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Ankita Bhandari के पिता का बड़ा ऐलान: दुष्यंत गौतम की नियुक्ति निरस्त नहीं हुई तो देशभर में होगा आंदोलन

Ankita Bhandari के पिता का बड़ा ऐलान: दुष्यंत गौतम की नियुक्ति निरस्त नहीं हुई तो देशभर में होगा आंदोलन

New Delhi: उत्तराखंड के चर्चित हत्याकांड के मामले में इंसाफ की गुहार लेकर दिल्ली पहुंचे अंकिता भंडारी के पिता ने गुरुवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सिक्किम के राज्यपाल के पद से दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति निरस्त नहीं हुई तो उत्तराखंड समेत देश में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बेटी के लिए एक बार फिर इंसाफ की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति निरस्त नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन के लिए उन्हें कांग्रेस और सपा समेत कई राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है। ये भी पढ़ें: Viral Fever & Cough: Flu से बचने के लिए अपनाएं ये 7 जरूरी उपाय अंकिता भंडारी के पिता ने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात की और हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि इंसाफ के लिए वे अंतिम क्षणों तक लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति निरस्त न होने पर पूरे देश में आंदोलन करने के मुद्दे पर उन्हें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी समेत तमाम दलों का पूरा समर्थन मिला है। अंकिता भंडारी के माता-पिता ने कहा कि जब तक उन्हें पूरा इंसाफ नहीं मिलता, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने साफ कहा कि दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रद्द होने तक वे किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेंगे।

Ankita Bhandari के माता-पिता इंडिया गेट पर हिरासत में लिए गए; मां बोलीं- “भूख हड़ताल पर बैठेंगे”

“भूख हड़ताल पर बैठेंगे” Ankita Bhandari के माता-पिता हिरासत में लिए गए

New Delhi: उत्तराखंड हत्याकांड पीड़िता अंकिता भंडारी के माता–पिता को दिल्ली के इंडिया गेट के पास चल रहे धरने के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। गुरुवार तड़के करीब 4 बजे हुई कार्रवाई के बाद उन्हें करीब 5 बजे रिहा कर दिया गया। अंकिता के माता–पिता पूर्व उत्तराखंड भाजपा प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। परिवार की मांग है कि जब तक अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी कनेक्शन की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनकी नियुक्ति रोक दी जाए। हिरासत के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी ने कहा कि वे न्याय की मांग के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “अगर हमें यहां बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी, तो हम अपने ही घर में भूख हड़ताल पर बैठेंगे।” अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने केंद्र सरकार को दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेताया कि अगर मांग पूरी नहीं हुई, तो पूरे देश में लोग सड़कों पर उतरेंगे। ये भी पढ़ें:Zelenskyy ने US की Starlink restriction पर कहा ‘betrayed’, रूस के missile-drone हमले में 6 लाख लोग बिजलीहीन, Nord Stream sabotage trial शुरू   View this post on Instagram   राहुल–प्रियंका ने किया समर्थन धरना बुधवार शाम इंडिया गेट के पास शुरू हुआ था। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा ने धरने पर पहुंचकर अंकिता के माता–पिता से मुलाकात की और उनकी मांग का समर्थन किया। दिल्ली पुलिस ने रातभर चले प्रदर्शन के बाद अंकिता के माता–पिता के अलावा कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की और आरोप लगाया कि न्याय मांग रहे प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। क्या है Ankita Bhandari केस? अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या के बाद पूरे देश में गुस्सा भड़का था। प्रभावशाली लोगों से जुड़े आरोपों के चलते यह मामला अब भी चर्चा में है और परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। अंकिता के परिवार ने साफ कहा है कि जब तक उन्हें पूरा न्याय नहीं मिलता, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे | FAQs अंकिता भंडारी के माता–पिता को क्यों हिरासत में लिया गया? वे सिक्किम राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के विरोध में इंडिया गेट पर धरना दे रहे थे। रातभर के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। अंकिता भंडारी के माता–पिता कब रिहा हुए? उन्हें गुरुवार तड़के करीब 4 बजे हिरासत में लिया गया था और करीब 5 बजे रिहा कर दिया गया। अंकिता भंडारी के परिवार की मुख्य मांग क्या है? परिवार चाहता है कि अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी कनेक्शन की सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति रोक दी जाए। अंकिता भंडारी की मां ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि अगर इंडिया गेट पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली, तो वे घर पर भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

