Rajya Sabha की 11 सीटों पर चुनाव का ऐलान, UP-उत्तराखंड में बड़ा सियासी घमासान तय

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में Rajya Sabha की 11 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों का ऐलान कर दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 सीटें, उत्तराखंड की एक सीट, और पश्चिम बंगाल में एक सीट पर उपचुनाव शामिल है। इस ऐलान के साथ ही कई राज्यों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। कब जारी होगी Rajya Sabha की अधिसूचना चुनाव आयोग के मुताबिक, Rajya Sabha चुनावों की अधिसूचना 29 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे, जबकि मतदान और मतगणना दोनों 16 अक्टूबर को होंगे। तीन राज्यों में होंगे चुनाव यह चुनाव उन सीटों के लिए हो रहे हैं जहां सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। देश की सबसे बड़ी विधानसभा वाले राज्य उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा 10 Rajya Sabha सीटों पर चुनाव होंगे। उत्तराखंड में एक सीट के लिए मतदान होगा, जबकि पश्चिम बंगाल में एक खाली सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। राज्यसभा भारत की संसदीय व्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है और लोकसभा के साथ मिलकर विधायी प्रक्रिया में हिस्सा लेती है। यह भी पढ़ें:Haridwar में गले में 7 फीट का अजगर लटकाकर घूमता दिखा युवक, वन विभाग ने शुरू की जांच पूरा चुनावी कार्यक्रम क्या है चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया का विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया है। 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होते ही नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की समय-सीमा के बाद, योग्य उम्मीदवार 16 अक्टूबर को मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। उसी दिन मतगणना भी होगी, जिससे इन राज्यों से Rajya Sabha में नए निर्वाचित प्रतिनिधियों की तस्वीर साफ हो जाएगी। विधान परिषद चुनावों का भी ऐलान Rajya Sabha चुनावों के अलावा, चुनाव आयोग ने बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की विधान परिषदों के लिए भी चुनावों का ऐलान किया है। ये चुनाव स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों (Graduates’ and Teachers’ Constituencies) के लिए होंगे, जिनकी चुनावी व्यवस्था सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होती है। इन निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए सदस्य विधान परिषदों में पंजीकृत स्नातकों और शिक्षकों जैसे विशेष पेशेवर वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं। UP की 10 सीटें, उत्तराखंड की 1 सीट, और पश्चिम बंगाल में 1 सीट पर उपचुनाव। पूरी खबर 👇 https://t.co/3a5IFG2Ehs#RajyaSabha #ElectionCommission #UttarPradesh #WestBengal pic.twitter.com/ud16qekYKI — News26india (@news26indias) September 22, 2026 इन चुनावों का राजनीतिक महत्व क्यों है राज्यसभा चुनाव इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि सभी प्रमुख राजनीतिक दल संसद के उच्च सदन में अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखने या उसे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। लोकसभा चुनावों के उलट, Rajya Sabha सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिए अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। इतने सारे राज्यों के एक साथ चुनाव में शामिल होने से, राजनीतिक दल जल्द ही उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं शुरू करेंगे। आगे क्या होगा कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही अब राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने और चुनावी औपचारिकताएं पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। चुनाव आयोग नामांकन से लेकर जांच, मतदान और मतगणना तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा, ताकि सब कुछ तय नियमों के अनुसार संपन्न हो सके। 16 अक्टूबर को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि इन राज्यों से राज्यसभा में अगली बार कौन-कौन प्रतिनिधि पहुंचेंगे। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: कुल कितनी राज्यसभा सीटों पर चुनाव होंगे? 11 सीटों पर उत्तर प्रदेश की 10, उत्तराखंड की 1, और पश्चिम बंगाल में 1 सीट पर उपचुनाव। Q2: नामांकन प्रक्रिया कब शुरू होगी? 29 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी होने के साथ ही। Q3: मतदान और मतगणना कब होगी? दोनों 16 अक्टूबर 2026 को एक ही दिन होंगे। Q4: क्या सिर्फ राज्यसभा चुनाव ही घोषित हुए हैं? नहीं, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की विधान परिषदों के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए भी चुनाव घोषित किए गए हैं। Q5: राज्यसभा सदस्यों का चुनाव कैसे होता है? सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के ज़रिए अप्रत्यक्ष रूप से।
