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यूपी चुनाव से पहले ताजा सर्वे: अवध-बुंदेलखंड की 137 सीटों में BJP गठबंधन को बढ़त, जानें आंकड़े

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New Delhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अवध और बुंदेलखंड की 137 विधानसभा सीटों को लेकर एक नया सर्वे सामने आया है। News Leader और Matrize के सर्वे के मुताबिक, इन दोनों क्षेत्रों में BJP गठबंधन को कुल 94 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं सपा गठबंधन के खाते में 42 सीटें और बसपा के खाते में एक सीट जाने का अनुमान जताया गया है। यह सर्वे उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से फिलहाल अवध और बुंदेलखंड की 137 सीटों के अनुमान सामने रखता है। इन आंकड़ों को चुनाव परिणाम नहीं, बल्कि सर्वे का अनुमान माना जाना चाहिए। UP Election 2027 अवध की 118 सीटों का क्या अनुमान है? सर्वे के अनुसार, अवध क्षेत्र की 118 विधानसभा सीटों में BJP गठबंधन को 77 सीटें मिलने का अनुमान है। सपा गठबंधन को 40 सीटें, जबकि 1 सीट बसपा के खाते में जाने की संभावना जताई गई है। अवध के आंकड़ों में कुछ प्रमुख जिलों की सीटों को लेकर भी अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ की सभी 9 विधानसभा सीटों पर BJP गठबंधन को बढ़त का अनुमान है। वहीं रायबरेली की 6 सीटों में BJP गठबंधन को 1 और सपा गठबंधन को 5 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। लखीमपुर खीरी में 8 सीटों में से 6 पर BJP गठबंधन और 2 पर सपा गठबंधन का अनुमान है। सीतापुर की 9 सीटों में BJP गठबंधन को 6 और सपा गठबंधन को 3 सीटें मिलने की संभावना रिपोर्ट में बताई गई है। बुंदेलखंड की 19 सीटों पर क्या कहता है सर्वे? बुंदेलखंड की कुल 19 विधानसभा सीटों के लिए सर्वे में BJP गठबंधन को 17 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं सपा गठबंधन को 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चित्रकूट की दो विधानसभा सीटों में BJP गठबंधन और सपा गठबंधन को एक-एक सीट मिलने का अनुमान है। वहीं झांसी की चारों विधानसभा सीटों पर BJP गठबंधन को बढ़त का अनुमान लगाया गया है। 137 सीटों का पूरा गणित सर्वे में अब तक सामने आए अवध और बुंदेलखंड के आंकड़ों को जोड़ने पर तस्वीर इस तरह है: कुल सीटें: 137 BJP गठबंधन: 94 सपा गठबंधन: 42 बसपा: 1 ये आंकड़े News Leader-Matrize सर्वे के अनुमान हैं और वास्तविक चुनाव परिणाम नहीं हैं। ये भी पढ़ें:UP Election 2027: यूपी चुनाव में योगी का साथ देंगे नीतीश कुमार! बेटे निशांत के वाराणसी दौरे से JDU की 60 सीटों पर बड़ी तैयारी किन इलाकों में क्या अनुमान? रिपोर्ट में बहराइच, हरदोई, उन्नाव, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रायबरेली, चित्रकूट और झांसी समेत कई जिलों के सीटवार अनुमान भी दिए गए हैं। बहराइच की 7 सीटों में BJP को 5 और सपा गठबंधन को 2 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है। हरदोई की 8 और उन्नाव की 6 सीटों पर BJP गठबंधन को बढ़त का अनुमान लगाया गया है। सर्वे के आंकड़ों को कैसे समझें? यह ध्यान रखना जरूरी है कि विधानसभा चुनाव अभी हुए नहीं हैं और सर्वे के अनुमान समय के साथ बदल सकते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में News Leader-Matrize सर्वे के sample size, सर्वेक्षण की पूरी methodology और fieldwork period का विवरण स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आंकड़ों की व्याख्या करते समय इसे एक सर्वेक्षण अनुमान के तौर पर ही देखना उचित है। इसके अलावा, 137 सीटों के आंकड़े उत्तर प्रदेश की पूरी 403 सीटों की चुनावी तस्वीर नहीं हैं। बाकी सीटों को लेकर अलग अनुमान सामने आने पर राज्य की व्यापक तस्वीर अलग हो सकती है। आगे क्या? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में और सर्वे तथा क्षेत्रवार अनुमान सामने आ सकते हैं। अंतिम चुनावी नतीजे मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होंगे। फैक्ट-चेक नोट: उपलब्ध स्रोतों में अवध की 118 सीटों के लिए 77 BJP गठबंधन, 40 सपा गठबंधन और 1 बसपा का विवरण दिया गया है। बुंदेलखंड की 19 सीटों में 17 BJP गठबंधन और 2 सपा गठबंधन के अनुमान हैं। इस तरह कुल 137 सीटों का योग पूरा होता है।

