Mental Health Alert:थकने के बाद भी आराम न कर पाना खतरनाक! जानिए क्यों जरूरी है Mental Break लेना

New Delhi: आज की fast-paced life में लगातार काम करना, busy रहना और हर वक्त productive बने रहना success का benchmark बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी notice किया है कि जब आप दिन-भर की exhaustion के बाद थोड़ी देर relax करने बैठते हैं, तो mind में अजीब सी restlessness या mental rest महसूस होने लगती है? ऐसा लगता है जैसे break लेकर आप कोई बहुत बड़ा loss कर रहे हैं या laziness दिखा रहे हैं। Mental Health Experts और Psychotherapists के मुताबिक, extreme fatigue के बावजूद break न ले पाना और rest करने पर खुद को guilty महसूस करना Toxic Productivity और Burnout का एक बड़ा sign है। यह भी पढ़ें:Gautam Adani vs Zhang Yiming: अडानी को पीछे छोड़ कैसे एशिया के सबसे अमीर शख्स बने बाइटडांस के फाउंडर? क्यों महसूस होता है ‘Rest Guilt’? Toxic Productivity Culture: आज के दौर में society ने यह mindset बना दिया है कि अगर आप हर वक्त hustle नहीं कर रहे, तो आप अपना time waste कर रहे हैं। यही thinking दिमाग में continuous pressure पैदा करती है। Self-Worth vs Output: कई लोग अपनी self-worth और value सिर्फ इस बात से attach कर लेते हैं कि उन्होंने दिन भर में कितना task complete किया। जैसे ही productivity रुकती है, उनका confidence low होने लगता है। The ‘Earned Rest’ Trap: ज्यादातर लोग मानते हैं कि rest कोई ऐसी चीज़ है जिसे hard work करके earn करना पड़ता है। चूंकि work कभी पूरी तरह finish नहीं होता, इसलिए relax करने का time कभी नहीं आता। Nervous System in Overdrive: जब आप लंबे समय तक stress और heavy workload में रहते हैं, तो आपका nervous system ‘fight-or-flight’ mode में रहता है। ऐसे में अचानक idle बैठना brain को uncomfortable महसूस कराता है। Rest करना Weakness नहीं, Priority है Psychotherapists का मानना है कि rest कोई reward नहीं है जिसके लिए आपको खुद को exhaust करना पड़े, बल्कि यह शरीर और mind की basic human need है। जिस तरह mobile battery drain होने पर phone को recharge करना पड़ता है, ठीक वैसे ही optimal performance के लिए mental health का recharge होना जरूरी है। ‘Rest Guilt’ Overcome करने के 3 Effective Tips: Schedule Your Break: अपने daily routine में meetings की तरह relaxation time का भी एक fixed slot book करें। Reframe Your Mindset: खुद को याद दिलाएं कि आपकी identity सिर्फ आपके work deliverables या achievements से तय नहीं होती। Digital Detox: Break के दौरान screen time कम करें ताकि mind बिना distractions के सही मायने में recover कर सके।
Gautam Adani vs Zhang Yiming: अडानी को पीछे छोड़ कैसे एशिया के सबसे अमीर शख्स बने बाइटडांस के फाउंडर?