Haridwar में गले में 7 फीट का अजगर लटकाकर घूमता दिखा युवक, वन विभाग ने शुरू की जांच

New Delhi: उत्तराखंड के Haridwar स्थित खड़खड़ी इलाके में रविवार को एक अजीबोगरीब वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी|एक युवक अपने गले में करीब 7 फीट लंबा अजगर लटकाए सड़क पर घूमता नज़र आया। यह घटना राजाजी नेशनल पार्क के पास रेलवे क्रॉसिंग की बताई जा रही है। वीडियो में क्या दिखा वायरल वीडियो में युवक अजगर को गले में डाले हुए बेफिक्री से सड़क पर चलता दिख रहा है, मानो सांप को लेकर रौब गांठ रहा हो। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की हरकत सामने आई हो कुछ ही दिन पहले बिहार के सारन ज़िले में भी एक युवक अजगर को अपने शरीर पर लपेटकर करतब दिखाता वीडियो वायरल हुआ था। वन विभाग ने शुरू की जांच वीडियो सामने आने के बाद Haridwar के DFO स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि वन विभाग की टीम इसकी गंभीरता से जांच कर रही है। टीम वीडियो की सटीक लोकेशन और समय की पुष्टि करने के साथ-साथ वीडियो में दिख रहे युवक की पहचान करने में जुटी है। DFO के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह भी पढ़ें:US Tariff Impact on India: अमरीका के 100% टैरिफ बिल से भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट, जानिए पूरा सच एक ही दिन में दूसरी अजगर से जुड़ी घटना गौरतलब है कि इसी दौरान वन विभाग की एक और टीम को व्यस्त रहना पड़ा शहर के सरकारी अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में अचानक घुस आए 12 फीट लंबे अजगर को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया, जिससे वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। Haridwar में अजगर देखना क्यों आम होता जा रहा है? Haridwar, राजाजी नेशनल पार्क से सटा होने के कारण, अजगर जैसे वन्यजीवों के शहरी इलाकों में घुस आने की घटनाओं के लिए पहले से भी चर्चा में रहा है। पिछले कुछ महीनों में ही शहर में कई बार अजगर देखे जाने की खबरें आई हैं कभी किसी हॉस्टल परिसर में, कभी हाईवे किनारे, तो कभी किसी पेड़ पर चढ़ा हुआ। वन अधिकारियों के मुताबिक, ठंड से राहत पाने के लिए अक्सर अजगर अपने बिलों से बाहर निकलकर धूप सेंकने आते हैं, जिससे इस तरह के मामले आम हो जाते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा सांप को पकड़ लेना या उसे शरीर पर लपेट लेना, यह साबित नहीं करता कि वह उससे सुरक्षित है। सांप और अन्य वन्यजीव अप्रत्याशित व्यवहार कर सकते हैं, इसलिए उन्हें पकड़ना, उनके साथ प्रदर्शन करना या तस्वीरें-वीडियो बनाने के चक्कर में उन्हें छेड़ना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है दोनों, इंसान और वन्यजीव, दोनों के लिए। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: यह घटना कहां हुई? उत्तराखंड के Haridwar स्थित खड़खड़ी इलाके में, राजाजी नेशनल पार्क के पास रेलवे क्रॉसिंग के नज़दीक। Q2: वीडियो में क्या दिख रहा है? एक युवक अपने गले में करीब 7 फीट लंबा अजगर लटकाए सड़क पर घूम रहा है। Q3: वन विभाग ने क्या कदम उठाया है? वीडियो की लोकेशन और समय की पुष्टि करते हुए युवक की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Q4: क्या इस तरह की हरकत पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है? हां, DFO स्वप्निल अनिरुद्ध के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। Q5: क्या हरिद्वार में अजगर दिखना आम है? हां, राजाजी नेशनल पार्क से सटे होने के कारण Haridwar में समय-समय पर अजगर दिखने और रेस्क्यू किए जाने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
WFH Cyber Fraud: जब बिना OTP और पासवर्ड के खाली हो जाए बैंक खाता, जानिए ठगों का नया पैंतर