UPI MDR पर दिवाली तक राहत: NPCI ने टाला प्रस्तावित 0.4% चार्ज, 15 अक्टूबर से नहीं होगा लागू

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New Delhi: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को कहा कि चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रक्रिया को दिवाली के तुरंत बाद तक टाल दिया गया है। यानी ₹2,000 से ऊपर के संबंधित भुगतान फिलहाल बिना MDR के जारी रहेंगे। NPCI ने क्या कहा NPCI के आधिकारिक बयान के मुताबिक, UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमिटी ने त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। बयान में कहा गया कि MDR अब दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा और इसकी तारीख अलग से बताई जाएगी। अभी नई तारीख घोषित नहीं हुई है। पहले क्या तय था रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी। इसमें ₹2,000 से ज़्यादा के कुछ चुनिंदा P2M भुगतान पर 0.40% MDR लगना था। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि ₹75,000 या उससे ज़्यादा के लेन-देन पर अधिकतम MDR ₹300 तय किया गया था। व्यापारी संगठन लगातार इसे टालने की मांग कर रहे थे। MDR क्या है और इसे कौन भरता है MDR वह शुल्क है जो दुकानदार या व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर देना होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे में यह चार्ज व्यापारी से लिया जाना था, ग्राहक से नहीं। इस ढांचे में ऐसे छोटे व्यापारियों को छूट देने की बात भी रिपोर्ट हुई है, जिनकी महीने की कुल UPI आमदनी ₹1 लाख तक है। इन ब्योरों पर NPCI का विस्तृत बयान नई तारीख के साथ आने की उम्मीद है। पुरानी व्यवस्था क्या थी वित्त मंत्रालय के पुराने स्पष्टीकरण के मुताबिक, जनवरी 2020 से P2M UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लिया जा रहा है। इसी वजह से इन भुगतानों पर GST भी लागू नहीं होता, क्योंकि GST MDR जैसे शुल्कों पर लगता है। किसे मिली राहत फैसले का सीधा फायदा उन दुकानदारों को है जो त्योहारी सीजन में ज़्यादा बिक्री की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें बड़े भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क की चिंता फिलहाल नहीं करनी होगी। आम ग्राहकों के लिए UPI भुगतान का तरीका वैसा ही रहेगा। आगे क्या होगा MDR रद्द नहीं हुआ है, सिर्फ टला है। दिवाली के बाद इसे लागू करने की तारीख NPCI अलग से घोषित करेगा। तब तक यह साफ नहीं है कि प्रस्तावित दरों या शर्तों में कोई बदलाव होगा या नहीं।

CJP Protest: ममता बनर्जी समेत TMC नेता हिरासत में, जंतर-मंतर कूच से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा

CJP Protest: ममता बनर्जी समेत TMC नेता हिरासत में,

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन से पहले शनिवार को दिल्ली में कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें TMC प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के कुछ अन्य नेता भी शामिल हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था। ममता बनर्जी की हिरासत कैसे हुई रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू इलाके में उनके दिल्ली आवास के बाहर से हिरासत में लिया गया। TMC नेता साकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी और पांच अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस और CRPF ने एक कैदी वैन में हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स में डोला सेन और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य TMC नेताओं के भी हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। हिरासत के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि लड़ाई जारी रहेगी। CJP के शीर्ष नेताओं को भी हिरासत में लिया गया ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद CJP ने घोषणा की कि संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। बताया गया है कि दिपके ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते पहले से एक वीडियो रिकॉर्ड कर रखा था। द फेडरल की रिपोर्ट में ध्रुव राठी के भी हिरासत में लिए जाने का ज़िक्र है। धरने पर बैठीं और विरोध प्रदर्शन कर रहीं ममता बनर्जी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है ​#MamataBanerjee #DelhiPolice #JantarMantar #TMC #ElectionCommission #BreakingNews https://t.co/X2dpMMhEo6 — News26india (@news26indias) October 10, 2026 दिल्ली में भारी सुरक्षा द फेडरल के मुताबिक, प्रदर्शन के मद्देनज़र दिल्ली में करीब 25,000 पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए। आउटलुक की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था की “गंभीर” चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, और करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वकीलों की हिरासत पर विवाद रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे कुछ वकीलों को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इसकी निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। आउटलुक की लाइव अपडेट्स में बताया गया है कि वकीलों की रिहाई के लिए CJI ने दखल दिया। विपक्ष की प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर “ब्लैक इमरजेंसी” लगाने का आरोप लगाया। पार्टी विधायक गोपाल राय ने दावा किया कि मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और ट्रेनें रद्द की गईं। इन आरोपों पर सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से हमें कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। महत्वपूर्ण बातें CJP का “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आयोजित था ममता बनर्जी और TMC के कुछ नेता रिपोर्ट्स के मुताबिक हिरासत में लिए गए CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका भी हिरासत में लिए गए दिल्ली में करीब 25,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी SCBA ने वकीलों की हिरासत की निंदा की आगे क्या होगा हिरासत में लिए गए नेताओं पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर हमें दिल्ली पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं मिला है। CJP ने कहा है कि अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी रहेगा। स्थिति साफ होने पर खबर अपडेट की जाएगी।

