब दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक हो रही थी। Q5. क्या अखिलेश यादव इस बैठक में शामिल हुए? नहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक अखिलेश यादव 30 सितंबर की INDIA गठबंधन बैठक में शामिल नहीं हुए। Q6. सपा-कांग्रेस के बीच सीट-बंटवारे पर अखिलेश यादव का क्या कहना है? उन्होंने कहा है कि सीटों की संख्या से ज़्यादा ज़रूरी उन क्षेत्रों पर ध्यान देना है जहां मजबूत उम्मीदवार जीत की अच्छी स्थिति में हों।
UP Election 2027: दिल्ली में योगी-मोदी मुलाकात, पोस्टर वॉर शुरू, चुनाव आयोग पर सपा के सवाल

New Delhi: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज़ हो रही है। शनिवार को कई मोर्चों पर एक साथ हलचल देखी गई दिल्ली में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की मुलाकात से लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच पोस्टर वॉर तक, और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर छिड़ी बहस तक। एक न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुलाकात को आगामी चुनाव की रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों से जोड़ा जा रहा है। बीजेपी के भीतर यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी राज्य में अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में जुटी है। इसी बीच राज्य में सियासी माहौल गरमाने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच पोस्टर वॉर शुरू हो गया है, जिसमें बीजेपी की ओर से सपा पर निशाना साधा गया है। पार्टियों के बीच यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि दोनों दल अभी से जनता के बीच अपनी उपस्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। संगठनात्मक स्तर पर भी हलचल जारी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी की राज्यसभा सीटों को लेकर बीजेपी के भीतर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन चल रहा है, जिसमें केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सहित कुछ और नामों की चर्चा है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई फाइनल सूची जारी नहीं हुई है, इसलिए इन नामों को अभी संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इसके अलावा एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी ने विधान परिषद (MLC) की 6 सीटों के लिए अपना उम्मीदवार पैनल फाइनल कर लिया है, जो पार्टी की आगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक टकराव का एक और मोर्चा चुनाव आयोग को लेकर खुला है। समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसी क्रम में एक रिपोर्ट के मुताबिक सपा सांसद आदित्य यादव ने बदायूं में मतदाता सूची से नाम कटने और Form-6 से जुड़ी शिकायतों पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग की है। इसके जवाब में ANI की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा की ओर से कहा गया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी को आयोग पर सवाल उठाने से पहले आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, क्योंकि वे स्वयं इसी आयोग की निगरानी में हुए चुनावों में जीत चुके हैं। विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सवाल उठाया जा रहा है कि 2027 में उत्तर प्रदेश में विपक्ष का चेहरा राहुल गांधी होंगे या अखिलेश यादव, जिस पर कांग्रेस और सपा के नेताओं की अलग-अलग राय सामने आई है। इसके साथ ही एक अन्य रिपोर्ट में सपा के भीतर नेतृत्व को लेकर आंतरिक असंतोष की भी बात कही गई है, हालांकि इस पर किसी पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ज़मीनी स्तर पर तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपना जनसंपर्क अभियान शुरू किया है, जिसे पार्टी की 2027 की रणनीति की शुरुआत माना जा रहा है। कुल मिलाकर, यूपी की सियासत अभी से गठबंधन, संगठन और चुनावी मुद्दों को लेकर सक्रिय हो चुकी है, और आने वाले महीनों में यह हलचल और तेज़ होने की उम्मीद है। FAQs Q1. उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव कब होगा? संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 से पहले पूरा होना है, ऐसे में चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने अभी तारीखों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। Q2. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पीएम मोदी से मुलाकात क्यों अहम मानी जा रही है? इस मुलाकात को 2027 के चुनाव की रणनीति और बीजेपी की संगठनात्मक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। Q3. बीजेपी और सपा के बीच पोस्टर वॉर किस बात को लेकर है? रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चुनावी माहौल के बीच शुरू हुआ है, जिसमें बीजेपी की ओर से सपा पर निशाना साधा गया है। Q4. डिंपल यादव ने चुनाव आयोग पर क्या सवाल उठाए? उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा सपा सांसद आदित्य यादव ने बदायूं में वोट कटने और Form-6 से जुड़ी शिकायतों पर स्पष्टीकरण मांगा है। Q5. भाजपा ने चुनाव आयोग विवाद पर क्या जवाब दिया? ANI की रिपोर्ट के अनुसार भाजपा ने कहा कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी को सवाल उठाने से पहले आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, क्योंकि वे उसी आयोग की निगरानी में चुनाव जीत चुके हैं। Q6. 2027 में विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा राहुल गांधी या अखिलेश यादव? इस पर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। कांग्रेस और सपा नेताओं की इस पर अलग-अलग राय सामने आई है। Q7. यूपी की राज्यसभा सीटों को लेकर बीजेपी में क्या चर्चा है? पार्टी में उम्मीदवारों के नामों पर मंथन चल रहा है, जिसमें स्मृति ईरानी सहित कुछ और नाम चर्चा में हैं, लेकिन फाइनल लिस्ट अभी जारी नहीं हुई है।
UP Election 2027: यूपी चुनाव में योगी का साथ देंगे नीतीश कुमार! बेटे निशांत के वाराणसी दौरे से JDU की 60 सीटों पर बड़ी तैयारी

New Delhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में उतरने की अपनी रणनीति को गति दे दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, JDU उत्तर प्रदेश में एनडीए (NDA) के घटक दल के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मदद करने और करीब 60 सीटों पर अपनी चुनावी जमीन तैयार करने के फॉर्मूले पर काम कर रही है। इसी चुनावी अभियान के तहत बिहार के मंत्री और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 25 अक्टूबर को वाराणसी पहुंच रहे हैं, जहाँ पार्टी के एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाना तय माना जा रहा है। ये भी पढ़ें:Anemia महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है? जानिए वजह और बचाव निशांत कुमार का वाराणसी दौरा और JDU का मेगा प्लान प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर को वाराणसी में JDU के प्रस्तावित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से सटे जिलों के कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं का बड़ा जुटान होगा। तारीख और स्थान: 25 अक्टूबर को वाराणसी में JDU का बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा। रणनीतिक उद्देश्य: बिहार-यूपी सीमा से सटे पूर्वांचल के जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और चुनावी माहौल तैयार करना। निशांत कुमार की उपस्थिति: इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार के बेटे व बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के मौजूद रहने की जानकारी सामने आई है। यूपी की 60 सीटों पर JDU का फोकस रिपोर्ट्स के अनुसार, JDU ने उत्तर प्रदेश की लगभग 60 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है, जहाँ पार्टी चुनाव लड़ने की संभावना तलाश रही है। पिछला रिकॉर्ड: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में JDU ने 27 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जहाँ उसे असफलता का सामना करना पड़ा था। इस बार की तैयारी: पूर्वांचल और बिहार से सटे सीमावर्ती जिलों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस बार अधिक सीटों पर संगठनात्मक ढांचा मजबूत किया जा रहा है। बिहार मॉडल का प्रचार: JDU कार्यकर्ता शराबबंदी, सामाजिक सुधार और नीतीश सरकार की उपलब्धियों को यूपी के वोटरों के बीच लेकर जाएंगे।
अखिलेश यादव का EC पर बड़ा आरोप: ‘निष्पक्ष नहीं तो सरकारें असंवैधानिक’ | UP Elections 2027

New Delhi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जिस दौर में चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा था, उस दौरान बनी सरकारें असंवैधानिक हैं. अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था माना जाता है और उससे लोकतंत्र को मजबूत करने की उम्मीद की जाती है. लेकिन जब संस्था के भीतर से ही फैसलों पर आपत्तियां दर्ज हो रही हों, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है. ये भी पढ़ें:Akhilesh Yadav का BJP पर हमला: “अयोध्या के विकास के नाम पर गरीबों के घर तोड़े गए” EC फैसलों पर संस्था के भीतर से ही उठे सवाल अखिलेश यादव ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की. उन्होंने कहा, “इससे यह सवाल खड़ा होता है कि चुनाव आयोग किसकी ओर से काम कर रहा था. चुनाव आयोग बेनकाब हो गया है. यह हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है.” पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया, “अब आप क्या कल्पना कर सकते हैं? क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा होगा? क्या वह पक्षपात रहित रहा होगा?” ‘इस अवधि की सरकारें असंवैधानिक’ अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटनाक्रम का असर इस दौरान बनी सरकारों पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि इस अवधि के दौरान जो सरकारें बनी हैं, वे असंवैधानिक सरकारें हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को “रौंद दिया गया है” और सत्ता में बने रहने के लिए संवैधानिक संस्थाओं के साथ “खिलवाड़” किया जा रहा है. SIR में वोट कटने का आरोप अखिलेश यादव ने मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कथित तौर पर एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से 100 से ज्यादा वोट काटे जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस तरह से पांच से ज्यादा वोट हटाने की अनुमति नहीं है. उन्होंने सवाल किया, “चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की?” अखिलेश ने यह भी दावा किया कि नंद लाल निषाद के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके दावे के अनुसार नंद लाल निषाद को हस्ताक्षर करना ही नहीं आता था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोटों को निशाना बनाया गया. चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले पर भी सवाल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े काम संभालने वाले अधिकारियों में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समूह का एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया. उन्होंने कहा, “इससे बड़ी साजिश क्या हो सकती है? आप पीठासीन अधिकारी किसे बनाएंगे? किन अधिकारियों को भेजेंगे? तबादले और पोस्टिंग किसी आरोप की वजह से हो रहे हैं या चुनाव की तैयारी चल रही है?” सुप्रीम कोर्ट से अपील अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि आयोग के कामकाज से इस बात को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है कि क्या नागरिक अब भी उस पर भरोसा कर सकते हैं. उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, “2022 में उन्होंने हम समाजवादियों को हरवा दिया और अगर यह जारी रहा तो हो सकता है कि वे फिर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की तैयारी कर रहे हों.”
