New Delhi: आज जो शैंपू हम रोज इस्तेमाल करते हैं, उसकी कहानी भारत से जुड़ी है। बिहार के पटना में जन्मे शेख दीन मोहम्मद ने 19वीं सदी में भारतीय ‘चंपी’ को ब्रिटेन में लोकप्रिय बनाया, जिससे अंग्रेजी शब्द ‘शैंपू’ अस्तित्व में आया।
दीन मोहम्मद का जन्म 1759 में पटना में हुआ था। वे बचपन में ही ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना से जुड़ गए थे और करीब 18 साल सैनिक के रूप में काम करने के बाद यूरोप चले गए।
ब्रिटेन का पहला भारतीय रेस्टोरेंट
1810 में Sheikh Deen Mohammad ने लंदन में ‘हिंदुस्तान कॉफी हाउस’ खोला, जिसे ब्रिटेन का पहला भारतीय रेस्टोरेंट माना जाता है। यहां अंग्रेजों को पहली बार भारतीय व्यंजन, हुक्का और भारतीय संस्कृति का स्वाद चखने का मौका मिला।
इसके साथ ही वे पहले भारतीय लेखक भी बने, जिनकी किताब अंग्रेजी में प्रकाशित हुई। उन्होंने ‘द ट्रेवल्स ऑफ दीन मोहम्मद’ नाम से किताब लिखी, जिसमें उन्होंने भारत और अपने सफर के अनुभव साझा किए।
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1814 में दीन मोहम्मद ने अपनी पत्नी जेन के साथ इंग्लैंड के ब्राइटन में समुद्र किनारे ‘महोमेद्स बाथ्स’ खोला। यहां वे ग्राहकों को भारतीय जड़ी-बूटियों और खुशबूदार तेलों से चंपी, गर्म पानी का स्नान और भाप स्नान की सुविधा देते थे।
भारतीय मालिश परंपरा ‘चंपी’ को उन्होंने अंग्रेजी में ‘शैंपूइंग’ कहा। धीरे-धीरे यही शब्द ‘शैंपू’ बन गया, जो आज बालों की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले उत्पाद के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।
राजा बने उनके ग्राहक
दीन मोहम्मद की मालिश और भाप स्नान की तकनीक ब्रिटेन के अमीर वर्ग में इतनी लोकप्रिय हुई कि राजपरिवार तक उनकी पहुंच बन गई। राजा जॉर्ज चतुर्थ और राजा विलियम चतुर्थ ने उन्हें अपना ‘शैंपूइंग सर्जन’ नियुक्त किया।
राजा जॉर्ज चतुर्थ ने अपने लिए निजी भाप स्नान भी बनवाया और दीन मोहम्मद को रॉयल वारंट दिया। इससे उनकी पहचान सिर्फ एक व्यवसायी नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के उद्यमी के रूप में बनी।
शैंपू का असली आधुनिक रूप
यह ध्यान रखना जरूरी है कि दीन मोहम्मद ने आज जैसा लिक्विड शैंपू नहीं बनाया था। उन्होंने भारतीय चंपी और हर्बल तेलों से मालिश की परंपरा को ब्रिटेन में ‘शैंपूइंग’ के नाम से फैलाया था।
आधुनिक लिक्विड शैंपू का विकास बाद में यूरोप में हुआ। फिर भी, ‘शैंपू’ शब्द और इसकी वैचारिक जड़ें भारतीय चंपी परंपरा से जुड़ी हैं, जिसे दुनिया तक पहुंचाने का श्रेय शेख दीन मोहम्मद को दिया जाता है।
दीन मोहम्मद का 1851 में ब्राइटन में निधन हुआ। लेकिन उनकी विरासत आज भी हर उस शैंपू की बोतल में जिंदा है, जिसका नाम भारतीय ‘चंपी’ से निकला है।










