Delhi-NCR Weather: IMD का बारिश और आंधी-बिजली का अलर्ट, जानिए तापमान

New Delhi: राजधानी में गुरुवार को मौसम ने करवट ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली-NCR में बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश, गरज–चमक और तेज़ हवाओं का पूर्वानुमान जारी किया है। पिछले दिनों की गर्मी के बाद यह बदलाव लोगों को राहत देगा, लेकिन सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। Delhi में आज का मौसम कैसा रहेगा बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, IMD ने दिल्ली में आसमान ज़्यादातर बादलों से घिरे रहने और हल्की बारिश के दौर का अनुमान जताया है। कुछ जगहों पर मध्यम बारिश हो सकती है। दोपहर और शाम के समय गरज–चमक के साथ तेज़ हवाएं भी चल सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रात में भी हल्की बारिश के साथ गरज–चमक का एक और दौर आने की संभावना है। इंडिया डॉट कॉम की रिपोर्ट में बताया गया है कि IMD ने दिल्ली के लिए ज़िला–स्तरीय अलर्ट जारी किया है। इसके मुताबिक, सुबह के समय उत्तरी दिल्ली और उत्तर–पश्चिमी दिल्ली में मध्यम बारिश और गरज–चमक की संभावना है। तापमान में गिरावट पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, आज न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 3.7 डिग्री ज़्यादा है। अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिन का अधिकतम तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। इसके मुकाबले बुधवार, 14 अक्टूबर को सफदरजंग मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और न्यूनतम 22.4 डिग्री दर्ज किया गया था। यानी बारिश के चलते दिन के तापमान में करीब तीन–चार डिग्री की गिरावट आने की उम्मीद है। ये भी पढ़ें:UPI MDR पर दिवाली तक राहत: NPCI ने टाला प्रस्तावित 0.4% चार्ज, 15 अक्टूबर से नहीं होगा लागू अगले दो दिन का पूर्वानुमान 16 अक्टूबर (शुक्रवार): IMD ने बारिश के साथ गरज–चमक का पूर्वानुमान जताया है। बिज़नेस टुडे के अनुसार, कुछ इलाकों में सुबह से ही गरज–चमक की संभावना है। 17 अक्टूबर (शनिवार): मौसम में सुधार की उम्मीद है। आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा। 17 अक्टूबर के बाद: बिज़नेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम शुष्क होने लगेगा और अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री के बीच रह सकता है। मौसम बदलने की वजह बिज़नेस टुडे के अनुसार, उत्तर और उत्तर–पश्चिम भारत के कई राज्यों में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर है। IMD ने पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 14 और 15 अक्टूबर को काफी व्यापक बारिश और गरज–चमक की संभावना जताई थी। विभाग ने यह भी साफ किया है कि क्षेत्रीय पूर्वानुमान का मतलब यह नहीं कि हर मोहल्ले में बराबर बारिश होगी। स्थानीय स्तर पर हालात अलग हो सकते हैं। यात्रियों और निवासियों के लिए सलाह तेज़ हवाओं और गरज–चमक के दौरान खुले में, खासकर पेड़ों या बिजली के खंभों के पास रुकने से बचें। बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने और धीमी रफ्तार का असर यातायात पर पड़ सकता है, इसलिए दफ्तर या यात्रा के लिए निकलने से पहले रास्ते की स्थिति देख लें। ज़रूरत हो तो थोड़ा पहले निकलें। आगे क्या IMD के मुताबिक, शुक्रवार तक अस्थिर मौसम बना रह सकता है और शनिवार से हालात सुधरने की उम्मीद है। मौसम विभाग नए अपडेट जारी करता रहेगा। ताज़ा अलर्ट के लिए IMD की आधिकारिक वेबसाइट या मौसम ऐप देखते रहें।
Dalhi Gold Rate Today: 22 और 24 कैरेट के ताज़ा दाम, ज्वेलरी खरीदने से पहले ये बातें जानें

New Delhi: दिल्ली में आज सोने (Gold) का भाव लगभग ₹14,841 प्रति ग्राम (24 कैरेट) के आसपास चल रहा है। गुडरिटर्न्स और ग्रो जैसे पोर्टल्स के आंकड़ों के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,48,410 है। त्योहारी सीज़न में गहने या सिक्के खरीदने की सोच रहे लोगों के लिए रेट के साथ यह समझना भी ज़रूरी है कि बिल की अंतिम रकम कैसे बनती है। दिल्ली में आज का सोने (Gold) का भाव रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 अक्टूबर को दिल्ली में रेट इस तरह हैं: 24 कैरेट (99.9% शुद्धता): ₹14,841 प्रति ग्राम, यानी ₹1,48,410 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट (91.6% शुद्धता): ₹13,605 प्रति ग्राम, यानी ₹1,36,050 प्रति 10 ग्राम 18 कैरेट (75% शुद्धता): ₹11,134 प्रति ग्राम, यानी ₹1,11,340 