New Delhi: अगर आपको लगता है कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP या नेट बैंकिंग का पासवर्ड शेयर न करने से आपका बैंक खाता पूरी तरह सुरक्षित है, तो अब संभल जाइए। देश भर में ऑनलाइन ठगी का पैटर्न अब पूरी तरह बदल चुका है। WFH Cyber Fraud के नए मामलों में जालसाज आपके किसी पासवर्ड पर नहीं, बल्कि आपकी मानसिकता पर हमला कर रहे हैं। ‘Youtube Video लाइक करके पैसे कमाएं‘ से लेकर खुद को सीबीआई (CBI) अफसर बताकर डराने तक, ठग ऐसे जाल बुन रहे हैं जहाँ पढ़े-लिखे लोग भी मिनटों में अपनी जिंदगी भर की कमाई गंवा बैठते हैं। ‘पहले अकाउंट में भेजे 500 रुपये, फिर ऐंठ लिए लाखों’: समझिए कैसे शुरू होता है यह खेल पारंपरिक साइबर अपराधों में ठग सीधे आपके पैसे उड़ाने की हड़बड़ी में रहते थे, लेकिन WFH Cyber Fraud के इस नए तरीके में अपराधी बेहद सब्र के साथ काम करते हैं। वे सबसे पहले टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर आपको पार्ट-टाइम जॉब का ऑफर देते हैं। शुरुआती ‘मीठा ज़हर’: पहले दिन आपको बेहद आसान काम दिए जाते हैं, जैसे किसी होटल को रेटिंग देना या वीडियो लाइक करना। काम पूरा होते ही ठग आपके खाते में सचमुच 300 से 1,000 रुपये भेज देते हैं। भरोसे का शिकार: खाते में असली पैसा आते ही शिकार को लगता है कि कंपनी पूरी तरह जेनुइन है और कमाई सच में हो रही है। बड़ा इन्वेस्टमेंट ट्रैप: भरोसा जमते ही आपको एक ‘वीआईपी ग्रुप’ (VIP Group) में जोड़ दिया जाता है। यहाँ से असली खेल शुरू होता है ज्यादा मुनाफे का लालच देकर आपसे ‘टास्क’ के नाम पर हजारों और फिर लाखों रुपये जमा करा लिए जाते हैं। जब आप पैसे निकालने की कोशिश करते हैं, तो टैक्स और पेनल्टी का बहाना बनाकर खाता ब्लॉक कर दिया जाता है। यह भी पढ़ें:Riyadh Houthi Missile Attack: US को डर, पश्चिम एशिया में तेज़ी से भड़क सकता है संघर्ष ‘कमरे से बाहर निकले तो जेल होगी’: पुलिस की वर्दी और AI वॉइस क्लोनिंग का खौफनाक जाल आजकल WFH Cyber Fraud का सबसे खतरनाक रूप ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के रूप में सामने आ रहा है। इसमें किसी भी तरह की तकनीकी हैकिंग के बजाय सिर्फ और सिर्फ खौफ का सहारा लिया जाता है। स्क्रीन पर असली जैसा पुलिस स्टेशन और बैकग्राउंड की हलचल नकली अधिकारी और AI का मेल: जालसाज खुद को पुलिस, कस्टम्स या ईडी (ED) का अफसर बताकर आपको सीधे वीडियो कॉल करते हैं। बैकग्राउंड में बाकायदा पुलिस स्टेशन का सेट दिखता है और एआई (AI) तकनीक की मदद से आपकी या आपके परिचितों की आवाज तक मैच करा दी जाती है। खौफ का माहौल: आपको डराया जाता है कि आपके नाम से आए पार्सल में ड्रग्स मिले हैं या आपके बैंक खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। कमरे में बंद करके वसूली: जब तक पीड़ित घबराकर केस रफा-दफा करने के नाम पर उनके बताए खाते में ‘जमानत राशि’ नहीं भेज देता, तब तक उसे वीडियो कॉल पर ही बंधक बनाए रखा जाता है। गाढ़ी कमाई डूब जाए तो तुरंत उठाएं ये 3 कदम, बच सकती है रकम अगर आप या आपके आसपास कोई भी व्यक्ति इस तरह के WFH Cyber Fraud में फंस जाए, तो बिना वक्त गंवाए इन शुरुआती 30 मिनटों (Golden Hour) में एक्शन लें: 1930 नंबर पर कॉल करें: यह राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर है। तुरंत कॉल करके लेन-देन की जानकारी दें, ताकि पुलिस जालसाजों के बैंक खाते को समय रहते फ्रीज (Hold) करा सके। cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें: चैट के स्क्रीनशॉट, पेमेंट स्लिप और जिस नंबर से बात हुई उसकी पूरी जानकारी के साथ साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। बैंक को अलर्ट करें: तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर को कॉल करके अपना खाता, एटीएम कार्ड और यूपीआई (UPI) सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करवाएं। निष्कर्ष एक बात हमेशा याद रखें: इंटरनेट पर ऐसी कोई नौकरी नहीं है जो बिना किसी हुनर या बिना किसी काम के आपको घर बैठे रोजाना हजारों रुपये दे सके। अगर कोई भी कंपनी काम देने के बदले आपसे पैसे मांगती है, तो वह पूरी तरह WFH Cyber Fraud है। इसके अलावा, भारत का कोई भी कानून पुलिस या जांच एजेंसियों को वीडियो कॉल पर किसी को हिरासत में लेने या पैसे मांगने का अधिकार नहीं देता। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर हो रहे वर्क फ्रॉम होम साइबर फ्रॉड को कैसे पहचानें? Ans: अगर कोई आपको टेलीग्राम पर बिना किसी इंटरव्यू के काम दे रहा है, काम शुरू करने से पहले ‘प्रीपेड टास्क’ या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पैसे मांग रहा है, तो समझ जाइए कि यह 100% फ्रॉड है। Q2: क्या ऑनलाइन ठगी के शिकार होने पर पैसे वापस मिल सकते हैं? Ans: जी हां, अगर आप पैसे कटने के तुरंत बाद (1 से 2 घंटे के भीतर) 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज करा देते हैं, तो पुलिस उस पैसे को ठगों के खाते से निकलने से पहले फ्रीज कर देती है। ऐसे मामलों में पैसे वापस मिलने की संभावना काफी ज्यादा होती है। Q3: क्या सचमुच वीडियो कॉल पर पुलिस किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर सकती है? Ans: बिल्कुल नहीं। भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई चीज नहीं है। पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी स्काइप, व्हाट्सएप या ज़ूम कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही ऑनलाइन जुर्माना मांगती है।