Sahil Wakode Death Case: संस्थान ने अपने पुराने बयान पर मांगी माफी

पहले आरोप, अब माफी: साहिल वाकोडे केस में पलटा IIT बॉम्बे

New Delhi: IIT बॉम्बे के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के मामले में संस्थान ने अपने पुराने बयान को लेकर माफी मांगी है। IIT बॉम्बे ने कहा कि घटना की जांच अभी जारी है, ऐसे में साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर किसी तरह की राय बनाना या जानकारी साझा करना उचित नहीं था। क्या हुआ था रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 वर्षीय साहिल रवींद्र वाकोडे शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। बताया जा रहा है कि यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई। IIT बॉम्बे ने क्या कहा संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने 21 सितंबर के पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए कहा, “साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में हमारे पहले के संवाद में शामिल बयानों के लिए हम माफी मांगते हैं।” IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं, और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान के शुरुआती बयान में यह आरोप लगाया गया था कि वाकोडे ने परीक्षा हल करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया, हालांकि उस समय यह भी बताया गया था कि उनके खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। निदेशक के इस्तीफे की खबर को बताया गलत इस बीच, संस्थान ने मीडिया में चल रही उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि IIT बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केडार इस्तीफा देंगे। संस्थान ने एक अलग पोस्ट में स्पष्ट किया, “IIT बॉम्बे के निदेशक ने इस्तीफा नहीं दिया है। हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि संबंधित खबर गलत है।” परिवार के आरोप साहिल के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें यह कदम उठाने से पहले संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, और यह मामला अभी जांच के दायरे में है। महत्वपूर्ण बातें साहिल रवींद्र वाकोडे, 22 वर्षीय BTech द्वितीय वर्ष के छात्र, शुक्रवार शाम हॉस्टल में मृत पाए गए घटना परीक्षा में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए कथित तौर पर पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई IIT बॉम्बे ने 21 सितंबर के अपने पुराने बयान के लिए माफी मांगी संस्थान ने निदेशक के इस्तीफे की खबरों को भी गलत बताया परिवार ने संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं, जिनकी पुष्टि अभी नहीं हुई मामले की आधिकारिक जांच जारी है प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध कर रहे छात्रों ने दावा किया है कि साहिल पर भारी मानसिक दबाव था और उन्हें शैक्षणिक निलंबन की धमकियों का भी सामना करना पड़ा था। इन दावों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। आगे क्या होगा फिलहाल घटना की आधिकारिक जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही परिस्थितियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। इस बीच परिसर में तनाव और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ये भी पढ़ें:UP Election 2027: यूपी चुनाव में योगी का साथ देंगे नीतीश कुमार! बेटे निशांत के वाराणसी दौरे से JDU की 60 सीटों पर बड़ी तैयारी

UP Election 2027: यूपी चुनाव में योगी का साथ देंगे नीतीश कुमार! बेटे निशांत के वाराणसी दौरे से JDU की 60 सीटों पर बड़ी तैयारी

UP Election 2027: यूपी में 60 सीटों पर लड़ेगी JDU!

New Delhi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उत्तर प्रदेश के सियासी मैदान में उतरने की अपनी रणनीति को गति दे दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, JDU उत्तर प्रदेश में एनडीए (NDA) के घटक दल के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मदद करने और करीब 60 सीटों पर अपनी चुनावी जमीन तैयार करने के फॉर्मूले पर काम कर रही है। इसी चुनावी अभियान के तहत बिहार के मंत्री और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार 25 अक्टूबर को वाराणसी पहुंच रहे हैं, जहाँ पार्टी के एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाना तय माना जा रहा है। ये भी पढ़ें:Anemia महिलाओं में ज्यादा क्यों होता है? जानिए वजह और बचाव निशांत कुमार का वाराणसी दौरा और JDU का मेगा प्लान प्राप्त जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर को वाराणसी में JDU के प्रस्तावित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा से सटे जिलों के कार्यकर्ताओं और प्रमुख नेताओं का बड़ा जुटान होगा। तारीख और स्थान: 25 अक्टूबर को वाराणसी में JDU का बड़ा कार्यक्रम आयोजित होगा। रणनीतिक उद्देश्य: बिहार-यूपी सीमा से सटे पूर्वांचल के जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और चुनावी माहौल तैयार करना। निशांत कुमार की उपस्थिति: इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार के बेटे व बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के मौजूद रहने की जानकारी सामने आई है। यूपी की 60 सीटों पर JDU का फोकस रिपोर्ट्स के अनुसार, JDU ने उत्तर प्रदेश की लगभग 60 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है, जहाँ पार्टी चुनाव लड़ने की संभावना तलाश रही है। पिछला रिकॉर्ड: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में JDU ने 27 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जहाँ उसे असफलता का सामना करना पड़ा था। इस बार की तैयारी: पूर्वांचल और बिहार से सटे सीमावर्ती जिलों के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस बार अधिक सीटों पर संगठनात्मक ढांचा मजबूत किया जा रहा है। बिहार मॉडल का प्रचार: JDU कार्यकर्ता शराबबंदी, सामाजिक सुधार और नीतीश सरकार की उपलब्धियों को यूपी के वोटरों के बीच लेकर जाएंगे।

Patanjali Ghee विवाद पर Baba Ramdev का बड़ा बयान: ‘हमारा घी 100% शुद्ध, अफवाह फैलाई जा रही’, बृजभूषण सिंह के आरोपों