प्रति 10 ग्राम ग्रो के आंकड़ों के मुताबिक, 13 अक्टूबर को दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,49,440 प्रति 10 ग्राम था। यानी दो दिन में हल्की नरमी देखी गई है। अलग–अलग पोर्टल्स पर रेट अलग क्यों आज दिल्ली के रेट अलग–अलग स्रोतों पर थोड़े अलग दिख रहे हैं। बिज़नेस टुडे ने 24 कैरेट के लिए ₹1,47,220 प्रति 10 ग्राम बताया है, जबकि एशियानेट न्यूज़ेबल ने ₹1,45,580। यह फर्क इसलिए हो सकता है कि पोर्टल्स अलग समय पर और अलग बेंचमार्क के आधार पर रेट अपडेट करते हैं। इसलिए किसी एक पोर्टल का रेट देखकर फैसला करने के बजाय ज्वेलर से लाइव रेट पूछना बेहतर है। बड़े ज्वेलर्स के रेट बिज़नेस टुडे के अनुसार, आज जॉयआलुक्कास और मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स ने 22 कैरेट सोना ₹13,515 प्रति ग्राम बताया, जबकि तनिष्क ने ₹13,635 प्रति ग्राम। 24 कैरेट के लिए मालाबार का रेट ₹14,744 और तनिष्क का ₹14,875 प्रति ग्राम रहा। यानी एक ही शहर में भी अलग–अलग दुकानों के रेट में फर्क हो सकता है। GST और मेकिंग चार्ज: असली बिल कैसे बनेगा पोर्टल्स पर दिख रहे रेट में मेकिंग चार्ज और 3% GST शामिल नहीं होते। इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आप 10 ग्राम 22 कैरेट का गहना खरीदते हैं और ज्वेलर 10% मेकिंग चार्ज लगाता है (यह सिर्फ समझाने के लिए मान्यता है, असली चार्ज दुकान और डिज़ाइन पर निर्भर करता है)। सोने की कीमत: ₹1,36,050 मेकिंग चार्ज (10%): ₹13,605 कुल: ₹1,49,655 इस पर 3% GST जोड़ने पर: लगभग ₹4,490 इस हिसाब से बिल करीब ₹1,54,145 बनेगा, जो पोर्टल पर दिख रहे रेट से काफी ऊपर है। ज्वेलर बिल में GST कैसे जोड़ रहा है, यह बिल पर साफ देख लें। 22 कैरेट और 24 कैरेट में क्या फर्क है 24 कैरेट सोना लगभग शुद्ध होता है और आमतौर पर सिक्के और बार के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन यह नरम होता है, इसलिए गहनों के लिए ठीक नहीं रहता। 22 कैरेट में दूसरी धातुएं मिली होती हैं, जिससे गहना मज़बूत रहता है और ज़्यादातर ज्वेलरी इसी में बनती है। 18 कैरेट में सोने का हिस्सा 75% होता है, इसलिए यह सस्ता पड़ता है और अक्सर हीरे–जड़े डिज़ाइनों में दिखता है। खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें हॉलमार्क देखें: BIS हॉलमार्क और उस पर छपा 6 अंकों का HUID कोड गहने की शुद्धता की पहचान है। पक्का बिल लें: बिल में वज़न, कैरेट, रेट, मेकिंग चार्ज और GST अलग–अलग लिखे होने चाहिए। मेकिंग चार्ज की तुलना करें: अलग–अलग दुकानों पर यह चार्ज अलग हो सकता है, इसलिए दो–तीन जगह पूछ लें। लाइव रेट पूछें: दिन में रेट बदल सकते हैं, इसलिए खरीदते वक्त उसी समय का रेट लिखवा लें। वापसी की शर्तें समझें: पुराना गहना बेचते या बदलते समय कटौती की शर्तें पहले पूछ लें। सोने का भाव कैसे तय होता है आमतौर पर सोने के घरेलू रेट पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की कीमतों, रुपये–डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और स्थानीय मांग का असर पड़ता है। इसी वजह से त्योहारों और शादियों के सीज़न में भी रेट में उतार–चढ़ाव देखने को मिलता है। आगे क्या सोने के भाव रोज़ बदलते हैं, इसलिए बाज़ार खुलने पर रेट में बदलाव संभव है। खरीदारी से पहले ज्वेलर या किसी भरोसेमंद पोर्टल से ताज़ा भाव की पुष्टि कर लें।
UPI MDR पर दिवाली तक राहत: NPCI ने टाला प्रस्तावित 0.4% चार्ज, 15 अक्टूबर से नहीं होगा लागू

New Delhi: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को कहा कि चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रक्रिया को दिवाली के तुरंत बाद तक टाल दिया गया है। यानी ₹2,000 से ऊपर के संबंधित भुगतान फिलहाल बिना MDR के जारी रहेंगे। NPCI ने क्या कहा NPCI के आधिकारिक बयान के मुताबिक, UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमिटी ने त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। बयान में कहा गया कि MDR अब दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा और इसकी तारीख अलग से बताई जाएगी। अभी नई तारीख घोषित नहीं हुई है। पहले क्या तय था रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी। इसमें ₹2,000 से ज़्यादा के कुछ चुनिंदा P2M भुगतान पर 0.40% MDR लगना था। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि ₹75,000 या उससे ज़्यादा के लेन-देन पर अधिकतम MDR ₹300 तय किया गया था। व्यापारी संगठन लगातार इसे टालने की मांग कर रहे थे। MDR क्या है और इसे कौन भरता है MDR वह शुल्क है जो दुकानदार या व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर देना होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे में यह चार्ज व्यापारी से लिया जाना था, ग्राहक से नहीं। इस ढांचे में ऐसे छोटे व्यापारियों को छूट देने की बात भी रिपोर्ट हुई है, जिनकी महीने की कुल UPI आमदनी ₹1 लाख तक है। इन ब्योरों पर NPCI का विस्तृत बयान नई तारीख के साथ आने की उम्मीद है। पुरानी व्यवस्था क्या थी वित्त मंत्रालय के पुराने स्पष्टीकरण के मुताबिक, जनवरी 2020 से P2M UPI ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लिया जा रहा है। इसी वजह से इन भुगतानों पर GST भी लागू नहीं होता, क्योंकि GST MDR जैसे शुल्कों पर लगता है। किसे मिली राहत फैसले का सीधा फायदा उन दुकानदारों को है जो त्योहारी सीजन में ज़्यादा बिक्री की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें बड़े भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क की चिंता फिलहाल नहीं करनी होगी। आम ग्राहकों के लिए UPI भुगतान का तरीका वैसा ही रहेगा। आगे क्या होगा MDR रद्द नहीं हुआ है, सिर्फ टला है। दिवाली के बाद इसे लागू करने की तारीख NPCI अलग से घोषित करेगा। तब तक यह साफ नहीं है कि प्रस्तावित दरों या शर्तों में कोई बदलाव होगा या नहीं।
PERM सस्पेंशन: IT कंपनियों पर रोक से भारतीय टेकीज़ के ग्रीन कार्ड पर क्या असर पड़ेगा?

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों भारतीय आईटी कर्मचारियों के मन में इस वक्त एक ही सवाल है: मेरे ग्रीन कार्ड केस का क्या होगा? गुरुवार, 8 अक्टूबर को US श्रम विभाग ने आठ बड़ी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के एक अहम चरण, PERM प्रोग्राम, से सस्पेंड कर दिया है। क्या हुआ US श्रम सचिव कीथ सोनडरलिंग ने घोषणा की कि Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL और Capgemini को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Microsoft और Adobe भी इस सूची में हैं। सोनडरलिंग के अनुसार, विभाग इन कंपनियों से जुड़ी कोई नई PERM अर्ज़ी स्वीकार नहीं करेगा और लंबित अर्ज़ियों को भी प्रोसेस नहीं करेगा। घोषणा के समय उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस भी मौजूद थे। रिपोर्ट्स में Tata को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) बताया गया है। PERM क्या है ट्रिब्यून के मुताबिक, PERM एक अलग प्रक्रिया है, जो आमतौर पर ज़्यादातर रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए याचिका दाखिल करने से पहले ज़रूरी होती है। इसमें नियोक्ता को साबित करना होता है कि उस नौकरी के लिए कोई योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला। यानी H-1B पर काम कर रहे कर्मचारी के लिए ग्रीन कार्ड की सीढ़ी यहीं से शुरू होती है। ये भी पढ़ें:CJP Protest: ममता बनर्जी समेत TMC नेता हिरासत में, जंतर-मंतर कूच से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा भारतीय टेकीज़ पर क्या असर हो सकता है ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, जिन कर्मचारियों की PERM प्रक्रिया अभी शुरू होनी है, वे अपनी “प्रायोरिटी डेट” तय नहीं करा पाएंगे। यही तारीख ग्रीन कार्ड कतार में उनकी जगह तय करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नागरिकों के लिए यह असर खास तौर पर गंभीर हो सकता है, क्योंकि रोज़गार-आधारित ग्रीन कार्ड पर देश-वार सीमाएं हैं और बैकलॉग पहले से लंबा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क सोनडरलिंग ने कहा कि 2009 से अब तक सिर्फ इन्हीं कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कामगारों के लिए अर्ज़ी दी है। उनके मुताबिक, इन्हें 2.3 लाख से ज़्यादा H-1B वीज़ा मंज़ूरियां और 1 लाख से ज़्यादा परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन मिले हैं। ट्रिब्यून के अनुसार, प्रशासन का तर्क है कि इस प्रथा से अमेरिकी नागरिक नौकरी बाज़ार से बाहर हुए। Microsoft और Adobe के मामले में रिपोर्ट्स में कई सक्रिय संघीय जांचों का ज़िक्र है। क्या अभी साफ नहीं है उपलब्ध रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट नहीं है कि यह सस्पेंशन कितने समय के लिए है। यह भी साफ नहीं है कि पहले से दाखिल हो चुके ग्रीन कार्ड मामलों और H-1B पर काम कर रहे मौजूदा कर्मचारियों पर इसका क्या असर होगा। हमें कंपनियों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया भी नहीं मिली है। प्रभावित कर्मचारियों को अपनी कंपनी के HR या इमिग्रेशन वकील से सलाह लेनी चाहिए। आगे क्या स्थिति साफ होने पर, खासकर कंपनियों के बयान और श्रम विभाग के अगले दिशा-निर्देश आने पर, खबर अपडेट की जाएगी।
