New Delhi: Italy की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni की सरकार ने स्कूलों में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को कैबिनेट ने एक decree-law (डिक्री-कानून) पास किया, जिसके तहत स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरा ढकने वाले परिधान पहनना गैरकानूनी होगा। साथ ही अगले साल से क्लासरूम में गैर-इतालवी भाषी छात्रों की संख्या पर 30 प्रतिशत की सीमा लागू की जाएगी।
नियम तोड़ने पर जुर्माना
नए नियमों का उल्लंघन करने पर 1,000 यूरो (करीब 1,140 डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। decree-law तुरंत प्रभाव में आ सकता है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी होगी।
मेलोनी ने क्या कहा
Giorgia Meloniने रविवार को अपनी पार्टी Brothers of Italy (FdI) की युवा शाखा के एक कार्यक्रम में इन बदलावों की घोषणा की थी। उन्होंने अपने X अकाउंट पर लिखा कि इतालवी भाषा सीखने के “tools” और स्कूलों में बुर्का-नकाब को “रोकना” ऐसी “common sense” बातें हैं जो लोगों को बांटती नहीं हैं।
Oggi abbiamo approvato in Consiglio dei Ministri il decreto sulla scuola.
Un limite del 30% nelle classi per gli studenti che non conoscono adeguatamente l’italiano, più strumenti per imparare la nostra lingua e stop a burqa e niqab a scuola.
Strumenti di buonsenso che non… pic.twitter.com/JEbie74wYy
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) September 24, 2026
राष्ट्रपति की चिंता
राष्ट्रपति सर्जियो मतारेल्ला, जिन्हें भी इस डिक्री पर हस्ताक्षर करने हैं, ने इस हफ्ते शिक्षा पर किसी भी तरह की बाधा को लेकर सतर्कता जताई थी।
विदेशी छात्रों की मौजूदा स्थिति
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 शैक्षणिक वर्ष में गैर-नागरिक छात्र Italy की स्कूली आबादी का 11.2 प्रतिशत थे, जबकि 30 प्रतिशत से ज्यादा विदेशी छात्रों वाली कक्षाएं कुल कक्षाओं का 7.6 प्रतिशत थीं।
अभिभावकों के लिए भाषा की शर्त
सरकार ने उन विदेशी छात्रों के अभिभावकों के लिए भी इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में एकीकृत होने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।
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नए नियमों के तहत छात्र स्कूल में बुर्का और नकाब सहित चेहरा पूरी तरह ढकने वाले परिधान नहीं पहन सकेंगे। सरकार का तर्क है कि खुला संवाद और भागीदारी सीखने के माहौल का अहम हिस्सा हैं। समर्थकों का कहना है कि यह एकीकरण की दिशा में कदम है, जबकि आलोचकों ने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद से जुड़े सवाल उठाए हैं। मेलोनी ने हिजाब (सिर ढकने वाला स्कार्फ) का इसमें कोई ज़िक्र नहीं किया।
यूरोप में व्यापक बहस का हिस्सा
यह प्रस्ताव यूरोप में आव्रजन, सांस्कृतिक एकीकरण और सार्वजनिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर जारी व्यापक बहस के बीच आया है। कई यूरोपीय देशों में पहले से सार्वजनिक स्थानों और शिक्षण संस्थानों में चेहरा ढकने वाले परिधानों पर अलग-अलग स्तर की पाबंदियां लागू हैं।
FAQs
Q1. इटली में स्कूलों में बुर्का-नकाब पर बैन क्यों लगाया जा रहा है?
सरकार का कहना है कि स्कूलों में खुला संवाद और छात्रों की पूरी भागीदारी ज़रूरी है, इसलिए चेहरा ढकने वाले परिधानों पर रोक लगाई जा रही है।
Q2. नियम तोड़ने पर क्या सज़ा है?
नियमों के उल्लंघन पर 1,000 यूरो (लगभग 1,140 डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
Q3. विदेशी छात्रों की संख्या पर क्या सीमा तय की गई है?
क्लासरूम में गैर-इतालवी भाषी छात्रों की संख्या पर 30 प्रतिशत की सीमा अगले साल से लागू होगी।
Q4. क्या यह कानून लागू हो चुका है?
यह एक decree-law है, जो तुरंत प्रभाव में आ सकता है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी ज़रूरी है।
Q5. क्या हिजाब पर भी बैन लगाया गया है?
नहीं, मेलोनी ने खासतौर पर बुर्का और नकाब का ज़िक्र किया है, हिजाब का इसमें उल्लेख नहीं किया गया है।
Q6. इस फैसले पर क्या विवाद है?
समर्थक इसे एकीकरण की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि आलोचकों ने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद पर सवाल उठाए हैं।