नई दिल्ली: ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की लेटेस्ट रैंकिंग के मुताबिक, ग्लोबल और एशियाई शेयर मार्केट में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भारत के जाने-माने इंडस्ट्रियलिस्ट और अडानी ग्रुप के चेयरमैन Gautam Adani अब एशिया के सबसे अमीर आदमी नहीं रहे। शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म TikTok की पेरेंट कंपनी ByteDance के को-फाउंडर Zhang Yiming ने उन्हें पीछे छोड़कर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब अपने नाम कर लिया है। ब्लूमबर्ग की तरफ से जारी दुनिया के टॉप 20 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट के मुताबिक, झांग यिमिंग ग्लोबल लेवल पर 18वें नंबर पर पहुंच गए हैं, जबकि गौतम अडानी अब 20वें नंबर पर खिसक गए हैं। झांग यिमिंग की दौलत में आठ गुना उछाल ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के डेटा के मुताबिक, 41 साल के चीनी टेक एंटरप्रेन्योर झांग यिमिंग की नेटवर्थ $105 बिलियन (करीब ₹8.7 लाख करोड़) हो गई है। झांग यिमिंग की फाइनेंशियल तरक्की काफी हैरान करने वाली रही है। जब ब्लूमबर्ग ने मार्च 2019 में पहली बार उनकी संपत्ति को ट्रैक करना शुरू किया, तो उनकी नेट वर्थ सिर्फ़ $13 बिलियन थी। बाइटडांस के तेज़ी से बढ़ते ग्लोबल बिज़नेस और TikTok की ज़बरदस्त पॉपुलैरिटी की वजह से, कुछ ही सालों में उनकी संपत्ति आठ गुना से ज़्यादा बढ़ गई है। दूसरी ओर, भारत के गौतम अडानी भी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में $105 बिलियन की कुल नेट वर्थ के साथ 20वें स्थान पर बने हुए हैं। हालांकि, मार्केट में उतार-चढ़ाव और वैल्यूएशन में बदलाव की वजह से, वह एशियाई रैंकिंग में झांग यिमिंग से पीछे हो गए हैं। ब्लूमबर्ग रैंकिंग: एशिया के टॉप 5 सबसे अमीर बिज़नेसमैन ब्लूमबर्ग की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया के 5 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट इस तरह है: Zhang Yiming: ByteDance/TikTok, China – $105 billion Gautam Adani: Adani Group, India – $105 billion Mukesh Ambani: Reliance Industries, India Tadashi Yanai: Uniqlo Founder, Japan Masayoshi Son: SoftBank Founder, Japan यह भी पढ़ें:Meta Verified और YouTube प्रमोशन के नाम पर साइबर फ्रॉड, ‘Youtube Wale Baba’ के नाम से जुड़ी UPI ID पर ठगी का आरोप एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने टेक दिग्गज ग्लोबल लेवल पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। एलन मस्क, टेस्ला, स्पेसएक्स के मालिक और दुनिया के टॉप 10 सबसे अमीर लोगों की लिस्ट: 1. एलन मस्क: $892 बिलियन 2. लैरी पेज: $295 बिलियन 3. सर्गेई ब्रिन: $274 बिलियन 4. जेफ बेजोस: $274 बिलियन 5. माइकल डेल: $253 बिलियन 6. मार्क जुकरबर्ग: $238 बिलियन 7. लैरी एलिसन: $194 बिलियन 8. जेन्सेन हुआंग: $176 बिलियन 9. स्टीव बाल्मर: $174 बिलियन 10. वॉरेन बफेट: $147 बिलियन इसके अलावा, बर्नार्ड अर्नाल्ट जिनकी नेट वर्थ $142 बिलियन है, जिम वाल्टन जिनकी नेट वर्थ $137 बिलियन है, रॉब वाल्टन जिनकी नेट वर्थ $135 बिलियन है, एलिस वाल्टन जिनकी नेट वर्थ $134 बिलियन है, अमानसियो ऑर्टेगा जिनकी नेट वर्थ $128 बिलियन है, और कार्लोस स्लिम $123 बिलियन की नेट वर्थ के साथ टॉप 20 में हैं। माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स $114 बिलियन की नेट वर्थ के साथ 17वें स्थान पर हैं। टेक और डिजिटल मीडिया का ग्लोबल इकॉनमी पर असर झांग यिमिंग का एशिया का सबसे अमीर व्यक्ति बनना इस बात का साफ संकेत है कि ग्लोबल इकॉनमी में पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर के साथ-साथ डिजिटल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक प्लेटफॉर्म का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। बाइटडांस न केवल चीन में बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी अपने डिजिटल प्रोडक्ट्स के जरिए भारी रेवेन्यू कमा रहा है।