Deoghar News: देवघर में चोरों ने पूरा ATM ही उड़ा लिया, गैस कटर से काटकर कार में लादकर हुए फरार

Deoghar News

Deoghar: शहर के नगर थाना क्षेत्र स्थित नंदन पहाड़ के पास चोरों ने एसबीआई का पूरा ATM चोरी कर ले जाने की वारदात को अंजाम दिया है। यह घटना अहले सुबह हुई बताई जा रही है। Deoghar में कैसे हुई वारदात एक रिपोर्ट के मुताबिक बदमाशों ने पहले ATM का शटर तोड़ा। इसके बाद गैस कटर की मदद से पूरी मशीन को काटकर बाहर निकाला गया। मशीन को रस्सी से बांधकर चोर करीब 500 मीटर तक सड़क पर घसीटते हुए ले गए, और बाद में एक सुनसान जगह पर उसे कार में लादकर मौके से फरार हो गए। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगालकर बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस वारदात में कितने लोग शामिल थे और चोरी की गई मशीन में कितनी रकम मौजूद थी। सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी तक पुलिस की ओर से किसी गिरफ्तारी या चोरी गई रकम की पुष्टि नहीं हुई है। FAQs Q1.Deoghar में ATM चोरी कहां हुई? यह वारदात नगर थाना क्षेत्र के नंदन पहाड़ के पास स्थित एसबीआई ATM में हुई। Q2. चोरों ने ATM कैसे चुराया? बदमाशों ने पहले शटर तोड़ा, फिर गैस कटर से मशीन को काटकर निकाला और रस्सी से बांधकर घसीटते हुए ले गए। Q3. मशीन को कैसे ले गए चोर? करीब 500 मीटर तक घसीटने के बाद उन्होंने मशीन को एक सुनसान जगह पर कार में लादा और फरार हो गए। Q4. क्या पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया है? अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर जांच कर रही है। Q5. ATM में कितनी रकम थी? अभी तक यह स्पष्ट नहीं है, पुलिस इसका पता लगाने में जुटी है।

उपराष्ट्रपति के देवघर दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट, DC-SP ने कसी कमर