Prayagraj High Court का बड़ा फैसला: Hindu-Muslim Same-Sex Couple को सुरक्षा देने का आदेश

New Delhi: Prayagraj High Court ने Uttar Pradesh Police को एक Inter-Faith Same-Sex Couple को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है, यह कहते हुए कि विवाह की कानूनी मान्यता न होना किसी को भी वयस्क नागरिकों की गरिमा या शारीरिक सुरक्षा पर हमला करने का अधिकार नहीं देता। मामला क्या है यह मामला एक Hindu-Muslim जोड़े से जुड़ा है, जिसमें दोनों महिलाएं साथ live-in relationship में रह रही थीं। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों महिलाओं को उनके परिवार वालों से जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं, इसलिए उन्हें तत्काल Police Protection की ज़रूरत थी। Justice गौतम चौधरी का फैसला 14 सितंबर को सुनाए गए इस फैसले में Justice Gautam Chowdhary ने दोनों महिलाओं से सीधे बातचीत की और पाया कि दोनों Adults हैं तथा बिना किसी दबाव, डर या अनुचित प्रभाव के स्वेच्छा से साथ रहने का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि यह जोड़ा अपने Family Members या किसी अन्य व्यक्ति के हस्तक्षेप के बिना शांतिपूर्वक साथ रहने के लिए स्वतंत्र है। पुलिस को क्या निर्देश दिया गया कोर्ट ने साफ आदेश दिया कि अगर इस Live-in Relationship में कोई बाधा उत्पन्न होती है, तो पुलिस को यह Verify करने के बाद कि दोनों महिलाएं Adults हैं और स्वेच्छा से साथ रह रही हैं तुरंत उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी होगी। राज्य सरकार की आपत्ति राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि Same-Sex Relationships “समाज के प्राकृतिक और पारंपरिक ढांचे को प्रभावित करते हैं” और इन्हें स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए Supreme Court द्वारा तय किए गए कानून का हवाला दिया। कोर्ट ने Constitution के आधार पर क्या कहा कोर्ट ने कहा कि दो Adult Citizens का अपनी मर्ज़ी से साथ रहने का फैसला एक Fundamental Right है, और Family Members, रिश्तेदारों या समाज के किसी भी वर्ग को उनकी शारीरिक स्वतंत्रता में बाधा डालने या उसका उल्लंघन करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों Petitioners Adult, Educated और अपनी भलाई समझने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए उनकी Police Protection की मांग को अस्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता। गौरतलब है कि यह फैसला Hindi में सुनाया गया। Uttar Pradesh में यह पहला मामला नहीं Allahabad High Court पहले भी इसी तरह के कई मामलों में Same-Sex Couples के अधिकारों को बरकरार रख चुका है जैसे 2020 में सुल्ताना मिर्ज़ा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2021 में पूनम रानी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले। ध्यान देने वाली बात यह है कि Uttar Pradesh में Same-Sex Marriage या Civil Union को कानूनी मान्यता नहीं है, लेकिन Live-in Relationship गैरकानूनी नहीं है और Supreme Court पहले ही तय कर चुका है कि Adults को बिना शादी के साथ रहने का Constitutional Right है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Prayagraj High Court ने क्या आदेश दिया? UP Police को एक Hindu-Muslim Same-Sex Couple की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जो Family से धमकियों का सामना कर रहा था। Q2: यह फैसला किसने सुनाया? Justice Gautam Chowdhary ने, 14 सितंबर 2026 को। Q3: पुलिस को किस शर्त के साथ सुरक्षा देने को कहा गया? यह Verify करने के बाद कि दोनों महिलाएं Adults हैं और स्वेच्छा से साथ रह रही हैं। Q4: राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या तर्क दिया था? कि Same-Sex Relationships समाज के पारंपरिक ढांचे को प्रभावित करते हैं और स्वीकार्य नहीं हैं जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। Q5: क्या Uttar Pradesh में Live-in Relationship कानूनी है? हां, Live-in Relationship गैरकानूनी नहीं है, हालांकि Same-Sex Marriage या Civil Union को अभी कानूनी मान्यता नहीं मिली है।
Pune Bhumkar Bridge Accident: Container का Brake Fail होने से 2 की जान गई, कई घायल

