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Zelenskyy ने US की Starlink restriction पर कहा ‘betrayed’, रूस के missile-drone हमले में 6 लाख लोग बिजलीहीन, Nord Stream sabotage trial शुरू

Zelenskyy का Trump पर आरोप: 'Starlink से धोखा', रूस के हमले में 6 लाख बिजलीहीन

New DelhiL यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने बुधवार को कहा कि उन्हें US President Donald Trump की ओर से लगातार Starlink satellite internet की military access पर लगाई जा रही restrictions को लेकर “धोखा” महसूस हो रहा है. इसी दौरान रूस के बड़े missile और drone हमले में यूक्रेन में लगभग 6 लाख लोग बिजलीहीन हो गए, जबकि Nord Stream pipeline sabotage मामले में एक पूर्व यूक्रेनी सैन्य अधिकारी का Germany में मुकदमा शुरू हो गया.apnews+2 Zelenskyy का ‘betrayed’ आरोप Zelenskyy ने एक interview में कहा कि Starlink के military version पर लगाई गई restrictions से उन्हें व्यक्तिगत रूप से धोखा महसूस हुआ है. उन्होंने चेताया कि इस कदम से यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में “बहुत अधिक मानवीय नुकसान” हो सकता है.cnbc+2 SpaceX के संस्थापक Elon Musk ने जिम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा कि Starlink की सभी speeds को US government और military द्वारा नियंत्रित किया जाता है.cnbc+1 Zelenskyy के technology adviser Sergiy Beskrestnov ने बताया कि रात के दौरान moving Starlink terminals पर speed limit लगाई गई, जिससे कई battlefield missions में बाधा आई. उन्होंने कहा कि यूक्रेन की रक्षा बलों को इस restriction के बारे में पहले से कोई warning नहीं दी गई ये भी पढ़ें:UP Election 2027: अखिलेश यादव की कार्यकर्ताओं को नसीहत, अनुशासन में रहें और बूथों पर ढिलाई न बरतें रूस का ‘massive’ हमला, 6 लाख बिजलीहीन रूस ने बुधवार तड़के यूक्रेन पर 39 ballistic missiles और 120 से अधिक drones के साथ एक बड़ा हमला बोला, जिसमें मुख्य रूप से Kyiv और आसपास के क्षेत्र निशाना बनाए गए.abcnews+1 Zelenskyy ने बताया कि इस हमले में कम से कम 26 power facilities और 4 gas-oil sector के infrastructure को गंभीर नुकसान हुआ. उन्होंने चेताया कि बिजली कटौती आगे और बढ़ सकती है. रूस के Defense Ministry ने दावा किया कि उन्होंने Kyiv और Kharkiv में communication और energy infrastructure को निशाना बनाकर “massive strike” किया. Trump के ‘energy ceasefire’ के बाद हमला इस हमले के कुछ घंटे पहले ही US President Donald Trump ने दावा किया था कि रूस और यूक्रेन के बीच “energy ceasefire” लागू हो चुका है. लेकिन Zelenskyy ने आरोप लगाया कि रूस ने इस घोषणा के तुरंत बाद ही energy targets पर हमला किया.france24+2 Zelenskyy के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकियों ने रूसी ballistic launches के बारे में दो बार warning नहीं दी, जिससे यूक्रेन की energy sector को बचाने की क्षमता प्रभावित हुई. Nord Stream sabotage trial शुरू इसी बीच, Germany के Hamburg Higher Regional Court में 2022 के Nord Stream pipeline bombings मामले में पूर्व यूक्रेनी सैन्य अधिकारी Sergiy Kuznietsov का मुकदमा शुरू हो गया. यह इस मामले में पहला व्यक्ति है जिस पर मुकदमा चल रहा है.apnews+2 50 वर्षीय Kuznietsov पर आरोप है कि उन्होंने divers, explosives expert और boat captain की एक टीम का नेतृत्व किया, जिन्होंने Nord Stream pipelines पर explosives लगाए.ansa+2 Prosecutors ने उन पर explosion causing, property damage, public service disruption और civilian infrastructure पर हमला (war crime) जैसे आरोप लगाए हैं.apnews+1 Kuznietsov के lawyer ने दलील दी कि रूस ने Nord Stream pipelines को political और economic pressure के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया.afp+1 Trial की अवधि अगले साल February 2027 तक चलने की उम्मीद है. FAQs Zelenskyy ने Starlink restriction पर क्या कहा? Zelenskyy ने कहा कि US की Starlink military access restriction से उन्हें “betrayed” महसूस हुआ और इससे यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में बड़ा मानवीय नुकसान हो सकता है.cnbc+1 रूस के हमले में कितने लोग बिजलीहीन हुए? रूस के missile और drone हमलों में यूक्रेन में लगभग 6 लाख लोग बिजलीहीन हो गए, जिसमें 26 power facilities को नुकसान हुआ.abcnews+1 Nord Stream sabotage trial किसका है? Germany के Hamburg court में पूर्व यूक्रेनी सैन्य अधिकारी Sergiy Kuznietsov का मुकदमा चल रहा है, जिन पर 2022 के Nord Stream pipeline bombings का आरोप है.apnews+2 Trump का ‘energy ceasefire’ क्या था? Trump ने दावा किया था कि रूस और यूक्रेन के बीच energy infrastructure पर हमले रोकने का समझौता हुआ है, लेकिन रूस ने इसके तुरंत बाद ही हमला किया.

Brazil Election: सर्वे को झुठलाकर आगे निकले फ्लाविओ Bolsonaro, अब लूला से रनऑफ में टक्कर

Brazil Election: सर्वे को झुठलाकर आगे निकले फ्लाविओ Bolsonaro, अब लूला से रनऑफ में टक्कर