CJP Protest: ममता बनर्जी समेत TMC नेता हिरासत में, जंतर-मंतर कूच से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन से पहले शनिवार को दिल्ली में कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें TMC प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के कुछ अन्य नेता भी शामिल हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया था। ममता बनर्जी की हिरासत कैसे हुई रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी को साउथ एवेन्यू इलाके में उनके दिल्ली आवास के बाहर से हिरासत में लिया गया। TMC नेता साकेत गोखले ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ममता बनर्जी और पांच अन्य नेताओं को दिल्ली पुलिस और CRPF ने एक कैदी वैन में हिरासत में लिया। रिपोर्ट्स में डोला सेन और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य TMC नेताओं के भी हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। हिरासत के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि लड़ाई जारी रहेगी। CJP के शीर्ष नेताओं को भी हिरासत में लिया गया ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। इसके बाद CJP ने घोषणा की कि संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। बताया गया है कि दिपके ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते पहले से एक वीडियो रिकॉर्ड कर रखा था। द फेडरल की रिपोर्ट में ध्रुव राठी के भी हिरासत में लिए जाने का ज़िक्र है। धरने पर बैठीं और विरोध प्रदर्शन कर रहीं ममता बनर्जी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है #MamataBanerjee #DelhiPolice #JantarMantar #TMC #ElectionCommission #BreakingNews https://t.co/X2dpMMhEo6 — News26india (@news26indias) October 10, 2026 दिल्ली में भारी सुरक्षा द फेडरल के मुताबिक, प्रदर्शन के मद्देनज़र दिल्ली में करीब 25,000 पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए। आउटलुक की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था की “गंभीर” चिंताओं का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, और करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वकीलों की हिरासत पर विवाद रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रहे कुछ वकीलों को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इसकी निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। आउटलुक की लाइव अपडेट्स में बताया गया है कि वकीलों की रिहाई के लिए CJI ने दखल दिया। विपक्ष की प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर “ब्लैक इमरजेंसी” लगाने का आरोप लगाया। पार्टी विधायक गोपाल राय ने दावा किया कि मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और ट्रेनें रद्द की गईं। इन आरोपों पर सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से हमें कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। महत्वपूर्ण बातें CJP का “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर आयोजित था ममता बनर्जी और TMC के कुछ नेता रिपोर्ट्स के मुताबिक हिरासत में लिए गए CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका भी हिरासत में लिए गए दिल्ली में करीब 25,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी SCBA ने वकीलों की हिरासत की निंदा की आगे क्या होगा हिरासत में लिए गए नेताओं पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इसे लेकर हमें दिल्ली पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं मिला है। CJP ने कहा है कि अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी रहेगा। स्थिति साफ होने पर खबर अपडेट की जाएगी।
उपराष्ट्रपति के देवघर दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट, DC-SP ने कसी कमर