New Delhi: Pune के Narhe इलाके में भूमकर ब्रिज पर शनिवार तड़के एक बड़ा सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक मालवाहक कंटेनर का ब्रेक फेल होने से कई वाहन आपस में टकरा गए। हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3-4 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। कैसे हुआ ये हादसा Pune में पुलिस के मुताबिक, यह हादसा रात करीब 12:30 बजे कटराज-देहू रोड बायपास स्थित भूमकर ब्रिज पर हुआ। सतारा से मुंबई की तरफ जा रहा एक भारी मालवाहक कंटेनर भूमकर ब्रिज के ढलान पर उतरते समय अचानक ब्रेक फेल हो गया, जिससे चालक का वाहन पर से नियंत्रण छूट गया। तेज़ रफ्तार से आ रहे कंटेनर ने पहले आगे चल रहे एक ट्रक को टक्कर मारी, और उसके बाद यह एक चेन कोलिज़न में बदल गया, जिसमें कुल तीन भारी वाहन और कुछ अन्य गाड़ियां शामिल हो गईं। यह भी पढ़ें:West Bengal SIR: 37 लाख से ज़्यादा अपीलें Tribunals में अटकीं, नगरपालिका चुनाव नज़दीक View this post on Instagram A post shared by @News26india (@news26india) टक्कर इतनी तेज़ थी कि केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया टक्कर इतनी भयंकर थी कि कंटेनर ट्रक का अगला केबिन पूरी तरह चकनाचूर हो गया, जिसमें सवार लोग फंस गए। कंटेनर के अंदर सफर कर रहे दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, हालांकि उनकी पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। शुरुआती रिपोर्ट्स में एक व्यक्ति की मौत और एक ड्राइवर के गाड़ी में फंसे होने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि मरने वालों की संख्या दो है। मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीमें हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और एम्बुलेंस टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की वजह से मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर भी यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, और क्षतिग्रस्त वाहनों तथा रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते इलाके में लंबा जाम लग गया। पुलिस और आपातकालीन टीमें सड़क को साफ करने और यातायात को सामान्य बनाने में जुटी हैं। कुछ दिन पहले भी हुआ था भयानक हादसा यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब सिर्फ चार-पांच दिन पहले ही इसी इलाके के पास नावले ब्रिज पर एक और भीषण हादसा हुआ था। उस हादसे में भी एक ट्रक का ब्रेक फेल होने के कारण गाड़ी बेकाबू हो गई थी और कई वाहनों से जा टकराई थी जिससे यह इलाका एक बार फिर बार-बार होने वाले हादसों की वजह से सुर्खियों में आ गया है। जांच जारी पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर कंटेनर का नियंत्रण कैसे छूटा और वाहनों की टक्कर किस क्रम में हुई। शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने को ही मुख्य वजह माना जा रहा है, लेकिन पूरी घटना की विस्तृत जांच अभी जारी है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: हादसा कब और कहां हुआ? 19 सितंबर को रात करीब 12:30 बजे, Pune के Narhe स्थित भूमकर ब्रिज पर। Q2: हादसे की वजह क्या बताई जा रही है? कंटेनर ट्रक का ब्रेक फेल हो गया, जिससे चालक का वाहन पर नियंत्रण छूट गया। Q3: कितने लोगों की मौत हुई? 2 लोगों की मौके पर ही मौत हुई, 3-4 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। Q4: क्या यह इलाका पहले भी हादसों का शिकार रहा है? हां, सिर्फ चार-पांच दिन पहले ही पास के नावले ब्रिज पर भी इसी तरह का भीषण हादसा हो चुका है। Q5: हादसे के बाद यातायात पर क्या असर पड़ा? मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर लंबा जाम लगा, जिसे पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने संभालने की कोशिश की।
West Bengal SIR: 37 लाख से ज़्यादा अपीलें Tribunals में अटकीं, नगरपालिका चुनाव नज़दीक

New Delhi: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य में 37 लाख से ज़्यादा अपीलें अभी भी ट्राइब्यूनल्स में लंबित हैं, और यह सब ऐसे समय हो रहा है जब राज्य में नगरपालिका चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। आंकड़े क्या कहते हैं चुनाव आयोग के हलफनामे के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान 24 ज़िलों में कुल 38.20 लाख अपीलें दाखिल की गई थीं ये अपीलें वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़ी शिकायतों और अनुरोधों से संबंधित हैं। इनमें से सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ट्राइब्यूनल्स अब तक सिर्फ करीब 1.02 लाख मामलों का ही निपटारा कर पाए हैं यानी 