Baba Ramdev: Patanjali Ghee 100% शुद्ध, अफवाह फैलाई जा रही

New Delhi: Patanjali Ghee controversy पर योग गुरु और Patanjali Ayurved के सह-संस्थापक Baba Ramdev ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई पेश की. उन्होंने कहा कि Patanjali Ghee 100% शुद्ध है और इसकी गुणवत्ता पर फैलाई जा रही अफवाहें निराधार हैं. ‘पतंजलि घी कई देशों में बिक रहा, किसी टेस्ट में नहीं फैला’ Baba Ramdev ने कहा कि Patanjali Ghee न केवल भारत में, बल्कि कई विदेशी बाजारों में भी बिक रहा है. अब तक किसी भी lab test में यह घी fail नहीं हुआ है. उन्होंने दावा किया कि Patanjali Foods के उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठाना गलत है. उन्होंने कहा, “पतंजलि घी पर अफवाह फैलाई जा रही है, हमारा घी 100% शुद्ध है. हमारी कंपनी कई देशों में उत्पाद बेचती है और कहीं भी किसी टेस्ट में फेल नहीं हुआ.” बृजभूषण सिंह के आरोपों पर पलटवार Baba Ramdev ने BJP सांसद Brijbhushan Sharan Singh के पुराने बयानों पर भी पलटवार किया. उन्होंने कहा कि सिंह ने सुनी-सुनाई बातों के आधार पर Patanjali Ghee के खिलाफ बयान दिया था. साथ ही, उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम कोई नशेड़ी-गंजेड़ी साधु नहीं हैं… हम गांजे की चिलम नहीं लगाते हैं.” ये भी पढ़ें:अखिलेश यादव का EC पर बड़ा आरोप: ‘निष्पक्ष नहीं तो सरकारें असंवैधानिक’ | UP Elections 2027 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा गौरतलब है कि Patanjali Foods की ओर से Brijbhushan Sharan Singh के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा किया गया है. इसके बाद भी बृजभूषण सिंह सार्वजनिक रूप से अपने आरोपों पर कायम रहने की बात कह चुके हैं. अब Baba Ramdev के ताजा बयान के बाद सवाल फिर उठ रहा है क्या 50 करोड़ के मानहानि केस के बीच Brijbhushan Sharan Singh अपने पुराने बयान से पीछे हटे हैं? क्या विवाद खत्म होने की ओर? क्या कानूनी कार्रवाई के दबाव में दोनों पक्षों के बीच विवाद खत्म होने की ओर है? हालांकि, Brijbhushan Singh के बयान बदलने या मानहानि केस के डर से ऐसा करने की बात की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सामने नहीं है. Legal experts का कहना है कि defamation case में दोनों पक्षों के बीच settlement हो सकता है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. Patanjali Ghee की गुणवत्ता पर FSSAI का क्या रुख? Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने अभी तक Patanjali Ghee के खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई या warning जारी नहीं की है. Baba Ramdev ने इस बात का भी जिक्र किया कि अगर कोई regulatory issue होता, तो FSSAI द्वारा action लिया जाता. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs 1.Baba Ramdev ने Patanjali Ghee पर क्या कहा? Baba Ramdev ने कहा कि Patanjali Ghee 100% शुद्ध है और इसकी गुणवत्ता पर फैलाई जा रही अफवाहें निराधार हैं. घी कई देशों में बिक रहा है और किसी टेस्ट में fail नहीं हुआ. 2.Brijbhushan Sharan Singh ने क्या आरोप लगाए थे? Brijbhushan Sharan Singh ने Patanjali Ghee की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे और बाबा रामदेव पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाए थे. 3.Patanjali Foods ने कितने रुपये का मानहानि दावा किया? Patanjali Foods ने Brijbhushan Sharan Singh के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा किया है. 4.क्या FSSAI ने Patanjali Ghee पर कोई कार्रवाई की? नहीं, FSSAI ने अभी तक Patanjali Ghee के खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई या warning जारी नहीं की है.

अखिलेश यादव का EC पर बड़ा आरोप: ‘निष्पक्ष नहीं तो सरकारें असंवैधानिक’ | UP Elections 2027

Akhilesh Yadav: EC पर आरोप: 'सरकारें असंवैधानिक'