Meta Verified और YouTube प्रमोशन के नाम पर साइबर फ्रॉड, ‘Youtube Wale Baba’ के नाम से जुड़ी UPI ID पर ठगी का आरोप

लखनऊ: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Meta Verified बैज दिलाने, चैनल की ग्रोथ बढ़ाने और मोनेटाइजेशन के जरिए कमाई कराने का झांसा देकर साइबर फ्रॉड करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित द्वारा साझा किए गए साक्ष्यों और बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स के अनुसार, डिजिटल सेवाओं का भरोसा दिलाकर अलग-अलग चरणों में हजारों रुपये की रकम ऐंठ ली गई। ₹150 से शुरू हुआ खेल, ‘Pending Charges’ बताकर ऐंठे हजारों रुपये पीड़ित के अनुसार, ठगों ने शुरुआत में बेहद कम रकम यानी ₹150 से बात शुरू की थी। इसके बाद धीरे-धीरे ‘प्रोसेसिंग फीस’, ‘जीएसटी’ और ‘Pending Charges’ के नाम पर बड़ी रकम मांगना शुरू कर दिया गया। उपलब्ध रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अलग-अलग किश्तों में पेमेंट कराई गई: शुरुआत में ₹150 की पेमेंट ली गई (Manish Kumar Saini के नाम पर)। इसके बाद Meta Verified के नाम पर ₹996.20 का ट्रांजैक्शन कराया गया। फिर सर्विसेज और अप्रूवल के नाम पर ₹2,000 और ₹800 (कुल ₹2,800) की रकम Sawan Raigar के नाम से ली गई। इसके बाद ठगों ने ₹4,500 की और अतिरिक्त मांग रख दी, जिसे पीड़ित ने देने से साफ इनकार कर दिया। ‘Youtube Wale Baba’ के नाम और QR कोड का इस्तेमाल मामले से जुड़े स्क्रीनशॉट्स और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पेमेंट्स में “Youtube wala baba” नाम से बने QR कोड और UPI ID का इस्तेमाल देखा जा सकता है। आरोप है कि सोशल मीडिया गाइडेंस और व्यूज/वॉच-टाइम बढ़ाने का झांसा देकर इसी क्रेडेंशियल के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाए गए। इसके अलावा ट्रांजैक्शन इंटरफेस में FamApp by Trio और KD Rider नाम के इंटरफेस का इस्तेमाल भी सामने आया है। आधिकारिक कंपनियों के नाम का गलत इस्तेमाल जांच का एक मुख्य बिंदु यह है कि पेमेंट रिक्वेस्ट में आधिकारिक तौर पर Meta का नाम दिखाया जा रहा था, जबकि वास्तविक भुगतान KD Rider, Sawan Raigar और Manish Kumar Saini जैसे निजी UPI खातों में प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि आधिकारिक टेक कंपनियों के ब्रांड नेम का गलत इस्तेमाल कर इस फ्रॉड को अंजाम दिया गया। यह भी पढ़ें: Vvaan Trailer Out: सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘Vvaan’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, विकास और आस्था के बीच छिड़ी जंग
Vvaan Trailer Out: सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘Vvaan’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, विकास और आस्था के बीच छिड़ी जंग

New Delhi: बॉलीवुड एक्टर Sidharth Malhotra की फिल्म “Vvaan – Force of the Forest” का ऑफिशियल ट्रेलर आखिरकार रिलीज़ हो गया है। ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, फैंस सिद्धार्थ के नए और दमदार अवतार की तारीफ कर रहे हैं। यह फिल्म सिर्फ एक एक्शन ड्रामा ही नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण की सुरक्षा, लोकल परंपराओं और मॉडर्न “डेवलपमेंट” के नाम पर प्रकृति के विनाश के बीच गहरे टकराव को भी दिखाया गया है। ट्रेलर की कहानी क्या है? ट्रेलर एक घने, रहस्यमयी जंगल के खूबसूरत सीन से शुरू होता है, जहाँ लोकल लोग सदियों से रहते आ रहे हैं और उनकी गहरी आस्था है। कहानी तब मोड़ लेती है जब एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी और सरकारी अधिकारी “मॉडर्न डेवलपमेंट” और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर जंगल काटने का प्लान बनाते हैं। ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे यह डेवलपमेंट प्रोजेक्ट न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि लोगों की सदियों पुरानी परंपराओं, मान्यताओं और कल्चर को भी दांव पर लगाता है। ऐसे समय में, Sidharth Malhotra एक लोकल रक्षक के तौर पर उभरते हैं, जो अपनी ज़मीन, जंगल और आस्था की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। यह भी पढ़ें:क्या एयरलाइन की लापरवाही खेल उपकरणों के लिए बड़ा ख़तरा बन रही है? पथिराजा मामला यह सवाल उठाता है। Sidharth Malhotra का रफ एंड टफ अवतार फिल्म में Sidharth Malhotra का लुक और एक्टिंग काफी शानदार है। वह एक ऐसे इंसान का रोल कर रहे हैं जो नेचर से बहुत जुड़ा हुआ है। ट्रेलर में उनके दमदार एक्शन सीन, इमोशनल डायलॉग और इंटेंस एक्सप्रेशन दिखाए गए हैं। सिद्धार्थ का यह नया अवतार उनके पिछले रोल से काफी अलग है, जो दर्शकों को थिएटर तक ज़रूर खींचेगा। शानदार विजुअल्स और बैकग्राउंड स्कोर ट्रेलर की सबसे बड़ी खासियत इसके विजुअल इफेक्ट्स और सिनेमैटोग्राफी हैं। घने जंगल के सीन, एक्शन कोरियोग्राफी और रात के अंधेरे में शूट किए गए सीन एक अनोखा रोमांच पैदा करते हैं। इसके अलावा, दमदार बैकग्राउंड म्यूजिक हर सीन के सस्पेंस और इमोशन को बढ़ाता है। डेवलपमेंट बनाम ट्रेडिशन का बड़ा मुद्दा यह फिल्म सिर्फ़ एंटरटेनमेंट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक सोशल मैसेज भी देती है। आज के ज़माने में, जब डेवलपमेंट के नाम पर जंगल काटे जा रहे हैं और इकोलॉजिकल बैलेंस बिगड़ रहा है, ‘Vvaan’ इस मुद्दे को हिम्मत से उठाती है। यह सवाल उठाती है: क्या हमें डेवलपमेंट की कीमत अपनी आस्था, परंपरा और पर्यावरण को कुर्बान करके चुकानी चाहिए? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: फिल्म ‘Vvaan’ में लीड रोल कौन कर रहा है? जवाब: फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा हैं, जो जंगलों और लोकल परंपराओं को बचाने के लिए लड़ते हैं। Q2: फिल्म ‘Vvaan’ का मेन थीम या सब्जेक्ट मैटर क्या है? जवाब: फिल्म एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन, मॉडर्न डेवलपमेंट की दौड़, जंगलों की कटाई और लोकल लोगों की आस्था और कल्चर के बीच के टकराव को दिखाती है। Q3: ट्रेलर में दिखाया गया मेन टकराव क्या है? जवाब: मेन टकराव बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट बनाने के लिए जंगल काटने और लोकल लोगों और उसे बचाने की कोशिश कर रहे प्रोटेक्टर (सिद्धार्थ) के बीच है।
क्या एयरलाइन की लापरवाही खेल उपकरणों के लिए बड़ा ख़तरा बन रही है? पथिराजा मामला यह सवाल उठाता है।

Sri Lanka: श्रीलंका के जेवलिन स्टार रुमेश पथिराजा के पांच “जीतने वाले” जेवलिन के फ्लाइट में टूटने की घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या एथलीटों का कीमती स्पोर्ट्स इक्विपमेंट एयरलाइंस के हाथों में सुरक्षित है? यह कोई अकेली घटना नहीं लगती, बल्कि यह एक बड़े, बार-बार होने वाले पैटर्न की ओर इशारा करती है। टूटे हुए जेवलिन सिर्फ इक्विपमेंट नहीं थे। पथिराजा के लिए, यह नुकसान सिर्फ आम सामान नहीं है। टर्किश एयरलाइंस की फ्लाइट में जो पांच जेवलिन खराब हुए थे, वे वही थे जिनका इस्तेमाल उन्होंने इस साल 90 से ज़्यादा बार फेंका था जिसमें 92.62 मीटर (रोम) और 92.07 मीटर (ज़्यूरिख) के रिकॉर्ड तोड़ने वाले थ्रो शामिल हैं। इसका मतलब है कि यह सिर्फ इक्विपमेंट नहीं था, बल्कि पूरे सीजन की कड़ी मेहनत और “मसल मेमोरी” से जुड़ा भरोसा भी था। पथिराजा ने खुद सोशल मीडिया पर हर जेवलिन की दूरी पोस्ट करके उन्हें “अलविदा” कहा—85.98, 92.62, 88.50, 89.20, 89.37, 88.20, 89.68, 92.06, 91.06. यह भी पढ़ें:शाह के UCC एलान पर ओवैसी भड़के “समानता नहीं, मुसलमानों को निशाना बनाना है मकसद” एक एथलीट के लिए अपना जेवलिन बदलना इतना आसान क्यों नहीं है? आम लोग सोच सकते हैं कि नया जेवलिन खरीदना इसका हल है, लेकिन टॉप जेवलिन थ्रोअर के लिए यह इतना आसान नहीं है। हर जेवलिन अपने वेट बैलेंस, फ्लेक्स और ग्रिप में थोड़ा अलग होता है, और एथलीट एक ही खास इक्विपमेंट के साथ एडजस्ट करने में महीनों—कभी-कभी सालों—लगा देते हैं। यही वजह है कि पथिराजा के कोच, टोनी प्रसन्ना ने इसे सिर्फ फिजिकल ही नहीं, बल्कि “साइकोलॉजिकल झटका” बताया। सरकार का तुरंत जवाब, लेकिन