उपराष्ट्रपति के देवघर दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट

Deoghar: उपराष्ट्रपति देवघर दौरा को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित इस दौरे से पहले सोमवार को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था की समीक्षा की। प्रशासन का फोकस सिर्फ़ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसे भी ध्यान में रखा गया है। अधिकारियों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी तैयारियां समय पर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। AIIMS दीक्षांत समारोह से हिंदुजा अस्पताल तक का कार्यक्रम उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के देवघर दौरे का प्रमुख कार्यक्रम AIIMS देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होना है। इसके बाद उनके दर्दमारा स्थित पीडी हिंदुजा अस्पताल पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जहां भारतीय सेना की ओर से आयोजित दो दिवसीय सैन्य संपर्क मेले और मेडिकल कैंप (9-10 अक्टूबर) के समापन कार्यक्रम में वे शामिल होंगे। इस आयोजन में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ युवाओं को सेना में भर्ती प्रक्रिया और अवसरों की जानकारी देने की तैयारी है। आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी भी प्रस्तावित है। ये भी पढ़ें:उपराष्ट्रपति के देवघर दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट, DC-SP ने कसी कमर निशिकांत दुबे का बयान गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने इस आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ़ उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा और समाज से जुड़ने का प्रयास है। दुबे के मुताबिक कार्यक्रम में सेना के अधिकारी और जवान बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे, और युवाओं को सेना में भर्ती प्रक्रिया व योग्यता से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। DC-SP की बैठक में सुरक्षा और ट्रैफिक पर फोकस सोमवार की समीक्षा बैठक में उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। बैठक में एसपी प्रवीण पुष्कर, डीडीसी पीयूष सिन्हा, एसडीओ रवि कुमार, जिला नजारत उपसमाहर्ता मुकेश कुमार, एसडीपीओ कुलदीप कुमार और ट्रैफिक डीएसपी लक्ष्मण प्रसाद सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। FAQs Q1. उपराष्ट्रपति देवघर कब आ रहे हैं? उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का देवघर दौरा 10 अक्टूबर को प्रस्तावित है। Q2. उपराष्ट्रपति देवघर में किन कार्यक्रमों में शामिल होंगे? वे AIIMS देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह और पीडी हिंदुजा अस्पताल में सेना के सैन्य संपर्क मेले के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। Q3. हिंदुजा अस्पताल में होने वाला सैन्य संपर्क मेला क्या है? यह भारतीय सेना द्वारा 9-10 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय मेला है, जिसमें पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, युवाओं के लिए सेना भर्ती की जानकारी और हथियारों की प्रदर्शनी शामिल है। Q4. निशिकांत दुबे ने इस कार्यक्रम को लेकर क्या कहा? उन्होंने इसे सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ते हुए युवाओं को सेना से जोड़ने और देशभक्ति की भावना जगाने का अवसर बताया। Q5. प्रशासन ने दौरे की तैयारियों के लिए क्या किया है? उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की समीक्षा की गई है।

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग, CM योगी को लिखा गया पत्र

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग, CM योगी को लिखा गया पत्र

मथुरा/वृंदावन: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज सुरक्षा को लेकर एक बड़ी मांग सामने आई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ श्रेणी की सुरक्षा देने की मांग की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में इस संबंध में मुख्यमंत्री को दो पत्र भेजे जा चुके हैं।  प्रेमानंद महाराज सुरक्षा मांग की वजह क्या बताई गई पत्र में दावा किया गया है कि केलिकुंज आश्रम के भीतर दो गुटों के बीच विवाद है, और इस गुटबाजी से महाराज जी को खतरा हो सकता है। फलाहारी ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, आश्रम के सेवादारों के पुलिस वेरिफिकेशन और लगाए गए आरोपों की जांच की भी मांग की है। शिष्य की मौत का मामला यह मांग आश्रम से जुड़ी एक दुखद घटना के बाद सामने आई है। 25 सितंबर 2026 को महाराज जी के शिष्य दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण), उम्र 25 वर्ष, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार वे गुरु कृपा कुंज (वराह घाट के पास स्थित भवन, जहां प्रेमानंद के शिष्य रहते हैं) की चौथी मंजिल से गिर गए थे। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अब तक तीन दर्जन से ज़्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है, हालांकि किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। मृतक के परिवार ने आश्रम प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के भाई और जीजा का आरोप है कि आश्रम ने उन्हें घटना की सही जानकारी नहीं दी और CCTV फुटेज भी उपलब्ध नहीं कराई। आश्रम ट्रस्ट की ओर से जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही गई है। लापता शिष्यों का मामला एक रिपोर्ट के अनुसार आश्रम से जुड़े कुछ और साधकों के लापता होने के भी आरोप लगे हैं। हालांकि इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जुलाई से लापता बताया जा रहा एक 17 वर्षीय शिष्य हाल ही में बरसाना के एक अन्य आश्रम में मिल गया है। बाकी लापता बताए गए लोगों को लेकर अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन दावों को सावधानी से लिया जाना चाहिए। प्रशासन का रुख सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और आश्रम से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से Z+ सुरक्षा देने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर आप या आपके किसी परिचित को मानसिक तनाव या निराशा महसूस हो रही है, तो Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है। ये भी पढ़ें:OpenAI के सेफ्टी कर्मचारी का इस्तीफा, कहा- ‘ट्रायल एंड एरर का समय अब खत्म हो चुका है’ FAQs Q1. प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग किसने की? श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने यह मांग CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर की है। Q2. यह मांग क्यों उठी? पत्र में आश्रम के भीतर दो गुटों के विवाद और शिष्य की संदिग्ध मौत के बाद महाराज जी को खतरे की आशंका जताई गई है। Q3. दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण) की मौत कैसे हुई? एक रिपोर्ट के अनुसार 25 सितंबर को वे गुरु कृपा कुंज भवन की चौथी मंजिल से गिर गए थे। मामला संदिग्ध है और पुलिस जांच कर रही है। Q4. क्या आश्रम से कोई शिष्य लापता हुआ है? कुछ आरोप लगे हैं, लेकिन इनमें से एक मामले में जुलाई से लापता बताए गए शिष्य के बरसाना में मिलने की बात सामने आई है। बाकी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Q5. क्या प्रेमानंद महाराज को Z+ सुरक्षा मिल गई है? नहीं, अभी तक प्रशासन की ओर से इस पर कोई औपचारिक फैसला नहीं आया है।