New Delhi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग (EC) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जिस दौर में चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा था, उस दौरान बनी सरकारें असंवैधानिक हैं. अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था माना जाता है और उससे लोकतंत्र को मजबूत करने की उम्मीद की जाती है. लेकिन जब संस्था के भीतर से ही फैसलों पर आपत्तियां दर्ज हो रही हों, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है. ये भी पढ़ें:Akhilesh Yadav का BJP पर हमला: “अयोध्या के विकास के नाम पर गरीबों के घर तोड़े गए” EC फैसलों पर संस्था के भीतर से ही उठे सवाल अखिलेश यादव ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की. उन्होंने कहा, “इससे यह सवाल खड़ा होता है कि चुनाव आयोग किसकी ओर से काम कर रहा था. चुनाव आयोग बेनकाब हो गया है. यह हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है.” पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया, “अब आप क्या कल्पना कर सकते हैं? क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा होगा? क्या वह पक्षपात रहित रहा होगा?” ‘इस अवधि की सरकारें असंवैधानिक’ अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटनाक्रम का असर इस दौरान बनी सरकारों पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि इस अवधि के दौरान जो सरकारें बनी हैं, वे असंवैधानिक सरकारें हैं.” उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को “रौंद दिया गया है” और सत्ता में बने रहने के लिए संवैधानिक संस्थाओं के साथ “खिलवाड़” किया जा रहा है. SIR में वोट कटने का आरोप अखिलेश यादव ने मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कथित तौर पर एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से 100 से ज्यादा वोट काटे जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार इस तरह से पांच से ज्यादा वोट हटाने की अनुमति नहीं है. उन्होंने सवाल किया, “चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की?” अखिलेश ने यह भी दावा किया कि नंद लाल निषाद के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके दावे के अनुसार नंद लाल निषाद को हस्ताक्षर करना ही नहीं आता था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोटों को निशाना बनाया गया. चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले पर भी सवाल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े काम संभालने वाले अधिकारियों में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समूह का एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया. उन्होंने कहा, “इससे बड़ी साजिश क्या हो सकती है? आप पीठासीन अधिकारी किसे बनाएंगे? किन अधिकारियों को भेजेंगे? तबादले और पोस्टिंग किसी आरोप की वजह से हो रहे हैं या चुनाव की तैयारी चल रही है?” सुप्रीम कोर्ट से अपील अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि आयोग के कामकाज से इस बात को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है कि क्या नागरिक अब भी उस पर भरोसा कर सकते हैं. उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, “2022 में उन्होंने हम समाजवादियों को हरवा दिया और अगर यह जारी रहा तो हो सकता है कि वे फिर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की तैयारी कर रहे हों.”

स्क्रीन टाइम और जंक फूड बढ़ा रहे PCOS का खतरा: AIMS का बड़ा अध्ययन

किशोरियों में PCOS का खतरा: AIMS स्टडी में खुलासा

New Delhi: मोबाइल फोन पर घंटों समय बिताना, बाहर का खाना ज़्यादा खाना और शारीरिक गतिविधि कम होना आज की किशोरियों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। लेकिन यही आदतें आगे चलकर सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों की ओर से स्कूली बच्चियों की सेहत को लेकर किए जा रहे अध्ययन की शुरुआती रिपोर्ट में हार्मोन से जुड़ी समस्याओं को लेकर चिंता सामने आई है। अध्ययन के शुरुआती आंकड़े क्या कहते हैं एम्स के विशेषज्ञ करीब 4,000 स्कूली बच्चियों पर अध्ययन कर रहे हैं। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, हर 100 में करीब 3 से 8 किशोरियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS की समस्या सामने आई है। वहीं वयस्क महिलाओं में यह आंकड़ा करीब 5 से 18 फीसदी तक बताया गया है यानी उम्र बढ़ने के साथ यह आंकड़ा और भी चिंताजनक हो सकता है। बदलती लाइफस्टाइल बन रही चिंता की वजह एम्स की पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के मुताबिक, किशोरियों में हार्मोन से जुड़ी परेशानियां बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली की भूमिका हो सकती है। ज़्यादा कैलोरी वाला खाना, मीठे और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव और नींद का बिगड़ा हुआ पैटर्न समस्या को बढ़ा सकता है। स्क्रीन टाइम का सीधा असर आज बच्चों और किशोरों के बीच स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है। पढ़ाई और मनोरंजन, दोनों के लिए मोबाइल और दूसरे गैजेट्स पर निर्भरता बढ़ने से शारीरिक गतिविधियां कम हो सकती हैं। ऐसे में खानपान और रोज़ाना की दिनचर्या पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी माना जा रहा है। यह भी पढ़ें:IND vs JPN T20 Match Report: बारिश से प्रभावित 5-5 ओवर के ऐतिहासिक मुकाबले में भारत ने जापान को 2 रन से हराया, अंतिम गेंद तक चला रोमांच PCOS सिर्फ एक वजह से नहीं होता एम्स के एनाटॉमी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. रीमा दादा ने बताया कि PCOS को किसी एक कारण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इसमें आनुवंशिक कारणों के साथ बचपन की परिस्थितियां, हार्मोन, खानपान और जीवनशैली जैसे कई पहलू भूमिका निभा सकते हैं। यानी केवल मोबाइल चलाने या जंक फूड खाने को PCOS की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता कई कारक मिलकर इस समस्या का जोखिम बढ़ाते हैं, यही वजह है कि विशेषज्ञ किशोरियों की पूरी जीवनशैली पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। स्क्रीन टाइम कम करने और एक्टिव रहने पर ज़ोर विशेषज्ञों के मुताबिक, अनियंत्रित स्क्रीन टाइम को कम करना, संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना, तथा नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। डॉक्टर ने नियमित योग को भी उपयोगी बताया है। उनके अनुसार, योग और बेहतर जीवनशैली से अनियमित माहवारी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि PCOS की स्थिति हर किशोरी में अलग हो सकती है, और इसके कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं इसलिए किसी एक सामान्य समाधान की बजाय व्यक्तिगत मूल्यांकन ज़्यादा कारगर माना जाता है। माता-पिता के लिए क्यों अहम है यह अध्ययन एम्स की यह रिपोर्ट माता-पिता और स्कूलों दोनों के लिए एक चेतावनी की तरह है  किशोरावस्था में बनने वाली आदतें आगे चलकर लंबे समय तक सेहत पर असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करने से भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: PCOS क्या है? पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, एक हार्मोनल समस्या जो महिलाओं और किशोरियों में माहवारी संबंधी अनियमितताओं का कारण बन सकती है। Q2: एम्स के अध्ययन में क्या पाया गया? हर 100 में से 3 से 8 किशोरियों में PCOS के लक्षण मिले, जबकि वयस्क महिलाओं में यह दर 5-18% तक है। Q3: PCOS के पीछे मुख्य कारण क्या हैं? आनुवंशिक कारण, बचपन की परिस्थितियां, हार्मोन, खानपान और जीवनशैली इनमें से कोई एक नहीं, बल्कि कई कारक मिलकर भूमिका निभाते हैं। Q4: स्क्रीन टाइम का PCOS से क्या संबंध है? बढ़ता स्क्रीन टाइम शारीरिक गतिविधि घटाता है, जो जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों में से एक है। Q5: इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है? संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, कम स्क्रीन टाइम, और योग को दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। नोट: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है, चिकित्सीय सलाह नहीं। PCOS से जुड़े किसी भी लक्षण के लिए कृपया डॉक्टर से सलाह लें।