असली सवाल बना हुआ है। श्रीलंका की स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री ने तुरंत नए जेवलिन देने और एयरलाइन के खिलाफ लीगल एक्शन लेने का वादा किया है—यह एक पॉजिटिव कदम है। लेकिन इससे एक बड़ा सवाल बिना जवाब के रह जाता है: क्या एयरलाइंस के पास नाजुक, महंगे स्पोर्ट्स इक्विपमेंट को संभालने के लिए कोई पक्का प्रोटोकॉल है, या हर बार इसे बस किस्मत पर छोड़ दिया जाता है? टाइमिंग मुश्किल बढ़ाती है यह घटना सबसे बुरे समय पर हुई। एशियन गेम्स 19 सितंबर को जापान के आइची-नागोया में शुरू हो रहे हैं, और पथिराजा का जेवलिन फाइनल 28 सितंबर को है—मतलब उन्हें तैयारी के आखिरी और सबसे ज़रूरी दिनों में नए इक्विपमेंट के साथ एडजस्ट करना होगा। उनका मुकाबला पाकिस्तान के अरशद नदीम से है, जिनके नाम 92.97 मीटर का एशियन रिकॉर्ड है—मतलब थोड़ी सी भी गलती उन्हें मेडल की दौड़ से बाहर कर सकती है। अभी भी उम्मीद बाकी है इस झटके के बावजूद, पथिराजा का सीजन बहुत अच्छा रहा है—उन्होंने 13 में से 12 कॉम्पिटिशन जीते, कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा को हराया, और डायमंड लीग फाइनल भी जीता। उन्हें 1950 से श्रीलंका का सबसे बड़ा एथलेटिक्स गोल्ड मेडल का दावेदार माना जाता है—मतलब उनका परफॉर्मेंस लेवल इतना ऊंचा है कि नए इक्विपमेंट के साथ भी, वे मेडल की रेस में बने रह सकते हैं। बड़ा सबक क्या है? यह घटना सिर्फ पथिराजा तक ही सीमित नहीं है—यह हर उस एथलीट के लिए एक चेतावनी है जो अपने कीमती इक्विपमेंट के साथ एक टूर्नामेंट से दूसरे टूर्नामेंट तक यात्रा करता है। शायद अब समय आ गया है कि स्पोर्ट्स ऑर्गनाइजेशन और एयरलाइंस मिलकर महंगे स्पोर्ट्स गियर के लिए एक खास, सुरक्षित हैंडलिंग सिस्टम पर विचार करें—ताकि किसी एथलीट की सालों की मेहनत एक लापरवाही वाली हवाई यात्रा की घटना की वजह से बर्बाद न हो। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल Q1: क्या यह पहली बार है जब किसी एथलीट का स्पोर्ट्स इक्विपमेंट फ्लाइट में टूटा है? यह हाल के सालों का एक और उदाहरण है जो दिखाता है कि एयरलाइन हैंडलिंग के दौरान नाजुक स्पोर्ट्स गियर कितने कमजोर हो सकते हैं। Q2: क्या पथिराजा एशियन गेम्स में हिस्सा ले पाएंगे? हां, श्रीलंका सरकार ने नए जेवलिन देने का भरोसा दिया है, इसलिए हिस्सा लेने में कोई रिस्क नहीं है। Q3: नए जेवलिन के परफॉर्मेंस पर क्या असर हो सकता है? एथलीट अपने खास इक्विपमेंट से बहुत जुड़े होते हैं, इसलिए नए जेवलिन के साथ एडजस्ट करने में समय लग सकता है, जिससे आखिरी समय की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। Q4: पथिराज का मुख्य कॉम्पिटिटर कौन है? पाकिस्तान के अरशद नदीम, जो अभी एशियन रिकॉर्ड होल्डर (92.97 मीटर) हैं। Q5: इस घटना के बाद एयरलाइन की क्या ज़िम्मेदारी हो सकती है? पथिराज ने टर्किश एयरलाइंस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, और श्रीलंका सरकार ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है—आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है।
शाह के UCC एलान पर ओवैसी भड़के “समानता नहीं, मुसलमानों को निशाना बनाना है मकसद”

New Delhi: रविवार को मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऐलान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। शाह ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP की अगुवाई वाले NDA शासित 21 राज्यों में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाएगा। अगले ही दिन सोमवार को AIMIM चीफ़ असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर तीखा हमला बोला। ओवैसी का सीधा आरोप रिपोर्टर्स से बात करते हुए ओवैसी ने साफ़ कहा, “BJP यह (UCC लागू करना) बराबरी के लिए नहीं कर रही है। यह सिर्फ़ मुसलमानों को टारगेट करने के लिए है।” उन्होंने इसे संविधान के आर्टिकल 14 (बराबरी का अधिकार) और आर्टिकल 25 (धार्मिक आज़ादी) का सीधा उल्लंघन बताया। “देश की आत्मा प्लूरलिज़्म में है” ओवैसी ने आगे कहा कि भारत की