13 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से छूटे, अब चुनाव आयोग ने शुरू की ‘लेफ्ट आउट’ वोटर ड्राइव

EC वोटर ड्राइव

नई दिल्ली: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम छूट जाने के बाद चुनाव आयोग ने EC वोटर ड्राइव की शुरुआत की है, ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में जोड़ा जा सके। किन राज्यों में कितने नाम छूटे एक रिपोर्ट के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रकाशित ड्राफ्ट रोल्स में से कुल करीब 13 करोड़ नाम छूटे हैं। बिहार में 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में करीब 65 लाख नाम छूटे थे, जिसमें कुल 7.24 करोड़ मतदाता सूचीबद्ध हुए थे। उत्तर प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हो सके, जिससे राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 12.55 करोड़ मतदाताओं तक पहुंची। दिल्ली में 47.56 लाख नाम छूटे, जिससे ड्राफ्ट रोल 1.45 करोड़ से घटकर 97.53 लाख मतदाताओं तक रह गया। मुख्य चुनाव आयुक्त का निर्देश एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को यह विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश लिखित पत्र और राज्यों के CEO के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस, दोनों के ज़रिए दिया गया। ये भी पढ़ें:Brazil Election: सर्वे को झुठलाकर आगे निकले फ्लाविओ Bolsonaro, अब लूला से रनऑफ में टक्कर अभियान में क्या किया जाएगा चुनाव आयोग के पत्र के मुताबिक, “आयोग ने छूटे हुए और पहली बार/युवा मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।” अधिकारियों को उन लोगों की सूची तैयार करने को कहा गया है जिनके नाम हटाए गए हैं, और ऐसे मतदाताओं की पहचान करने को कहा गया है जो छूट गए हों। ऐसे मतदाताओं को Form 6 भरने में मदद की जाएगी ताकि उनका नाम दोबारा जोड़ा जा सके। आयोग का रुख चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट रोल में किसी नाम का न होना और उस नाम का डिलीट होना, दोनों अलग बातें हैं। आयोग के मुताबिक मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और जिस भी व्यक्ति का नाम अभी तक सूची में नहीं है या जिसका नाम हट गया है, वह किसी भी समय पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। क्यों अहम है यह मामला एक रिपोर्ट के अनुसार वोटर लिस्ट से नाम छूटने का असर राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से विपक्षी दल लगातार छूटे हुए नामों को वापस जोड़ने की मांग कर रहे हैं। FAQs Q1. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कुल कितने नाम छूटे हैं? 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल करीब 13 करोड़ नाम छूटे हैं। Q2. उत्तर प्रदेश में कितने नाम छूटे? उत्तर प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हो सके। Q3. EC वोटर ड्राइव किस लिए शुरू की गई है? यह ड्राइव छूटे हुए और पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं को दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए शुरू की गई है। Q4. छूटे मतदाता दोबारा नाम कैसे जुड़वा सकते हैं? उन्हें Form 6 भरकर आवेदन करना होगा, जिसमें अधिकारी मदद करेंगे। Q5. यह अभियान किन राज्यों में चलेगा? यह अभियान 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा, जहां SIR प्रक्रिया हो चुकी है। Q6. चुनाव आयोग का इस पर क्या कहना है? आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट रोल में नाम न होना डिलीशन नहीं है, और पात्र मतदाता कभी भी पंजीकरण के लिए आवेदन

