New Delhi: Mysore Dasara समारोह में इस साल पहली बार कंबाला रेस शामिल की गई। कर्नाटक के तटीय इलाके की इस पारंपरिक भैंस दौड़ को रविवार, 18 अक्टूबर को मैसूर में हरी झंडी दिखाई गई। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, मैसूर के जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने इसका उद्घाटन किया।
कहां हुआ Mysore Dasara का आयोजन
रेस का आयोजन जिला प्रशासन ने सथागल्ली में VTU कॉलेज के पास किया। इसके लिए खास स्लश ट्रैक तैयार किया गया है। आयोजन 18 और 19 अक्टूबर को होना तय है।
150 से ज्यादा भैंस जोड़ियां
मंत्री यतींद्र ने कहा कि तटीय इलाके से 150 से ज्यादा भैंस जोड़ियों का आना उत्साह बढ़ाने वाला है। जिला प्रशासन ने दर्शकों के लिए जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया है।
मंत्री ने क्या कहा
यतींद्र ने उम्मीद जताई कि कंबाला को वैसी ही वैश्विक पहचान मिलेगी, जैसी मैसूर दशहरा को मिली है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार की पहल पर हुआ है। मकसद दक्षिण कन्नड़ जैसे तटीय इलाके के इस पारंपरिक खेल को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को कर्नाटक की सांस्कृतिक विविधता से जोड़ना है।
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कंबाला क्या है
कंबाला तटीय कर्नाटक की सदियों पुरानी परंपरा है। यह भैंसों की कीचड़ वाले ट्रैक पर होने वाली दौड़ है। इसे फसल कटाई के मौसम में मनोरंजन और देवताओं के प्रति आभार के रूप में आयोजित किया जाता है।
विरोध भी हुआ
इस फैसले का कुछ लोगों ने विरोध किया है। मैसूर राजपरिवार के वंशज और सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वडियार समेत कई संगठनों और नेताओं का कहना है कि कंबाला दशहरा की विरासत, सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक महत्व से मेल नहीं खाता।
आगे क्या
आयोजन सोमवार, 19 अक्टूबर को भी जारी रहने की बात कही गई है। इस नए प्रयोग पर लोगों की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में और साफ होगी।