Riyadh Houthi Missile Attack: US  को डर, पश्चिम एशिया में तेज़ी से भड़क सकता है संघर्ष

Riyadh Missile Attack: मिडिल ईस्ट में भड़क सकता है युद्ध

New Delhi: यमन युद्ध फिर से शुरू होने के बाद पहली बार हूथी मिसाइलों ने सऊदी अरब की राजधानी Riyadh को निशाना बनाया है। इस घटना के बाद, US ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सऊदी अरब और ईरान के सपोर्ट वाले हूथी विद्रोहियों के बीच चल रहा मिलिट्री झगड़ा तेज़ी से बढ़ सकता है। शनिवार शाम को, Riyadh के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सोशल मीडिया पर कन्फर्म किया कि हूथी विद्रोहियों द्वारा राजधानी की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया गया। गठबंधन के अनुसार, ईरान के सपोर्ट वाले लड़ाकों ने पश्चिमी सऊदी अरब के कई शहरों में आम लोगों और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसमें लाल सागर पर यानबू पोर्ट भी शामिल है, जो सऊदी तेल एक्सपोर्ट का एक बड़ा हब है। शनिवार को Riyadh में दो ज़ोरदार धमाके सुने गए। एयरपोर्ट के पास तेल कंपनी अरामको के एक फ्यूल टैंक में आग लगने की भी खबर मिली। हूथी विद्रोहियों का दावा हूथी मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सारी ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर कहा कि हाल ही में सऊदी हमलों के जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके दो बड़े मिलिट्री ऑपरेशन किए गए। पहले ऑपरेशन में Riyadh में सेंसिटिव टारगेट और दूसरे में यानबू में अरामको की फैसिलिटी को टारगेट किया गया। US की कड़ी चेतावनी और ट्रंप का फैसला US स्टेट डिपार्टमेंट ने साफ कहा, “इस मिलिट्री लड़ाई के तेज़ी से बढ़ने का खतरा है।” इसने मिडिल ईस्ट के बाहर रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को भी इस इलाके की यात्रा पर गंभीरता से दोबारा सोचने की सलाह दी। इस घटनाक्रम के बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप कैंप डेविड में अपना वीकेंड छोटा करने के बाद अचानक व्हाइट हाउस लौट आए। व्हाइट हाउस ने उनके लौटने का कोई ऑफिशियल कारण नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि इसका सीधा संबंध सऊदी अरब पर हुए बड़े हमले से है। यमन में तबाही और लोगों को हटाना हूथी विद्रोहियों के हालिया हमलों ने यमन के बड़े हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं। यूनाइटेड नेशंस (UN) के डेटा के मुताबिक, इस लड़ाई की वजह से 110,000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। हालांकि सऊदी अरब ने हूथी के कंट्रोल वाले इलाकों पर लगातार एयरस्ट्राइक की हैं, लेकिन बागियों की बढ़त रुकी नहीं है।सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है।Riyadh और यानबू जैसे बड़े हब पर हुए हमलों ने सऊदी ऑयल एक्सपोर्ट और शिपिंग पर असर डाला है। पहले से चल रही ग्लोबल इकॉनमिक उथल-पुथल के बीच, ऑयल सप्लाई में रुकावट से इंटरनेशनल मार्केट पर और दबाव पड़ सकता है। एनालिस्ट की राय एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि हूथी हमलों में यह बढ़ोतरी US और उसके साथियों को यह मैसेज देने की कोशिश है कि ईरान के साथ कोई भी लड़ाई पूरे इलाके में एक बड़ी जंग छेड़ सकती है। इसे US के “मैक्सिमम प्रेशर” बैन के जवाब में ईरान की तरफ से एक अजीब जवाबी कार्रवाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: रियाद पर हमला कब हुआ था? जवाब: शनिवार, 19 सितंबर, 2026. यमन युद्ध फिर से शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब सऊदी कैपिटल को सीधे टारगेट किया गया है? शनिवार, 19 सितंबर 2026 को। यमन युद्ध दोबारा शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब सीधे सऊदी राजधानी को निशाना बनाया गया है। Q2: US ने क्या चेतावनी जारी की है? US ने कहा है कि यह लड़ाई तेज़ी से बढ़ सकती है और उसने अपने नागरिकों को इस इलाके की यात्रा करने से बचने या फिर से सोचने की सलाह दी है। Q3: हूथी विद्रोहियों ने क्या दावा किया है?  उन्होंने रियाद में सेंसिटिव जगहों और यानबू में अरामको की फैसिलिटी पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। Q4: प्रेसिडेंट ट्रंप ने क्या एक्शन लिया?  प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कैंप डेविड में अपना वीकेंड छोटा कर दिया और तुरंत व्हाइट हाउस लौट आए। Q5: इस लड़ाई का दुनिया भर में क्या असर हो सकता है?  सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल एक्सपोर्टर है। ये हमले तेल सप्लाई और समुद्री ट्रैफिक में रुकावट डालकर दुनिया की इकॉनमी पर असर डाल सकते हैं।

