New Delhi: चीन की राजधानी Beijing तेज़ी से बूढ़ी हो रही है। सरकारी अख़बार बीजिंग डेली के हवाले से एक रिपोर्ट के अनुसार 2035 तक शहर ‘सुपर–एज्ड‘ हो जाएगा, यानी करीब एक–तिहाई आबादी 60 साल या उससे ऊपर की होगी। यह बदलाव चीन की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के लिए क्यों मायने रखता है, आसान सवाल–जवाब में समझिए।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल के अंत में Beijing में 60 साल से ऊपर के स्थायी निवासी 52.9 लाख थे, जो आबादी का लगभग एक–चौथाई हिस्सा है। 2035 तक यह अनुपात बढ़कर हर तीन में से एक निवासी तक पहुँचने का अनुमान है। शहर सरकार बुज़ुर्गों की मदद बढ़ा रही है, जिसमें बुनियादी पेंशन बढ़ाना भी शामिल है।
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‘सुपर–एज्ड‘ का क्या मतलब है?
इस रिपोर्ट में इसका मतलब है कि कुल आबादी में बुज़ुर्गों की हिस्सेदारी बहुत ज़्यादा हो जाए। यहाँ बुज़ुर्ग की परिभाषा 60 साल या उससे ऊपर रखी गई है। अलग–अलग देश और संस्थाएँ इसकी सीमा अलग तय करती हैं, इसलिए आँकड़ों की तुलना करते समय परिभाषा देखना ज़रूरी है।
आबादी बूढ़ी क्यों हो रही है?
मुख्य वजह कम जन्म दर है। चीन की आबादी 2025 में लगातार चौथे साल घटी और जन्मों की संख्या 79.2 लाख रह गई, जो 2024 के 95.4 लाख से 17% कम है। रिपोर्ट के अनुसार चीन में प्रजनन दर प्रति महिला करीब 1 जन्म है, जबकि आबादी स्थिर रखने के लिए 2.1 चाहिए। विश्लेषक ऊँचे रहन–सहन के खर्च, महँगे मकान, पढ़ाई के दबाव और अस्थिर आय को वजह बताते हैं।
असर क्या पड़ सकता है?
पेंशन पर दबाव: रिपोर्ट के अनुसार करोड़ों लोग कार्यबल से बाहर होने वाले हैं, जबकि पेंशन बजट पहले से तनाव में हैं।
- खपत पर असर: जनसांख्यिकी विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री कहते हैं कि कम बच्चों का मतलब आगे चलकर कम परिवार और धीमी खपत वृद्धि हो सकता है।
- सेवाओं की माँग (संभावित): बुज़ुर्ग आबादी बढ़ने से अस्पताल, देखभाल और रिहैबिलिटेशन सेवाओं की माँग बढ़ने की संभावना है। यह विश्लेषण है, रिपोर्ट का दावा नहीं।
- कार्यबल की कमी (संभावित): ज़्यादा लोग रिटायर होंगे तो काम करने वालों पर बोझ बढ़ सकता है।
चीन क्या कर रहा है?
Report के अनुमान के मुताबिक जन्म दर बढ़ाने की कोशिशों पर इस साल सरकार को करीब 180 अरब युआन (लगभग 26.92 अरब डॉलर) तक का संभावित खर्च उठाना पड़ सकता है। सरकार तीन साल से छोटे हर बच्चे पर 3,600 युआन देने जैसी मदद दे रही है। रिटायरमेंट की उम्र भी बढ़ाना शुरू किया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञ चेताते हैं कि गिरावट रोकना मुश्किल बना हुआ है।
आगे क्या?
Beijing के आँकड़े पूरे चीन की तस्वीर का छोटा हिस्सा हैं। 2035 तक शहर की सरकार बुज़ुर्गों की देखभाल, पेंशन और कार्यबल के बीच संतुलन कैसे बनाती है, यही असली परीक्षा होगी।