Deoghar: उपराष्ट्रपति देवघर दौरा को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 10 अक्टूबर को प्रस्तावित इस दौरे से पहले सोमवार को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानिया की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था की समीक्षा की। प्रशासन का फोकस सिर्फ़ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसे भी ध्यान में रखा गया है। अधिकारियों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सभी तैयारियां समय पर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। AIIMS दीक्षांत समारोह से हिंदुजा अस्पताल तक का कार्यक्रम उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के देवघर दौरे का प्रमुख कार्यक्रम AIIMS देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होना है। इसके बाद उनके दर्दमारा स्थित पीडी हिंदुजा अस्पताल पहुंचने की जानकारी सामने आई है, जहां भारतीय सेना की ओर से आयोजित दो दिवसीय सैन्य संपर्क मेले और मेडिकल कैंप (9-10 अक्टूबर) के समापन कार्यक्रम में वे शामिल होंगे। इस आयोजन में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ युवाओं को सेना में भर्ती प्रक्रिया और अवसरों की जानकारी देने की तैयारी है। आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी भी प्रस्तावित है। ये भी पढ़ें:उपराष्ट्रपति के देवघर दौरे से पहले प्रशासन अलर्ट, DC-SP ने कसी कमर निशिकांत दुबे का बयान गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने इस आयोजन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ़ उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा और समाज से जुड़ने का प्रयास है। दुबे के मुताबिक कार्यक्रम में सेना के अधिकारी और जवान बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगे, और युवाओं को सेना में भर्ती प्रक्रिया व योग्यता से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। DC-SP की बैठक में सुरक्षा और ट्रैफिक पर फोकस सोमवार की समीक्षा बैठक में उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो। बैठक में एसपी प्रवीण पुष्कर, डीडीसी पीयूष सिन्हा, एसडीओ रवि कुमार, जिला नजारत उपसमाहर्ता मुकेश कुमार, एसडीपीओ कुलदीप कुमार और ट्रैफिक डीएसपी लक्ष्मण प्रसाद सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। FAQs Q1. उपराष्ट्रपति देवघर कब आ रहे हैं? उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का देवघर दौरा 10 अक्टूबर को प्रस्तावित है। Q2. उपराष्ट्रपति देवघर में किन कार्यक्रमों में शामिल होंगे? वे AIIMS देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह और पीडी हिंदुजा अस्पताल में सेना के सैन्य संपर्क मेले के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। Q3. हिंदुजा अस्पताल में होने वाला सैन्य संपर्क मेला क्या है? यह भारतीय सेना द्वारा 9-10 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय मेला है, जिसमें पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, युवाओं के लिए सेना भर्ती की जानकारी और हथियारों की प्रदर्शनी शामिल है। Q4. निशिकांत दुबे ने इस कार्यक्रम को लेकर क्या कहा? उन्होंने इसे सेवा-संकल्प अभियान से जोड़ते हुए युवाओं को सेना से जोड़ने और देशभक्ति की भावना जगाने का अवसर बताया। Q5. प्रशासन ने दौरे की तैयारियों के लिए क्या किया है? उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की समीक्षा की गई है।
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग, CM योगी को लिखा गया पत्र

मथुरा/वृंदावन: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज सुरक्षा को लेकर एक बड़ी मांग सामने आई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ श्रेणी की सुरक्षा देने की मांग की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में इस संबंध में मुख्यमंत्री को दो पत्र भेजे जा चुके हैं। प्रेमानंद महाराज सुरक्षा मांग की वजह क्या बताई गई पत्र में दावा किया गया है कि केलिकुंज आश्रम के भीतर दो गुटों के बीच विवाद है, और इस गुटबाजी से महाराज जी को खतरा हो सकता है। फलाहारी ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने, आश्रम के सेवादारों के पुलिस वेरिफिकेशन और लगाए गए आरोपों की जांच की भी मांग की है। शिष्य की मौत का मामला यह मांग आश्रम से जुड़ी एक दुखद घटना के बाद सामने आई है। 25 सितंबर 2026 को महाराज जी के शिष्य दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण), उम्र 25 वर्ष, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। एक रिपोर्ट के अनुसार वे गुरु कृपा कुंज (वराह घाट के पास स्थित भवन, जहां प्रेमानंद के शिष्य रहते हैं) की चौथी मंजिल से गिर गए थे। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अब तक तीन दर्जन से ज़्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है, हालांकि किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। मृतक के परिवार ने आश्रम प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के भाई और जीजा का आरोप है कि आश्रम ने उन्हें घटना की सही जानकारी नहीं दी और CCTV फुटेज भी उपलब्ध नहीं कराई। आश्रम ट्रस्ट की ओर से जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही गई है। लापता शिष्यों का मामला एक रिपोर्ट के अनुसार आश्रम से जुड़े कुछ और साधकों के लापता होने के भी आरोप लगे हैं। हालांकि इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जुलाई से लापता बताया जा रहा एक 17 वर्षीय शिष्य हाल ही में बरसाना के एक अन्य आश्रम में मिल गया है। बाकी लापता बताए गए लोगों को लेकर अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन दावों को सावधानी से लिया जाना चाहिए। प्रशासन का रुख सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और आश्रम से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से Z+ सुरक्षा देने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर आप या आपके किसी परिचित को मानसिक तनाव या निराशा महसूस हो रही है, तो Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है। ये भी पढ़ें:OpenAI के सेफ्टी कर्मचारी का इस्तीफा, कहा- ‘ट्रायल एंड एरर का समय अब खत्म हो चुका है’ FAQs Q1. प्रेमानंद महाराज के लिए Z+ सुरक्षा की मांग किसने की? श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने यह मांग CM योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर की है। Q2. यह मांग क्यों उठी? पत्र में आश्रम के भीतर दो गुटों के विवाद और शिष्य की संदिग्ध मौत के बाद महाराज जी को खतरे की आशंका जताई गई है। Q3. दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण) की मौत कैसे हुई? एक रिपोर्ट के अनुसार 25 सितंबर को वे गुरु कृपा कुंज भवन की चौथी मंजिल से गिर गए थे। मामला संदिग्ध है और पुलिस जांच कर रही है। Q4. क्या आश्रम से कोई शिष्य लापता हुआ है? कुछ आरोप लगे हैं, लेकिन इनमें से एक मामले में जुलाई से लापता बताए गए शिष्य के बरसाना में मिलने की बात सामने आई है। बाकी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Q5. क्या प्रेमानंद महाराज को Z+ सुरक्षा मिल गई है? नहीं, अभी तक प्रशासन की ओर से इस पर कोई औपचारिक फैसला नहीं आया है।
OpenAI के सेफ्टी कर्मचारी का इस्तीफा, कहा- ‘ट्रायल एंड एरर का समय अब खत्म हो चुका है’

New Delhi: OpenAI के एक पूर्व सुरक्षा (safety) कर्मचारी ने कंपनी छोड़ते हुए उसकी तेज़ रफ्तार से काम करने की संस्कृति पर सवाल उठाए हैं। डेविड रॉबिन्सन ने OpenAI सेफ्टी कर्मचारी इस्तीफा से जुड़े अपने अनुभव The Atlantic में प्रकाशित एक लेख में साझा किए, जिसका शीर्षक है “I Quit OpenAI Because Its Culture Is Broken”। रॉबिन्सन ने क्या लिखा रॉबिन्सन ने अपने लेख में लिखा, “ट्रायल एंड एरर का समय अब खत्म हो चुका है।” उन्होंने तर्क दिया कि एडवांस्ड AI सिस्टम्स को न्यूक्लियर पावर और एविएशन जैसे उद्योगों की तरह सख्त सुरक्षा उपायों की ज़रूरत है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी लिखा कि जैसे-जैसे कंपनी एक लॉन्च से दूसरे लॉन्च की ओर तेज़ी से बढ़ रही है, वह उस स्तर की सावधानी बरतने में नाकाम हो रही है जो ज़रूरी है। कौन हैं डेविड रॉबिन्सन एक रिपोर्ट के अनुसार रॉबिन्सन ने OpenAI में साढ़े तीन साल काम किया, जहां उन्होंने कंपनी के “प्रिपेयर्डनेस फ्रेमवर्क” को तैयार करने में मदद की और 12 फ्रंटियर-मॉडल लॉन्च की सुरक्षा रिपोर्ट्स की निगरानी की। ‘Iterative Deployment’ पर सवाल रॉबिन्सन ने OpenAI के उस तरीके पर सवाल उठाया जिसे कंपनी “iterative deployment” कहती है — यानी सिस्टम्स को पहले रिलीज़ करना और समस्या सामने आने पर सुरक्षा उपाय मज़बूत करना। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI की क्षमताएं उस रफ्तार से बढ़ रही हैं, जिस रफ्तार से शोधकर्ताओं की “अलाइनमेंट” (AI को मानवीय लक्ष्यों और मूल्यों के अनुरूप बनाए रखने से जुड़ा क्षेत्र) की समझ नहीं बढ़ रही। OpenAI का जवाब इस आलोचना पर OpenAI के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा, “हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे मॉडल उतने ही सक्षम हों जितना हम सुरक्षित रूप से संभाल और सुरक्षित रख सकें, और ज़रूरत पड़ने पर हम ट्रेनिंग रोकते हैं या मॉडल को रोककर रखते हैं।” ये भी पढ़ें:13 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से छूटे, अब चुनाव