New Delhi: रविवार को मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। शाह ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP की अगुवाई वाले NDA शासित 21 राज्यों में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाएगा। अगले ही दिन सोमवार को AIMIM चीफ़ असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखा हमला बोला।
ओवैसी का सीधा आरोप
रिपोर्टर्स से बात करते हुए ओवैसी ने साफ़ कहा, “BJP यह (UCC लागू करना) बराबरी के लिए नहीं कर रही है। यह सिर्फ़ मुसलमानों को टारगेट करने के लिए है।” उन्होंने इसे संविधान के आर्टिकल 14 (बराबरी का अधिकार) और आर्टिकल 25 (धार्मिक आज़ादी) का सीधा उल्लंघन बताया।
“देश की आत्मा प्लूरलिज़्म में है”
ओवैसी ने आगे कहा कि भारत की पहचान उसकी डाइवर्सिटी में है, और UCC लागू करने का मतलब होगा गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना। यह कोई नई बात नहीं है — ओवैसी पहले भी इसी तर्क के साथ UCC का विरोध करते रहे हैं।
गोवा का सवाल फिर उठा
ओवैसी ने एक पुराना लेकिन असरदार सवाल दोहराया – अगर BJP सच में UCC को लेकर सीरियस है, तो उसे गोवा में लागू किए गए मॉडल को उत्तराखंड और गुजरात जैसे BJP शासित राज्यों में लागू करके दिखाना चाहिए। उन्होंने एक पोस्ट में यह भी लिखा
गुरुवार को हैदराबाद में एक बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मुसलमानों के खिलाफ हैं, वे बार-बार गोवा का उदाहरण देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं — जबकि असलियत यह है कि गोवा में अभी भी अलग-अलग कम्युनिटी के लिए अलग-अलग प्रोविज़न हैं।
NDA के सहयोगियों पर भी निशाना
ओवैसी यहीं नहीं रुके। उन्होंने BJP के सहयोगियों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उनके पास कोई इंडिपेंडेंट पॉलिटिकल आवाज़ बची है, या वे सिर्फ़ एक “छोटी BJP” बन गए हैं।
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उलझन का मुद्दा भी उठाया
एक दिलचस्प तर्क देते हुए ओवैसी ने कहा कि यह एक अजीब विडंबना है – एक तरफ BJP एक जैसे कानून की बात करती है, दूसरी तरफ उसके शासित राज्यों में “डिस्टर्ब्ड एरियाज़ एक्ट” जैसे कानून लागू हैं, जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाते हैं। NRC को लेकर भी चेतावनी
बातचीत सिर्फ़ UCC तक ही सीमित नहीं थी। ओवैसी ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ऑफ़ इलेक्टोरल रोल्स) प्रोसेस पर भी नाराज़गी जताई और कहा कि इससे पहले ही माइनॉरिटीज़, SC/STs और माइग्रेंट्स को बहुत मुश्किल हो रही है, और अगर NRC पूरे देश में लागू किया गया, तो हालात “100 गुना ज़्यादा खराब” होंगे। 2019 में असम में NRC के असर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जिस देश में 80 करोड़ लोग राशन पर निर्भर हैं, क्या उनसे डॉक्यूमेंट्स मांगकर अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जाएगा? यह सरकार चाहती है कि हम किसी बाबू की दया पर निर्भर रहें।”
शाह ने क्या कहा
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद शाह के मुंबई में दिए बयान से शुरू हुआ था। शाह ने कहा था, “ट्रिपल तलाक़ खत्म हो गया है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को बराबर अधिकार मिले हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू किया है, और मुझे पूरा भरोसा है कि यह 2029 से पहले सभी 21 BJP-NDA शासित राज्यों में लागू हो जाएगा।”
FAQ
Q1: अमित शाह ने क्या अनाउंस किया?
2029 के लोकसभा इलेक्शन से पहले BJP-NDA के राज वाले 21 राज्यों में UCC लागू करना।
Q2: ओवैसी का मेन इल्ज़ाम क्या है?
कि UCC का असली मकसद बराबरी नहीं बल्कि मुसलमानों को टारगेट करना है।
Q3: ओवैसी ने कौन से कॉन्स्टिट्यूशनल आर्टिकल कोट किए?
आर्टिकल 14 (बराबरी का अधिकार) और आर्टिकल 25 (धार्मिक आज़ादी)।
Q4: गोवा का उदाहरण क्यों दिया जा रहा है?
गोवा में UCC जैसा मॉडल पहले से ही लागू है, और ओवैसी चाहते हैं कि BJP इसे अपने दूसरे राज्यों में भी लागू करे।
Q5: NRC को लेकर ओवैसी ने क्या वॉर्निंग दी?
कहा कि अगर NRC पूरे देश में लागू किया जाता है, तो यह SIR प्रोसेस से ज़्यादा प्रॉब्लम खड़ी करेगा, खासकर माइनॉरिटीज़ और गरीबों के लिए।