Sahil Wakode Death Case: संस्थान ने अपने पुराने बयान पर मांगी माफी

पहले आरोप, अब माफी: साहिल वाकोडे केस में पलटा IIT बॉम्बे

New Delhi: IIT बॉम्बे के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की मौत के मामले में संस्थान ने अपने पुराने बयान को लेकर माफी मांगी है। IIT बॉम्बे ने कहा कि घटना की जांच अभी जारी है, ऐसे में साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर किसी तरह की राय बनाना या जानकारी साझा करना उचित नहीं था। क्या हुआ था रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 वर्षीय साहिल रवींद्र वाकोडे शुक्रवार शाम अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। बताया जा रहा है कि यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई। IIT बॉम्बे ने क्या कहा संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने 21 सितंबर के पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए कहा, “साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में हमारे पहले के संवाद में शामिल बयानों के लिए हम माफी मांगते हैं।” IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं, और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान के शुरुआती बयान में यह आरोप लगाया गया था कि वाकोडे ने परीक्षा हल करने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया, हालांकि उस समय यह भी बताया गया था कि उनके खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। निदेशक के इस्तीफे की खबर को बताया गलत इस बीच, संस्थान ने मीडिया में चल रही उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि IIT बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केडार इस्तीफा देंगे। संस्थान ने एक अलग पोस्ट में स्पष्ट किया, “IIT बॉम्बे के निदेशक ने इस्तीफा नहीं दिया है। हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि संबंधित खबर गलत है।” परिवार के आरोप साहिल के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें यह कदम उठाने से पहले संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, और यह मामला अभी जांच के दायरे में है। महत्वपूर्ण बातें साहिल रवींद्र वाकोडे, 22 वर्षीय BTech द्वितीय वर्ष के छात्र, शुक्रवार शाम हॉस्टल में मृत पाए गए घटना परीक्षा में मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए कथित तौर पर पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद हुई IIT बॉम्बे ने 21 सितंबर के अपने पुराने बयान के लिए माफी मांगी संस्थान ने निदेशक के इस्तीफे की खबरों को भी गलत बताया परिवार ने संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए हैं, जिनकी पुष्टि अभी नहीं हुई मामले की आधिकारिक जांच जारी है प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध कर रहे छात्रों ने दावा किया है कि साहिल पर भारी मानसिक दबाव था और उन्हें शैक्षणिक निलंबन की धमकियों का भी सामना करना पड़ा था। इन दावों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। आगे क्या होगा फिलहाल घटना की आधिकारिक जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही परिस्थितियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। इस बीच परिसर में तनाव और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ये भी पढ़ें:UP Election 2027: यूपी चुनाव में योगी का साथ देंगे नीतीश कुमार! बेटे निशांत के वाराणसी दौरे से JDU की 60 सीटों पर बड़ी तैयारी

दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल, 12 दिनों में 4 मामले सामने आए

Delhi में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, 12 दिनों में 4 मामले

