New Delhi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जिस दौर में चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा था, उस दौरान बनी सरकारें असंवैधानिक हैं.
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था माना जाता है और उससे लोकतंत्र को मजबूत करने की उम्मीद की जाती है. लेकिन जब संस्था के भीतर से ही फैसलों पर आपत्तियां दर्ज हो रही हों, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है.
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EC फैसलों पर संस्था के भीतर से ही उठे सवाल
अखिलेश यादव ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की.
उन्होंने कहा, “इससे यह सवाल खड़ा होता है कि चुनाव आयोग किसकी ओर से काम कर रहा था. चुनाव आयोग बेनकाब हो गया है. यह हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है.”
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया, “अब आप क्या कल्पना कर सकते हैं? क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा होगा? क्या वह पक्षपात रहित रहा होगा?”
‘इस अवधि की सरकारें असंवैधानिक’
अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटनाक्रम का असर इस दौरान बनी सरकारों पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि इस अवधि के दौरान जो सरकारें बनी हैं, वे असंवैधानिक सरकारें हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को “रौंद दिया गया है” और सत्ता में बने रहने के लिए संवैधानिक संस्थाओं के साथ “खिलवाड़” किया जा रहा है.
SIR में वोट कटने का आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कथित तौर पर एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से 100 से ज्यादा वोट काटे जाने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस तरह से पांच से ज्यादा वोट हटाने की अनुमति नहीं है. उन्होंने सवाल किया, “चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की?”
अखिलेश ने यह भी दावा किया कि नंद लाल निषाद के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके दावे के अनुसार नंद लाल निषाद को हस्ताक्षर करना ही नहीं आता था.
उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोटों को निशाना बनाया गया.
चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले पर भी सवाल
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े काम संभालने वाले अधिकारियों में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समूह का एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया.
उन्होंने कहा, “इससे बड़ी साजिश क्या हो सकती है? आप पीठासीन अधिकारी किसे बनाएंगे? किन अधिकारियों को भेजेंगे? तबादले और पोस्टिंग किसी आरोप की वजह से हो रहे हैं या चुनाव की तैयारी चल रही है?”
सुप्रीम कोर्ट से अपील
अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि आयोग के कामकाज से इस बात को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है कि क्या नागरिक अब भी उस पर भरोसा कर सकते हैं.
उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, “2022 में उन्होंने हम समाजवादियों को हरवा दिया और अगर यह जारी रहा तो हो सकता है कि वे फिर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की तैयारी कर रहे हों.”










