नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों भारतीय आईटी कर्मचारियों के मन में इस वक्त एक ही सवाल है: मेरे ग्रीन कार्ड केस का क्या होगा? गुरुवार, 8 अक्टूबर को US श्रम विभाग ने आठ बड़ी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के एक अहम चरण, PERM प्रोग्राम, से सस्पेंड कर दिया है।
क्या हुआ
US श्रम सचिव कीथ सोनडरलिंग ने घोषणा की कि Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Microsoft और Adobe भी इस सूची में हैं। सोनडरलिंग के अनुसार, विभाग इन कंपनियों से जुड़ी कोई नई PERM अर्ज़ी स्वीकार नहीं करेगा और लंबित अर्ज़ियों को भी प्रोसेस नहीं करेगा। घोषणा के समय उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस भी मौजूद थे। रिपोर्ट्स में Tata को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) बताया गया है।
PERM क्या है
ट्रिब्यून के मुताबिक, PERM एक अलग प्रक्रिया है, जो आमतौर पर ज़्यादातर रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए याचिका दाखिल करने से पहले ज़रूरी होती है। इसमें नियोक्ता को साबित करना होता है कि उस नौकरी के लिए कोई योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला। यानी H-1B पर काम कर रहे कर्मचारी के लिए ग्रीन कार्ड की सीढ़ी यहीं से शुरू होती है।
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भारतीय टेकीज़ पर क्या असर हो सकता है
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, जिन कर्मचारियों की PERM प्रक्रिया अभी शुरू होनी है, वे अपनी “प्रायोरिटी डेट” तय नहीं करा पाएंगे। यही तारीख ग्रीन कार्ड कतार में उनकी जगह तय करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नागरिकों के लिए यह असर खास तौर पर गंभीर हो सकता है, क्योंकि रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड पर देश-वार सीमाएं हैं और बैकलॉग पहले से लंबा है।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क
सोनडरलिंग ने कहा कि 2009 से अब तक सिर्फ इन्हीं कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कामगारों के लिए अर्ज़ी दी है। उनके मुताबिक, इन्हें 2.3 लाख से ज़्यादा H-1B वीज़ा मंज़ूरियां और 1 लाख से ज़्यादा परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन मिले हैं। ट्रिब्यून के अनुसार, प्रशासन का तर्क है कि इस प्रथा से अमेरिकी नागरिक नौकरी बाज़ार से बाहर हुए। Microsoft और Adobe के मामले में रिपोर्ट्स में कई सक्रिय संघीय जांचों का ज़िक्र है।
क्या अभी साफ नहीं है
उपलब्ध रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट नहीं है कि यह सस्पेंशन कितने समय के लिए है। यह भी साफ नहीं है कि पहले से दाखिल हो चुके ग्रीन कार्ड मामलों और H-1B पर काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों पर इसका क्या असर होगा। हमें कंपनियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया भी नहीं मिली है। प्रभावित कर्मचारियों को अपनी कंपनी के HR या इमिग्रेशन वकील से सलाह लेनी चाहिए।
आगे क्या
स्थिति साफ होने पर, खासकर कंपनियों के बयान और श्रम विभाग के अगले दिशा-निर्देश आने पर, खबर अपडेट की जाएगी।