37 लाख से ज़्यादा अपीलें अभी भी अटकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला यह मुद्दा जुलाई में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने पश्चिम बंगाल कांग्रेस की SIR कमेटी के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की याचिका पर सुनवाई शुरू की। याचिका में विधानसभा क्षेत्र-वार आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की गई थी, ताकि यह पता चल सके कि SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं ने कितने दावे और आपत्तियां दर्ज कराईं। यह भी पढ़ें:Iran War पर रिकॉर्ड विरोध: 71% अमेरिकी वोटरों का मानना ट्रम्प के पास “कोई रणनीति नहीं”, Fox News सर्वे में खुलासा 58 लाख से ज़्यादा मतदाता हटाए गए थे बोस की याचिका के मुताबिक, SIR की एन्युमरेशन (गणना) प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से ज़्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके बाद दावे और आपत्ति के चरण में 9.64 लाख inclusion आवेदन (Form 6 और 6A) और 99,000 से ज़्यादा deletion आवेदन (Form 7) प्राप्त हुए लेकिन 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम वोटर लिस्ट में सिर्फ करीब 1.82 लाख नाम ही वापस जोड़े जा सके। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह ट्राइब्यूनल्स में लंबित और निपटाई गई अपीलों का पूरा डेटा जमा करे। कोर्ट ने साफ कहा कि इन मामलों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर होना चाहिए, और आयोग से यह भी पूछा कि लंबित अपीलों को तेज़ी से निपटाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, और कितने अतिरिक्त ट्राइब्यूनल्स की ज़रूरत है। ज़िलों के बीच भी बड़ा अंतर चुनाव आयोग के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि अलग-अलग ज़िलों में अपीलों के निपटारे की रफ्तार में काफी अंतर है कुछ ज़िलों में मामलों का निपटारा अपेक्षाकृत तेज़ी से हो रहा है, जबकि कुछ में स्थिति अभी भी काफी पीछे है। हालांकि, आयोग के जवाब में यह स्पष्ट ब्रेकअप नहीं दिया गया कि कितनी अपीलें नाम हटाए जाने के खिलाफ हैं, और कितनी नाम शामिल करने के खिलाफ। नगरपालिका चुनावों के लिए क्यों है यह चिंता का विषय यह भारी बैकलॉग ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल आगामी नगरपालिका चुनावों की तैयारी कर रहा है। लाखों मतदाता अभी भी अपनी अपीलों पर फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि चुनाव प्राधिकरण और ट्राइब्यूनल्स के सामने इतने बड़े पैमाने पर मामलों को निपटाने की चुनौती है। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अब पारदर्शिता, समयबद्ध निपटारे और योग्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर केंद्रित हो गई है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: पश्चिम बंगाल में कुल कितनी अपीलें दाखिल हुई थीं? 38.20 लाख, जिनमें से सिर्फ 1.02 लाख का ही निपटारा हो पाया है। Q2: सुप्रीम कोर्ट में यह मामला किसने उठाया? प्रसेनजीत बोस, जो पश्चिम बंगाल कांग्रेस की SIR कमेटी के अध्यक्ष हैं। Q3: SIR के दौरान कितने मतदाता हटाए गए थे? 58 लाख से ज़्यादा, एन्युमरेशन चरण के दौरान। Q4: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को क्या निर्देश दिया? लंबित और निपटाई गई अपीलों का पूरा डेटा जमा करने और तेज़ी से निपटारे के लिए कदम बताने का। Q5: यह मुद्दा अभी क्यों अहम है? क्योंकि पश्चिम बंगाल में नगरपालिका चुनाव नज़दीक हैं, और लाखों मतदाता अभी भी अपनी अपीलों पर फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं।
रिपोर्टर टीवी के MD Anto Augustine की मुश्किलें बढ़ीं, केरल CM की “second marriage” के डॉक्यूमेंट्स मामले में केस दर्ज

New Delhi: केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की कथित “दूसरी शादी” को लेकर चल रहे विवाद में रिपोर्टर टीवी के मैनेजिंग डायरेक्टर Anto Augustine की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। पुलिस ने बुधवार को उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किया। कैसे शुरू हुआ विवाद यह पूरी घटना 10 सितंबर को पट्टनमटिट्टा में हुए एक इवेंट से शुरू हुई, जहां एंटो ऑगस्टीन भाषण दे रहे थे। दो अनजान आदमी उनके पास आए और दावा किया कि उनके पास “करोड़ों रुपये” की खबर है। उन्होंने कथित तौर पर Anto AugustineAugustine को एक मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और कर्नाटक के एक सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से जारी एक कानूनी नोटिस की कॉपी दी। इन डॉक्यूमेंट्स में दावा किया गया था कि सतीशन ने 17 