New Delhi: दिल्ली एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा को लेकर मुश्किल सवालों का सामना कर रही है। सिर्फ़ 12 दिनों में नाबालिगों से जुड़े चार मामले सामने आए हैं, जिससे शहर में चिंता और गुस्से का माहौल है। इन घटनाओं ने न सिर्फ़ पीड़ित परिवारों को चौंका दिया है, बल्कि पूरी राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है। Delhi में बच्चों की सुरक्षा फिर सुर्खियों में इन घटनाओं ने परिवारों को चिंता में डाल दिया है, और बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। हालांकि हर मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है, लेकिन नाबालिगों से जुड़ी घटनाओं की बार-बार रिपोर्ट आने से डर और गुस्सा दोनों पैदा हो गया है। इन घटनाओं पर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है, और कई नागरिक संगठनों ने प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है। Delhi के अलग-अलग हिस्सों से मामले रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में चार नाबालिग लड़कियों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया है। जिन मामलों पर खास ध्यान गया है, उनमें से एक कालकाजी मंदिर इलाके के पास एक नाबालिग लड़की का है, जहां पुलिस का कहना है कि आरोपी पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों से मिले थे। इस मामले की अभी भी जांच चल रही है। एक और मामला बाहरी दिल्ली में एक टीनएज लड़की की मौत और कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, जिसके बाद पुलिस ने संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की है। बाकी दो मामलों की जांच भी अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में चल रही है, और पुलिस ने अभी तक उनसे जुड़ी सभी डिटेल्स जारी नहीं की हैं, क्योंकि जांच एक सेंसिटिव फेज में है। यह भी पढ़ें:Mirabai Chanu एशियन गेम्स सिल्वर: 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में लौटी देश की गुड न्यूज़ परिवारों ने कड़ी सुरक्षा की मांग की इन घटनाओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को सामने लाया है। माता-पिता और स्थानीय निवासियों ने नाबालिगों से जुड़े मामलों में रोकथाम के उपायों, मॉनिटरिंग सिस्टम और तेजी से कार्रवाई की जरूरत पर सवाल उठाए हैं। कई माता-पिता का कहना है कि स्कूलों और आसपास की सार्वजनिक जगहों पर CCTV कवरेज बढ़ाने, गश्त तेज करने और स्थानीय हेल्पलाइन नंबर देकर और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्टिंग को बढ़ावा देकर प्रचार बढ़ाने की जरूरत है। चाइल्ड सेफ्टी एक्सपर्ट्स ने लगातार जागरूकता, तुरंत रिपोर्टिंग सिस्टम और बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों को सख्ती से लागू करने के महत्व पर जोर दिया है। पुलिस जांच जारी है Delhi पुलिस इन सभी मामलों की जांच कर रही है और मौजूद सबूतों के आधार पर कानूनी कार्रवाई कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि हर मामले में तथ्य पता लगाने के लिए जांच जारी है। पुलिस ने यह भी कहा कि स्कूलों और रिहायशी इलाकों के आसपास सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इलाके में अतिरिक्त पेट्रोलिंग टीमें तैनात की जा रही हैं। एक्सपर्ट्स की राय: सिर्फ कानून काफी नहीं हैं बच्चों के अधिकारों के क्षेत्र के एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि सिर्फ सख्त कानून बनाना काफी नहीं है असली चुनौती उन्हें असरदार तरीके से लागू करने में है। उनका कहना है कि स्कूलों में बच्चों को “गुड टच-बैड टच” जैसे विषयों पर रेगुलर जानकारी देना, माता-पिता और टीचरों के बीच खुली बातचीत बनाए रखना, और कम्युनिटी लेवल पर सतर्कता को बढ़ावा देना ये सभी उपाय मिलकर लंबे समय तक चलने वाला बदलाव ला सकते हैं। दिल्ली का चाइल्ड सेफ्टी डेटा और बड़ी तस्वीर Delhi में बच्चों के खिलाफ अपराधों पर समय-समय पर बहस उठती रही है, और हर बार यह एक बड़े सवाल पर आकर रुक जाती है क्या शहर का मौजूदा सिक्योरिटी सिस्टम बच्चों की सुरक्षा के लिए वाकई काफी है? हाल की इन घटनाओं ने बच्चों को गलत व्यवहार से बचाने और पब्लिक जगहों को सुरक्षित बनाने के बारे में बातचीत को फिर से शुरू कर दिया है। कई परिवारों के लिए, ये घटनाएं याद दिलाती हैं कि नाबालिगों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए आज भी कड़े बचाव के उपाय, जागरूकता और कम्युनिटी का सपोर्ट उतना ही ज़रूरी है जितना पहले हुआ करता था। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: हाल ही में Delhi में कितने मामले सामने आए हैं? 12 दिन के समय में नाबालिगों से जुड़े चार अलग-अलग मामले सामने आए हैं। Q2: पुलिस इन मामलों में क्या कार्रवाई कर रही है? सभी मामलों की जांच चल रही है, और मौजूद सबूतों के आधार पर संदिग्धों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है, साथ ही और पेट्रोलिंग भी की जा रही है। Q3: परिवार और रहने वाले क्या मांग कर रहे हैं? बेहतर सर्विलांस सिस्टम (जैसे CCTV), तेज़ कार्रवाई, और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए कड़े बचाव के उपाय। Q4: बच्चों की सुरक्षा के लिए एक्सपर्ट क्या सुझाव देते हैं? जागरूकता बढ़ाना, तुरंत रिपोर्ट करने का तरीका बनाना, स्कूलों में रेगुलर जागरूकता प्रोग्राम चलाना, और मौजूदा बच्चों की सुरक्षा कानूनों को सख्ती से लागू करना। Q5: क्या सभी मामलों में जांच पूरी हो गई है? नहीं, हर मामले में जांच अभी भी चल रही है और तथ्य पता लगाए जा रहे हैं।