New Delhi: देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने Tata Group में चल रही अंदरूनी खींचतान अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुकी है। इस Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद में अब NCP-SP प्रमुख Sharad Pawar की सीधी एंट्री हो गई है उन्होंने X पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए साफ कहा है कि टाटा समूह का परोपकारी ढांचा भारत की धरोहर है, और Tata Trusts के अधिकारों को कमज़ोर करना देश के हित में नहीं होगा।
Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद: शुरू कैसे हुआ
यह पूरा मामला 17 सितंबर 2026 को हुई Tata Sons बोर्ड बैठक के बाद गहराया। बोर्ड ने N Chandrasekaran को फरवरी 2027 से अगले 5 सालों के लिए फिर से Executive Chairman बनाने का प्रस्ताव 4-1 के बहुमत से पास किया। Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने इस फैसले के खिलाफ वोट दिया, जबकि ट्रस्ट के दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर Venu Srinivasan ने समर्थन में वोट किया। यही असहमति पूरे विवाद की जड़ बनी। इसी बैठक में Tata Sons की स्टॉक एक्सचेंज लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का प्रस्ताव भी पास हुआ।
जमशेदजी टाटा आणि टाटा कुटुंबाने उद्योगाला समाजसेवेची मूल्याधिष्ठित दिशा दिली. त्यामुळे टाटा ट्रस्टची सामाजिक बांधिलकी आणि संस्थात्मक भूमिका जपली गेली पाहिजे.
टाटा समूहाच्या नेतृत्वाबाबत निर्णय होताना संस्थात्मक प्रक्रिया आणि ट्रस्टच्या भूमिकेचा आदर होणं आवश्यक आहे. कारण… pic.twitter.com/4dNklgm8tH
— Sharad Pawar (@PawarSpeaks) September 22, 2026
Articles of Association और Veto Power की जंग
Tata Trusts और Noel Tata का तर्क है कि कंपनी के Articles of Association के तहत चेयरमैन के चुनाव या एक्सटेंशन के लिए ट्रस्ट द्वारा नामांकित दोनों (बहुमत) डायरेक्टर्स की सहमति ज़रूरी है। चूंकि 2 नॉमिनी में से केवल 1 ने ही समर्थन किया, इसलिए Tata Trusts इस फैसले को कानूनी रूप से अमान्य मान रहा है। पवार ने भी इसी बिंदु पर ज़ोर देते हुए कहा कि 4-1 का प्रस्ताव कानूनी रूप से वैध नहीं ठहरता, और उन्होंने Supreme Court के उस पुराने फैसले का हवाला दिया जिसमें नॉमिनी डायरेक्टर्स के विशेष सहमति अधिकार को मान्यता दी गई थी।
66% हिस्सेदारी और Listing पर मतभेद
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में लगभग 66% हिस्सेदारी Sir Ratan Tata Trust और Sir Dorabji Tata Trust समेत अन्य एलाइड ट्रस्ट्स के पास है। RBI के नियमों के मुताबिक Upper Layer NBFC होने के कारण Tata Sons पर शेयर बाजार में लिस्ट होने का दबाव है, लेकिन Tata Trusts को डर है कि लिस्टिंग के बाद पब्लिक शेयरहोल्डर्स के आने से ग्रुप पर ट्रस्ट्स का कंट्रोल और चैरिटी के लिए मिलने वाला डिविडेंड प्रभावित हो सकता है।
Sharad Pawar ने क्या कहा
दिग्गज नेता और पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री Sharad Pawar ने अपने बयान में टाटा समूह को महाराष्ट्र से गहरे जुड़ाव वाली एक राष्ट्रीय संस्था बताया। उन्होंने कहा कि जमशेदजी टाटा, सर दोराबजी और सर रतन टाटा की सोच थी कि बिजनेस से बनी संपत्ति समाज सेवा में जानी चाहिए यही वजह है कि Tata Sons में 66% हिस्सेदारी जानबूझकर व्यक्तिगत हाथों के बजाय परोपकारी ट्रस्ट्स को दी गई थी, ताकि कोई एक व्यक्ति इसका मालिक न बन सके। पवार ने स्पष्ट किया कि यह डिज़ाइन जानबूझकर बनाया गया था, महज़ संयोग नहीं अच्छा बिजनेस चलता है तो उसी से मिलने वाला डिविडेंड स्वास्थ्य, शिक्षा, रिसर्च और ग्रामीण आजीविका जैसे सार्वजनिक हित के कामों को फंड करता है।
संवैधानिक प्रक्रिया की अपील
पवार ने Tata Sons और Tata Trusts, दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे इस मतभेद को संवाद, तय प्रक्रिया, और Tata Group के दशकों पुराने गवर्नेंस नियमों के दायरे में ही सुलझाएं। उन्होंने कहा कि यह विवाद सिर्फ एक सामान्य बोर्डरूम असहमति नहीं, बल्कि इससे कहीं बड़ा मसला है, और नेतृत्व से जुड़े विवादों को टकराव के बजाय रचनात्मक बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए ही सुलझाया जाना चाहिए।
इस विवाद का Tata Group पर क्या असर पड़ेगा
साइरस मिस्त्री विवाद के बाद यह टाटा ग्रुप में मैनेजमेंट बनाम ट्रस्ट्स की अब तक की सबसे बड़ी संवैधानिक लड़ाई मानी जा रही है। 17 सितंबर की वोटिंग के बाद Tata Sons Board और Tata Trusts के बीच कानूनी रास्ता अपनाने की आशंका भी बढ़ गई है। इस बीच, टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों जैसे TCS, Tata Motors, और Tata Steel के शेयरधारक इस विवाद के जल्द से जल्द बातचीत से सुलझने का इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Sharad Pawar टाटा ट्रस्ट्स विवाद में क्यों कूदे?
उन्होंने Tata Trusts के परोपकारी ढांचे और गवर्नेंस अधिकारों की रक्षा को ज़रूरी बताते हुए दोनों पक्षों से संवाद के ज़रिए मसला सुलझाने की अपील की।
Q2: विवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई?
17 सितंबर 2026 को Tata Sons की बोर्ड बैठक में N Chandrasekaran के 5 साल के एक्सटेंशन को 4-1 वोट से पास किए जाने के बाद।
Q3: Tata Trusts के पास Tata Sons में कितनी हिस्सेदारी है?
लगभग 66%, विभिन्न एलाइड ट्रस्ट्स के ज़रिए।
Q4: Noel Tata ने फैसले के खिलाफ वोट क्यों दिया?
उनका तर्क है कि Articles of Association के तहत दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स की सहमति ज़रूरी है, जो इस मामले में नहीं मिली।
Q5: इस विवाद का निवेशकों पर क्या असर हो सकता है?
TCS, Tata Motors और Tata Steel जैसी लिस्टेड कंपनियों के शेयरधारक जल्द समाधान का इंतज़ार कर रहे हैं, क्योंकि लंबा खिंचता विवाद निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।