New Delhi: Brazil के राष्ट्रपति चुनाव 2026 के पहले दौर में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लाविओ Bolsonaro ने चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को पीछे छोड़ते हुए मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा पर बढ़त हासिल की है। अब दोनों नेताओं के बीच 25 अक्टूबर को रनऑफ (दूसरे दौर का) मुकाबला होगा, क्योंकि कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए ज़रूरी 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट हासिल नहीं कर सका। Brazil Election के क्या रहे नतीजे रिपोर्ट्स के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज़्यादा वोटों की गिनती के बाद फ्लाविओ Bolsonaro को 47 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिले, जबकि लूला दूसरे स्थान पर 45 प्रतिशत वोटों के साथ रहे। चुनाव पूर्व सर्वे में लूला को करीब तीन प्रतिशत अंकों की बढ़त मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन नतीजे इसके उलट रहे। फ्लाविओ Bolsonaro कौन हैं फ्लाविओ बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर Bolsonaro के सबसे बड़े बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो फिलहाल 2022 के चुनाव नतीजों को पलटने की साज़िश रचने के दोषी ठहराए जाने के बाद 27 साल की सज़ा काट रहे हैं और नज़रबंद हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार फ्लाविओ की उम्मीदवारी को तब और मज़बूती मिली जब दिसंबर में जेल में बंद उनके पिता ने उनका नाम आगे बढ़ाया। नेताओं की प्रतिक्रिया नतीजों के बाद फ्लाविओ बोल्सोनारो ने कहा, “ब्राज़ील बदलाव चाहता है, आज जो हुआ उसका यही मतलब निकलता है।” वहीं लूला ने कहा कि अब एक नया अभियान शुरू होगा। लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर मतदाताओं को आगाह भी किया। मुद्दे क्या रहे एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाविओ ने महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को प्रमुख मुद्दा बनाया, वहीं लूला ने ऑनलाइन गैंबलिंग पर बैन लगाने के साथ चुनाव नज़दीक आते ही कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार और परिवारों के लिए कर्ज़ राहत का प्रस्ताव रखा। ये भी पढ़ें: UP Election 2027: सपा का 55 सीटों का ऑफर, कांग्रेस की 200 की डिमांड, क्या बनेगी बात? आगे क्या होगा रनऑफ मुकाबला 25 अक्टूबर को होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर रहे उम्मीदवार भी दक्षिणपंथी रुझान के रहे, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रनऑफ में फ्लाविओ को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। FAQs Q1. ब्राज़ील चुनाव के पहले दौर में कौन आगे रहा? फ्लाविओ बोल्सोनारो को करीब 47 प्रतिशत वोट मिले, जबकि लूला दा सिल्वा को करीब 45 प्रतिशत वोट मिले। Q2. रनऑफ मुकाबला कब होगा? 25 अक्टूबर को लूला और फ्लाविओ बोल्सोनारो के बीच रनऑफ मुकाबला होगा। Q3. फ्लाविओ बोल्सोनारो कौन हैं? वे पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और मौजूदा सीनेटर हैं। Q4. जायर बोल्सोनारो अभी कहां हैं? वे 2022 के चुनाव नतीजे पलटने की साज़िश के दोषी ठहराए जाने के बाद 27 साल की सज़ा के तहत नज़रबंद हैं। Q5. इस चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या रहे? महंगाई, जीवन-यापन की लागत, और लूला की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख मुद्दे रहे। Editor’s Note यह स्थिति तेज़ी से बदल रही है  मैंने दो स्वतंत्र, भरोसेमंद स्रोतों (NPR, OPB) के आंकड़े मिलाकर रखे हैं। प्रकाशन से पहले नवीनतम आंकड़े ज़रूर cross-check करें, क्योंकि वोटों की गिनती अपडेट होती रह सकती है।

Italy: स्कूलों में Burqa-Niqab पर Ban, विदेशी छात्रों की संख्या Limited करने का फैसला

Italy: स्कूलों में Burqa-Niqab Ban, छात्र संख्या Limited

New Delhi: Italy की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की सरकार ने स्कूलों में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को कैबिनेट ने एक decree-law (डिक्री-कानून) पास किया, जिसके तहत स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरा ढकने वाले परिधान पहनना गैरकानूनी होगा। साथ ही अगले साल से क्लासरूम में गैर-इतालवी भाषी छात्रों की संख्या पर 30 प्रतिशत की सीमा लागू की जाएगी। नियम तोड़ने पर जुर्माना नए नियमों का उल्लंघन करने पर 1,000 यूरो (करीब 1,140 डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। decree-law तुरंत प्रभाव में आ सकता है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी होगी। मेलोनी ने क्या कहा Giorgia Meloniने रविवार को अपनी पार्टी Brothers of Italy (FdI) की युवा शाखा के एक कार्यक्रम में इन बदलावों की घोषणा की थी। उन्होंने अपने X अकाउंट पर लिखा कि इतालवी भाषा सीखने के “tools” और स्कूलों में बुर्का-नकाब को “रोकना” ऐसी “common sense” बातें हैं जो लोगों को बांटती नहीं हैं। Oggi abbiamo approvato in Consiglio dei Ministri il decreto sulla scuola. Un limite del 30% nelle classi per gli studenti che non conoscono adeguatamente l’italiano, più strumenti per imparare la nostra lingua e stop a burqa e niqab a scuola. Strumenti di buonsenso che non… pic.twitter.com/JEbie74wYy — Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) September 24, 2026 राष्ट्रपति की चिंता राष्ट्रपति सर्जियो मतारेल्ला, जिन्हें भी इस डिक्री पर हस्ताक्षर करने हैं, ने इस हफ्ते शिक्षा पर किसी भी तरह की बाधा को लेकर सतर्कता जताई थी। विदेशी छात्रों की मौजूदा स्थिति शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 शैक्षणिक वर्ष में गैर-नागरिक छात्र Italy की स्कूली आबादी का 11.2 प्रतिशत थे, जबकि 30 प्रतिशत से ज्यादा विदेशी छात्रों वाली कक्षाएं कुल कक्षाओं का 7.6 प्रतिशत थीं। अभिभावकों के लिए भाषा की शर्त सरकार ने उन विदेशी छात्रों के अभिभावकों के लिए भी इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में एकीकृत होने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। ये भी पढ़ें:Sensex 315 अंक चढ़ा, Nifty भी संभला; Realty-Auto शेयरों में तेजी, बैंकिंग शेयरों का भी सहारा बुर्का बैन पर बहस नए नियमों के तहत छात्र स्कूल में बुर्का और नकाब सहित चेहरा पूरी तरह ढकने वाले परिधान नहीं पहन सकेंगे। सरकार का तर्क है कि खुला संवाद और भागीदारी सीखने के माहौल का अहम हिस्सा हैं। समर्थकों का कहना है कि यह एकीकरण की दिशा में कदम है, जबकि आलोचकों ने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद से जुड़े सवाल उठाए हैं। मेलोनी ने हिजाब (सिर ढकने वाला स्कार्फ) का इसमें कोई ज़िक्र नहीं किया। यूरोप में व्यापक बहस का हिस्सा यह प्रस्ताव यूरोप में आव्रजन, सांस्कृतिक एकीकरण और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर जारी व्यापक बहस के बीच आया है। कई यूरोपीय देशों में पहले से सार्वजनिक स्थानों और शिक्षण संस्थानों में चेहरा ढकने वाले परिधानों पर अलग-अलग स्तर की पाबंदियां लागू हैं। FAQs Q1. इटली में स्कूलों में बुर्का-नकाब पर बैन क्यों लगाया जा रहा है? सरकार का कहना है कि स्कूलों में खुला संवाद और छात्रों की पूरी भागीदारी ज़रूरी है, इसलिए चेहरा ढकने वाले परिधानों पर रोक लगाई जा रही है। Q2. नियम तोड़ने पर क्या सज़ा है? नियमों के उल्लंघन पर 1,000 यूरो (लगभग 1,140 डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। Q3. विदेशी छात्रों की संख्या पर क्या सीमा तय की गई है? क्लासरूम में गैर-इतालवी भाषी छात्रों की संख्या पर 30 प्रतिशत की सीमा अगले साल से लागू होगी। Q4. क्या यह कानून लागू हो चुका है? यह एक decree-law है, जो तुरंत प्रभाव में आ सकता है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी ज़रूरी है। Q5. क्या हिजाब पर भी बैन लगाया गया है? नहीं, मेलोनी ने खासतौर पर बुर्का और नकाब का ज़िक्र किया है, हिजाब का इसमें उल्लेख नहीं किया गया है। Q6. इस फैसले पर क्या विवाद है? समर्थक इसे एकीकरण की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि आलोचकों ने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद पर सवाल उठाए हैं।