Prayagraj High Court का बड़ा फैसला: Hindu-Muslim Same-Sex Couple को सुरक्षा देने का आदेश

Prayagraj HC: Same-Sex Couple को सुरक्षा देने का आदेश

New Delhi: Prayagraj High Court ने Uttar Pradesh Police को एक Inter-Faith Same-Sex Couple को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है, यह कहते हुए कि विवाह की कानूनी मान्यता न होना किसी को भी वयस्क नागरिकों की गरिमा या शारीरिक सुरक्षा पर हमला करने का अधिकार नहीं देता। मामला क्या है यह मामला एक Hindu-Muslim जोड़े से जुड़ा है, जिसमें दोनों महिलाएं साथ live-in relationship में रह रही थीं। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों महिलाओं को उनके परिवार वालों से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं, इसलिए उन्हें तत्काल Police Protection की ज़रूरत थी। Justice गौतम चौधरी का फैसला 14 सितंबर को सुनाए गए इस फैसले में Justice Gautam Chowdhary ने दोनों महिलाओं से सीधे बातचीत की और पाया कि दोनों Adults हैं तथा बिना किसी दबाव, डर या अनुचित प्रभाव के स्वेच्छा से साथ रहने का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि यह जोड़ा अपने Family Members या किसी अन्य व्यक्ति के हस्तक्षेप के बिना शांतिपूर्वक साथ रहने के लिए स्वतंत्र है। पुलिस को क्या निर्देश दिया गया कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि अगर इस Live-in Relationship में कोई बाधा उत्पन्न होती है, तो पुलिस को यह Verify करने के बाद  कि दोनों महिलाएं Adults हैं और स्वेच्छा से साथ रह रही हैं  तुरंत उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी होगी। राज्य सरकार की आपत्ति राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि Same-Sex Relationships “समाज के प्राकृतिक और पारंपरिक ढांचे को प्रभावित करते हैं” और इन्हें स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए Supreme Court द्वारा तय किए गए कानून का हवाला दिया। कोर्ट ने Constitution के आधार पर क्या कहा कोर्ट ने कहा कि दो Adult Citizens का अपनी मर्ज़ी से साथ रहने का फैसला एक Fundamental Right है, और Family Members, रिश्तेदारों या समाज के किसी भी वर्ग को उनकी शारीरिक स्वतंत्रता में बाधा डालने या उसका उल्लंघन करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों Petitioners Adult, Educated और अपनी भलाई समझने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए उनकी Police Protection की मांग को अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता। गौरतलब है कि यह फैसला Hindi में सुनाया गया। Uttar Pradesh में यह पहला मामला नहीं Allahabad High Court पहले भी इसी तरह के कई मामलों में Same-Sex Couples के अधिकारों को बरकरार रख चुका है  जैसे 2020 में सुल्ताना मिर्ज़ा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2021 में पूनम रानी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले। ध्यान देने वाली बात यह है कि Uttar Pradesh में Same-Sex Marriage या Civil Union को कानूनी मान्यता नहीं है, लेकिन Live-in Relationship गैरकानूनी नहीं है और Supreme Court पहले ही तय कर चुका है कि Adults को बिना शादी के साथ रहने का Constitutional Right है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Prayagraj High Court ने क्या आदेश दिया? UP Police को एक Hindu-Muslim Same-Sex Couple की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जो Family से धमकियों का सामना कर रहा था। Q2: यह फैसला किसने सुनाया? Justice Gautam Chowdhary ने, 14 सितंबर 2026 को। Q3: पुलिस को किस शर्त के साथ सुरक्षा देने को कहा गया? यह Verify करने के बाद कि दोनों महिलाएं Adults हैं और स्वेच्छा से साथ रह रही हैं। Q4: राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या तर्क दिया था? कि Same-Sex Relationships समाज के पारंपरिक ढांचे को प्रभावित करते हैं और स्वीकार्य नहीं हैं जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। Q5: क्या Uttar Pradesh में Live-in Relationship कानूनी है? हां, Live-in Relationship गैरकानूनी नहीं है, हालांकि Same-Sex Marriage या Civil Union को अभी कानूनी मान्यता नहीं मिली है।

