New Delhi: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने अयोध्या में मकानों पर हुई कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर गरीब परिवारों के घर उजाड़े जा रहे हैं, और प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही। अयोध्या के 14-कोसी परिक्रमा मार्ग से जुड़े हालिया ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर भी उन्होंने तीखे सवाल उठाए हैं।
अयोध्या में कार्रवाई पर क्या बोले Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav ने कहा कि समाजवादी पार्टी अयोध्या के विकास के खिलाफ नहीं है। उनके मुताबिक, राम और अयोध्या के विकास में पार्टी कभी बाधा नहीं बनेगी, और मौका मिलने पर अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने भाजपा नेताओं के उन पुराने दावों को भी याद दिलाया, जिनमें अयोध्या को वेटिकन सिटी जैसे अन्य धार्मिक स्थलों से भी बड़े पैमाने पर विकसित करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, “लेकिन अब जो हम देख रहे हैं, वह यह है कि गरीब लोगों को बड़े पैमाने पर उजाड़ा जा रहा है। उनकी आजीविका छीनी जा रही है, और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार भले ही ध्वस्तीकरण को लेकर अपना पक्ष रख सकती है, लेकिन प्रशासन को प्रभावित परिवारों के प्रति ज़्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी।
सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला: आरोप
Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि कुछ परिवारों को अपने सामान को सुरक्षित निकालने तक का पर्याप्त मौका नहीं मिला, इससे पहले कि उनके घरों और दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा, “उनकी पूंजी उनके घरों में लगी होती है। कम से कम उन्हें अपने घरों से सामान निकालने का मौका तो मिलना चाहिए था।” हालांकि, अयोध्या जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि 14-कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार से जुड़ी कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को नोटिस दिए गए थे। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने कार्रवाई और पुनर्वास को लेकर शिकायतें उठाई हैं।
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“नुकसान की भरपाई की जाएगी”: Akhilesh Yadav का वादा
सपा प्रमुख ने बुलडोज़र कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को लेकर कहा कि जिन लोगों के घर और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उन्हें उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अगर मौजूदा सरकार प्रभावित लोगों की मदद नहीं करती, तो समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ऐसे परिवारों के नुकसान की भरपाई की जाएगी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान एक्सप्रेस-वे निर्माण से जुड़े विस्थापन का उदाहरण भी दिया, कहा कि उस समय प्रभावित गांवों को दूसरी जगह बसाने और लोगों को मुआवज़ा देने पर विशेष ध्यान दिया गया था।
चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना
Akhilesh Yadav ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक हालिया इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इस रिपोर्ट को कमतर आंकते हुए कहा कि आयोग के सभी फैसले, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
सपा वोटरों के “व्यवस्थित रूप से हटाए जाने” का आरोप
Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया कि सपा के वोटरों को मतदाता सूची से “व्यवस्थित रूप से हटाया गया” है, और उत्तर प्रदेश भाजपा पर “बुलडोज़र राज” चलाने तथा संविधान को कमज़ोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सरकार मनमाने ढंग से काम कर रही है। यह हर व्यवस्था को तोड़ रही है। जो लोग विध्वंस और तबाही में विश्वास रखते हैं चाहे वह कानून हो या संविधान उन्हें किसी की परवाह नहीं है। यह सरकार हर किसी की गरिमा और आत्म-सम्मान को रौंद रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी ने कभी राम मंदिर निर्माण का विरोध नहीं किया, लेकिन भाजपा पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने का आरोप लगाया।
SIR और वोटर लिस्ट को लेकर गहरी चिंता
Akhilesh Yadav ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, और उत्तर प्रदेश में फॉर्म-7 के इस्तेमाल तथा कुछ जगहों पर एक ही पते से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात कही। पश्चिम बंगाल में भी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 38.20 लाख अपीलों में से करीब 1.02 लाख का ही अब तक निपटारा किया गया है, और यह पूरी प्रक्रिया अभी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।
बुलडोज़र कार्रवाई पर व्यापक चिंता
Akhilesh Yadav ने उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि आम लोगों की बड़ी पूंजी उनके घर और ज़मीन में लगी होती है। ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले नियम, नोटिस और प्रभावित परिवारों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, न कि सीधे विध्वंस की कार्रवाई कर दी जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: Akhilesh Yadav ने अयोध्या में किस कार्रवाई पर सवाल उठाए?
14-कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार से जुड़े ध्वस्तीकरण अभियान पर, जिसमें गरीब परिवारों के घर तोड़े गए।
Q2: Akhilesh Yadav ने प्रभावित परिवारों के लिए क्या वादा किया?
कि सपा सरकार बनने पर उचित मुआवज़े के साथ प्रभावित परिवारों के नुकसान की भरपाई की जाएगी।
Q3: चुनाव आयोग को लेकर Akhilesh Yadav का मुख्य आरोप क्या है?
कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की है।
Q4: चुनाव आयोग ने इस आरोप पर क्या सफाई दी?
कि सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
Q5: पश्चिम बंगाल SIR मामले की मौजूदा स्थिति क्या है?
38.20 लाख अपीलों में से करीब 1.02 लाख का निपटारा हुआ है, बाकी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।