Russia Ukraine मिसाइल हमला: कीव में ताबड़तोड़ बमबारी से 19 लोग घायल, बच्चे भी शामिल

Russia Ukraine पर 131 मिसाइल-ड्रोन हमला, 19 घायल

New Delhi: Russia-Ukraine मिसाइल हमला एक बार फिर सुर्खियों में है Russia ने Ukraine की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों पर मिसाइलों और ड्रोनों की एक बड़ी बौछार की, जिसमें कम से कम 19 लोग घायल हो गए, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला रातोंरात कीव, ज़ापोरिज्जिया और ओडेसा क्षेत्रों में एक साथ किया गया। Russia Ukraine मिसाइल हमला: कितना बड़ा था यह हमला यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, इस ताज़ा रूस यूक्रेन मिसाइल हमले के दौरान कुल 131 रूसी हवाई लक्ष्यों जिनमें बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें, ड्रोन और डिकॉय (धोखा देने वाले उपकरण) शामिल थे को नष्ट या निष्क्रिय किया गया। इतने बड़े पैमाने पर एक साथ आए हमलों ने यूक्रेन की हवाई सुरक्षा प्रणाली को एक बड़ी परीक्षा से गुज़ारा। रूस का दावा: सैन्य-औद्योगिक ठिकानों को बनाया निशाना रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी सेना ने धातु और इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट्स, सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स की फैक्ट्रियों, और ऊर्जा व परिवहन से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर यूक्रेनी सेना के लिए सामान ले जा रहे तीन बड़े मालवाहक जहाज़ और एक फेरी को भी इस हमले में निशाना बनाया गया। यह भी पढ़ें:Rajya Sabha की 11 सीटों पर चुनाव का ऐलान, UP-उत्तराखंड में बड़ा सियासी घमासान तय आम नागरिकों पर सीधा असर हालांकि रूस अक्सर अपने हमलों को सैन्य-केंद्रित बताता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इन हमलों में आम नागरिक भी घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं जो दिखाता है कि आबादी वाले इलाकों में भी नुकसान पहुंचा है, भले ही असली लक्ष्य इंफ्रास्ट्रक्चर बताया जा रहा हो। रूस यूक्रेन युद्ध: जारी है दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला यह ताज़ा रूस यूक्रेन मिसाइल हमला उस लगातार बढ़ते पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे की ऊर्जा और सैन्य-औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहे हैं। हाल के हफ्तों में रूस ने मॉस्को पर भी यूक्रेनी ड्रोन हमलों का सामना किया है, जिसे मॉस्को के मेयर ने “अब तक का सबसे बड़ा” हमला बताया था, जिसमें एक तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचा था। वहीं यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने भी रूस के कई इलाकों में तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और फैक्ट्रियों को निशाना बनाया है। युद्ध का पैमाना लगातार बढ़ रहा है पिछले कुछ महीनों के आंकड़े देखें तो हमलों की तीव्रता में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद कुल पैमाना बढ़ता ही जा रहा है कुछ हालिया रातों में तो रूस ने एक ही हमले में 800 से ज़्यादा ड्रोन और दर्जनों मिसाइलें भी दागी हैं, जो युद्ध के इस चरण में अब तक के सबसे बड़े एक-रात के हमलों में शुमार है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया यूक्रेनी अधिकारी लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने और आधुनिक एयर-डिफेंस सिस्टम मुहैया कराने की अपील करते रहे हैं, ताकि नागरिक आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक शांति वार्ता ठोस नतीजे तक नहीं पहुंचती, तब तक इस तरह के रूस यूक्रेन मिसाइल हमले जारी रहने की आशंका है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Faqs) Q1: इस Russia-Ukraine मिसाइल हमले में कितने लोग घायल हुए? कम से कम 19 लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। Q2: हमला किन इलाकों में हुआ? कीव, ज़ापोरिज्जिया और ओडेसा क्षेत्रों में। Q3: कितने हवाई लक्ष्यों को नष्ट किया गया? यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, 131 रूसी मिसाइलों, ड्रोन और डिकॉय को नष्ट या निष्क्रिय किया गया। Q4: रूस ने अपने हमले का मकसद क्या बताया? सैन्य-औद्योगिक ठिकानों, ऊर्जा और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना। Q5: क्या चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर भी हमला हुआ? हां, रूस के मुताबिक वहां यूक्रेनी सेना के लिए सामान ले जा रहे जहाज़ों को निशाना बनाया गया।

US Tariff Impact on India: अमरीका के 100% टैरिफ बिल से भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट, जानिए पूरा सच