Deepika Padukone और रणवीर सिंह के घर आई दूसरी बेटी, दुआ बनी बड़ी बहन

Deepika-Ranveer के घर आई दूसरी बेटी, दुआ बनी बड़ी बहन

New Delhi: बॉलीवुड के मशहूर कपल Deepika Padukone और रणवीर सिंह के जीवन में एक बार फिर खुशियों की सौगात आई है। शनिवार को दोनों ने अपने दूसरे बच्चे  एक बेटी का स्वागत किया। इस खबर ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि लाखों फैंस के दिलों को खुशी से भर दिया है। कैसे हुआ ऐलान Deepika और रणवीर ने इस खुशखबरी को एक joint Instagram post के ज़रिए फैंस के साथ साझा किया। पोस्ट में नवजात बच्ची के पैरों के नन्हें निशान की तस्वीर थी, जिसके नीचे रणवीर, दीपिका और उनकी बड़ी बेटी दुआ के नाम लिखे थे, साथ ही तारीख 19/9/2026  भी दर्ज थी।   View this post on Instagram   A post shared by दीपिका पादुकोण (@deepikapadukone) दुआ अब बनी बड़ी बहन इस नई बच्ची के आने के साथ ही दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह अब बड़ी बहन बन गई हैं। दुआ का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था, और शुरुआत में कपल ने उन्हें मीडिया की नज़रों से दूर रखा था। नवंबर 2024 में उन्होंने अपनी बेटी का नाम “दुआ” रखने का ऐलान किया था जिसका मतलब होता है “प्रार्थना”, और कपल ने इसे अपनी दुआओं का जवाब बताया था। दूसरी प्रेगनेंसी का ऐलान कैसे हुआ था दीपिका और रणवीर ने इस साल 19 अप्रैल 2026 को अपनी दूसरी प्रेगनेंसी की खबर शेयर की थी  और यह ऐलान बेहद खास तरीके से किया गया था। पोस्ट में छोटी दुआ को एक पॉज़िटिव प्रेगनेंसी टेस्ट किट पकड़े हुए दिखाया गया था, जिसने फैंस के बीच काफी चर्चा बटोरी थी। इसके बाद कपल ने अपने मैटरनिटी फोटोशूट की तस्वीरें भी शेयर की थीं, जिससे फैंस को दीपिका की प्रेगनेंसी जर्नी की एक झलक मिली। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के जीवन में एक बार फिर खुशियों का बेहद खूबसूरत मोड़ आया है. दीपिका के दोबारा बेटी को जन्म देने की इस खबर ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि लाखों फैंस के दिलों को खुशी से भर दिया है#DeepikaPadukone #RanveerSingh #DeepVeer #BabyGirl pic.twitter.com/1q70AFji48 — News26india (@news26indias) September 19, 2026 दुआ के दूसरे जन्मदिन पर भी बेबी बंप दिखा सिर्फ कुछ दिन पहले, 8 सितंबर को जब दुआ ने अपना दूसरा जन्मदिन मनाया, तब भी कपल ने कई तस्वीरें शेयर की थीं जिनमें दीपिका का बेबी बंप साफ नज़र आ रहा था। उस मौके पर रणवीर ने लिखा था, “बेबी दुआ और हमारे दिल, दोनों बड़े हो रहे हैं! आपकी दुआओं के लिए शुक्रिया!” सोशल मीडिया पर बधाइयों का सैलाब इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों और शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू हो गया। फैंस और सेलिब्रिटीज़ दोनों ने कपल को उनकी दूसरी बेटी के आने पर बधाई देते हुए दिल खोलकर प्यार जताया। यह भी पढ़ें:America: 21 साल से कम उम्र वालों को हैंडगन बेचने पर बैन “असंवैधानिक” Justice Department का बड़ा फैसला अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Deepika  के अब कितने बच्चे हैं? दो बड़ी बेटियाँ दुआ, और अब उनकी दूसरी बेटी। Q2: दूसरे बच्चे का जन्म कब हुआ? 19 सितंबर 2026, शनिवार को। Q3: दुआ का जन्म कब हुआ था? 8 सितंबर 2024 को, जिसका नाम नवंबर 2024 में सार्वजनिक किया गया था। Q4: दूसरी प्रेगनेंसी का ऐलान कैसे हुआ था? 19 अप्रैल 2026 को, दुआ को पॉज़िटिव प्रेगनेंसी टेस्ट किट पकड़े हुए दिखाकर। Q5: कपल ने बच्चे का नाम बताया है क्या? अभी तक नई बच्ची का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

America: 21 साल से कम उम्र वालों को हैंडगन बेचने पर बैन “असंवैधानिक” Justice Department का बड़ा फैसला