अक्टूबर, 2012 को कर्नाटक के बयांदूर में अपनी दूसरी शादी रजिस्टर करवाई थी, जबकि उस समय उनकी पहली शादी कानूनी तौर पर वैलिड थी। यह भी पढ़ें: Mental Health Alert:थकने के बाद भी आराम न कर पाना खतरनाक! जानिए क्यों जरूरी है Mental Break लेना FIR में क्या है? तिरुवनंतपुरम साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने एंटो ऑगस्टीन और दो अनजान लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई कांग्रेस नेता राजू पी. नायर की शिकायत के आधार पर की गई, जिन्होंने DGP राउडा चंद्रशेखर को एक फॉर्मल लेटर लिखकर पूरी साज़िश की जांच की मांग की थी। FIR में इंडियन पीनल कोड की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं जालसाजी (336(4)), पब्लिक रजिस्टर की जालसाजी (337), क्रिमिनल साज़िश (61(2)), क्रिमिनल मानहानि (356(3)), जालसाजी (340(2)), और जाली डॉक्यूमेंट रखना (339)। कांग्रेस का आरोप: सरकार को अस्थिर करने की साज़िश शिकायतकर्ता राजू पी. नायर ने आरोप लगाया कि ये नकली डॉक्यूमेंट्स एक बड़ी राजनीतिक साज़िश का हिस्सा हैं जिसका मकसद राज्य सरकार को अस्थिर करना और मुख्यमंत्री की इमेज को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने यह भी मांग की कि पुलिस रिपोर्टर टीवी के ऑफिस से CCTV फुटेज की जांच करे ताकि उन दो लोगों की पहचान की जा सके जिन्होंने कथित तौर पर ये नकली डॉक्यूमेंट्स बनाए थे। रिपोर्टर टीवी के ऑफिस पर रेड FIR दर्ज होने के बाद, पुलिस ने रिपोर्टर टीवी के ऑफिस पर भी रेड की। रेड के बाद मीडिया से बात करते हुए, एंटो ऑगस्टीन ने कहा कि वह “मेसी इंसिडेंट” की जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन अपने न्यूज़ सोर्स से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब नहीं देंगे। उन्होंने साफ कहा, “अगर उनका मकसद कोई भी जर्नलिस्टिक जानकारी निकालना है जिसमें वीडी सतीशन की दूसरी शादी का मामला भी शामिल है तो उनके पास कोई जवाब नहीं है।” Anto Augustine ने मामले को “बेवजह का ड्रामा” बताया अपने पहले के बयान में, ऑगस्टीन ने कहा था कि वह निष्पक्ष पुलिस जांच में सहयोग करेंगे, लेकिन उन्होंने FIR दर्ज करने को भी “बेवजह का ड्रामा” कहा था। मामला अभी कहां है पुलिस उन दो बाकी लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने कथित तौर पर नकली डॉक्यूमेंट तैयार किए और उन्हें Anto Augustine को सौंपे। जांच जारी है, और अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Anto Augustine पर क्या आरोप हैं? केरल के CM वी.डी. सतीशन को नकली डॉक्यूमेंट्स के ज़रिए बदनाम करने की साज़िश में शामिल होने और नकली डॉक्यूमेंट्स रखने का आरोप। Q2: यह विवाद कब और कैसे शुरू हुआ? 10 सितंबर को, पट्टनमटिट्टा में एक इवेंट में, दो अनजान लोगों ने कथित तौर पर Anto Augustine को एक नकली मैरिज सर्टिफिकेट दिया। Q3: FIR में कौन से सेक्शन लगाए गए हैं? इंडियन पीनल कोड के तहत जालसाजी, क्रिमिनल साज़िश और क्रिमिनल मानहानि से जुड़े कई सेक्शन। Q4: क्या रिपोर्टर टीवी के ऑफिस पर रेड मारी गई थी? हाँ, FIR फाइल होने के बाद पुलिस ने ऑफिस पर रेड मारी थी। Q5: ऑगस्टीन ने पुलिस इन्वेस्टिगेशन पर क्या रिस्पॉन्स दिया? उन्होंने कहा कि वह इन्वेस्टिगेशन में कोऑपरेट करेंगे लेकिन अपने न्यूज़ सोर्स के बारे में जानकारी शेयर नहीं करेंगे।
Meta Verified और YouTube प्रमोशन के नाम पर साइबर फ्रॉड, ‘Youtube Wale Baba’ के नाम से जुड़ी UPI ID पर ठगी का आरोप

लखनऊ: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Meta Verified बैज दिलाने, चैनल की ग्रोथ बढ़ाने और मोनेटाइजेशन के जरिए कमाई कराने का झांसा देकर साइबर फ्रॉड करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित द्वारा साझा किए गए साक्ष्यों और बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स के अनुसार, डिजिटल सेवाओं का भरोसा दिलाकर अलग-अलग चरणों में हजारों रुपये की रकम ऐंठ ली गई। ₹150 से शुरू हुआ खेल, ‘Pending Charges’ बताकर ऐंठे हजारों रुपये पीड़ित के अनुसार, ठगों ने शुरुआत में बेहद कम रकम यानी ₹150 से बात शुरू की थी। इसके बाद धीरे-धीरे ‘प्रोसेसिंग फीस’, ‘जीएसटी’ और ‘Pending Charges’ के नाम पर बड़ी रकम मांगना शुरू कर दिया गया। उपलब्ध रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अलग-अलग किश्तों में पेमेंट कराई गई: शुरुआत में ₹150 की पेमेंट ली गई (Manish Kumar Saini के नाम पर)। इसके बाद Meta Verified के नाम पर ₹996.20 का ट्रांजैक्शन कराया गया। फिर सर्विसेज और अप्रूवल के नाम पर ₹2,000 और ₹800 (कुल ₹2,800) की रकम Sawan Raigar के नाम से ली गई। इसके बाद ठगों ने ₹4,500 