US Tariff Impact on India: जानिए 100% टैरिफ का असर

New Delhi: वैश्विक कूटनीति और व्यापार के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा नया मोड़ सामने आया है। अमरीकी संसद ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम बिल’ को हरी झंडी दे दी है, जो अमरीकी राष्ट्रपति को रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक का भारी शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार देता है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या US Tariff Impact on India भारत के निर्यात और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को सीधे प्रभावित करेगा? ‘100% टैरिफ का चाबुक’: जानिए क्या है अमरीका का नया दांव? रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत द्वारा रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदने का मुद्दा अमरीका में लगातार गरमाता रहा है। नया कानून पारित होने के बाद अमरीकी प्रशासन को यह शक्ति मिल गई है कि वह रूसी ईंधन का आयात करने वाले देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स थोप सके। निर्यातकों के लिए बड़ा झटका: भारतीय कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेक्टर के लिए अमरीका सबसे बड़ा बाजार है। अगर 100% शुल्क लगता है, तो अमरीकी बाजार में भारतीय उत्पाद काफी महंगे हो जाएंगे। सप्लाई चेन पर संकट: विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल भारत बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होगी, जिससे दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल बन रहा है। यह भी पढ़ें: WFH Cyber Fraud: जब बिना OTP और पासवर्ड के खाली हो जाए बैंक खाता, जानिए ठगों का नया पैंतरा भारत का रुख: संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं यह भी पढ़ें:WFH Cyber Fraud: जब बिना OTP और पासवर्ड के खाली हो जाए बैंक खाता, जानिए ठगों का नया पैंतर अमरीका के इस सख्त कानून के बीच नई दिल्ली का रुख बेहद स्पष्ट रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा ज़रूरतें 1.4 अरब आबादी के जीवन से जुड़ी हैं और किसी भी बाहरी दबाव में ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। क्या भारत के पास है कोई ‘प्लान B’? व्यापारिक विविधता: भारत पहले ही मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों से तेल आयात के विकल्पों को मजबूत कर रहा है। लोकल करंसी ट्रेड: अमरीकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अन्य मित्र देशों के साथ अपनी स्थानीय मुद्रा (रुपये) में व्यापार का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। आर्थिक मोर्चे पर क्या होगा असर? अगर अमरीकी प्रशासन इस टैरिफ को सख्ती से लागू करता है, तो इसका असर US Tariff Impact on India के रूप में शेयर बाजार और भारतीय मुद्रा पर देखने को मिल सकता है। आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव: अमरीकी कंपनियों के लिए भारतीय सेवाएं महंगी हो सकती हैं, जिससे नए कॉन्ट्रैक्ट्स पर असर पड़ सकता है। घरेलू बाजार में महंगाई की आशंका: यदि भारत को महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ा, तो देश के भीतर परिवहन और अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस नए दौर में अमरीका का यह सख्त फैसला वैश्विक कूटनीति को एक नाजुक मोड़ पर ले आया है। हालाँकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत किया है, लेकिन इस नए अमरीकी कानून के बाद नई दिल्ली की भावी कूटनीतिक रणनीति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: US Tariff Impact on India से आम भारतीय नागरिक पर क्या असर पड़ेगा? Ans: यदि अमरीकी टैरिफ के दबाव में भारत को महंगा तेल आयात करना पड़ता है, तो इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर परिवहन लागत और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर पड़ेगा। Q2: अमरीका का नया बिल क्या है और यह भारत को कैसे प्रभावित करता है? Ans: अमरीका ने एक नया कानून पारित किया है जो राष्ट्रपति को रूस से तेल खरीदने वाले देशों (जैसे भारत और चीन) के उत्पादों पर 100% तक का टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इससे भारत से अमरीका जाने वाले निर्यात महंगे हो सकते हैं। Q3: क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? Ans: भारत का हमेशा से रुख रहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा। भारत ने वैश्विक मंचों पर बार-बार स्पष्ट किया है कि उसकी तेल खरीद का फैसला देश की आंतरिक जरूरतों के आधार पर होता है।

Riyadh Houthi Missile Attack: US  को डर, पश्चिम एशिया में तेज़ी से भड़क सकता है संघर्ष