आयोग ने शुरू की ‘लेफ्ट आउट’ वोटर ड्राइव बड़े AI उद्योग पर सवाल एक रिपोर्ट के मुताबिक यह टिप्पणियां AI इंडस्ट्री में चल रही उस बहस को और बढ़ाती हैं कि क्या कंपनियां ज़्यादा शक्तिशाली सिस्टम बनाने में ज़रूरत से ज़्यादा तेज़ी दिखा रही हैं। OpenAI और प्रतिद्वंद्वी कंपनी Anthropic, दोनों को उन घटनाओं के बाद जांच का सामना करना पड़ा है जिनमें सुरक्षा नियंत्रण विफल रहे या experimental सिस्टम्स ने अप्रत्याशित व्यवहार किया। FAQs Q1. OpenAI के किस कर्मचारी ने इस्तीफा दिया? सेफ्टी टीम के पूर्व कर्मचारी डेविड रॉबिन्सन ने इस्तीफा दिया है। Q2. रॉबिन्सन ने इस्तीफे की वजह क्या बताई? उन्होंने कहा कि कंपनी की तेज़ रफ्तार वाली संस्कृति सुरक्षा के लिए ज़रूरी सावधानी में बाधा बन रही है। Q3. रॉबिन्सन ने OpenAI में क्या भूमिका निभाई थी? उन्होंने साढ़े तीन साल तक काम किया, कंपनी के प्रिपेयर्डनेस फ्रेमवर्क को तैयार करने में मदद की और 12 फ्रंटियर-मॉडल लॉन्च की सुरक्षा रिपोर्ट्स की निगरानी की। Q4. “Iterative Deployment” क्या है? यह OpenAI का वह तरीका है जिसमें सिस्टम्स को रिलीज़ किया जाता है और समस्या सामने आने पर सुरक्षा उपाय मज़बूत किए जाते हैं। Q5. OpenAI ने इस आलोचना पर क्या जवाब दिया? कंपनी ने कहा कि वह सुनिश्चित कर रही है कि मॉडल्स उतने ही सक्षम हों जितना सुरक्षित तरीके से संभाला जा सके, और ज़रूरत पड़ने पर ट्रेनिंग रोकी जाती है। Q6. यह लेख कहां प्रकाशित हुआ? यह लेख The Atlantic में “I Quit OpenAI Because Its Culture Is Broken” शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
13 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से छूटे, अब चुनाव आयोग ने शुरू की ‘लेफ्ट आउट’ वोटर ड्राइव

नई दिल्ली: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम छूट जाने के बाद चुनाव आयोग ने EC वोटर ड्राइव की शुरुआत की है, ताकि छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में जोड़ा जा सके। किन राज्यों में कितने नाम छूटे एक रिपोर्ट के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रकाशित ड्राफ्ट रोल्स में से कुल करीब 13 करोड़ नाम छूटे हैं। बिहार में 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में करीब 65 लाख नाम छूटे थे, जिसमें कुल 7.24 करोड़ मतदाता सूचीबद्ध हुए थे। उत्तर प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हो सके, जिससे राज्य की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 12.55 करोड़ मतदाताओं तक पहुंची। दिल्ली में 47.56 लाख नाम छूटे, जिससे ड्राफ्ट रोल 1.45 करोड़ से घटकर 97.53 लाख मतदाताओं तक रह गया। मुख्य चुनाव आयुक्त का निर्देश एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को यह विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। यह निर्देश लिखित पत्र और राज्यों के CEO के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस, दोनों के ज़रिए दिया गया। ये भी पढ़ें:Brazil Election: सर्वे को झुठलाकर आगे निकले फ्लाविओ Bolsonaro, अब लूला से रनऑफ में टक्कर अभियान में क्या किया जाएगा चुनाव आयोग के पत्र के मुताबिक, “आयोग ने छूटे हुए और पहली बार/युवा मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।” अधिकारियों को उन लोगों की सूची तैयार करने को कहा गया है जिनके नाम हटाए गए हैं, और ऐसे मतदाताओं की पहचान करने को कहा गया है जो छूट गए हों। ऐसे मतदाताओं को Form 6 भरने में मदद की जाएगी ताकि उनका नाम दोबारा जोड़ा जा सके। आयोग का रुख चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट रोल में किसी नाम का न होना और उस नाम का डिलीट होना, दोनों अलग बातें हैं। आयोग के मुताबिक मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और जिस भी व्यक्ति का नाम अभी तक सूची में नहीं है या जिसका नाम हट गया है, वह किसी भी समय पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। क्यों अहम है यह मामला एक रिपोर्ट के अनुसार वोटर लिस्ट से नाम छूटने का असर राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से विपक्षी दल लगातार छूटे हुए नामों को वापस जोड़ने की मांग कर रहे हैं। FAQs Q1. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कुल कितने नाम छूटे हैं? 