पहचान उसकी डाइवर्सिटी में है, और UCC लागू करने का मतलब होगा गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना। यह कोई नई बात नहीं है — ओवैसी पहले भी इसी तर्क के साथ UCC का विरोध करते रहे हैं। गोवा का सवाल फिर उठा ओवैसी ने एक पुराना लेकिन असरदार सवाल दोहराया – अगर BJP सच में UCC को लेकर सीरियस है, तो उसे गोवा में लागू किए गए मॉडल को उत्तराखंड और गुजरात जैसे BJP शासित राज्यों में लागू करके दिखाना चाहिए। उन्होंने एक पोस्ट में यह भी लिखा गुरुवार को हैदराबाद में एक बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग मुसलमानों के खिलाफ हैं, वे बार-बार गोवा का उदाहरण देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं — जबकि असलियत यह है कि गोवा में अभी भी अलग-अलग कम्युनिटी के लिए अलग-अलग प्रोविज़न हैं। NDA के सहयोगियों पर भी निशाना ओवैसी यहीं नहीं रुके। उन्होंने BJP के सहयोगियों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उनके पास कोई इंडिपेंडेंट पॉलिटिकल आवाज़ बची है, या वे सिर्फ़ एक “छोटी BJP” बन गए हैं। ये भी पढ़ें: 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में एआई, डॉलर और यूएन सुधार पर हुए बड़े फैसले उलझन का मुद्दा भी उठाया एक दिलचस्प तर्क देते हुए ओवैसी ने कहा कि यह एक अजीब विडंबना है – एक तरफ BJP एक जैसे कानून की बात करती है, दूसरी तरफ उसके शासित राज्यों में “डिस्टर्ब्ड एरियाज़ एक्ट” जैसे कानून लागू हैं, जो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाते हैं। NRC को लेकर भी चेतावनी बातचीत सिर्फ़ UCC तक ही सीमित नहीं थी। ओवैसी ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ऑफ़ इलेक्टोरल रोल्स) प्रोसेस पर भी नाराज़गी जताई और कहा कि इससे पहले ही माइनॉरिटीज़, SC/STs और माइग्रेंट्स को बहुत मुश्किल हो रही है, और अगर NRC पूरे देश में लागू किया गया, तो हालात “100 गुना ज़्यादा खराब” होंगे। 2019 में असम में NRC के असर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जिस देश में 80 करोड़ लोग राशन पर निर्भर हैं, क्या उनसे डॉक्यूमेंट्स मांगकर अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जाएगा? यह सरकार चाहती है कि हम किसी बाबू की दया पर निर्भर रहें।” शाह ने क्या कहा गौरतलब है कि यह पूरा विवाद शाह के मुंबई में दिए बयान से शुरू हुआ था। शाह ने कहा था, “ट्रिपल तलाक़ खत्म हो गया है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को बराबर अधिकार मिले हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लागू किया है, और मुझे पूरा भरोसा है कि यह 2029 से पहले सभी 21 BJP-NDA शासित राज्यों में लागू हो जाएगा।” FAQ Q1: अमित शाह ने क्या अनाउंस किया? 2029 के लोकसभा इलेक्शन से पहले BJP-NDA के राज वाले 21 राज्यों में UCC लागू करना। Q2: ओवैसी का मेन इल्ज़ाम क्या है? कि UCC का असली मकसद बराबरी नहीं बल्कि मुसलमानों को टारगेट करना है। Q3: ओवैसी ने कौन से कॉन्स्टिट्यूशनल आर्टिकल कोट किए? आर्टिकल 14 (बराबरी का अधिकार) और आर्टिकल 25 (धार्मिक आज़ादी)। Q4: गोवा का उदाहरण क्यों दिया जा रहा है? गोवा में UCC जैसा मॉडल पहले से ही लागू है, और ओवैसी चाहते हैं कि BJP इसे अपने दूसरे राज्यों में भी लागू करे। Q5: NRC को लेकर ओवैसी ने क्या वॉर्निंग दी? कहा कि अगर NRC पूरे देश में लागू किया जाता है, तो यह SIR प्रोसेस से ज़्यादा प्रॉब्लम खड़ी करेगा, खासकर माइनॉरिटीज़ और गरीबों के लिए।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में एआई, डॉलर और यूएन सुधार पर हुए बड़े फैसले