Riyadh Missile Attack: मिडिल ईस्ट में भड़क सकता है युद्ध

New Delhi: यमन युद्ध फिर से शुरू होने के बाद पहली बार हूथी मिसाइलों ने सऊदी अरब की राजधानी Riyadh को निशाना बनाया है। इस घटना के बाद, US ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सऊदी अरब और ईरान के सपोर्ट वाले हूथी विद्रोहियों के बीच चल रहा मिलिट्री झगड़ा तेज़ी से बढ़ सकता है। शनिवार शाम को, Riyadh के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सोशल मीडिया पर कन्फर्म किया कि हूथी विद्रोहियों द्वारा राजधानी की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट करके नष्ट कर दिया गया। गठबंधन के अनुसार, ईरान के सपोर्ट वाले लड़ाकों ने पश्चिमी सऊदी अरब के कई शहरों में आम लोगों और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की कोशिश की, जिसमें लाल सागर पर यानबू पोर्ट भी शामिल है, जो सऊदी तेल एक्सपोर्ट का एक बड़ा हब है। शनिवार को Riyadh में दो ज़ोरदार धमाके सुने गए। एयरपोर्ट के पास तेल कंपनी अरामको के एक फ्यूल टैंक में आग लगने की भी खबर मिली। हूथी विद्रोहियों का दावा हूथी मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सारी ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर कहा कि हाल ही में सऊदी हमलों के जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज़ मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके दो बड़े मिलिट्री ऑपरेशन किए गए। पहले ऑपरेशन में Riyadh में सेंसिटिव टारगेट और दूसरे में यानबू में अरामको की फैसिलिटी को टारगेट किया गया। US की कड़ी चेतावनी और ट्रंप का फैसला US स्टेट डिपार्टमेंट ने साफ कहा, “इस मिलिट्री लड़ाई के तेज़ी से बढ़ने का खतरा है।” इसने मिडिल ईस्ट के बाहर रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को भी इस इलाके की यात्रा पर गंभीरता से दोबारा सोचने की सलाह दी। इस घटनाक्रम के बीच, US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप कैंप डेविड में अपना वीकेंड छोटा करने के बाद अचानक व्हाइट हाउस लौट आए। व्हाइट हाउस ने उनके लौटने का कोई ऑफिशियल कारण नहीं बताया, लेकिन माना जा रहा है कि इसका सीधा संबंध सऊदी अरब पर हुए बड़े हमले से है। यमन में तबाही और लोगों को हटाना हूथी विद्रोहियों के हालिया हमलों ने यमन के बड़े हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया है, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं। यूनाइटेड नेशंस (UN) के डेटा के मुताबिक, इस लड़ाई की वजह से 110,000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। हालांकि सऊदी अरब ने हूथी के कंट्रोल वाले इलाकों पर लगातार एयरस्ट्राइक की हैं, लेकिन बागियों की बढ़त रुकी नहीं है।सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है।Riyadh और यानबू जैसे बड़े हब पर हुए हमलों ने सऊदी ऑयल एक्सपोर्ट और शिपिंग पर असर डाला है। पहले से चल रही ग्लोबल इकॉनमिक उथल-पुथल के बीच, ऑयल सप्लाई में रुकावट से इंटरनेशनल मार्केट पर और दबाव पड़ सकता है। एनालिस्ट की राय एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि हूथी हमलों में यह बढ़ोतरी US और उसके साथियों को यह मैसेज देने की कोशिश है कि ईरान के साथ कोई भी लड़ाई पूरे इलाके में एक बड़ी जंग छेड़ सकती है। इसे US के “मैक्सिमम प्रेशर” बैन के जवाब में ईरान की तरफ से एक अजीब जवाबी कार्रवाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: रियाद पर हमला कब हुआ था? जवाब: शनिवार, 19 सितंबर, 2026. यमन युद्ध फिर से शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब सऊदी कैपिटल को सीधे टारगेट किया गया है? शनिवार, 19 सितंबर 2026 को। यमन युद्ध दोबारा शुरू होने के बाद यह पहला मौका है जब सीधे सऊदी राजधानी को निशाना बनाया गया है। Q2: US ने क्या चेतावनी जारी की है? US ने कहा है कि यह लड़ाई तेज़ी से बढ़ सकती है और उसने अपने नागरिकों को इस इलाके की यात्रा करने से बचने या फिर से सोचने की सलाह दी है। Q3: हूथी विद्रोहियों ने क्या दावा किया है?  उन्होंने रियाद में सेंसिटिव जगहों और यानबू में अरामको की फैसिलिटी पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। Q4: प्रेसिडेंट ट्रंप ने क्या एक्शन लिया?  प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कैंप डेविड में अपना वीकेंड छोटा कर दिया और तुरंत व्हाइट हाउस लौट आए। Q5: इस लड़ाई का दुनिया भर में क्या असर हो सकता है?  सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल एक्सपोर्टर है। ये हमले तेल सप्लाई और समुद्री ट्रैफिक में रुकावट डालकर दुनिया की इकॉनमी पर असर डाल सकते हैं।

America: 21 साल से कम उम्र वालों को हैंडगन बेचने पर बैन “असंवैधानिक” Justice Department का बड़ा फैसला

America: 21 से कम उम्र वालों पर हैंडगन बैन असंवैधानिक

America: America Justice Department ने शुक्रवार को एक नई कानूनी राय जारी करते हुए कहा है कि लाइसेंस प्राप्त हथियार डीलरों को 18 से 20 साल के युवाओं को हैंडगन बेचने से रोकने वाला संघीय कानून असंवैधानिक है और इसे अब लागू नहीं किया जा सकता। फैसले में क्या कहा गया है Justice Department के Office of Legal Counsel की इस राय के मुताबिक, 18 से 20 साल के युवाओं के लिए हैंडगन खरीदना मुश्किल बनाने वाला यह कानून अमेरिकी संविधान के Second Amendment (हथियार रखने का अधिकार) का उल्लंघन करता है। इस राय का सीधा मतलब है कि Trump प्रशासन अब इस कानून के तहत किसी भी मामले का न तो बचाव करेगा और न ही मुकदमा चलाएगा। America Justice Department का तर्क क्या है Office of Legal Counsel के असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल टी. इलियट गाइज़र ने कहा, “18 साल के लोग वोट डाल सकते हैं, जूरी में बैठ सकते हैं, ड्राफ्ट (सैन्य भर्ती) हो सकते हैं, और वयस्कों जैसी आपराधिक सज़ा यहां तक कि मृत्युदंड भी भुगत सकते हैं। संविधान लोगों के हथियार रखने और साथ रखने के अधिकार की रक्षा करता है।” राय में यह भी लिखा गया, “हमारे कानून एक 18 वर्षीय को इतना ‘परिपक्व’ मानते हैं कि उसे ड्राफ्ट किया जा सके, वोट देने दिया जाए, जूरी में बिठाया जाए और मौत की सज़ा तक दी जा सके। ऐसा ही एक 18 वर्षीय 2020 के टोक्यो ओलंपिक में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हुए स्कीट शूटिंग खेल चुका है। यह भी पढ़ें:Costa Serena क्रूज़ पर 4,000 एथलीट! Japan के अनोखे Asian Games प्लान की चर्चा कानूनी लड़ाई का लंबा इतिहास यह मुद्दा अदालतों में लंबे समय से उलझा रहा है, और अलग-अलग अपीलीय अदालतों ने इस पर परस्पर विरोधाभासी फैसले दिए हैं। 5वीं Circuit Court of Appeals (न्यू ऑरलियन्स) ने पहले ही इसे असंवैधानिक करार दिया था, और 3rd तथा 8th Circuits ने भी राज्य-स्तर के इसी तरह के नियमों के खिलाफ फैसला सुनाया है। दूसरी तरफ, 4th Circuit ने पिछले साल संघीय आयु प्रतिबंध को बरकरार रखा था, जबकि 10th और 11th Circuits ने भी राज्य-स्तर की आयु सीमाओं का समर्थन किया है। खास बात यह है कि Supreme Court ने, जो हाल के वर्षों में Second Amendment को लेकर व्यापक रुख अपनाती रही है, पिछले साल इस मुद्दे को सुनने से इनकार कर दिया था। 2022 के बड़े फैसले का असर यह पूरा कानूनी विवाद 2022 के एक ऐतिहासिक Supreme Court फैसले  New York State Rifle & Pistol Association v. Bruen  के बाद और तेज़ हुआ, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि आधुनिक हथियार कानूनों को अमेरिका की “ऐतिहासिक हथियार-नियमन परंपरा” के अनुरूप होना ज़रूरी है। यह प्रतिबंध मूल रूप से 1968 के Omnibus Crime Control and Safe Streets Act के तहत लागू किया गया था। Gun Control समूहों की तीखी प्रतिक्रिया इस फैसले पर Gun Control समर्थक संगठनों ने कड़ी नाराज़गी जताई है। Everytown Law के कार्यकारी निदेशक एरिक टिर्शवेल ने कहा, “देशभर के संघीय अभियोजक अब 18 से 20 साल के युवाओं को अवैध रूप से हैंडगन बेचने वाले डीलरों को जवाबदेह ठहराना बंद कर देंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि DOJ ने उनसे यह सुरक्षा वापस ले ली है। हिंसा के सबसे ज़्यादा जोखिम वाले आयु वर्ग के लिए बनी सुरक्षा को छोड़ देना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति एक खतरनाक कर्तव्य-विमुखता है।” एक दिन पहले भी आया था बड़ा फैसला यह फैसला ऐसे समय आया है जब सिर्फ एक दिन पहले ही यह खबर सामने आई थी कि Justice Department उस कोर्ट फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगा जिसने साइलेंसर, शॉर्ट-बैरल्ड राइफल्स और शॉर्ट-बैरल्ड शॉटगन जैसे हथियारों को National Firearms Act के तहत काफी हद तक डीरेगुलेट कर दिया था , यानी बंदूक कानूनों को लेकर Trump प्रशासन का रुख लगातार ढीला होता जा रहा है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: Justice Department ने क्या फैसला दिया है? 18 से 20 साल के युवाओं को हैंडगन बेचने पर रोक लगाने वाला संघीय कानून असंवैधानिक है और इसे लागू नहीं किया जा सकता। Q2: यह फैसला किस आधार पर लिया गया? Second Amendment (हथियार रखने के अधिकार) के उल्लंघन के आधार पर। Q3: क्या इस मुद्दे पर पहले भी कोर्ट के फैसले आए हैं? हां, अलग-अलग Circuit Courts के परस्पर विरोधाभासी फैसले रहे हैं  कुछ ने बैन को असंवैधानिक माना, कुछ ने बरकरार रखा। Q4: Gun Control समूहों की क्या प्रतिक्रिया है? उन्होंने इसे “लापरवाह” और “खतरनाक” फैसला बताया है, जो हिंसा के सबसे ज़्यादा जोखिम वाले आयु वर्ग को असुरक्षित छोड़ देगा। Q5: क्या Supreme Court ने इस मुद्दे पर फैसला दिया है? नहीं, Supreme Court ने पिछले साल इस मुद्दे को सुनने से इनकार कर दिया था।