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल करीब 13 करोड़ नाम छूटे हैं। Q2. उत्तर प्रदेश में कितने नाम छूटे? उत्तर प्रदेश में करीब 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हो सके। Q3. EC वोटर ड्राइव किस लिए शुरू की गई है? यह ड्राइव छूटे हुए और पहली बार वोट डालने वाले युवा मतदाताओं को दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए शुरू की गई है। Q4. छूटे मतदाता दोबारा नाम कैसे जुड़वा सकते हैं? उन्हें Form 6 भरकर आवेदन करना होगा, जिसमें अधिकारी मदद करेंगे। Q5. यह अभियान किन राज्यों में चलेगा? यह अभियान 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा, जहां SIR प्रक्रिया हो चुकी है। Q6. चुनाव आयोग का इस पर क्या कहना है? आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट रोल में नाम न होना डिलीशन नहीं है, और पात्र मतदाता कभी भी पंजीकरण के लिए आवेदन
Brazil Election: सर्वे को झुठलाकर आगे निकले फ्लाविओ Bolsonaro, अब लूला से रनऑफ में टक्कर

New Delhi: Brazil के राष्ट्रपति चुनाव 2026 के पहले दौर में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लाविओ Bolsonaro ने चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को पीछे छोड़ते हुए मौजूदा राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा पर बढ़त हासिल की है। अब दोनों नेताओं के बीच 25 अक्टूबर को रनऑफ (दूसरे दौर का) मुकाबला होगा, क्योंकि कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए ज़रूरी 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट हासिल नहीं कर सका। Brazil Election के क्या रहे नतीजे रिपोर्ट्स के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज़्यादा वोटों की गिनती के बाद फ्लाविओ Bolsonaro को 47 प्रतिशत से ज़्यादा वोट मिले, जबकि लूला दूसरे स्थान पर 45 प्रतिशत वोटों के साथ रहे। चुनाव पूर्व सर्वे में लूला को करीब तीन प्रतिशत अंकों की बढ़त मिलने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन नतीजे इसके उलट रहे। फ्लाविओ Bolsonaro कौन हैं फ्लाविओ बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर Bolsonaro के सबसे बड़े बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो फिलहाल 2022 के चुनाव नतीजों को पलटने की साज़िश रचने के दोषी ठहराए जाने के बाद 27 साल की सज़ा काट रहे हैं और नज़रबंद हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार फ्लाविओ की उम्मीदवारी को तब और मज़बूती मिली जब दिसंबर में जेल में बंद उनके पिता ने उनका नाम आगे बढ़ाया। नेताओं की प्रतिक्रिया नतीजों के बाद फ्लाविओ बोल्सोनारो ने कहा, “ब्राज़ील बदलाव चाहता है, आज जो हुआ उसका यही मतलब निकलता है।” वहीं लूला ने कहा कि अब एक नया अभियान शुरू होगा। लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर मतदाताओं को आगाह भी किया। मुद्दे क्या रहे एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्लाविओ ने महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को प्रमुख मुद्दा बनाया, वहीं लूला ने ऑनलाइन गैंबलिंग पर बैन लगाने के साथ चुनाव नज़दीक आते ही कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार और परिवारों के लिए कर्ज़ राहत का प्रस्ताव रखा। ये भी पढ़ें: UP Election 2027: सपा का 55 सीटों का ऑफर, कांग्रेस की 200 की डिमांड, क्या बनेगी बात? आगे क्या होगा रनऑफ मुकाबला 25 अक्टूबर को होगा। एक रिपोर्ट के अनुसार तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर रहे उम्मीदवार भी दक्षिणपंथी रुझान के रहे, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि रनऑफ में फ्लाविओ को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। FAQs Q1. ब्राज़ील चुनाव के पहले दौर में कौन आगे रहा? फ्लाविओ बोल्सोनारो को करीब 47 प्रतिशत वोट मिले, जबकि लूला दा सिल्वा को करीब 45 प्रतिशत वोट मिले। Q2. रनऑफ मुकाबला कब होगा? 25 अक्टूबर को लूला और फ्लाविओ बोल्सोनारो के बीच रनऑफ मुकाबला होगा। Q3. फ्लाविओ बोल्सोनारो कौन हैं? वे पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे और मौजूदा सीनेटर हैं। Q4. जायर बोल्सोनारो अभी कहां हैं? वे 2022 के चुनाव नतीजे पलटने की साज़िश के दोषी ठहराए जाने के बाद 27 साल की सज़ा के तहत नज़रबंद हैं। Q5. इस चुनाव में मुख्य मुद्दे क्या रहे? महंगाई, जीवन-यापन की लागत, और लूला की कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख मुद्दे रहे। Editor’s Note यह स्थिति तेज़ी से बदल रही है मैंने दो स्वतंत्र, भरोसेमंद स्रोतों (NPR, OPB) के आंकड़े मिलाकर रखे हैं। प्रकाशन से पहले नवीनतम आंकड़े ज़रूर cross-check करें, क्योंकि वोटों की गिनती अपडेट होती रह सकती है।