नई दिल्ली : 18वां BRICS समिट नई दिल्ली में सफलतापूर्वक खत्म हुआ। इस ऐतिहासिक समिट के आखिर में, सभी 11 सदस्य देशों ने एकमत होकर 140-पॉइंट वाले “नई दिल्ली डिक्लेरेशन” को मंज़ूरी दी। समिट के दौरान फॉर्मल मीटिंग्स, फोटो-ऑप्स और दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद, दुनिया भर के पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स अब इस बात पर फोकस कर रहे हैं कि सदस्य देशों को इस बड़े ग्लोबल प्लेटफॉर्म से आखिर में क्या मिला और भविष्य में दुनिया की पॉलिटिक्स और इकॉनमी पर इसका क्या असर होगा। भारत ने एक बड़ी डिप्लोमैटिक जीत हासिल की इस समिट ने भारत के नज़रिए से कई बड़ी सफलताएं हासिल कीं: यूनाइटेड नेशंस में परमानेंट मेंबरशिप के लिए सपोर्ट:नई दिल्ली डिक्लेरेशन ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में भारत और ब्राज़ील के लिए एक परमानेंट और ज़्यादा असरदार रोल का खुलकर सपोर्ट किया। भारत दशकों से UN रिफॉर्म और परमानेंट मेंबरशिप की मांग कर रहा है, जिसे इस प्लेटफॉर्म से काफी सपोर्ट मिला है। आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश: घोषणा में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले (जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई) की कड़ी निंदा की गई है। ग्लोबल लेवल पर आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को सभी सदस्य देशों का सपोर्ट मिला। यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के CEO से की मुलाकात, कल से शुरू होगा SEMICON इंडिया 2026 US डॉलर से अलग होना और एकतरफा टैरिफ पर हमला घोषणा में ग्लोबल ट्रेड और अर्थव्यवस्था के बारे में कई बड़े फैसले भी लिए गए हैं: लोकल करेंसी में ट्रेड: BRICS देशों ने आपसी ट्रेड में US डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लोकल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया है। प्रोटेक्शनिज्म की आलोचना: किसी भी देश का सीधे नाम लिए बिना, घोषणा में एकतरफा टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों की कड़ी आलोचना की गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह US की ट्रेड पॉलिसी और आर्थिक पाबंदियों का सीधा रेफरेंस था। AI और साइबर सिक्योरिटी अब BRICS Summit के मुख्य एजेंडे में टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में, इस समिट ने एक नया चैप्टर जोड़ा है। पहली बार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को ऑफिशियली BRICS के मेन ट्रेड और फाइनेंशियल एजेंडा में शामिल किया गया है। डिक्लेरेशन में खास तौर पर साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करने, बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और स्कैम नेटवर्क से मिलकर निपटने, और भारत के फरवरी AI समिट और शंघाई AI कॉन्फ्रेंस के नतीजों का जिक्र है। गाजा और यूक्रेन जैसे ग्लोबल मुद्दों पर राय गाजा संकट: BRICS देशों ने वेस्ट एशिया के हालात पर चिंता जताई और गाजा में तुरंत सीजफायर और टू-स्टेट सॉल्यूशन की मांग की। उन्होंने फिलिस्तीन को UN की पूरी मेंबरशिप देने और ईस्ट येरुशलम को उसकी राजधानी बनाने के प्रपोजल का भी सपोर्ट किया। यूक्रेन विवाद पर कंट्रोल:रूस के BRICS का फाउंडिंग मेंबर होने की वजह से, डिक्लेरेशन में यूक्रेन वॉर का कोई डायरेक्ट जिक्र नहीं किया गया। इसके बजाय, इसमें सिर्फ डिप्लोमैटिक बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए विवाद को सुलझाने की एक आम अपील की गई। भारत की सफल बिहाइंड-द-सीन्स डिप्लोमेसी इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस 140-पॉइंट डिक्लेरेशन पर सभी 11 देशों की आम सहमति बनाना कोई आसान काम नहीं था। मिडिल ईस्ट में चल रहे टेंशन के बीच, यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) और ईरान जैसे देशों को एक साथ लाना और आम सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती थी। भारत ने अपनी मज़बूत बैक-चैनल डिप्लोमेसी का इस्तेमाल करके इस मुश्किल काम को सफलतापूर्वक पूरा किया। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) Q1: नई दिल्ली डिक्लेरेशन कब और कैसे अपनाया गया था? जवाब: इसे 12-13 सितंबर, 2026 को BRICS समिट के आखिरी दिन सभी 11 सदस्य देशों की एकमत से अपनाया गया था। Q2: क्या इसमें जम्मू और कश्मीर के आतंकवादी हमले का ज़िक्र है? जवाब: हाँ, डिक्लेरेशन में 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की साफ़ और कड़ी निंदा की गई है। Q3: क्या डिक्लेरेशन में यूनाइटेड स्टेट्स का ज़िक्र है? जवाब: कोई सीधा ज़िक्र नहीं किया गया है, लेकिन एकतरफ़ा टैरिफ़ और ट्रेड बैन की आलोचना साफ़ तौर पर यूनाइटेड स्टेट्स पर की गई है। Q4: टेक्नोलॉजी और AI को लेकर क्या नया फ़ैसला लिया गया? जवाब: पहली बार, AI, साइबर सिक्योरिटी और ऑनलाइन फ़ाइनेंशियल धोखाधड़ी से निपटने से जुड़े मुद्दों को BRICS के कोर एजेंडा में शामिल किया गया है। Q5: यूक्रेन युद्ध पर BRICS देशों का क्या रुख था? जवाब: रूस की मौजूदगी की वजह से, सीधे ज़िक्र से बचा गया और सिर्फ़ शांतिपूर्ण बातचीत और डिप्लोमेसी के ज़रिए समाधान की अपील की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के CEO से की मुलाकात, कल से शुरू होगा SEMICON इंडिया 2026

नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में एक गोलमेज बैठक के दौरान दुनिया भर की प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) से मुलाकात की। यह बैठक SEMICON इंडिया 2026 के औपचारिक उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले हुई, जिसे प्रधानमंत्री खुद 17 सितंबर को द्वारका स्थित यशोभूमि में शुरू करेंगे। बैठक का मकसद क्या था इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव और भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के CEO अमितेश कुमार सिन्हा के अनुसार, यह गोलमेज बैठक वैश्विक CEOs के साथ SEMICON इंडिया के औपचारिक उद्घाटन से एक दिन पहले आयोजित की गई। इस बातचीत का केंद्र बिंदु भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक कंपनियों के लिए देश के बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में विस्तार के अवसरों पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। पिछले साल भी हुई थी ऐसी ही बैठक यह कोई नई परंपरा नहीं है प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 के संस्करण में भी इसी तरह की एक गोलमेज बैठक की थी, जिसमें कंपनियों के अधिकारियों ने उन्हें अपनी निवेश योजनाओं के बारे में जानकारी दी थी। इस साल की बैठक उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हुई है, जहां सरकार और उद्योग जगत के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जाता है। SEMICON इंडिया 2026 के बारे में यह सम्मेलन का पांचवा संस्करण है, जो 17 से 19 सितंबर तक द्वारका के यशोभूमि (इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर) में आयोजित होगा। इसे भारत सेमीकंडक्टर मिशन, MeitY और वैश्विक सेमीकंडक्टर संस्था SEMI द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस साल की थीम है “सिलिकॉन टू सिस्टम्स – बिल्डिंग द इकोसिस्टम”, जो भारत के सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में एक व्यापक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भूमिका निभाने की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाती है। कितना बड़ा है भारत का सेमीकंडक्टर लक्ष्य ISM के CEO अमितेश कुमार सिन्हा के मुताबिक, वैश्विक सेमीकंडक्टर मांग आने वाले समय में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, वहीं भारत की खुद की सेमीकंडक्टर आवश्यकता भी करीब 100 अरब डॉलर से बढ़कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है यानी यह क्षेत्र भारत के लिए आने वाले वर्षों में एक बड़ा आर्थिक अवसर बनने जा रहा है। सम्मेलन में और क्या खास होगा SEMI इंडिया और IESA के अध्यक्ष अशोक चंदक के अनुसार, यह आयोजन भारत के एक संपूर्ण और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन बनाने की दिशा में हो रहे बदलाव को दर्शाता है। सम्मेलन में “महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व” पर एक विशेष सत्र भी शामिल होगा, साथ ही यह MeitY की Semicon 2.0 पहल के छह रणनीतिक स्तंभों चिप डिज़ाइन, मशीनें और सामग्री, अधिक फैब्स की स्थापना, ATMP/OSAT उद्योग को मजबूत करना, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है।