Iran War पर रिकॉर्ड विरोध: 71% अमेरिकी वोटरों का मानना ट्रम्प के पास “कोई रणनीति नहीं”, Fox News सर्वे में खुलासा

71% US Voters: Iran War पर Trump के पास रणनीति नहीं

New Delhi: अमेरिका में मध्यावधि चुनावों (midterms) की इन-पर्सन वोटिंग शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, Fox News के एक नए सर्वे ने Iran War को लेकर Trump प्रशासन की सबसे बड़ी राजनीतिक कमज़ोरी उजागर कर दी है  रिकॉर्ड संख्या में रजिस्टर्ड वोटर अब इस युद्ध के खिलाफ हैं, और मानते हैं कि इसे खत्म करने की कोई स्पष्ट योजना ही नहीं है। Iran War सर्वे का सबसे बड़ा आंकड़ा गुरुवार को प्रकाशित इस सर्वे के मुताबिक, 71% वोटरों का मानना है कि Trump प्रशासन के पास इस संघर्ष को खत्म करने की “कोई स्पष्ट रणनीति नहीं” है। यह युद्ध, जिसने महंगाई बढ़ाई है और ईंधन की कीमतों को आसमान छुआने पर मजबूर किया है, अब सीधे तौर पर ट्रम्प की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। टाइमिंग बेहद अहम इस सर्वे के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के लिए इन-पर्सन वोटिंग शुरू होने में सिर्फ एक दिन बाकी था। सितंबर के मध्य में किए गए इस सर्वे में यह भी सामने आया कि 60% से ज़्यादा वोटर — जो अब तक का नया उच्चतम आंकड़ा है — मानते हैं कि Iran  के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना “गलत फैसला” था। Trump की अप्रूवल रेटिंग को लगा सीधा झटका इस अलोकप्रिय युद्ध का सीधा असर राष्ट्रपति ट्रम्प की समग्र परफॉर्मेंस रेटिंग पर भी पड़ा है, जिसकी डिसअप्रूवल दर अब 61% तक पहुंच चुकी है  यानी दस में से छह वोटर उनके कामकाज से नाखुश हैं। सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता सर्वे में एक और चिंताजनक रुझान सामने आया  47% रजिस्टर्ड वोटरों का मानना है कि यह संघर्ष लंबे समय में अमेरिका को कम सुरक्षित बना देगा, जो अप्रैल में सिर्फ 39% था। इसके उलट, सिर्फ 32% वोटर मानते हैं कि इससे देश ज़्यादा सुरक्षित होगा यानी सुरक्षा को लेकर जनता की चिंता महीनों में काफी तेज़ी से बढ़ी है। यह भी पढ़ें:Delhi Bus Strike: एयरपोर्ट पहुंचना हुआ मुश्किल, Metro ने बढ़ाई 20 अतिरिक्त ट्रिप्स छह हफ्ते चलेगी अर्ली वोटिंग मध्यावधि चुनावों में अर्ली वोटिंग छह हफ्तों तक चलेगी, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट, दोनों के लिए वोट डाले जाएंगे। अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो वे ट्रम्प के राष्ट्रपति कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों की दिशा को काफी हद तक बदल सकते हैं। ट्रम्प की चुनावी प्रक्रिया में दखल की कोशिशें इस राजनीतिक चुनौती से निपटने के लिए ट्रम्प ने अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया में भी कई बदलाव करने की कोशिश की है। उन्होंने मेल बैलेट (डाक से मतदान) पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, चुनाव अधिकारियों पर संवेदनशील वोटर डेटा साझा करने के लिए दबाव अभियान शुरू किया, और गैर-नागरिकों द्वारा वोटिंग को लेकर एक व्यापक संघीय जांच भी शुरू करवाई। अन्य संबंधित घटनाक्रम इसी हफ्ते ट्रम्प प्रशासन ने सऊदी अरब को F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री को मंज़ूरी दी है, और शीर्ष ईरानी नेताओं को संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए वीज़ा भी स्वीकृत किया है दोनों ही फैसले मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में कूटनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं। इसके अलावा, व्हाइट हाउस ने ICE (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट) का नेतृत्व करने के लिए लांस श्रोयर के नामांकन को भी वापस ले लिया है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: कितने प्रतिशत वोटर मानते हैं कि ट्रम्प के पास Iran War खत्म करने की रणनीति नहीं है? 71% वोटर, Fox News के ताज़ा सर्वे के मुताबिक। Q2: ट्रम्प की मौजूदा अप्रूवल रेटिंग क्या है? 61% डिसअप्रूवल के साथ, जो उनके लिए एक नया झटका है। Q3: कितने वोटर Iran War को “गलत फैसला” मानते हैं? 60% से ज़्यादा — यह अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। Q4: क्या जनता की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है? हां — 47% वोटर मानते हैं कि यह युद्ध अमेरिका को कम सुरक्षित बनाएगा, जो अप्रैल में 39% था। Q5: यह सर्वे कब आया, और इसका महत्व क्या है? मध्यावधि चुनावों की इन-पर्सन वोटिंग शुरू होने से ठीक एक दिन पहले, जिससे यह राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