America: 21 से कम उम्र वालों पर हैंडगन बैन असंवैधानिक

America: America Justice Department ने शुक्रवार को एक नई कानूनी राय जारी करते हुए कहा है कि लाइसेंस प्राप्त हथियार डीलरों को 18 से 20 साल के युवाओं को हैंडगन बेचने से रोकने वाला संघीय कानून असंवैधानिक है और इसे अब लागू नहीं किया जा सकता। फैसले में क्या कहा गया है Justice Department के Office of Legal Counsel की इस राय के मुताबिक, 18 से 20 साल के युवाओं के लिए हैंडगन खरीदना मुश्किल बनाने वाला यह कानून अमेरिकी संविधान के Second Amendment (हथियार रखने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। इस राय का सीधा मतलब है कि Trump प्रशासन अब इस कानून के तहत किसी भी मामले का न तो बचाव करेगा और न ही मुकदमा चलाएगा। America Justice Department का तर्क क्या है Office of Legal Counsel के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल टी. इलियट गाइज़र ने कहा, “18 साल के लोग वोट डाल सकते हैं, जूरी में बैठ सकते हैं, ड्राफ्ट (सैन्य भर्ती) हो सकते हैं, और वयस्कों जैसी आपराधिक सज़ा यहां तक कि मृत्युदंड भी भुगत सकते हैं। संविधान लोगों के हथियार रखने और साथ रखने के अधिकार की रक्षा करता है।” राय में यह भी लिखा गया, “हमारे कानून एक 18 वर्षीय को इतना ‘परिपक्व’ मानते हैं कि उसे ड्राफ्ट किया जा सके, वोट देने दिया जाए, जूरी में बिठाया जाए और मौत की सज़ा तक दी जा सके। ऐसा ही एक 18 वर्षीय 2020 के टोक्यो ओलंपिक में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हुए स्कीट शूटिंग खेल चुका है। यह भी पढ़ें:Costa Serena क्रूज़ पर 4,000 एथलीट! Japan के अनोखे Asian Games प्लान की चर्चा कानूनी लड़ाई का लंबा इतिहास यह मुद्दा अदालतों में लंबे समय से उलझा रहा है, और अलग-अलग अपीलीय अदालतों ने इस पर परस्पर विरोधाभासी फैसले दिए हैं। 5वीं Circuit Court of Appeals (न्यू ऑरलियन्स) ने पहले ही इसे असंवैधानिक करार दिया था, और 3rd तथा 8th Circuits ने भी राज्य-स्तर के इसी तरह के नियमों के खिलाफ फैसला सुनाया है। दूसरी तरफ, 4th Circuit ने पिछले साल संघीय आयु प्रतिबंध को बरकरार रखा था, जबकि 10th और 11th Circuits ने भी राज्य-स्तर की आयु सीमाओं का समर्थन किया है। खास बात यह है कि Supreme Court ने, जो हाल के वर्षों में Second Amendment को लेकर व्यापक रुख अपनाती रही है, पिछले साल इस मुद्दे को सुनने से इनकार कर दिया था। 2022 के बड़े फैसले का असर यह पूरा कानूनी विवाद 2022 के एक ऐतिहासिक Supreme Court फैसले  New York State Rifle & Pistol Association v. Bruen  के बाद और तेज़ हुआ, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि आधुनिक हथियार कानूनों को अमेरिका की “ऐतिहासिक हथियार-नियमन परंपरा” के अनुरूप होना ज़रूरी है। यह प्रतिबंध मूल रूप से 1968 के Omnibus Crime Control and Safe Streets Act के तहत लागू किया गया था। Gun Control समूहों की तीखी प्रतिक्रिया इस फैसले पर Gun Control समर्थक संगठनों ने कड़ी नाराज़गी जताई है। Everytown Law के कार्यकारी निदेशक एरिक टिर्शवेल ने कहा, “देशभर के संघीय अभियोजक अब 18 से 20 साल के युवाओं को अवैध रूप से हैंडगन बेचने वाले डीलरों को जवाबदेह ठहराना बंद कर देंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि DOJ ने उनसे यह सुरक्षा वापस ले ली है। हिंसा के सबसे ज़्यादा जोखिम वाले आयु वर्ग के लिए बनी सुरक्षा को छोड़ देना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति एक खतरनाक कर्तव्य-विमुखता है।” एक दिन पहले भी आया था बड़ा फैसला यह फैसला ऐसे समय आया है जब सिर्फ एक दिन पहले ही यह खबर सामने आई थी कि Justice Department उस कोर्ट फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगा जिसने साइलेंसर, शॉर्ट-बैरल्ड राइफल्स और शॉर्ट-बैरल्ड शॉटगन जैसे हथियारों को National Firearms Act के तहत काफी हद तक डीरेगुलेट कर दिया था , यानी बंदूक कानूनों को लेकर Trump प्रशासन का रुख लगातार ढीला होता जा रहा है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Justice Department ने क्या फैसला दिया है? 18 से 20 साल के युवाओं को हैंडगन बेचने पर रोक लगाने वाला संघीय कानून असंवैधानिक है और इसे लागू नहीं किया जा सकता। Q2: यह फैसला किस आधार पर लिया गया? Second Amendment (हथियार रखने के अधिकार) के उल्लंघन के आधार पर। Q3: क्या इस मुद्दे पर पहले भी कोर्ट के फैसले आए हैं? हां, अलग-अलग Circuit Courts के परस्पर विरोधाभासी फैसले रहे हैं  कुछ ने बैन को असंवैधानिक माना, कुछ ने बरकरार रखा। Q4: Gun Control समूहों की क्या प्रतिक्रिया है? उन्होंने इसे “लापरवाह” और “खतरनाक” फैसला बताया है, जो हिंसा के सबसे ज़्यादा जोखिम वाले आयु वर्ग को असुरक्षित छोड़ देगा। Q5: क्या Supreme Court ने इस मुद्दे पर फैसला दिया है? नहीं, Supreme Court ने पिछले साल इस मुद्दे को सुनने से इनकार कर दिया था।