की और अतिरिक्त मांग रख दी, जिसे पीड़ित ने देने से साफ इनकार कर दिया। ‘Youtube Wale Baba’ के नाम और QR कोड का इस्तेमाल मामले से जुड़े स्क्रीनशॉट्स और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पेमेंट्स में “Youtube wala baba” नाम से बने QR कोड और UPI ID का इस्तेमाल देखा जा सकता है। आरोप है कि सोशल मीडिया गाइडेंस और व्यूज/वॉच-टाइम बढ़ाने का झांसा देकर इसी क्रेडेंशियल के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाए गए। इसके अलावा ट्रांजैक्शन इंटरफेस में FamApp by Trio और KD Rider नाम के इंटरफेस का इस्तेमाल भी सामने आया है। आधिकारिक कंपनियों के नाम का गलत इस्तेमाल जांच का एक मुख्य बिंदु यह है कि पेमेंट रिक्वेस्ट में आधिकारिक तौर पर Meta का नाम दिखाया जा रहा था, जबकि वास्तविक भुगतान KD Rider, Sawan Raigar और Manish Kumar Saini जैसे निजी UPI खातों में प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि आधिकारिक टेक कंपनियों के ब्रांड नेम का गलत इस्तेमाल कर इस फ्रॉड को अंजाम दिया गया। यह भी पढ़ें: Vvaan Trailer Out: सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘Vvaan’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, विकास और आस्था के बीच छिड़ी जंग
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के CEO से की मुलाकात, कल से शुरू होगा SEMICON इंडिया 2026

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक गोलमेज बैठक के दौरान दुनिया भर की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) से मुलाकात की। यह बैठक SEMICON इंडिया 2026 के औपचारिक उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले हुई, जिसे प्रधानमंत्री खुद 17 सितंबर को द्वारका स्थित यशोभूमि में शुरू करेंगे। बैठक का मकसद क्या था इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव और भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के CEO अमितेश कुमार सिन्हा के अनुसार, यह गोलमेज बैठक वैश्विक CEOs के साथ SEMICON इंडिया के औपचारिक उद्घाटन से एक दिन पहले आयोजित की गई। इस बातचीत का केंद्र बिंदु भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक कंपनियों के लिए देश के बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में विस्तार के अवसरों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। पिछले साल भी हुई थी ऐसी ही बैठक यह कोई नई परंपरा नहीं है प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 के संस्करण में भी इसी तरह की एक गोलमेज बैठक की थी, जिसमें कंपनियों के अधिकारियों ने उन्हें अपनी निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी दी थी। इस साल की बैठक उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हुई है, जहां सरकार और उद्योग जगत के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जाता है। SEMICON इंडिया 2026 के बारे में यह सम्मेलन का पांचवा संस्करण है, जो 17 से 19 सितंबर तक द्वारका के यशोभूमि (इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर) में आयोजित होगा। इसे भारत सेमीकंडक्टर मिशन, MeitY और वैश्विक सेमीकंडक्टर संस्था SEMI द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस साल की थीम है “सिलिकॉन टू सिस्टम्स – बिल्डिंग द इकोसिस्टम”, जो भारत के सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक व्यापक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भूमिका निभाने की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाती है। कितना बड़ा है भारत का सेमीकंडक्टर लक्ष्य ISM के CEO अमितेश कुमार सिन्हा के मुताबिक, वैश्विक सेमीकंडक्टर मांग आने वाले समय में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, वहीं भारत की खुद की सेमीकंडक्टर आवश्यकता भी करीब 100 अरब डॉलर से बढ़कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है यानी यह क्षेत्र भारत के लिए आने वाले वर्षों में एक बड़ा आर्थिक अवसर बनने जा रहा है। सम्मेलन में और क्या खास होगा SEMI इंडिया और IESA के अध्यक्ष अशोक चंदक के अनुसार, यह आयोजन भारत के एक संपूर्ण और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन बनाने की दिशा में हो रहे बदलाव को दर्शाता है। सम्मेलन में “महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व” पर एक विशेष सत्र भी शामिल होगा, साथ ही यह MeitY की Semicon 2.0 पहल के छह रणनीतिक स्तंभों चिप डिज़ाइन, मशीनें और सामग्री, अधिक फैब्स की स्थापना, ATMP/OSAT उद्योग को मजबूत करना, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है।