“1.4 अरब लोगों की सुरक्षा सबसे पहले”: Russian oil पर 100% US tariff की धमकी पर India का कड़ा जवाब

1.4 अरब लोग पहले': US tariff धमकी पर भारत का जवाब

New Delhi: US कांग्रेस में एक नया बिल पास होने के बाद, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक tariff लगाने का प्रावधान है, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि एनर्जी सिक्योरिटी पर उसका रुख नहीं बदलेगा। नए बिल में क्या कहा गया है यह नया कानून US एडमिनिस्ट्रेशन को रूसी कच्चे तेल और नेचुरल गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक tariff लगाने का अधिकार देता है, जिसका सीधा टारगेट भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार हैं। यह कानून सिर्फ उन देशों को छूट देता है जो रूस के कुल नेचुरल गैस एक्सपोर्ट का 15% से कम इंपोर्ट करते हैं और अपनी खरीद में साफ, वेरिफाइड कमी दिखा सकते हैं। इसका बताया गया मकसद रूस की युद्ध-फाइनेंसिंग क्षमता को कमजोर करना है। भारत का सीधा और साफ़ जवाब इस दबाव का जवाब देते हुए, विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत हालात पर करीब से नज़र रख रहा है, लेकिन उसकी एनर्जी खरीदने की पॉलिसी बदलते ग्लोबल मार्केट के हालात से तय होगी, बाहरी दबाव से नहीं। सरकार ने यह भी दोहराया कि रूसी तेल की स्ट्रेटेजिक खरीद ने घरेलू कीमतों को स्थिर करने में अहम भूमिका निभाई है, और बाहरी दबाव नहीं, बल्कि देश के हित उसकी खरीदने की पॉलिसी तय करेंगे। यह भी पढ़ें: रिपोर्टर टीवी के MD Anto Augustine की मुश्किलें बढ़ीं, केरल CM की “second marriage” के डॉक्यूमेंट्स मामले में केस दर्ज “1.4 अरब लोग” वाली बात नई नहीं है यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत की यह बात नई नहीं है कि उसकी एनर्जी खरीदना उसके 1.4 अरब नागरिकों की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए ज़रूरी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कई मौकों पर इस बात को दोहराया है, खासकर तब जब US ने रूसी तेल इंपोर्ट को वजह बताते हुए भारतीय सामान पर पहले 25% और फिर 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ (कुल 50%) लगाया था। भारत रूस का सबसे बड़ा समुद्री तेल खरीदार है भारत अभी रूस से समुद्र के रास्ते कच्चा तेल खरीदने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है। जनवरी और जून 2026 के बीच, भारत ने रोज़ाना लगभग 1.75 मिलियन बैरल रूसी तेल इंपोर्ट किया, जो पिछले साल से 1% ज़्यादा है। भारत का कहना है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पारंपरिक तेल सप्लाई यूरोप भेज दी गई, जिससे रूसी तेल पर स्विच करना “ग्लोबल मार्केट के हालात की वजह से मजबूरी” बन गया, न कि कोई राजनीतिक फैसला। भारत का जवाबी तर्क: “पश्चिमी देश खुद रूस के साथ ट्रेड कर रहे हैं” विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी तीखी लेकिन सही जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि पश्चिमी देश, खासकर यूरोपियन यूनियन, जो भारत की आलोचना कर रहे हैं, वे भी रूस के साथ बाइलेटरल ट्रेड करते रहते हैं। यह बयान भारत की बात को और मज़बूत करने के लिए दिया गया था, यह दिखाते हुए कि यह मुद्दा सिर्फ़ भारत तक सीमित नहीं है। Jayshankar का “रेड लाइन” कमेंट विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले साफ़ किया है कि भारत-US ट्रेड बातचीत में कुछ “रेड लाइन” हैं जिन्हें पार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत 2030 तक रूस के साथ अपने सालाना व्यापार को $100 बिलियन तक बढ़ाने की योजना बना रहा है—मतलब दबाव के बावजूद, भारत अपनी रूस पॉलिसी में कोई बड़ा बदलाव करने के मूड में नहीं दिखता है। Indian Airports पर असर एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर यह टैरिफ खतरा सच हो जाता है, तो इससे US को भारत के एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर टेक्सटाइल और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में, जहां मौजूदा tariff के कारण नौकरियां पहले से ही खतरे में हैं। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: नए US बिल में क्या प्रपोज़ल है? US एडमिनिस्ट्रेशन को रूस के कच्चे तेल के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक tariff लगाने की पावर देना। Q2: भारत ने इस पर क्या रिस्पॉन्स दिया है? भारत ने कहा है कि उसकी एनर्जी पॉलिसी मार्केट के हालात और देश के हित से तय होगी, बाहरी दबाव से नहीं। Q3: “1.4 बिलियन लोग” वाले बयान का क्या मतलब है? भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी का यही मुख्य कारण है—कि इतनी बड़ी आबादी की सस्ती एनर्जी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग सोर्स से तेल खरीदना ज़रूरी है। Q4: भारत रोज़ाना कितना रूसी तेल खरीदता है? जनवरी-जून 2026 के डेटा के मुताबिक, लगभग 1.75 मिलियन बैरल रोज़ाना। Q5: क्या कोई देश इस टैरिफ से छूट पा सकता है? हाँ, अगर कोई देश रूस के कुल गैस एक्सपोर्ट का 15% से कम इंपोर्ट करता है और अपनी खरीद में वेरिफाइड कमी दिखाता है।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में एआई, डॉलर और यूएन सुधार पर हुए बड़े फैसले

18th BRICS Summit New Delhi Declaration

नई दिल्ली : 18वां BRICS समिट नई दिल्ली में सफलतापूर्वक खत्म हुआ। इस ऐतिहासिक समिट के आखिर में, सभी 11 सदस्य देशों ने एकमत होकर 140-पॉइंट वाले “नई दिल्ली डिक्लेरेशन” को मंज़ूरी दी। समिट के दौरान फॉर्मल मीटिंग्स, फोटो-ऑप्स और दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद, दुनिया भर के पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स अब इस बात पर फोकस कर रहे हैं कि सदस्य देशों को इस बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म से आखिर में क्या मिला और भविष्य में दुनिया की पॉलिटिक्स और इकॉनमी पर इसका क्या असर होगा।  भारत ने एक बड़ी डिप्लोमैटिक जीत हासिल की इस समिट ने भारत के नज़रिए से कई बड़ी सफलताएं हासिल कीं: यूनाइटेड नेशंस में परमानेंट मेंबरशिप के लिए सपोर्ट:नई दिल्ली डिक्लेरेशन ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में भारत और ब्राज़ील के लिए एक परमानेंट और ज़्यादा असरदार रोल का खुलकर सपोर्ट किया। भारत दशकों से UN रिफॉर्म और परमानेंट मेंबरशिप की मांग कर रहा है, जिसे इस प्लेटफॉर्म से काफी सपोर्ट मिला है। आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश: घोषणा में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले (जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई) की कड़ी निंदा की गई है। ग्लोबल लेवल पर आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को सभी सदस्य देशों का सपोर्ट मिला। यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के CEO से की मुलाकात, कल से शुरू होगा SEMICON इंडिया 2026 US डॉलर से अलग होना और एकतरफा टैरिफ पर हमला घोषणा में ग्लोबल ट्रेड और अर्थव्यवस्था के बारे में कई बड़े फैसले भी लिए गए हैं: लोकल करेंसी में ट्रेड: BRICS देशों ने आपसी ट्रेड में US डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लोकल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया है। प्रोटेक्शनिज्म की आलोचना: किसी भी देश का सीधे नाम लिए बिना, घोषणा में एकतरफा टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों की कड़ी आलोचना की गई। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि यह US की ट्रेड पॉलिसी और आर्थिक पाबंदियों का सीधा रेफरेंस था। AI और साइबर सिक्योरिटी अब BRICS Summit के मुख्य एजेंडे में टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में, इस समिट ने एक नया चैप्टर जोड़ा है। पहली बार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को ऑफिशियली BRICS के मेन ट्रेड और फाइनेंशियल एजेंडा में शामिल किया गया है। डिक्लेरेशन में खास तौर पर साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने, बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और स्कैम नेटवर्क से मिलकर निपटने, और भारत के फरवरी AI समिट और शंघाई AI कॉन्फ्रेंस के नतीजों का जिक्र है। गाजा और यूक्रेन जैसे ग्लोबल मुद्दों पर राय गाजा संकट: BRICS देशों ने वेस्ट एशिया के हालात पर चिंता जताई और गाजा में तुरंत सीजफायर और टू-स्टेट सॉल्यूशन की मांग की। उन्होंने फिलिस्तीन को UN की पूरी मेंबरशिप देने और ईस्ट येरुशलम को उसकी राजधानी बनाने के प्रपोजल का भी सपोर्ट किया। यूक्रेन विवाद पर कंट्रोल:रूस के BRICS का फाउंडिंग मेंबर होने की वजह से, डिक्लेरेशन में यूक्रेन वॉर का कोई डायरेक्ट जिक्र नहीं किया गया। इसके बजाय, इसमें सिर्फ डिप्लोमैटिक बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए विवाद को सुलझाने की एक आम अपील की गई।  भारत की सफल बिहाइंड-द-सीन्स डिप्लोमेसी इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस 140-पॉइंट डिक्लेरेशन पर सभी 11 देशों की आम सहमति बनाना कोई आसान काम नहीं था। मिडिल ईस्ट में चल रहे टेंशन के बीच, यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) और ईरान जैसे देशों को एक साथ लाना और आम सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती थी। भारत ने अपनी मज़बूत बैक-चैनल डिप्लोमेसी का इस्तेमाल करके इस मुश्किल काम को सफलतापूर्वक पूरा किया।  अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: ​​नई दिल्ली डिक्लेरेशन कब और कैसे अपनाया गया था? जवाब: इसे 12-13 सितंबर, 2026 को BRICS समिट के आखिरी दिन सभी 11 सदस्य देशों की एकमत से अपनाया गया था। Q2: क्या इसमें जम्मू और कश्मीर के आतंकवादी हमले का ज़िक्र है? जवाब: हाँ, डिक्लेरेशन में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की साफ़ और कड़ी निंदा की गई है। Q3: क्या डिक्लेरेशन में यूनाइटेड स्टेट्स का ज़िक्र है? जवाब: कोई सीधा ज़िक्र नहीं किया गया है, लेकिन एकतरफ़ा टैरिफ़ और ट्रेड बैन की आलोचना साफ़ तौर पर यूनाइटेड स्टेट्स पर की गई है। Q4: टेक्नोलॉजी और AI को लेकर क्या नया फ़ैसला लिया गया? जवाब: पहली बार, AI, साइबर सिक्योरिटी और ऑनलाइन फ़ाइनेंशियल धोखाधड़ी से निपटने से जुड़े मुद्दों को BRICS के कोर एजेंडा में शामिल किया गया है। Q5: यूक्रेन युद्ध पर BRICS देशों का क्या रुख था? जवाब: रूस की मौजूदगी की वजह से, सीधे ज़िक्र से बचा गया और सिर्फ़ शांतिपूर्ण बातचीत और डिप्लोमेसी के ज़रिए समाधान की अपील की गई।